लुल्ला परिवारLulla Family
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सिख वाणीनाम, सेवा और एकत्व

वाणी: महला 5

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वाणी

महला 5, गुरु अर्जन देव जी

1563-1606 · पाँचवें गुरु · आदि ग्रंथ के संकलनकर्ता · पहले शहीद · 2218 शबद

30 मई 1606, लाहौर। तपती गर्मी। मुग़ल बादशाह जहाँगीर ने गुरु अर्जन देव जी को पाँच दिनों तक यातना दी, तपते रेत पर बिठाना, उबलते पानी में डालना, गर्म तवा पर बैठाना। पाँचवें दिन उनको रावी नदी में ठंडे पानी से नहाने के लिए छोड़ा। वो उतरे, और लौटे नहीं। यही सिख परंपरा की पहली शहादत है।

उनकी ज़िंदगी के दो सबसे बड़े काम: (1) 1604 में आदि ग्रंथ का संकलन पूरा किया, और हरमंदिर साहिब में स्थापित किया। (2) सुखमनी साहिब लिखी, 24 अष्टपदियाँ, अंग 262-296 पर। यह आज भी सिख परंपरा में सबसे ज़्यादा पढ़ा जाने वाला पाठ है।

आदि ग्रंथ में महला 5 के 2,218 शबद हैं, यानी पूरे ग्रंथ का लगभग एक-तिहाई। उनकी वाणी का फैलाव असाधारण है, दार्शनिक, भक्ति-भरी, गृहस्थी के रोज़मर्रा काम की, सब।

आदि ग्रंथ में इनके शबद

हर शबद अपनी पहली पंक्ति से, राग के अनुसार, ग्रंथ के क्रम में।

सलोक और अन्य वाणी (104)
  1. सैल पथर महि जंत उपाए ता का रिजकु आगै करि धरिआ ॥1॥अंग 10
  2. भई परापति मानुख देहुरीआ ॥अंग 12
  3. करउ बेनंती सुणहु मेरे मीता संत टहल की बेला ॥अंग 13
  4. कतंच माता कतंच पिता कतंच बनिता बिनोद सुतह ॥अंग 1353
  5. ध्रिगंत मात पिता सनेहं ध्रिग सनेहं भ्रात बांधवह ॥अंग 1354
  6. मिथ्यंत देहं खीणंत बलनं ॥अंग 1354
  7. काच कोटं रचंति तोयं लेपनं रकत चरमणह ॥अंग 1354
  8. सुभंत तुयं अचुत गुणग्यं पूरनं बहुलो क्रिपाला ॥अंग 1354
  9. म्रिगी पेखंत बधिक प्रहारेण लख्य आवधह ॥अंग 1354
  10. सबदं रतं हितं मइआ कीरतं कली करम क्रितुआ ॥अंग 1354
  11. घटंत रूपं घटंत दीपं घटंत रवि ससीअर नख्यत्र गगनं ॥अंग 1354
  12. नह बिलंब धरमं बिलंब पापं ॥अंग 1354
  13. मिरत मोहं अलप बुध्यं रचंति बनिता बिनोद साहं ॥अंग 1354
  14. जनमं त मरणं हरखं त सोगं भोगं त रोगं ॥अंग 1354
  15. किरपंत हरीअं मति ततु गिआनं ॥अंग 1355
  16. कहंत बेदा गुणंत गुनीआ सुणंत बाला बहु बिधि प्रकारा ॥अंग 1355
  17. नह चिंता मात पित भ्रातह नह चिंता कछु लोक कह ॥अंग 1355
  18. अनित्य वितं अनित्य चितं अनित्य आसा बहु बिधि प्रकारं ॥अंग 1355
  19. गिरंत गिरि पतित पातालं जलंत देदीप्य बैस्वांतरह ॥अंग 1355
  20. घोर दुख्यं अनिक हत्यं जनम दारिद्रं महा बिख्यादं ॥अंग 1355
  21. अंधकार सिमरत प्रकासं गुण रमंत अघ खंडनह ॥अंग 1355
  22. पाछं करोति अग्रणीवह निरासं आस पूरनह ॥अंग 1355
  23. अधरं धरं धारणह निरधनं धन नाम नरहरह ॥अंग 1355
  24. नह समरथं नह सेवकं नह प्रीति परम पुरखोतमं ॥अंग 1356
  25. भरण पोखण करंत जीआ बिस्राम छादन देवंत दानं ॥अंग 1356
  26. दानं परा पूरबेण भुंचंते महीपते ॥अंग 1356
  27. रमणं केवलं कीरतनं सुधरमं देह धारणह ॥अंग 1356
  28. तिरसकार नह भवंति नह भवंति मान भंगनह ॥अंग 1356
  29. सैना साध समूह सूर अजितं संनाहं तनि निंम्रताह ॥अंग 1356
  30. म्रिग त्रिसना गंधरब नगरं द्रुम छाया रचि दुरमतिह ॥अंग 1356
  31. कंठ रमणीय राम राम माला हसत ऊच प्रेम धारणी ॥अंग 1356
  32. गुर मंत्र हीणस्य जो प्राणी ध्रिगंत जनम भ्रसटणह ॥अंग 1356
  33. चरणारबिंद भजनं रिदयं नाम धारणह ॥अंग 1356
  34. नच दुरलभं धनं रूपं नच दुरलभं स्वरग राजनह ॥अंग 1357
  35. जत कतह ततह द्रिसटं स्वरग मरत पयाल लोकह ॥अंग 1357
  36. बिखया भयंति अंम्रितं द्रुसटां सखा स्वजनह ॥अंग 1357
  37. सरब सील ममं सीलं सरब पावन मम पावनह ॥अंग 1357
  38. नह सीतलं चंद्र देवह नह सीतलं बावन चंदनह ॥अंग 1357
  39. मंत्रं राम राम नामं ध्यानं सरबत्र पूरनह ॥अंग 1357
  40. अजा भोगंत कंद मूलं बसंते समीपि केहरह ॥अंग 1357
  41. छलं छिद्रं कोटि बिघनं अपराधं किलबिख मलं ॥अंग 1357
  42. तरण सरण सुआमी रमण सील परमेसुरह ॥अंग 1357
  43. दुरगम सथान सुगमं महा दूख सरब सूखणह ॥अंग 1357
  44. हे अजित सूर संग्रामं अति बलना बहु मरदनह ॥अंग 1358
  45. हे कामं नरक बिस्रामं बहु जोनी भ्रमावणह ॥अंग 1358
  46. हे कलि मूल क्रोधं कदंच करुणा न उपरजते ॥अंग 1358
  47. हे लोभा लंपट संग सिरमोरह अनिक लहरी कलोलते ॥अंग 1358
  48. हे जनम मरण मूलं अहंकारं पापातमा ॥अंग 1358
  49. हे प्राण नाथ गोबिंदह क्रिपा निधान जगद गुरो ॥अंग 1358
  50. चरण कमल सरणं रमणं गोपाल कीरतनह ॥अंग 1358
  51. सिर मस्तक रख्या पारब्रहमं हस्त काया रख्या परमेस्वरह ॥अंग 1358
  52. जेन कला धारिओ आकासं बैसंतरं कासट बेसटं ॥अंग 1358
  53. गुसांई गरिस्ट रूपेण सिमरणं सरबत्र जीवणह ॥अंग 1359
  54. मसकं भगनंत सैलं करदमं तरंत पपीलकह ॥अंग 1359
  55. तिलक हीणं जथा बिप्रा अमर हीणं जथा राजनह ॥अंग 1359
  56. न संखं न चक्रं न गदा न सिआमं ॥अंग 1359
  57. उदिआन बसनं संसारं सनबंधी स्वान सिआल खरह ॥अंग 1359
  58. क्रिपा करंत गोबिंद गोपालह सगल्यं रोग खंडणह ॥अंग 1359
  59. अचेत मूड़ा न जाणंत घटंत सासा नित प्रते ॥अंग 1359
  60. हे जिहबे हे रसगे मधुर प्रिअ तुयं ॥अंग 1359
  61. गरबंति नारी मदोन मतं ॥अंग 1359
  62. त्रिणं त मेरं सहकं त हरीअं ॥अंग 1359
  63. ब्रहमणह संगि उधरणं ब्रहम करम जि पूरणह ॥अंग 1360
  64. पर दरब हिरणं बहु विघन करणं उचरणं सरब जीअ कह ॥अंग 1360
  65. मते समेव चरणं उधरणं भै दुतरह ॥अंग 1360
  66. करपूर पुहप सुगंधा परस मानुख्य देहं मलीणं ॥अंग 1360
  67. हाथि कलंम अगंम मसतकि लेखावती ॥अंग 1361
  68. संमन जउ इस प्रेम की दम क्यिहु होती साट ॥अंग 1363
  69. कबीर कूकरु भउकना करंग पिछै उठि धाइ ॥अंग 1375
  70. कबीर धरती साध की तसकर बैसहि गाहि ॥अंग 1375
  71. कबीर चावल कारने तुख कउ मुहली लाइ ॥अंग 1375
  72. कबीरा हमरा को नही हम किस हू के नाहि ॥अंग 1376
  73. कबीर रामु न चेतिओ फिरिआ लालच माहि ॥अंग 1376
  74. फरीदा खालकु खलक महि खलक वसै रब माहि ॥अंग 1381
  75. फरीदा भूमि रंगावली मंझि विसूला बाग ॥अंग 1382
  76. फरीदा उमर सुहावड़ी संगि सुवंनड़ी देह ॥अंग 1382
  77. फरीदा गरबु जिन॑ा वडिआईआ धनि जोबनि आगाह ॥अंग 1383
  78. फरीदा कंतु रंगावला वडा वेमुहताजु ॥अंग 1383
  79. फरीदा दुखु सुखु इकु करि दिल ते लाहि विकारु ॥अंग 1383
  80. फरीदा दुनी वजाई वजदी तूं भी वजहि नालि ॥अंग 1383
  81. फरीदा दिलु रता इसु दुनी सिउ दुनी न कितै कंमि ॥अंग 1383
  82. आदि पुरख करतार करण कारण सभ आपे ॥अंग 1385
  83. अंम्रित प्रवाह सरि अतुल भंडार भरि परै ही ते परै अपर अपार परि ॥अंग 1385
  84. सगल भवन धारे एक थें कीए बिसथारे पूरि रहिओ स्रब महि आपि है निरारे ॥अंग 1385
  85. सरब गुण निधानं कीमति न ग्यानं ध्यानं ऊचे ते ऊचौ जानीजै प्रभ तेरो थानं ॥अंग 1386
  86. निरंकारु आकार अछल पूरन अबिनासी ॥अंग 1386
  87. सति सति हरि सति सति सते सति भणीऐ ॥अंग 1386
  88. सचु सभा दीबाणु सचु सचे पहि धरिओ ॥अंग 1386
  89. कवनु जोगु कउनु ग्यानु ध्यानु कवन बिधि उस्तति करीऐ ॥अंग 1386
  90. प्रभ दातउ दातार पर्यिउ जाचकु इकु सरना ॥अंग 1386
  91. काची देह मोह फुनि बांधी सठ कठोर कुचील कुगिआनी ॥अंग 1387
  92. कीरति करन सरन मनमोहन जोहन पाप बिदारन कउ ॥अंग 1387
