अभ्यास-संग्रह

थोड़ा अभ्यास।
ज़रा इत्मीनान से।

दिन की आवाजाही में कुछ पल अपने लिए रख लीजिए। एक कुर्सी का सहारा हो, साँस अपनी रवानी में चले, और आपको अपने तन-मन की ख़बर लेने की फ़ुर्सत मिले। जहाँ सहज लगे, वहीं से शुरू कीजिए।

कुर्सी पर योग से शुरू करें
एक महिला कुर्सी पर सीधे बैठती हैं, फिर दोनों बाँहें अपनी सहज सीमा में ऊपर उठाती हैं।
01 / शरीर कुर्सी का सहारा। श्वास की सजगता।

अपनी शुरुआत चुनिए

01 / शरीर

कुर्सी पर योग

बैठकर और सहारे के साथ 23 गतियाँ। उठना, बैठना, हाथ बढ़ाना और भार बदलना, अपने शरीर की आज की स्थिति के अनुसार।

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02 / श्वास

प्राणायाम

सहज श्वास से शुरुआत। पूरक और रेचक का क्रम समझें; कुम्भक और बलपूर्वक विधियों का प्रसंग अलग पढ़ें।

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03 / मनन

चक्र

कमल, तत्त्व, बीज और देवता की पारम्परिक भाषा। शास्त्रीय स्रोत, आधुनिक अर्थ और समग्र योग की व्याख्या साथ, पर अलग पहचान के साथ।

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अभ्यास का भाव

प्रतिदिन थोड़ा।
हर बार सजग।

लौट आने में भी एक हुनर है

पतञ्जलि अभ्यास के साथ वैराग्य रखते हैं। बार-बार लौटने की लगन हो, मगर हर बार किसी ख़ास फल की ज़िद न हो। यही बात रोज़ की इस छोटी बैठक में भी काम आती है। आज जितनी गति सहज है, उसे कल की उपलब्धि से कम मत आँकिए।

स्थिरता हो, मगर अकड़ न हो

आसन के लिए योगसूत्र स्थिरता और सुख का संकेत देते हैं। कुर्सी पर दिए ये आधुनिक रूप उस मूल आसन-विधि का दावा नहीं करते। इन्हें एक छोटे सवाल के साथ आज़माइए: सहारा लेते हुए क्या शरीर कुछ सहज हो सकता है और ध्यान कुछ साफ़?

जिस राह से मन लगे

शरीर की हल्की गति से शुरू कीजिए, आती-जाती साँस के पास ठहरिए, या चक्रों के अर्थ में उतरिए। तीनों राहें एक ही दिन तय करना ज़रूरी नहीं। इतना काफ़ी है कि लौट आने के लिए अपने दिन में थोड़ी-सी जगह बची रहे।

पाठ-संदर्भ: योगसूत्र 1.12-14 और 2.46। ऊपर का दैनिक अभ्यास-संबंधी विचार इस दर्शिका का सम्पादकीय अनुप्रयोग है। मूल पाठ · साइट पर योगसूत्र पढ़िए

पढ़िए, फिर पास रखिए

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कुर्सी पर योग, प्राणायाम और चक्रों का पूरा हिन्दी संस्करण। पढ़ने, छापने और दोबारा देखने के लिए।

हिन्दी अभ्यास-दर्शिका डाउनलोड करें PDF · 3.3 MB · सितम्बर 2026