लुल्ला परिवारLULLA FAMILY, शुरुआतEnglish

पारम्परिक सन्दर्भ

उड्डीयान बन्ध

उदर का बन्ध और ऊपर उड़ने की उपमा।

केवल उदर का स्थान; आसन का प्रदर्शन नहीं
केवल उदर का स्थान; आसन का प्रदर्शन नहीं।

शरीर का स्थान पहचान का हिस्सा है

हठयोगप्रदीपिका उदर को पीछे और ऊपर खींचने का वर्णन करती है। घेरण्ड का पाठ भी उदर को पीठ की ओर करने की बात कहता है और महापक्षी के ऊपर उड़ने की उपमा देता है। यह प्राण की ग्रन्थीय व्याख्या है; किसी अंग के सचमुच उड़ने का शारीरिक चित्र नहीं।

साधारण श्वास-संकेत से भेद

शिवानन्द उड्डीयान को बन्धों में रखते हैं और श्वास-चक्र से उसका सम्बन्ध बताते हैं। यह प्रसंग स्वाभाविक साँस के साथ पेट को अपनी सहज गति में रहने देने से अलग है। उड्डीयान से यह अर्थ न निकालिए कि आरम्भिक अभ्यासों में पेट लगातार भीतर खींचे रखना है।

दूसरे बन्धों के पास पढ़िए

जालन्धर का सम्बन्ध कण्ठ से और मूलबन्ध का आधार से है। तीनों साथ देखने पर स्पष्ट होता है कि हठग्रन्थों में मुद्रा केवल उँगलियों तक सीमित नहीं है। उड्डीयान को स्रोतों में बताए स्थान और आशय से समझिए; इसके साथ श्वास खाली करने की क्रिया, कुम्भक की सीमा या पाचन-रोग के उपचार का वादा नहीं जुड़ा है।

सूची और प्रकरण का क्रम

3.6 की नामावली में उड्डीयान मूलबन्ध से पहले आता है। प्रचलित अध्याय में भी पहले उड्डीयान 3.55 से 60 है, फिर मूलबन्ध। आलोचनात्मक संस्करण पहले मूलबन्ध का प्रकरण 3.49 से 57 रखता है और उसके बाद उड्डीयान 3.58 से 65। आरम्भिक सूची के दस नाम दोनों में वही हैं।

इस स्थान पर आलोचनात्मक संस्कृत पाठ में ण वाला रूप उड्डीयाण है; प्रचलित पाठ में उड्डीयान मिलता है। शीर्षक में परिचित उड्डीयान वर्तनी रखी गई है। स्रोत खोलने पर उस संस्करण का अपना पाठ मिलेगा।

जहाँ संस्करण का नाम नहीं दिया, वहाँ हठयोगप्रदीपिका की श्लोक-संख्या सिंह के 1914 संस्करण की संस्कृत गणना से है।

आलोचनात्मक संस्करण में अंश खोलिए (3.58 से 65)

स्रोत और दायरा

आधार-संस्करण

Hatha Yoga Pradipika, chapter 3

पाठ-स्थान

  1. Haṭhapradīpikā Online: आलोचनात्मक संस्करण से तुलना

    अध्याय 3, 3.58 से 65; जहाँ आवश्यक हो, साथ दिखाए गए अतिरिक्त पद्य भी। ऊपर की टिप्पणी सिंह की संस्कृत गणना 3.55 से 60 से सम्बन्धित भेद स्पष्ट करती है। तुलना की समीक्षा: 12 सितम्बर 2026।

  2. Hatha Yoga Pradipika, chapter 3

    अध्याय 3, संस्कृत श्लोक 3.55 से 60।

    स्वात्माराम; संस्कृत मूल और पंचम सिंह का 1914 का अंग्रेज़ी अनुवाद। अंग्रेज़ी अनुच्छेदों की गिनती कहीं-कहीं संस्कृत श्लोकों से अलग चलती है।

  3. Gheranda Samhita, James Mallinson (2004)

    3.8 से 9, छपे पृष्ठ 61 से 62; संस्कृत डॉक्युमेंट्स में 3.10 से 11।

    प्रकाशक की वेबसाइट पर दिया अंश: भूमिका और अध्याय 3, छपे पृष्ठ 60 से 71। यह पूरी पुस्तक का एक नमूना भर है।

  4. Kundalini Yoga

    “Mudras and Bandhas: 3. Uddiyana Bandha”।

    स्वामी शिवानन्द; डिवाइन लाइफ़ सोसाइटी, दसवाँ संस्करण 1994, अधिकृत वेब संस्करण 1999। पारम्परिक शिक्षण, चिकित्सकीय प्रमाण नहीं।

दायरा

पारम्परिक वर्णनों की तुलना वाला मौलिक सन्दर्भ-पाठ। यह पूरे मूल अध्याय का अनुवाद नहीं है।

सीमाएँ और पाठ-भेद

ऊपर की चर्चा में महत्त्वपूर्ण भेद स्पष्ट हैं। पारम्परिक व्याख्या और कहे गए फल अपने स्रोतों के कथन हैं, चिकित्सकीय प्रमाण नहीं। समीक्षा: 11 सितम्बर 2026।