  93. रंचक रेत खेत तनि निरमित दुरलभ देह सवारि धरी ॥अंग 1387
  94. रे मन मूस बिला महि गरबत करतब करत महां मुघनां ॥अंग 1387
  95. देह न गेह न नेह न नीता माइआ मत कहा लउ गारहु ॥अंग 1388
  96. प्रान मान दान मग जोहन हीतु चीतु दे ले ले पारी ॥अंग 1388
  97. ब्रहमादिक सिव छंद मुनीसुर रसकि रसकि ठाकुर गुन गावत ॥अंग 1388
  98. माइआ रंग बिरंग करत भ्रम मोह कै कूपि गुबारि परिओ है ॥अंग 1388
  99. गुण समूह फल सगल मनोरथ पूरन होई आस हमारी ॥अंग 1388
  100. आवध कटिओ न जात प्रेम रस चरन कमल संगि ॥अंग 1389
  101. उदमु करि लागे बहु भाती बिचरहि अनिक सासत्र बहु खटूआ ॥अंग 1389
  102. रते सेई जि मुखु न मोड़ंनि॑ जिन॑ी सिञाता साई ॥अंग 1425
  103. थाल विचि तिंनि वसतू पईओ सतु संतोखु वीचारो ॥अंग 1429
  104. तेरा कीता जातो नाही मैनो जोगु कीतोई ॥अंग 1429
सिरी राग (45)
  1. किआ तू रता देखि कै पुत्र कलत्र सीगार ॥अंग 42
  2. मनि बिलासु बहु रंगु घणा द्रिसटि भूलि खुसीआ ॥अंग 42
  3. भलके उठि पपोलीऐ विणु बुझे मुगध अजाणि ॥अंग 43
  4. घड़ी मुहत का पाहुणा काज सवारणहारु ॥अंग 43
  5. सभे गला विसरनु इको विसरि न जाउ ॥अंग 43
  6. सभे थोक परापते जे आवै इकु हथि ॥अंग 44
  7. सोई धिआईऐ जीअड़े सिरि साहां पातिसाहु ॥अंग 44
  8. नामु धिआए सो सुखी तिसु मुखु ऊजलु होइ ॥अंग 44
  9. इकु पछाणू जीअ का इको रखणहारु ॥अंग 45
  10. जिना सतिगुर सिउ चितु लाइआ से पूरे परधान ॥अंग 45
  11. मिलि सतिगुर सभु दुखु गइआ हरि सुखु वसिआ मनि आइ ॥अंग 46
  12. पूरा सतिगुरु जे मिलै पाईऐ सबदु निधानु ॥अंग 46
  13. प्रीति लगी तिसु सच सिउ मरै न आवै जाइ ॥अंग 46
  14. मनु तनु धनु जिनि प्रभि दीआ रखिआ सहजि सवारि ॥अंग 47
  15. मेरा तनु अरु धनु मेरा राज रूप मै देसु ॥अंग 47
  16. सरणि पए प्रभ आपणे गुरु होआ किरपालु ॥अंग 48
  17. उदमु करि हरि जापणा वडभागी धनु खाटि ॥अंग 48
  18. सोई सासतु सउणु सोइ जितु जपीऐ हरि नाउ ॥अंग 48
  19. रसना सचा सिमरीऐ मनु तनु निरमलु होइ ॥अंग 49
  20. संत जनहु मिलि भाईहो सचा नामु समालि ॥अंग 49
  21. मिठा करि कै खाइआ कउड़ा उपजिआ सादु ॥अंग 50
  22. गोइलि आइआ गोइली किआ तिसु डंफु पसारु ॥अंग 50
  23. तिचरु वसहि सुहेलड़ी जिचरु साथी नालि ॥अंग 50
  24. करण कारण एकु ओही जिनि कीआ आकारु ॥अंग 51
  25. संचि हरि धनु पूजि सतिगुरु छोडि सगल विकार ॥अंग 51
  26. दुक्रित सुक्रित मंधे संसारु सगलाणा ॥अंग 51
  27. तेरै भरोसै पिआरे मै लाड लडाइआ ॥अंग 51
  28. संत जना मिलि भाईआ कटिअड़ा जमकालु ॥अंग 52
  29. गुरु परमेसुरु पूजीऐ मनि तनि लाइ पिआरु ॥अंग 52
  30. संत जनहु सुणि भाईहो छूटनु साचै नाइ ॥अंग 52
  31. जा कउ मुसकलु अति बणै ढोई कोइ न देइ ॥अंग 70
  32. जानउ नही भावै कवन बाता ॥अंग 71
  33. गोसाई मिहंडा इठड़ा ॥अंग 73
  34. पहिलै पहरै रैणि कै वणजारिआ मित्रा धरि पाइता उदरै माहि ॥अंग 77
  35. मन पिआरिआ जी मित्रा हरि निबहै तेरै नाले ॥अंग 79
  36. हठ मझाहू मा पिरी पसे किउ दीदार ॥अंग 80
  37. दासा नह भावए बिनु दरसावए इक खिनु धीरजु किउ करै ॥अंग 80
  38. सोहंदड़ो हभ ठाइ कोइ न दिसै डूजड़ो ॥अंग 80
  39. किउ मनहु बेसारीऐ निमख नही टारीऐ गुणवंत प्रान हमारे ॥अंग 80
  40. धूड़ी मजनु साध खे साई थीए क्रिपाल ॥अंग 80
  41. जो तउ कीने आपणे तिना कूं मिलिओहि ॥अंग 81
  42. हरि कंठि लगि सोहिआ दोख सभि जोहिआ भगति लख्यण करि वसि भए ॥अंग 81
  43. साई नामु अमोलु कीम न कोई जाणदो ॥अंग 81
  44. ब्रहमु बीचारिआ जनमु सवारिआ पूरन किरपा प्रभि करी ॥अंग 81
  45. मुंढहु भुली नानका फिरि फिरि जनमि मुईआसु ॥अंग 89
माझ (50)
  1. मेरा मनु लोचै गुर दरसन ताई ॥अंग 96
  2. सा रुति सुहावी जितु तुधु समाली ॥अंग 97
  3. अनहदु वाजै सहजि सुहेला ॥अंग 97
  4. जितु घरि पिरि सोहागु बणाइआ ॥अंग 97
  5. खोजत खोजत दरसन चाहे ॥अंग 98
  6. पारब्रहम अपरंपर देवा ॥अंग 98
  7. कहिआ करणा दिता लैणा ॥अंग 98
  8. दुखु तदे जा विसरि जावै ॥अंग 98
  9. लाल गोपाल दइआल रंगीले ॥अंग 99
  10. धंनु सु वेला जितु मै सतिगुरु मिलिआ ॥अंग 99
  11. सगल संतन पहि वसतु इक मांगउ ॥अंग 99
  12. विसरु नाही एवड दाते ॥अंग 100
  13. सिफति सालाहणु तेरा हुकमु रजाई ॥अंग 100
  14. तूं जलनिधि हम मीन तुमारे ॥अंग 100
  15. अंम्रित नामु सदा निरमलीआ ॥अंग 100
  16. निधि सिधि रिधि हरि हरि हरि मेरै ॥अंग 101
  17. प्रभ किरपा ते हरि हरि धिआवउ ॥अंग 101
  18. ओति पोति सेवक संगि राता ॥अंग 101
  19. सभ किछु घर महि बाहरि नाही ॥अंग 102
  20. तिसु बलिहारी जिनि रसना भणिआ ॥अंग 102
  21. तूं पेडु साख तेरी फूली ॥अंग 102
  22. गुर परसादि किनै विरलै जाणी ॥अंग 103
  23. सुणि सुणि होवै परम गति मेरी ॥अंग 103
  24. तूं मेरा पिता तूंहै मेरा माता ॥अंग 103
  25. जीअ प्राण प्रभ मनहि अधारा ॥अंग 103
  26. सुणि सुणि जीवा सोइ तुमारी ॥अंग 104
  27. हुकमी वरसण लागे मेहा ॥अंग 104
  28. आउ साजन संत मीत पिआरे ॥अंग 104
  29. भए क्रिपाल गोविंद गुसाई ॥अंग 105
  30. जिथै नामु जपीऐ प्रभ पिआरे ॥अंग 105
  31. चरण ठाकुर के रिदै समाणे ॥अंग 105
  32. मीहु पइआ परमेसरि पाइआ ॥अंग 105
  33. मनु तनु तेरा धनु भी तेरा ॥अंग 106
  34. पारब्रहमि प्रभि मेघु पठाइआ ॥अंग 106
  35. सभे सुख भए प्रभ तुठे ॥अंग 106
  36. कीनी दइआ गोपाल गुसाई ॥अंग 107
  37. सो सचु मंदरु जितु सचु धिआईऐ ॥अंग 107
  38. रैणि सुहावड़ी दिनसु सुहेला ॥अंग 107
  39. ऐथै तूंहै आगै आपे ॥अंग 107
  40. मनु तनु रता राम पिआरे ॥अंग 108
  41. सिमरत नामु रिदै सुखु पाइआ ॥अंग 108
  42. सोई करणा जि आपि कराए ॥अंग 108
  43. झूठा मंगणु जे कोई मागै ॥अंग 109
  44. अंतरि अलखु न जाई लखिआ ॥अंग 130
  45. कउणु सु मुकता कउणु सु जुगता ॥अंग 131
  46. प्रभु अबिनासी ता किआ काड़ा ॥अंग 131
  47. नित नित दयु समालीऐ ॥अंग 132
  48. हरि जपि जपे मनु धीरे ॥1॥ रहाउ ॥अंग 132
  49. किरति करम के वीछुड़े करि किरपा मेलहु राम ॥अंग 133
  50. सेवी सतिगुरु आपणा हरि सिमरी दिन सभि रैण ॥अंग 136
गउड़ी (624)
  1. किन बिधि कुसलु होत मेरे भाई ॥अंग 175
  2. किउ भ्रमीऐ भ्रमु किस का होई ॥अंग 176
  3. कई जनम भए कीट पतंगा ॥अंग 176
  4. करम भूमि महि बोअहु नामु ॥अंग 176
  5. गुर का बचनु सदा अबिनासी ॥अंग 177
  6. जिनि कीता माटी ते रतनु ॥अंग 177
  7. तिस की सरणि नाही भउ सोगु ॥अंग 177
  8. सुणि हरि कथा उतारी मैलु ॥अंग 178
  9. अगले मुए सि पाछै परे ॥अंग 178
  10. अनिक जतन नही होत छुटारा ॥अंग 178
  11. बहुतु दरबु करि मनु न अघाना ॥अंग 179
  12. बहु रंग माइआ बहु बिधि पेखी ॥अंग 179
  13. तउ किरपा ते मारगु पाईऐ ॥अंग 180
  14. आन रसा जेते तै चाखे ॥अंग 180
  15. मनु मंदरु तनु साजी बारि ॥अंग 180
  16. रैणि दिनसु रहै इक रंगा ॥अंग 181
  17. तूं मेरा सखा तूंही मेरा मीतु ॥अंग 181
  18. नैनहु नीद पर द्रिसटि विकार ॥अंग 182
  19. जा कै वसि खान सुलतान ॥अंग 182
  20. सतिगुर दरसनि अगनि निवारी ॥अंग 183
  21. साधसंगि जपिओ भगवंतु ॥अंग 183
  22. बंधन तोड़ि बोलावै रामु ॥अंग 183
  23. जिसु मनि वसै तरै जनु सोइ ॥अंग 184
  24. जीअ जुगति जा कै है हाथ ॥अंग 184
  25. गुर परसादि नामि मनु लागा ॥अंग 184
  26. हसत पुनीत होहि ततकाल ॥अंग 185
  27. जो पराइओ सोई अपना ॥अंग 185
  28. कलिजुग महि मिलि आए संजोग ॥अंग 185
