वर्णन में क्या-क्या आता है
हठयोगप्रदीपिका में बैठी हुई स्थिति, एक फैला पैर, शरीर के आधार पर एड़ी, हाथों से पकड़ा हुआ पाँव और श्वास का नियमन आता है। घेरण्डसंहिता भी बैठने की व्यवस्था, कण्ठ की क्रिया और दृष्टि का प्रसंग साथ रखती है। इन पाठों की महामुद्रा केवल हाथ की आकृति से कहीं अधिक है।
एक समूह, तीन पर्याय नहीं
हठयोगप्रदीपिका और शिवानन्द की प्रस्तुति में महामुद्रा, महाबन्ध और महावेध का निकट सम्बन्ध है। इसलिए वे अक्सर साथ पढ़े जाते हैं। फिर भी प्रत्येक का अलग वर्णन महत्त्व रखता है; एक समूह में होने से उनकी स्थिति और क्रिया समान नहीं हो जाती।
फल को उसके अपने स्तर पर पढ़िए
पाठ रोग और जरा से मुक्ति के व्यापक फल कहते हैं। वे पारम्परिक कथन हैं, चिकित्सकीय परिणाम का वादा नहीं। महामुद्रा के हर घटक को समझिए, पर दबाव, कुम्भक या आगे झुकने को बिना देखरेख के अपने-आप अपनाने का क्रम न बनाइए। समूह की अगली कड़ी जानने के लिए महाबन्ध पढ़िए।
पहले तीन नामों का प्रसंग
आरम्भिक सूची में महामुद्रा पहले आती है। पंचम सिंह के साथ छपी संस्कृत गणना और आलोचनात्मक संस्करण, दोनों में इसका प्रकरण 3.10 से 18 है। आगे महाबन्ध और महावेध आते हैं; फिर पाठ इस त्रय का स्पष्ट उल्लेख करता है (सिंह की संस्कृत गणना 3.30; आलोचनात्मक संस्करण 3.29)। इन तीन पाठों को पास रखने का आधार स्वयं ग्रन्थ में है।
महामुद्रा नाम को इस अध्याय के भीतर पढ़िए। यहाँ उसका प्रसंग शरीर की साधना का है। स्रोतों की यह तुलना उसी वर्णन से सम्बन्ध रखती है; दूसरी परम्पराओं में महामुद्रा शब्द के सभी प्रयोग इसका विषय नहीं हैं।
जहाँ संस्करण का नाम नहीं दिया, वहाँ हठयोगप्रदीपिका की श्लोक-संख्या सिंह के 1914 संस्करण की संस्कृत गणना से है।
स्रोत और दायरा
आधार-संस्करण
Hatha Yoga Pradipika, chapter 3
पाठ-स्थान
- Haṭhapradīpikā Online: आलोचनात्मक संस्करण से तुलना
अध्याय 3, 3.10 से 18; जहाँ आवश्यक हो, साथ दिखाए गए अतिरिक्त पद्य भी। ऊपर की टिप्पणी सिंह की संस्कृत गणना 3.10 से 18 से सम्बन्धित भेद स्पष्ट करती है। तुलना की समीक्षा: 12 सितम्बर 2026।
- Hatha Yoga Pradipika, chapter 3
अध्याय 3, संस्कृत श्लोक 3.10 से 18।
स्वात्माराम; संस्कृत मूल और पंचम सिंह का 1914 का अंग्रेज़ी अनुवाद। अंग्रेज़ी अनुच्छेदों की गिनती कहीं-कहीं संस्कृत श्लोकों से अलग चलती है।
- Gheranda Samhita, James Mallinson (2004)
3.4 से 6, छपे पृष्ठ 60 से 61; संस्कृत डॉक्युमेंट्स में 3.4 से 8।
प्रकाशक की वेबसाइट पर दिया अंश: भूमिका और अध्याय 3, छपे पृष्ठ 60 से 71। यह पूरी पुस्तक का एक नमूना भर है।
- Kundalini Yoga
“Mudras and Bandhas: 4. Maha Mudra”।
स्वामी शिवानन्द; डिवाइन लाइफ़ सोसाइटी, दसवाँ संस्करण 1994, अधिकृत वेब संस्करण 1999। पारम्परिक शिक्षण, चिकित्सकीय प्रमाण नहीं।
दायरा
पारम्परिक वर्णनों की तुलना वाला मौलिक सन्दर्भ-पाठ। यह पूरे मूल अध्याय का अनुवाद नहीं है।
सीमाएँ और पाठ-भेद
ऊपर की चर्चा में महत्त्वपूर्ण भेद स्पष्ट हैं। पारम्परिक व्याख्या और कहे गए फल अपने स्रोतों के कथन हैं, चिकित्सकीय प्रमाण नहीं। समीक्षा: 11 सितम्बर 2026।