नाम से आगे व्यवस्था पढ़िए
हठयोगप्रदीपिका 3.19 से 25 बैठने की स्थिति, आधार के संकोच और नियंत्रित कुम्भक का वर्णन करती है। घेरण्डसंहिता एड़ियों की अपनी व्यवस्था देती है और जालन्धर से सम्बन्ध रखती है। दोनों को साथ पढ़ना उपयोगी है; उनके चरण जोड़कर नई विधि बना देना उचित नहीं।
महामुद्रा के पास इसका स्थान
शिवानन्द महामुद्रा को महाबन्ध की तैयारी के रूप में रखते हैं और उसके बाद महावेध बताते हैं। इस क्रम से समूह की शब्दावली समझ में आती है। पृष्ठों की कड़ियाँ इस क्रम में होने का अर्थ यह नहीं कि पाठक को तीनों का शारीरिक अभ्यास भी इसी तरह आगे बढ़ाना है।
तुलना में क्या देखें
आसन, दबाव की जगह और बन्ध का रोकी हुई श्वास से सम्बन्ध देखिए। इनसे महाबन्ध का अर्थ केवल बड़े बन्ध के अनुवाद से अधिक साफ़ होगा। महाबन्ध के साथ कुम्भक की अवधि या संयुक्त बन्धों की कोई दिनचर्या नहीं जुड़ी है। जरा-मृत्यु पर विजय के कथन परम्परा की सिद्धि-भाषा में रखे गए हैं।
पाठ में दर्ज एक मतान्तर
प्रचलित संस्कृत अंश 3.19 से 25 है; आलोचनात्मक संस्करण में सम्बन्धित पाठ 3.19 से 24 तथा 3.21*1 से 2 पर दिखाए गए अतिरिक्त पद्यों में मिलता है। उनमें एक पद्य कण्ठबन्ध के स्थान पर जीभ से सम्बन्धित मतान्तर दर्ज करता है (सिंह की संस्कृत गणना 3.22; आलोचनात्मक संस्करण 3.21*2)। इस तरह वर्णन की भिन्नता ग्रन्थ के भीतर भी दिखाई देती है।
सूची के पृष्ठ आरम्भिक नाम-क्रम में जुड़े हैं। यह पढ़ने का क्रम है; वर्णन और उसका मतान्तर अपने-अपने संस्करण के साथ रखे गए हैं।
जहाँ संस्करण का नाम नहीं दिया, वहाँ हठयोगप्रदीपिका की श्लोक-संख्या सिंह के 1914 संस्करण की संस्कृत गणना से है।
स्रोत और दायरा
आधार-संस्करण
Hatha Yoga Pradipika, chapter 3
पाठ-स्थान
- Haṭhapradīpikā Online: आलोचनात्मक संस्करण से तुलना
अध्याय 3, 3.19 से 24; जहाँ आवश्यक हो, साथ दिखाए गए अतिरिक्त पद्य भी। ऊपर की टिप्पणी सिंह की संस्कृत गणना 3.19 से 25 से सम्बन्धित भेद स्पष्ट करती है। तुलना की समीक्षा: 12 सितम्बर 2026।
- Hatha Yoga Pradipika, chapter 3
अध्याय 3, संस्कृत श्लोक 3.19 से 25।
स्वात्माराम; संस्कृत मूल और पंचम सिंह का 1914 का अंग्रेज़ी अनुवाद। अंग्रेज़ी अनुच्छेदों की गिनती कहीं-कहीं संस्कृत श्लोकों से अलग चलती है।
- Gheranda Samhita, James Mallinson (2004)
3.14 से 16, छपे पृष्ठ 66 से 67; संस्कृत डॉक्युमेंट्स में 3.18 से 20।
प्रकाशक की वेबसाइट पर दिया अंश: भूमिका और अध्याय 3, छपे पृष्ठ 60 से 71। यह पूरी पुस्तक का एक नमूना भर है।
- Kundalini Yoga
“Mudras and Bandhas: 5. Maha Bandha”।
स्वामी शिवानन्द; डिवाइन लाइफ़ सोसाइटी, दसवाँ संस्करण 1994, अधिकृत वेब संस्करण 1999। पारम्परिक शिक्षण, चिकित्सकीय प्रमाण नहीं।
दायरा
पारम्परिक वर्णनों की तुलना वाला मौलिक सन्दर्भ-पाठ। यह पूरे मूल अध्याय का अनुवाद नहीं है।
सीमाएँ और पाठ-भेद
ऊपर की चर्चा में महत्त्वपूर्ण भेद स्पष्ट हैं। पारम्परिक व्याख्या और कहे गए फल अपने स्रोतों के कथन हैं, चिकित्सकीय प्रमाण नहीं। समीक्षा: 11 सितम्बर 2026।