  29. हम धनवंत भागठ सच नाइ ॥अंग 185
  30. डरि डरि मरते जब जानीऐ दूरि ॥अंग 186
  31. जा का मीतु साजनु है समीआ ॥अंग 186
  32. जा कै दुखु सुखु सम करि जापै ॥अंग 186
  33. अगम रूप का मन महि थाना ॥अंग 186
  34. कवन रूपु तेरा आराधउ ॥अंग 186
  35. आपन तनु नही जा को गरबा ॥अंग 187
  36. गुर के चरण ऊपरि मेरे माथे ॥अंग 187
  37. रे मन मेरे तूं ता कउ आहि ॥ जा कै ऊणा कछहू नाहि ॥1॥अंग 187
  38. मीतु करै सोई हम माना ॥अंग 187
  39. जा कउ तुम भए समरथ अंगा ॥अंग 188
  40. दुलभ देह पाई वडभागी ॥अंग 188
  41. का की माई का को बाप ॥अंग 188
  42. वडे वडे जो दीसहि लोग ॥अंग 188
  43. पूरा मारगु पूरा इसनानु ॥अंग 188
  44. संत की धूरि मिटे अघ कोट ॥अंग 188
  45. हरि गुण जपत कमलु परगासै ॥अंग 189
  46. एकसु सिउ जा का मनु राता ॥अंग 189
  47. नामु भगत कै प्रान अधारु ॥अंग 189
  48. संत प्रसादि हरि नामु धिआइआ ॥अंग 189
  49. कर करि टहल रसना गुण गावउ ॥अंग 189
  50. जा कउ अपनी किरपा धारै ॥अंग 190
  51. छाडि सिआनप बहु चतुराई ॥अंग 190
  52. राखि लीआ गुरि पूरै आपि ॥अंग 190
  53. अनिक रसा खाए जैसे ढोर ॥अंग 190
  54. साधसंगि ता की सरनी परहु ॥अंग 191
  55. सूके हरे कीए खिन माहे ॥अंग 191
  56. ताप गए पाई प्रभि सांति ॥अंग 191
  57. भले दिनस भले संजोग ॥अंग 191
  58. गुर का सबदु राखु मन माहि ॥अंग 192
  59. जिसु सिमरत दूखु सभु जाइ ॥अंग 192
  60. भै महि रचिओ सभु संसारा ॥अंग 192
  61. तुमरी क्रिपा ते जपीऐ नाउ ॥अंग 192
  62. कण बिना जैसे थोथर तुखा ॥अंग 192
  63. तूं समरथु तूंहै मेरा सुआमी ॥अंग 193
  64. ता का दरसु पाईऐ वडभागी ॥अंग 193
  65. हरि सिमरत तेरी जाइ बलाइ ॥अंग 193
  66. हिरदै चरन कमल प्रभ धारे ॥अंग 193
  67. गुर जी के दरसन कउ बलि जाउ ॥अंग 193
  68. करै दुहकरम दिखावै होरु ॥अंग 194
  69. राम रंगु कदे उतरि न जाइ ॥अंग 194
  70. सिमरत सुआमी किलविख नासे ॥अंग 194
  71. हरि चरणी जा का मनु लागा ॥अंग 194
  72. हरि सिमरत सभि मिटहि कलेस ॥अंग 194
  73. जिस का दीआ पैनै खाइ ॥अंग 195
  74. प्रभ के चरन मन माहि धिआनु ॥अंग 195
  75. खादा पैनदा मूकरि पाइ ॥अंग 195
  76. अपने लोभ कउ कीनो मीतु ॥अंग 195
  77. कोटि बिघन हिरे खिन माहि ॥अंग 195
  78. करि किरपा भेटे गुर सोई ॥अंग 196
  79. बिखै राज ते अंधुला भारी ॥अंग 196
  80. आठ पहर संगी बटवारे ॥अंग 196
  81. थाती पाई हरि को नाम ॥अंग 196
  82. जलि थलि महीअलि पूरन हरि मीत ॥अंग 196
  83. हरि हरि नामि मजनु करि सूचे ॥अंग 197
  84. पउ सरणाई जिनि हरि जाते ॥अंग 197
  85. बाहरि राखिओ रिदै समालि ॥अंग 197
  86. धंनु इहु थानु गोविंद गुण गाए ॥अंग 197
  87. जो प्राणी गोविंदु धिआवै ॥अंग 197
  88. हरि के दास सिउ साकत नही संगु ॥अंग 198
  89. सा मति निरमल कहीअत धीर ॥अंग 198
  90. ऐसी प्रीति गोविंद सिउ लागी ॥अंग 198
  91. राम रसाइणि जो जन गीधे ॥अंग 198
  92. नितप्रति नावणु राम सरि कीजै ॥अंग 198
  93. सो किछु करि जितु मैलु न लागै ॥अंग 199
  94. जीवत छाडि जाहि देवाने ॥अंग 199
  95. गरीबा उपरि जि खिंजै दाड़ी ॥अंग 199
  96. महजरु झूठा कीतोनु आपि ॥अंग 199
  97. जन की धूरि मन मीठ खटानी ॥अंग 199
  98. जीवन पदवी हरि के दास ॥अंग 200
  99. सांति भई गुर गोबिदि पाई ॥अंग 200
  100. नेत्र प्रगासु कीआ गुरदेव ॥अंग 200
  101. धनु ओहु मसतकु धनु तेरे नेत ॥अंग 200
  102. तूंहै मसलति तूंहै नालि ॥अंग 200
  103. सतिगुरु पूरा भइआ क्रिपालु ॥अंग 200
  104. धोती खोलि विछाए हेठि ॥अंग 201
  105. थिरु घरि बैसहु हरि जन पिआरे ॥अंग 201
  106. हरि संगि राते भाहि न जलै ॥अंग 201
  107. उदमु करत सीतल मन भए ॥अंग 201
  108. कोटि मजन कीनो इसनान ॥अंग 202
  109. सिमरि सिमरि सिमरि सुखु पाइआ ॥अंग 202
  110. अपने सेवक कउ आपि सहाई ॥अंग 202
  111. राम को बलु पूरन भाई ॥अंग 202
  112. भुज बल बीर ब्रहम सुख सागर गरत परत गहि लेहु अंगुरीआ ॥1॥ रहाउ ॥अंग 203
  113. तुझ बिनु घरी न जीवना ध्रिगु रहणा संसारि ॥अंग 203
  114. है कोई राम पिआरो गावै ॥अंग 203
  115. कवन गुन प्रानपति मिलउ मेरी माई ॥1॥ रहाउ ॥अंग 204
  116. प्रभ मिलबे कउ प्रीति मनि लागी ॥अंग 204
  117. निकसु रे पंखी सिमरि हरि पांख ॥अंग 204
  118. हरि पेखन कउ सिमरत मनु मेरा ॥अंग 204
  119. किन बिधि मिलै गुसाई मेरे राम राइ ॥अंग 204
  120. ऐसो परचउ पाइओ ॥अंग 205
  121. अउध घटै दिनसु रैनारे ॥अंग 205
  122. राखु पिता प्रभ मेरे ॥अंग 205
  123. ओहु अबिनासी राइआ ॥अंग 206
  124. छोडि छोडि रे बिखिआ के रसूआ ॥अंग 206
  125. तुझ बिनु कवनु हमारा ॥अंग 206
  126. तुझ बिनु कवनु रीझावै तोही ॥अंग 207
  127. मिलहु पिआरे जीआ ॥अंग 207
  128. हउ ता कै बलिहारी ॥अंग 207
  129. जोग जुगति सुनि आइओ गुर ते ॥अंग 208
  130. अनूप पदारथु नामु सुनहु सगल धिआइले मीता ॥अंग 208
  131. दइआ मइआ करि प्रानपति मोरे मोहि अनाथ सरणि प्रभ तोरी ॥अंग 208
  132. तुम हरि सेती राते संतहु ॥अंग 209
  133. सहजि समाइओ देव ॥अंग 209
  134. पारब्रहम पूरन परमेसुर मन ता की ओट गहीजै रे ॥अंग 209
  135. हरि हरि कबहू न मनहु बिसारे ॥अंग 210
  136. सुखु नाही रे हरि भगति बिना ॥अंग 210
  137. मन धर तरबे हरि नाम नो ॥अंग 210
  138. दीबानु हमारो तुही एक ॥अंग 210
  139. जीअरे ओल॑ा नाम का ॥अंग 211
  140. बारनै बलिहारनै लख बरीआ ॥अंग 211
  141. हरि हरि हरि आराधीऐ ॥अंग 211
  142. मन राम नाम गुन गाईऐ ॥अंग 211
  143. रसना जपीऐ एकु नाम ॥अंग 211
  144. जा कउ बिसरै राम नाम ताहू कउ पीर ॥अंग 212
  145. गरबु बडो मूलु इतनो ॥अंग 212
  146. मोहि दासरो ठाकुर को ॥अंग 212
  147. है कोई ऐसा हउमै तोरै ॥अंग 212
  148. चिंतामणि करुणा मए ॥1॥ रहाउ ॥अंग 212
  149. मेरे मन सरणि प्रभू सुख पाए ॥अंग 212
  150. मेरे मन गुरु गुरु गुरु सद करीऐ ॥अंग 213
  151. त्रिसना बिरले ही की बुझी हे ॥1॥ रहाउ ॥अंग 213
  152. सभहू को रसु हरि हो ॥1॥ रहाउ ॥अंग 213
  153. गुन कीरति निधि मोरी ॥1॥ रहाउ ॥अंग 213
  154. मातो हरि रंगि मातो ॥1॥ रहाउ ॥अंग 214
  155. हरि नामु लेहु मीता लेहु आगै बिखम पंथु भैआन ॥1॥ रहाउ ॥अंग 214
  156. पाइओ बाल बुधि सुखु रे ॥अंग 214
  157. भावनु तिआगिओ री तिआगिओ ॥अंग 214
  158. पाइआ लालु रतनु मनि पाइआ ॥अंग 215
  159. उबरत राजा राम की सरणी ॥अंग 215
  160. मो कउ इह बिधि को समझावै ॥अंग 215
  161. हरि बिनु अवर क्रिआ बिरथे ॥अंग 216
  162. गउड़ी माला 5 ॥अंग 216
  163. तूं मेरा बहु माणु करते तूं मेरा बहु माणु ॥अंग 217
  164. दुख भंजनु तेरा नामु जी दुख भंजनु तेरा नामु ॥अंग 218
  165. हरि राम राम राम रामा ॥अंग 218
  166. मीठे हरि गुण गाउ जिंदू तूं मीठे हरि गुण गाउ ॥अंग 218
  167. जब इहु मन महि करत गुमाना ॥अंग 235
  168. गुर सेवा ते नामे लागा ॥अंग 236
  169. गुर का सबदु रिद अंतरि धारै ॥अंग 236
  170. प्रथमे गरभ वास ते टरिआ ॥अंग 237
  171. जो इसु मारे सोई सूरा ॥अंग 237
  172. हरि सिउ जुरै त सभु को मीतु ॥अंग 238
  173. बिनु सिमरन जैसे सरप आरजारी ॥अंग 239
  174. गुर कै बचनि मोहि परम गति पाई ॥अंग 239
  175. तिसु गुर कउ सिमरउ सासि सासि ॥अंग 239
  176. मिलु मेरे गोबिंद अपना नामु देहु ॥अंग 240
  177. आदि मधि जो अंति निबाहै ॥ सो साजनु मेरा मनु चाहै ॥1॥अंग 240
  178. खोजत फिरे असंख अंतु न पारीआ ॥अंग 240
  179. नाराइण हरि रंग रंगो ॥अंग 241
  180. हरि हरि गुरु गुरु करत भरम गए ॥अंग 241
  181. रंग संगि बिखिआ के भोगा इन संगि अंध न जानी ॥1॥अंग 242
  182. पुरखो बिधाता एकु स्रीधरु किउ मिलह तुझै उडीणीआ ॥अंग 247
  183. मोहन तेरे ऊचे मंदर महल अपारा ॥अंग 248
  184. पतित असंख पुनीत करि पुनह पुनह बलिहार ॥अंग 248
  185. जपि मना तूं राम नराइणु गोविंदा हरि माधो ॥अंग 248
  186. सुणि सखीए मिलि उदमु करेहा मनाइ लैहि हरि कंतै ॥अंग 249
  187. गुरदेव माता गुरदेव पिता गुरदेव सुआमी परमेसुरा ॥अंग 250
  188. आपहि कीआ कराइआ आपहि करनै जोगु ॥अंग 250
  189. ओअं साध सतिगुर नमसकारं ॥अंग 250
  190. निरंकार आकार आपि निरगुन सरगुन एक ॥अंग 250
  191. ओअं गुरमुखि कीओ अकारा ॥अंग 250
  192. सेई साह भगवंत से सचु संपै हरि रासि ॥अंग 250
  193. ससा सति सति सति सोऊ ॥अंग 250
  194. धनु धनु कहा पुकारते माइआ मोह सभ कूर ॥अंग 250
  195. धधा धूरि पुनीत तेरे जनूआ ॥अंग 251
  196. अनिक भेख अरु ङिआन धिआन मनहठि मिलिअउ न कोइ ॥अंग 251
  197. ङंङा ङिआनु नही मुख बातउ ॥अंग 251
  198. आवन आए स्रिसटि महि बिनु बूझे पसु ढोर ॥अंग 251
  199. या जुग महि एकहि कउ आइआ ॥अंग 251
  200. आवत हुकमि बिनास हुकमि आगिआ भिंन न कोइ ॥अंग 251
  201. एऊ जीअ बहुतु ग्रभ वासे ॥अंग 251
  202. किरत कमावन सुभ असुभ कीने तिनि प्रभि आपि ॥अंग 251
  203. एकहि आपि करावनहारा ॥अंग 251
  204. राचि रहे बनिता बिनोद कुसम रंग बिख सोर ॥अंग 251
  205. रे मन बिनु हरि जह रचहु तह तह बंधन पाहि ॥अंग 252
  206. टूटे बंधन जासु के होआ साधू संगु ॥अंग 252
  207. रारा रंगहु इआ मनु अपना ॥अंग 252
  208. लालच झूठ बिकार मोह बिआपत मूड़े अंध ॥अंग 252
  209. लला लपटि बिखै रस राते ॥अंग 252
  210. लाल गुपाल गोबिंद प्रभ गहिर गंभीर अथाह ॥अंग 252
  211. लला ता कै लवै न कोऊ ॥अंग 252
  212. आतम रसु जिह जानिआ हरि रंग सहजे माणु ॥अंग 252
  213. आइआ सफल ताहू को गनीऐ ॥अंग 252
  214. यासु जपत मनि होइ अनंदु बिनसै दूजा भाउ ॥ दूख दरद त्रिसना बुझै नानक नामि समाउ ॥1॥अंग 252
  215. यया जारउ दुरमति दोऊ ॥अंग 253
  216. अंतरि मन तन बसि रहे ईत ऊत के मीत ॥अंग 253
  217. अनदिनु सिमरहु तासु कउ जो अंति सहाई होइ ॥अंग 253
  218. अति सुंदर कुलीन चतुर मुखि ङिआनी धनवंत ॥अंग 253
  219. ङंङा खटु सासत्र होइ ङिआता ॥अंग 253
  220. कुंट चारि दह दिसि भ्रमे करम किरति की रेख ॥अंग 253
  221. कका कारन करता सोऊ ॥अंग 253
  222. खात खरचत बिलछत रहे टूटि न जाहि भंडार ॥अंग 253
  223. खखा खूना कछु नही तिसु संम्रथ कै पाहि ॥अंग 253
  224. गनि मिनि देखहु मनै माहि सरपर चलनो लोग ॥अंग 254
  225. गगा गोबिद गुण रवहु सासि सासि जपि नीत ॥अंग 254
  226. घोखे सासत्र बेद सभ आन न कथतउ कोइ ॥अंग 254
  227. घघा घालहु मनहि एह बिनु हरि दूसर नाहि ॥अंग 254
  228. ङणि घाले सभ दिवस सास नह बढन घटन तिलु सार ॥अंग 254
  229. ङंङा ङ्रासै कालु तिह जो साकत प्रभि कीन ॥अंग 254
  230. चिति चितवउ चरणारबिंद ऊध कवल बिगसांत ॥अंग 254
  231. चचा चरन कमल गुर लागा ॥ धनि धनि उआ दिन संजोग सभागा ॥अंग 254
  232. छाती सीतल मनु सुखी छंत गोबिद गुन गाइ ॥अंग 254
  233. छछा छोहरे दास तुमारे ॥अंग 254
  234. जोर जुलम फूलहि घनो काची देह बिकार ॥अंग 255
  235. जजा जानै हउ कछु हूआ ॥अंग 255
  236. झालाघे उठि नामु जपि निसि बासुर आराधि ॥अंग 255
  237. झझा झूरनु मिटै तुमारो ॥अंग 255
  238. ञतन करहु तुम अनिक बिधि रहनु न पावहु मीत ॥अंग 255
  239. ञंञा ञाणहु द्रिड़ु सही बिनसि जात एह हेत ॥अंग 255
  240. टूटे बंधन जनम मरन साध सेव सुखु पाइ ॥अंग 255
  241. टहल करहु तउ एक की जा ते ब्रिथा न कोइ ॥अंग 255
  242. ठाक न होती तिनहु दरि जिह होवहु सुप्रसंन ॥अंग 255
  243. ठठा मनूआ ठाहहि नाही ॥ जो सगल तिआगि एकहि लपटाही ॥अंग 256
  244. डंडउति बंदन अनिक बार सरब कला समरथ ॥अंग 256
  245. डडा डेरा इहु नही जह डेरा तह जानु ॥अंग 256
  246. ढाहन लागे धरम राइ किनहि न घालिओ बंध ॥अंग 256
  247. ढढा ढूढत कह फिरहु ढूढनु इआ मन माहि ॥अंग 256
  248. जह साधू गोबिद भजनु कीरतनु नानक नीत ॥अंग 256
  249. णाणा रण ते सीझीऐ आतम जीतै कोइ ॥अंग 256
  250. तनु मनु धनु अरपउ तिसै प्रभू मिलावै मोहि ॥अंग 256
  251. तता ता सिउ प्रीति करि गुण निधि गोबिद राइ ॥अंग 256
  252. थाके बहु बिधि घालते त्रिपति न त्रिसना लाथ ॥अंग 257
  253. थथा थिरु कोऊ नही काइ पसारहु पाव ॥अंग 257
  254. दासह एकु निहारिआ सभु कछु देवनहार ॥अंग 257
  255. ददा दाता एकु है सभ कउ देवनहार ॥अंग 257
  256. धर जीअरे इक टेक तू लाहि बिडानी आस ॥अंग 257
  257. धधा धावत तउ मिटै संतसंगि होइ बासु ॥अंग 257
  258. नानक नामु नामु जपु जपिआ अंतरि बाहरि रंगि ॥अंग 257
  259. नंना नरकि परहि ते नाही ॥ जा कै मनि तनि नामु बसाही ॥अंग 257
  260. पति राखी गुरि पारब्रहम तजि परपंच मोह बिकार ॥अंग 258
  261. पपा परमिति पारु न पाइआ ॥अंग 258
  262. फाहे काटे मिटे गवन फतिह भई मनि जीत ॥अंग 258
  263. फफा फिरत फिरत तू आइआ ॥अंग 258
  264. बिनउ सुनहु तुम पारब्रहम दीन दइआल गुपाल ॥अंग 258
  265. बबा ब्रहमु जानत ते ब्रहमा ॥अंग 258
  266. भै भंजन अघ दूख नास मनहि अराधि हरे ॥अंग 258
  267. भभा भरमु मिटावहु अपना ॥अंग 258
  268. माइआ डोलै बहु बिधी मनु लपटिओ तिह संग ॥अंग 258
  269. ममा मागनहार इआना ॥अंग 258
  270. मति पूरी परधान ते गुर पूरे मन मंत ॥अंग 259
  271. ममा जाहू मरमु पछाना ॥ भेटत साधसंग पतीआना ॥अंग 259
  272. यार मीत सुनि साजनहु बिनु हरि छूटनु नाहि ॥अंग 259
  273. यया जतन करत बहु बिधीआ ॥अंग 259
  274. रोसु न काहू संग करहु आपन आपु बीचारि ॥अंग 259
  275. रारा रेन होत सभ जा की ॥अंग 259
  276. लालच झूठ बिखै बिआधि इआ देही महि बास ॥अंग 259
  277. लला लावउ अउखध जाहू ॥अंग 259
  278. वासुदेव सरबत्र मै ऊन न कतहू ठाइ ॥अंग 259
  279. ववा वैरु न करीऐ काहू ॥अंग 259
  280. हउ हउ करत बिहानीआ साकत मुगध अजान ॥अंग 260
  281. ड़ाड़ा ड़ाड़ि मिटै संगि साधू ॥अंग 260
  282. साधू की मन ओट गहु उकति सिआनप तिआगु ॥अंग 260
  283. ससा सरनि परे अब हारे ॥ सासत्र सिम्रिति बेद पूकारे ॥अंग 260
  284. खुदी मिटी तब सुख भए मन तन भए अरोग ॥अंग 260
  285. खखा खरा सराहउ ताहू ॥अंग 260
  286. सति कहउ सुनि मन मेरे सरनि परहु हरि राइ ॥अंग 260
  287. ससा सिआनप छाडु इआना ॥अंग 260
  288. हरि हरि मुख ते बोलना मनि वूठै सुखु होइ ॥अंग 260
  289. हेरउ घटि घटि सगल कै पूरि रहे भगवान ॥अंग 260
  290. लेखै कतहि न छूटीऐ खिनु खिनु भूलनहार ॥अंग 261
  291. लूण हरामी गुनहगार बेगाना अलप मति ॥अंग 261
  292. खात पीत खेलत हसत भरमे जनम अनेक ॥अंग 261
  293. खेलत खेलत आइओ अनिक जोनि दुख पाइ ॥अंग 261
  294. आए प्रभ सरनागती किरपा निधि दइआल ॥अंग 261
  295. अखर महि त्रिभवन प्रभि धारे ॥अंग 261
  296. हथि कलंम अगंम मसतकि लिखावती ॥अंग 261
  297. हे अचुत हे पारब्रहम अबिनासी अघनास ॥अंग 261
  298. गुरदेव माता गुरदेव पिता गुरदेव सुआमी परमेसुरा ॥अंग 262
  299. आदि गुरए नमह ॥अंग 262
  300. सिमरउ सिमरि सिमरि सुखु पावउ ॥अंग 262
  301. सुखमनी सुख अंम्रित प्रभ नामु ॥अंग 262
  302. प्रभ कै सिमरनि रिधि सिधि नउ निधि ॥अंग 262
  303. प्रभ का सिमरनु सभ ते ऊचा ॥अंग 263
  304. प्रभ कउ सिमरहि से धनवंते ॥अंग 263
  305. प्रभ कउ सिमरहि से परउपकारी ॥अंग 263
  306. प्रभ कै सिमरनि कारज पूरे ॥अंग 263
  307. हरि सिमरनु करि भगत प्रगटाए ॥अंग 263
  308. दीन दरद दुख भंजना घटि घटि नाथ अनाथ ॥अंग 263
  309. जह मात पिता सुत मीत न भाई ॥अंग 264
  310. सगल स्रिसटि को राजा दुखीआ ॥अंग 264
  311. छूटत नही कोटि लख बाही ॥अंग 264
  312. जिह मारग के गने जाहि न कोसा ॥अंग 264
  313. भगत जना की बरतनि नामु ॥अंग 264
  314. हरि का नामु जन कउ मुकति जुगति ॥अंग 264
  315. हरि हरि जन कै मालु खजीना ॥अंग 265
  316. पारजातु इहु हरि को नाम ॥अंग 265
  317. बहु सासत्र बहु सिम्रिती पेखे सरब ढढोलि ॥अंग 265
  318. जाप ताप गिआन सभि धिआन ॥अंग 265
  319. नउ खंड प्रिथमी फिरै चिरु जीवै ॥अंग 265
  320. मन कामना तीरथ देह छुटै ॥अंग 265
  321. बहुतु सिआणप जम का भउ बिआपै ॥अंग 265
  322. चारि पदारथ जे को मागै ॥अंग 266
  323. सगल पुरख महि पुरखु प्रधानु ॥अंग 266
  324. निरधन कउ धनु तेरो नाउ ॥अंग 266
  325. सरब धरम महि स्रेसट धरमु ॥अंग 266
  326. निरगुनीआर इआनिआ सो प्रभु सदा समालि ॥अंग 266
  327. रमईआ के गुन चेति परानी ॥अंग 266
  328. जिह प्रसादि धर ऊपरि सुखि बसहि ॥अंग 267
  329. आदि अंति जो राखनहारु ॥अंग 267
  330. रतनु तिआगि कउडी संगि रचै ॥अंग 267
  331. करतूति पसू की मानस जाति ॥अंग 267
  332. सुनि अंधा कैसे मारगु पावै ॥अंग 267
  333. संगि सहाई सु आवै न चीति ॥अंग 267
  334. तू ठाकुरु तुम पहि अरदासि ॥अंग 268
  335. देनहारु प्रभ छोडि कै लागहि आन सुआइ ॥अंग 268
  336. दस बसतू ले पाछै पावै ॥अंग 268
  337. अगनत साहु अपनी दे रासि ॥अंग 268
  338. अनिक भाति माइआ के हेत ॥ सरपर होवत जानु अनेत ॥अंग 268
  339. मिथिआ तनु धनु कुटंबु सबाइआ ॥अंग 268
  340. मिथिआ स्रवन पर निंदा सुनहि ॥अंग 268
  341. बिरथी साकत की आरजा ॥अंग 269
  342. रहत अवर कछु अवर कमावत ॥अंग 269
  343. करउ बेनती पारब्रहमु सभु जानै ॥अंग 269
  344. काम क्रोध अरु लोभ मोह बिनसि जाइ अहंमेव ॥अंग 269
  345. जिह प्रसादि छतीह अंम्रित खाहि ॥अंग 269
  346. जिह प्रसादि पाट पटंबर हढावहि ॥अंग 269
  347. जिह प्रसादि आरोग कंचन देही ॥अंग 270
  348. जिह प्रसादि आभूखन पहिरीजै ॥अंग 270
  349. जिह प्रसादि करहि पुंन बहु दान ॥अंग 270
  350. जिह प्रसादि सुनहि करन नाद ॥अंग 270
  351. जिह प्रसादि तूं प्रगटु संसारि ॥अंग 270
  352. आपि जपाए जपै सो नाउ ॥अंग 270
  353. अगम अगाधि पारब्रहमु सोइ ॥अंग 271
  354. साध कै संगि मुख ऊजल होत ॥अंग 271
  355. साध कै संगि अगोचरु मिलै ॥अंग 271
  356. साधसंगि दुसमन सभि मीत ॥अंग 271
  357. साध कै संगि न कबहू धावै ॥अंग 271
  358. साध कै संगि सभ कुल उधारै ॥अंग 271
  359. साध कै संगि नही कछु घाल ॥अंग 272
  360. साध कै संगि सुनउ हरि नाउ ॥अंग 272
  361. साध की महिमा बेद न जानहि ॥अंग 272
  362. मनि साचा मुखि साचा सोइ ॥अंग 272
  363. ब्रहम गिआनी सदा निरलेप ॥अंग 272
  364. ब्रहम गिआनी निरमल ते निरमला ॥अंग 272
  365. ब्रहम गिआनी सगल की रीना ॥अंग 272
  366. ब्रहम गिआनी एक ऊपरि आस ॥अंग 273
  367. ब्रहम गिआनी कै एकै रंग ॥अंग 273
  368. ब्रहम गिआनी ब्रहम का बेता ॥अंग 273
  369. ब्रहम गिआनी की कीमति नाहि ॥अंग 273
  370. ब्रहम गिआनी सभ स्रिसटि का करता ॥अंग 273
  371. उरि धारै जो अंतरि नामु ॥अंग 274
  372. मिथिआ नाही रसना परस ॥अंग 274
  373. बैसनो सो जिसु ऊपरि सुप्रसंन ॥अंग 274
  374. भगउती भगवंत भगति का रंगु ॥अंग 274
  375. सो पंडितु जो मनु परबोधै ॥अंग 274
  376. बीज मंत्रु सरब को गिआनु ॥अंग 274
  377. जिस कै मनि पारब्रहम का निवासु ॥अंग 274
  378. प्रभ की आगिआ आतम हितावै ॥अंग 275
  379. पारब्रहम के सगले ठाउ ॥अंग 275
  380. उसतति करहि अनेक जन अंतु न पारावार ॥अंग 275
  381. कई कोटि होए पूजारी ॥अंग 275
  382. कई कोटि भए अभिमानी ॥अंग 275
  383. कई कोटि सिध जती जोगी ॥अंग 275
  384. कई कोटि राजस तामस सातक ॥अंग 276
  385. कई कोटि पाताल के वासी ॥अंग 276
  386. कई कोटि भए बैरागी ॥अंग 276
  387. कई कोटि खाणी अरु खंड ॥अंग 276
  388. कई कोटि पारब्रहम के दास ॥अंग 276
  389. करण कारण प्रभु एकु है दूसर नाही कोइ ॥अंग 276
  390. करन करावन करनै जोगु ॥अंग 276
  391. प्रभ भावै मानुख गति पावै ॥अंग 277
  392. कहु मानुख ते किआ होइ आवै ॥अंग 277
  393. खिन महि नीच कीट कउ राज ॥अंग 277
  394. इस का बलु नाही इसु हाथ ॥अंग 277
  395. कबहू निरति करै बहु भाति ॥अंग 277
  396. कबहू होइ पंडितु करे बख्यानु ॥अंग 277
  397. कबहू साधसंगति इहु पावै ॥अंग 278
  398. सुखी बसै मसकीनीआ आपु निवारि तले ॥अंग 278
  399. जिस कै अंतरि राज अभिमानु ॥अंग 278
  400. धनवंता होइ करि गरबावै ॥अंग 278
  401. कोटि करम करै हउ धारे ॥अंग 278
  402. जब लगु जानै मुझ ते कछु होइ ॥अंग 278
  403. सहस खटे लख कउ उठि धावै ॥अंग 278
  404. करन करावन करनैहारु ॥अंग 279
  405. आपि उपदेसै समझै आपि ॥अंग 279
  406. सति सति सति प्रभु सुआमी ॥अंग 279
  407. संत सरनि जो जनु परै सो जनु उधरनहार ॥अंग 279
  408. संत कै दूखनि आरजा घटै ॥अंग 279
  409. संत के दूखन ते मुखु भवै ॥अंग 279
  410. संत का निंदकु महा अतताई ॥अंग 280
  411. संत का दोखी सदा अपवितु ॥अंग 280
  412. संत का दोखी अध बीच ते टूटै ॥अंग 280
  413. संत का दोखी इउ बिललाइ ॥अंग 280
  414. संत का दोखी बिगड़ रूपु होइ जाइ ॥अंग 280
  415. सभ घट तिस के ओहु करनैहारु ॥अंग 280
  416. तजहु सिआनप सुरि जनहु सिमरहु हरि हरि राइ ॥अंग 281
  417. मानुख की टेक ब्रिथी सभ जानु ॥अंग 281
  418. उसतति मन महि करि निरंकार ॥अंग 281
  419. बडभागी ते जन जग माहि ॥अंग 281
  420. गुर प्रसादि आपन आपु सुझै ॥अंग 281
  421. जिस कउ हरि प्रभु मनि चिति आवै ॥अंग 281
  422. नह किछु जनमै नह किछु मरै ॥अंग 281
  423. जिन प्रभु जाता सु सोभावंत ॥अंग 282
  424. जो किछु करै सु प्रभ कै रंगि ॥अंग 282
  425. सरब कला भरपूर प्रभ बिरथा जाननहार ॥अंग 282
  426. टूटी गाढनहार गोुपाल ॥अंग 282
  427. रूपवंतु होइ नाही मोहै ॥अंग 282
  428. जिउ मंदर कउ थामै थंमनु ॥अंग 282
  429. मन मूरख काहे बिललाईऐ ॥अंग 282
  430. जिसु वखर कउ लैनि तू आइआ ॥अंग 283
  431. चरन साध के धोइ धोइ पीउ ॥अंग 283
  432. मिरतक कउ जीवालनहार ॥अंग 283
  433. जा कै मनि गुर की परतीति ॥अंग 283
  434. रूपु न रेख न रंगु किछु त्रिहु गुण ते प्रभ भिंन ॥अंग 283
  435. अबिनासी प्रभु मन महि राखु ॥अंग 283
  436. मनसा पूरन सरना जोग ॥अंग 284
  437. जा की लीला की मिति नाहि ॥अंग 284
  438. नाना रूप नाना जा के रंग ॥अंग 284
  439. नाम के धारे सगले जंत ॥अंग 284
  440. रूपु सति जा का सति असथानु ॥अंग 284
  441. सति बचन साधू उपदेस ॥अंग 284
  442. बिसमन बिसम भए बिसमाद ॥अंग 285
  443. आदि सचु जुगादि सचु ॥अंग 285
  444. चरन सति सति परसनहार ॥अंग 285
  445. सति सरूपु रिदै जिनि मानिआ ॥अंग 285
  446. ठाकुर का सेवकु आगिआकारी ॥अंग 285
  447. अपुने जन का परदा ढाकै ॥अंग 285
  448. नीकी कीरी महि कल राखै ॥अंग 285
  449. बारं बार बार प्रभु जपीऐ ॥अंग 286
  450. बोलहु जसु जिहबा दिनु राति ॥अंग 286
  451. मन मेरे तिन की ओट लेहि ॥अंग 286
  452. सति पुरखु जिनि जानिआ सतिगुरु तिस का नाउ ॥अंग 286
  453. सतिगुरु सिख की करै प्रतिपाल ॥अंग 286
  454. गुर कै ग्रिहि सेवकु जो रहै ॥अंग 286
  455. बीस बिसवे गुर का मनु मानै ॥अंग 287
  456. सफल दरसनु पेखत पुनीत ॥अंग 287
  457. जिहबा एक उसतति अनेक ॥अंग 287
  458. इहु हरि रसु पावै जनु कोइ ॥अंग 287
  459. तपति माहि ठाढि वरताई ॥अंग 287
  460. निरगुनु आपि सरगुनु भी ओही ॥अंग 287
  461. साथि न चालै बिनु भजन बिखिआ सगली छारु ॥अंग 288
  462. संत जना मिलि करहु बीचारु ॥अंग 288
  463. जिसु धन कउ चारि कुंट उठि धावहि ॥अंग 288
  464. मनु परबोधहु हरि कै नाइ ॥अंग 288
  465. ततु बीचारु कहै जनु साचा ॥अंग 288
  466. संगि न चालसि तेरै धना ॥अंग 288
  467. गुर की मति तूं लेहि इआने ॥अंग 288
  468. गुन गावत तेरी उतरसि मैलु ॥अंग 289
  469. एको जपि एको सालाहि ॥अंग 289
  470. फिरत फिरत प्रभ आइआ परिआ तउ सरनाइ ॥अंग 289
  471. जाचक जनु जाचै प्रभ दानु ॥अंग 289
  472. प्रभ की द्रिसटि महा सुखु होइ ॥अंग 289
  473. सेवक की मनसा पूरी भई ॥अंग 289
  474. सो किउ बिसरै जि घाल न भानै ॥अंग 289
  475. साजन संत करहु इहु कामु ॥अंग 290
  476. उपजी प्रीति प्रेम रसु चाउ ॥अंग 290
  477. प्रभ बखसंद दीन दइआल ॥अंग 290
  478. सरब बैकुंठ मुकति मोख पाए ॥अंग 290
  479. सरगुन निरगुन निरंकार सुंन समाधी आपि ॥अंग 290
  480. जब अकारु इहु कछु न द्रिसटेता ॥अंग 290
  481. जब होवत प्रभ केवल धनी ॥अंग 291
  482. अबिनासी सुख आपन आसन ॥अंग 291
  483. जह निरमल पुरखु पुरख पति होता ॥अंग 291
  484. जब अपनी सोभा आपन संगि बनाई ॥अंग 291
  485. जह अछल अछेद अभेद समाइआ ॥अंग 291
  486. जह आपि रचिओ परपंचु अकारु ॥अंग 291
  487. जह अबिगतु भगतु तह आपि ॥अंग 292
  488. जीअ जंत के ठाकुरा आपे वरतणहार ॥अंग 292
  489. आपि कथै आपि सुननैहारु ॥अंग 292
  490. जीअ जंत्र सभ ता कै हाथ ॥अंग 292
  491. पूरन पूरि रहे दइआल ॥अंग 292
  492. जनु लागा हरि एकै नाइ ॥अंग 292
  493. साधसंगि मिलि करहु अनंद ॥अंग 293
  494. हलतु पलतु दुइ लेहु सवारि ॥अंग 293
  495. तिस ते दूरि कहा को जाइ ॥अंग 293
  496. मति पूरी अंम्रितु जा की द्रिसटि ॥अंग 293
  497. गिआन अंजनु गुरि दीआ अगिआन अंधेर बिनासु ॥अंग 293
  498. संतसंगि अंतरि प्रभु डीठा ॥अंग 293
  499. सो अंतरि सो बाहरि अनंत ॥अंग 293
  500. बेद पुरान सिंम्रिति महि देखु ॥अंग 294
  501. संत जना का पेखनु सभु ब्रहम ॥अंग 294
  502. आपि सति कीआ सभु सति ॥अंग 294
  503. सरब भूत आपि वरतारा ॥अंग 294
  504. इस ते होइ सु नाही बुरा ॥अंग 294
  505. जो जानै तिसु सदा सुखु होइ ॥अंग 294
  506. पूरा प्रभु आराधिआ पूरा जा का नाउ ॥अंग 295
  507. पूरे गुर का सुनि उपदेसु ॥अंग 295
  508. खेम कुसल सहज आनंद ॥अंग 295
  509. उतम सलोक साध के बचन ॥अंग 295
  510. सरनि जोगु सुनि सरनी आए ॥अंग 295
  511. प्रभ की उसतति करहु संत मीत ॥अंग 295
  512. खेम सांति रिधि नव निधि ॥अंग 295
  513. इहु निधानु जपै मनि कोइ ॥अंग 296
  514. जिसु मनि बसै सुनै लाइ प्रीति ॥अंग 296
  515. जलि थलि महीअलि पूरिआ सुआमी सिरजनहारु ॥अंग 296
  516. एकम एकंकारु प्रभु करउ बंदना धिआइ ॥अंग 296
  517. करउ बंदना अनिक वार सरनि परउ हरि राइ ॥अंग 296
  518. दुतीआ दुरमति दूरि करि गुर सेवा करि नीत ॥अंग 296
  519. तीनि बिआपहि जगत कउ तुरीआ पावै कोइ ॥अंग 297
  520. त्रितीआ त्रै गुण बिखै फल कब उतम कब नीचु ॥अंग 297
  521. चतुर सिआणा सुघड़ु सोइ जिनि तजिआ अभिमानु ॥अंग 297
  522. चतुरथि चारे बेद सुणि सोधिओ ततु बीचारु ॥अंग 297
  523. पंच बिकार मन महि बसे राचे माइआ संगि ॥अंग 297
  524. पंचमि पंच प्रधान ते जिह जानिओ परपंचु ॥अंग 297
  525. खट सासत्र ऊचौ कहहि अंतु न पारावार ॥अंग 297
  526. खसटमि खट सासत्र कहहि सिंम्रिति कथहि अनेक ॥अंग 297
  527. संत मंडल हरि जसु कथहि बोलहि सति सुभाइ ॥अंग 298
  528. सपतमि संचहु नाम धनु टूटि न जाहि भंडार ॥अंग 298
  529. आठ पहर गुन गाईअहि तजीअहि अवरि जंजाल ॥अंग 298
  530. असटमी असट सिधि नव निधि ॥अंग 298
  531. नाराइणु नह सिमरिओ मोहिओ सुआद बिकार ॥अंग 298
  532. नउमी नवे छिद्र अपवीत ॥अंग 298
  533. दस दिस खोजत मै फिरिओ जत देखउ तत सोइ ॥अंग 298
  534. दसमी दस दुआर बसि कीने ॥अंग 298
  535. एको एकु बखानीऐ बिरला जाणै स्वादु ॥अंग 299
  536. एकादसी निकटि पेखहु हरि रामु ॥अंग 299
  537. दुरमति हरी सेवा करी भेटे साध क्रिपाल ॥अंग 299
  538. दुआदसी दानु नामु इसनानु ॥अंग 299
  539. तीनि गुणा महि बिआपिआ पूरन होत न काम ॥अंग 299
  540. त्रउदसी तीनि ताप संसार ॥अंग 299
  541. चारि कुंट चउदह भवन सगल बिआपत राम ॥अंग 299
  542. चउदहि चारि कुंट प्रभ आप ॥अंग 299
  543. आतमु जीता गुरमती गुण गाए गोबिंद ॥अंग 299
  544. अमावस आतम सुखी भए संतोखु दीआ गुरदेव ॥अंग 299
  545. पूरनु कबहु न डोलता पूरा कीआ प्रभ आपि ॥अंग 300
  546. पूरनमा पूरन प्रभ एकु करण कारण समरथु ॥अंग 300
  547. दुख बिनसे सहसा गइओ सरनि गही हरि राइ ॥अंग 300
  548. कोई गावै को सुणै कोई करै बीचारु ॥अंग 300
  549. रहदे खुहदे निंदक मारिअनु करि आपे आहरु ॥अंग 315
  550. मुंढहु भुले मुंढ ते किथै पाइनि हथु ॥अंग 315
  551. पउड़ी 5 ॥अंग 315
  552. सेवक सचे साह के सेई परवाणु ॥अंग 315
  553. जो धुरि लिखिआ लेखु प्रभ मेटणा न जाइ ॥अंग 315
  554. पउड़ी 5 ॥अंग 315
  555. नरक घोर बहु दुख घणे अकिरतघणा का थानु ॥अंग 315
  556. अवखध सभे कीतिअनु निंदक का दारू नाहि ॥अंग 315
  557. पउड़ी 5 ॥अंग 315
  558. भगत जनां का राखा हरि आपि है किआ पापी करीऐ ॥अंग 316
  559. नानक वीचारहि संत मुनि जनां चारि वेद कहंदे ॥अंग 316
  560. गुर नानक हरि नामु द्रिड़ाइआ भंनण घड़ण समरथु ॥अंग 317
  561. खुधिआवंतु न जाणई लाज कुलाज कुबोलु ॥अंग 317
  562. हरि हरि नामु जो जनु जपै सो आइआ परवाणु ॥अंग 318
  563. भलके उठि पराहुणा मेरै घरि आवउ ॥अंग 318
  564. जो तुधु भावै सो भला सचु तेरा भाणा ॥अंग 318
  565. चेता ई तां चेति साहिबु सचा सो धणी ॥अंग 318
  566. वाऊ संदे कपड़े पहिरहि गरबि गवार ॥अंग 318
  567. सेई उबरे जगै विचि जो सचै रखे ॥अंग 318
  568. नानक सोई दिनसु सुहावड़ा जितु प्रभु आवै चिति ॥अंग 318
  569. नानक मित्राई तिसु सिउ सभ किछु जिस कै हाथि ॥अंग 318
  570. अंम्रितु नामु निधानु है मिलि पीवहु भाई ॥अंग 318
  571. डिठड़ो हभ ठाइ ऊण न काई जाइ ॥अंग 318
  572. दामनी चमतकार तिउ वरतारा जग खे ॥अंग 319
  573. सिम्रिति सासत्र सोधि सभि किनै कीम न जाणी ॥अंग 319
  574. अंतरि चिंता नैणी सुखी मूलि न उतरै भुख ॥अंग 319
  575. मुठड़े सेई साथ जिनी सचु न लदिआ ॥अंग 319
  576. जिथै बैसनि साध जन सो थानु सुहंदा ॥अंग 319
  577. चिड़ी चुहकी पहु फुटी वगनि बहुतु तरंग ॥अंग 319
  578. घर मंदर खुसीआ तही जह तू आवहि चिति ॥अंग 319
  579. हरि धनु सची रासि है किनै विरलै जाता ॥अंग 319
  580. खखड़ीआ सुहावीआ लगड़ीआ अक कंठि ॥अंग 319
  581. विसारेदे मरि गए मरि भि न सकहि मूलि ॥अंग 319
  582. सुख निधानु प्रभु एकु है अबिनासी सुणिआ ॥अंग 319
  583. जिना सासि गिरासि न विसरै हरि नामां मनि मंतु ॥अंग 319
  584. अठे पहर भउदा फिरै खावण संदड़ै सूलि ॥अंग 319
  585. तिसै सरेवहु प्राणीहो जिस दै नाउ पलै ॥अंग 320
  586. जाचकु मंगै दानु देहि पिआरिआ ॥अंग 320
  587. सिखहु सबदु पिआरिहो जनम मरन की टेक ॥अंग 320
  588. ओथै अंम्रितु वंडीऐ सुखीआ हरि करणे ॥अंग 320
  589. सतिगुरि पूरै सेविऐ दूखा का होइ नासु ॥अंग 320
  590. जिसु सिमरत संकट छुटहि अनद मंगल बिस्राम ॥अंग 320
  591. तिन की सोभा किआ गणी जिनी हरि हरि लधा ॥अंग 320
  592. कामु न करही आपणा फिरहि अवता लोइ ॥अंग 320
  593. बिखै कउड़तणि सगल माहि जगति रही लपटाइ ॥अंग 320
  594. इह नीसाणी साध की जिसु भेटत तरीऐ ॥अंग 320
  595. नानक आए से परवाणु है जिन हरि वुठा चिति ॥अंग 320
  596. पारब्रहमु प्रभु द्रिसटी आइआ पूरन अगम बिसमाद ॥अंग 320
  597. धोहु न चली खसम नालि लबि मोहि विगुते ॥अंग 321
  598. उठंदिआ बहंदिआ सवंदिआ सुखु सोइ ॥अंग 321
  599. लालचि अटिआ नित फिरै सुआरथु करे न कोइ ॥अंग 321
  600. सभे वसतू कउड़ीआ सचे नाउ मिठा ॥अंग 321
  601. जाचड़ी सा सारु जो जाचंदी हेकड़ो ॥अंग 321
  602. नीहि जि विधा मंनु पछाणू विरलो थिओ ॥अंग 321
  603. सोई सेविहु जीअड़े दाता बखसिंदु ॥अंग 321
  604. वत लगी सचे नाम की जो बीजे सो खाइ ॥अंग 321
  605. मंगणा त सचु इकु जिसु तुसि देवै आपि ॥अंग 321
  606. लाहा जग महि से खटहि जिन हरि धनु रासि ॥अंग 321
  607. पारब्रहमि फुरमाइआ मीहु वुठा सहजि सुभाइ ॥अंग 321
  608. जंमणु मरणु न तिन॑ कउ जो हरि लड़ि लागे ॥अंग 322
  609. धरणि सुवंनी खड़ रतन जड़ावी हरि प्रेम पुरखु मनि वुठा ॥अंग 322
  610. फिरदी फिरदी दह दिसा जल परबत बनराइ ॥अंग 322
  611. जिसु सरब सुखा फल लोड़ीअहि सो सचु कमावउ ॥अंग 322
  612. एकु जि साजनु मै कीआ सरब कला समरथु ॥अंग 322
  613. जे करु गहहि पिआरड़े तुधु न छोडा मूलि ॥अंग 322
  614. सभि निधान घरि जिस दै हरि करे सु होवै ॥अंग 322
  615. भोरी भरमु वञाइ पिरी मुहबति हिकु तू ॥अंग 322
  616. चड़ि कै घोड़ड़ै कुंदे पकड़हि खूंडी दी खेडारी ॥अंग 322
  617. रसना उचरै हरि स्रवणी सुणै सो उधरै मिता ॥अंग 322
  618. धंधड़े कुलाह चिति न आवै हेकड़ो ॥अंग 323
  619. परेतहु कीतोनु देवता तिनि करणैहारे ॥अंग 323
  620. प्रभु बेअंतु किछु अंतु नाहि सभु तिसै करणा ॥अंग 323
  621. तिंना भुख न का रही जिस दा प्रभु है सोइ ॥अंग 323
  622. जाचिकु मंगै नित नामु साहिबु करे कबूलु ॥अंग 323
  623. मनु रता गोविंद संगि सचु भोजनु जोड़े ॥अंग 323
  624. ऐसो अचरजु देखिओ कबीर ॥अंग 326
आसा (183)
  1. जिनि लाई प्रीति सोई फिरि खाइआ ॥अंग 370
  2. ससू ते पिरि कीनी वाखि ॥अंग 370
  3. निज भगती सीलवंती नारि ॥अंग 370
  4. मता करउ सो पकनि न देई ॥अंग 371
  5. प्रथमे मता जि पत्री चलावउ ॥अंग 371
  6. परदेसु झागि सउदे कउ आइआ ॥अंग 372
  7. गुनु अवगनु मेरो कछु न बीचारो ॥अंग 372
  8. दानु देइ करि पूजा करना ॥अंग 372
  9. अरड़ावै बिललावै निंदकु ॥अंग 373
  10. जउ मै कीओ सगल सीगारा ॥अंग 373
  11. जीवत दीसै तिसु सरपर मरणा ॥अंग 374
  12. पुतरी तेरी बिधि करि थाटी ॥अंग 374
  13. इक घड़ी दिनसु मो कउ बहुतु दिहारे ॥अंग 374
  14. हरि सेवा महि परम निधानु ॥अंग 375
  15. प्रभु होइ क्रिपालु त इहु मनु लाई ॥अंग 375
  16. करि किरपा हरि परगटी आइआ ॥अंग 375
  17. जैसे किरसाणु बोवै किरसानी ॥अंग 375
  18. नउ निधि तेरै सगल निधान ॥अंग 376
  19. निकटि जीअ कै सद ही संगा ॥अंग 376
  20. हरि रसु छोडि होछै रसि माता ॥अंग 376
  21. जीअ प्रान धनु हरि को नामु ॥अंग 376
  22. अनद बिनोद भरेपुरि धारिआ ॥अंग 376
  23. गुर कै सबदि बनावहु इहु मनु ॥अंग 377
  24. बुधि प्रगास भई मति पूरी ॥अंग 377
  25. हरि रसु पीवत सद ही राता ॥अंग 377
  26. कामु क्रोधु लोभु मोहु मिटावै छुटकै दुरमति अपुनी धारी ॥अंग 377
  27. भई परापति मानुख देहुरीआ ॥अंग 378
  28. तुझ बिनु अवरु नाही मै दूजा तूं मेरे मन माही ॥अंग 378
  29. हरि जन लीने प्रभू छडाइ ॥अंग 378
  30. अउखधु खाइओ हरि को नाउ ॥अंग 378
  31. बांछत नाही सु बेला आई ॥अंग 378
  32. सदा सदा आतम परगासु ॥अंग 378
  33. जा का हरि सुआमी प्रभु बेली ॥अंग 378
  34. काम क्रोध माइआ मद मतसर ए खेलत सभि जूऐ हारे ॥अंग 379
  35. तू बिअंतु अविगतु अगोचरु इहु सभु तेरा आकारु ॥अंग 379
  36. राज मिलक जोबन ग्रिह सोभा रूपवंतु जोुआनी ॥अंग 379
  37. भ्रम महि सोई सगल जगत धंध अंध ॥अंग 380
  38. जो तुधु भावै सो परवाना सूखु सहजु मनि सोई ॥अंग 380
  39. जनम जनम की मलु धोवै पराई आपणा कीता पावै ॥अंग 380
  40. बाहरु धोइ अंतरु मनु मैला दुइ ठउर अपुने खोए ॥अंग 381
  41. उदमु करत होवै मनु निरमलु नाचै आपु निवारे ॥अंग 381
  42. अधम चंडाली भई ब्रहमणी सूदी ते स्रेसटाई रे ॥अंग 381
  43. बंधन काटि बिसारे अउगन अपना बिरदु सम॑ारिआ ॥अंग 382
  44. जा तूं साहिबु ता भउ केहा हउ तुधु बिनु किसु सालाही ॥अंग 382
  45. अंम्रितु नामु तुम॑ारा ठाकुर एहु महा रसु जनहि पीओ ॥अंग 382
  46. आगै ही ते सभु किछु हूआ अवरु कि जाणै गिआना ॥अंग 383
  47. तूं विसरहि तां सभु को लागू चीति आवहि तां सेवा ॥अंग 383
  48. करि किरपा प्रभ अंतरजामी साधसंगि हरि पाईऐ ॥अंग 383
  49. मोह मलन नीद ते छुटकी कउनु अनुग्रहु भइओ री ॥अंग 383
  50. लालु चोलना तै तनि सोहिआ ॥अंग 384
  51. दूखु घनो जब होते दूरि ॥अंग 384
  52. साचि नामि मेरा मनु लागा ॥अंग 384
  53. पावतु रलीआ जोबनि बलीआ ॥अंग 385
  54. एकु बगीचा पेड घन करिआ ॥अंग 385
  55. राज लीला तेरै नामि बनाई ॥अंग 385
  56. तीरथि जाउ त हउ हउ करते ॥अंग 385
  57. घर महि सूख बाहरि फुनि सूखा ॥अंग 385
  58. जहा पठावहु तह तह जाइंी ॥अंग 386
  59. ऊठत बैठत सोवत धिआईऐ ॥अंग 386
  60. जा कै सिमरनि सूख निवासु ॥अंग 386
  61. जिसु नीच कउ कोई न जानै ॥अंग 386
  62. एको एकी नैन निहारउ ॥अंग 386
  63. कोटि जनम के रहे भवारे ॥अंग 387
  64. मिटी तिआस अगिआन अंधेरे ॥अंग 387
  65. सतिगुरु अपना सद सदा सम॑ारे ॥अंग 387
  66. आपे पेडु बिसथारी साख ॥अंग 387
  67. उकति सिआनप किछू न जाना ॥अंग 387
  68. हरि हरि अखर दुइ इह माला ॥अंग 388
  69. जिस का सभु किछु तिस का होइ ॥अंग 388
  70. जउ सुप्रसंन होइओ प्रभु मेरा ॥अंग 388
  71. कामि क्रोधि अहंकारि विगूते ॥अंग 388
  72. तू मेरा तरंगु हम मीन तुमारे ॥अंग 389
  73. रोवनहारै झूठु कमाना ॥अंग 389
  74. सोइ रही प्रभ खबरि न जानी ॥अंग 389
  75. चरन कमल की आस पिआरे ॥अंग 389
  76. मनु त्रिपतानो मिटे जंजाल ॥अंग 389
  77. ठाकुर सिउ जा की बनि आई ॥अंग 390
  78. जउ मै अपुना सतिगुरु धिआइआ ॥अंग 390
  79. अनदिनु मूसा लाजु टुकाई ॥अंग 390
  80. उन कै संगि तू करती केल ॥अंग 390
  81. अनिक भांति करि सेवा करीऐ ॥अंग 391
  82. प्रभ की प्रीति सदा सुखु होइ ॥अंग 391
  83. भूपति होइ कै राजु कमाइआ ॥अंग 391
  84. इन॑ सिउ प्रीति करी घनेरी ॥अंग 392
  85. आठ पहर निकटि करि जानै ॥अंग 392
  86. सगल सूख जपि एकै नाम ॥अंग 392
  87. आठ पहर उदक इसनानी ॥अंग 393
  88. जिह पैडै लूटी पनिहारी ॥अंग 393
  89. साधू संगि सिखाइओ नामु ॥अंग 393
  90. हरि का नामु रिदै नित धिआई ॥अंग 394
  91. साधू संगति तरिआ संसारु ॥अंग 394
  92. मीठी आगिआ पिर की लागी ॥अंग 394
  93. माथै त्रिकुटी द्रिसटि करूरि ॥अंग 394
  94. सरब दूख जब बिसरहि सुआमी ॥अंग 394
  95. नामु जपत मनु तनु सभु हरिआ ॥अंग 395
  96. गावि लेहि तू गावनहारे ॥अंग 395
  97. प्रथमे मिटिआ तन का दूख ॥अंग 395
  98. सतिगुर साचै दीआ भेजि ॥अंग 396
  99. गुर पूरे राखिआ दे हाथ ॥अंग 396
  100. मै बंदा बै खरीदु सचु साहिबु मेरा ॥अंग 396
  101. सरब सुखा मै भालिआ हरि जेवडु न कोई ॥अंग 396
  102. साई अलखु अपारु भोरी मनि वसै ॥अंग 397
  103. लाख भगत आराधहि जपते पीउ पीउ ॥अंग 397
  104. हभे थोक विसारि हिको खिआलु करि ॥अंग 397
  105. जिन॑ा न विसरै नामु से किनेहिआ ॥अंग 397
  106. पूरि रहिआ स्रब ठाइ हमारा खसमु सोइ ॥अंग 398
  107. किआ सोवहि नामु विसारि गाफल गहिलिआ ॥अंग 398
  108. कोइ न किस ही संगि काहे गरबीऐ ॥अंग 398
  109. जिसु सिमरत दुखु जाइ सहज सुखु पाईऐ ॥अंग 398
  110. गोबिंदु गुणी निधानु गुरमुखि जाणीऐ ॥अंग 399
  111. आवहु मीत इकत्र होइ रस कस सभि भुंचह ॥अंग 399
  112. उदमु कीआ कराइआ आरंभु रचाइआ ॥अंग 399
  113. जा का ठाकुरु तुही प्रभ ता के वडभागा ॥अंग 399
  114. जा प्रभ की हउ चेरुली सो सभ ते ऊचा ॥अंग 400
  115. संता की होइ दासरी एहु अचारा सिखु री ॥अंग 400
  116. डीगन डोला तऊ लउ जउ मन के भरमा ॥अंग 400
  117. सूख सहज आनदु घणा हरि कीरतनु गाउ ॥अंग 400
  118. चितवउ चितवि सरब सुख पावउ आगै भावउ कि न भावउ ॥अंग 401
  119. अंतरि गावउ बाहरि गावउ गावउ जागि सवारी ॥अंग 401
  120. जिस नो तूं असथिरु करि मानहि ते पाहुन दो दाहा ॥अंग 401
  121. अपुसट बात ते भई सीधरी दूत दुसट सजनई ॥अंग 402
  122. रे मूड़े लाहे कउ तूं ढीला ढीला तोटे कउ बेगि धाइआ ॥अंग 402
  123. मिथिआ संगि संगि लपटाए मोह माइआ करि बाधे ॥अंग 402
  124. निमख काम सुआद कारणि कोटि दिनस दुखु पावहि ॥अंग 403
  125. लूकि कमानो सोई तुम॑ पेखिओ मूड़ मुगध मुकरानी ॥अंग 403
  126. अपुने सेवक की आपे राखै आपे नामु जपावै ॥अंग 403
  127. नटूआ भेख दिखावै बहु बिधि जैसा है ओहु तैसा रे ॥अंग 403
  128. गुर परसादि मेरै मनि वसिआ जो मागउ सो पावउ रे ॥अंग 404
  129. चारि बरन चउहा के मरदन खटु दरसन कर तली रे ॥अंग 404
  130. नीकी जीअ की हरि कथा ऊतम आन सगल रस फीकी रे ॥1॥ रहाउ ॥अंग 404
  131. हमारी पिआरी अंम्रित धारी गुरि निमख न मन ते टारी रे ॥1॥ रहाउ ॥अंग 404
  132. नीकी साध संगानी ॥ रहाउ ॥अंग 404
  133. तिआगि सगल सिआनपा भजु पारब्रहम निरंकारु ॥अंग 405
  134. दीन बंधप जीअ दाता सरणि राखण जोगु ॥1॥अंग 405
  135. डोलि डोलि महा दुखु पाइआ बिना साधू संग ॥अंग 405
  136. उदमु करउ करावहु ठाकुर पेखत साधू संगि ॥अंग 405
  137. अगम अगोचरु दरसु तेरा सो पाए जिसु मसतकि भागु ॥अंग 406
  138. सतिगुर बचन तुम॑ारे ॥अंग 406
  139. बावर सोइ रहे ॥1॥ रहाउ ॥अंग 406
  140. ओहा प्रेम पिरी ॥1॥ रहाउ ॥अंग 406
  141. गुरहि दिखाइओ लोइना ॥1॥ रहाउ ॥अंग 407
  142. हरि हरि नामु अमोला ॥अंग 407
  143. आपुनी भगति निबाहि ॥अंग 407
  144. ठाकुर चरण सुहावे ॥अंग 407
  145. एकु सिमरि मन माही ॥1॥ रहाउ ॥अंग 407
  146. हरि बिसरत सो मूआ ॥1॥ रहाउ ॥अंग 407
  147. ओहु नेहु नवेला ॥अंग 407
  148. मिलु राम पिआरे तुम बिनु धीरजु को न करै ॥1॥ रहाउ ॥अंग 408
  149. बिकार माइआ मादि सोइओ सूझ बूझ न आवै ॥अंग 408
  150. बापारि गोविंद नाए ॥अंग 408
  151. कोऊ बिखम गार तोरै ॥अंग 408
  152. कामु क्रोधु लोभु तिआगु ॥अंग 408
  153. हरख सोग बैराग अनंदी खेलु री दिखाइओ ॥1॥ रहाउ ॥अंग 409
  154. गोबिंद गोबिंद करि हां ॥अंग 409
  155. मनसा एक मानि हां ॥अंग 409
  156. हरि हरि हरि गुनी हां ॥अंग 409
  157. एका ओट गहु हां ॥अंग 410
  158. मिलि हरि जसु गाईऐ हां ॥अंग 410
  159. कारन करन तूं हां ॥अंग 410
  160. ओइ परदेसीआ हां ॥अंग 410
  161. पंच मनाए पंच रुसाए ॥ पंच वसाए पंच गवाए ॥1॥अंग 430
  162. मेरे मन हरि सिउ लागी प्रीति ॥अंग 431
  163. पारब्रहमु प्रभु सिमरीऐ पिआरे दरसन कउ बलि जाउ ॥1॥अंग 431
  164. अनदो अनदु घणा मै सो प्रभु डीठा राम ॥अंग 452
  165. अकथा हरि अकथ कथा किछु जाइ न जाणी राम ॥अंग 453
  166. हरि चरन कमल मनु बेधिआ किछु आन न मीठा राम राजे ॥अंग 453
  167. जा कउ भए क्रिपाल प्रभ हरि हरि सेई जपात ॥अंग 454
  168. जल दुध निआई रीति अब दुध आच नही मन ऐसी प्रीति हरे ॥अंग 454
  169. बनु बनु फिरती खोजती हारी बहु अवगाहि ॥अंग 455
  170. जा कउ खोजहि असंख मुनी अनेक तपे ॥अंग 455
  171. उदमु करहु वडभागीहो सिमरहु हरि हरि राइ ॥अंग 456
  172. नामु जपत गोबिंद नह अलसाईऐ ॥अंग 456
  173. थिरु संतन सोहागु मरै न जावए ॥अंग 457
  174. हरि हरि नामु जपंतिआ कछु न कहै जमकालु ॥अंग 457
  175. मिलउ संतन कै संगि मोहि उधारि लेहु ॥अंग 457
  176. पुरख पते भगवान ता की सरणि गही ॥अंग 458
  177. सुभ चिंतन गोबिंद रमण निरमल साधू संग ॥अंग 459
  178. भिंनी रैनड़ीऐ चामकनि तारे ॥अंग 459
  179. उठि वंञु वटाऊड़िआ तै किआ चिरु लाइआ ॥अंग 459
  180. वंञु मेरे आलसा हरि पासि बेनंती ॥अंग 460
  181. दिनु राति कमाइअड़ो सो आइओ माथै ॥अंग 461
  182. कमला भ्रम भीति कमला भ्रम भीति हे तीखण मद बिपरीति हे अवध अकारथ जात ॥अंग 461
  183. गोबिंद गोबिंद गोबिंद संगि नामदेउ मनु लीणा ॥अंग 487
गूजरी (97)
  1. सैल पथर महि जंत उपाए ता का रिजकु आगै करि धरिआ ॥1॥अंग 495
  2. किरिआचार करहि खटु करमा इतु राते संसारी ॥अंग 495
  3. हरि धनु जाप हरि धनु ताप हरि धनु भोजनु भाइआ ॥अंग 495
  4. जिसु सिमरत सभि किलविख नासहि पितरी होइ उधारो ॥अंग 496
  5. मता करै पछम कै ताई पूरब ही लै जात ॥अंग 496
  6. नामु निधानु जिनि जनि जपिओ तिन के बंधन काटे ॥अंग 496
  7. जिसु मानुख पहि करउ बेनती सो अपनै दुखि भरिआ ॥अंग 497
  8. प्रथमे गरभ माता कै वासा ऊहा छोडि धरनि महि आइआ ॥अंग 497
  9. दुख बिनसे सुख कीआ निवासा त्रिसना जलनि बुझाई ॥अंग 497
  10. पतित पवित्र लीए करि अपुने सगल करत नमसकारो ॥अंग 498
  11. है नाही कोऊ बूझनहारो जानै कवनु भता ॥अंग 498
  12. मता मसूरति अवर सिआनप जन कउ कछू न आइओ ॥अंग 498
  13. दिनु राती आराधहु पिआरो निमख न कीजै ढीला ॥अंग 498
  14. मुनि जोगी सासत्रगि कहावत सभ कीन॑े बसि अपनही ॥अंग 498
  15. दुइ कर जोड़ि करी बेनंती ठाकुरु अपना धिआइआ ॥अंग 499
  16. मात पिता भाई सुत बंधप तिन का बलु है थोरा ॥अंग 499
  17. आल जाल भ्रम मोह तजावै प्रभ सेती रंगु लाई ॥अंग 499
  18. खिन महि थापि उथापनहारा कीमति जाइ न करी ॥अंग 499
  19. तूं दाता जीआ सभना का बसहु मेरे मन माही ॥अंग 499
  20. करि किरपा अपना दरसु दीजै जसु गावउ निसि अरु भोर ॥अंग 500
  21. ब्रहम लोक अरु रुद्र लोक आई इंद्र लोक ते धाइ ॥अंग 500
  22. अपजसु मिटै होवै जगि कीरति दरगह बैसणु पाईऐ ॥अंग 500
  23. बिस्वंभर जीअन को दाता भगति भरे भंडार ॥अंग 500
  24. जन की पैज सवारी आप ॥अंग 500
  25. कबहू हरि सिउ चीतु न लाइओ ॥अंग 500
  26. रसना राम राम रवंत ॥अंग 501
  27. छाडि सगल सिआणपा साध सरणी आउ ॥अंग 501
  28. आपना गुरु सेवि सद ही रमहु गुण गोबिंद ॥अंग 501
  29. गुर प्रसादी प्रभु धिआइआ गई संका तूटि ॥अंग 501
  30. अहंबुधि बहु सघन माइआ महा दीरघ रोगु ॥अंग 502
  31. आराधि स्रीधर सफल मूरति करण कारण जोगु ॥अंग 502
  32. तूं समरथु सरनि को दाता दुख भंजनु सुख राइ ॥अंग 502
  33. राजन महि तूं राजा कहीअहि भूमन महि भूमा ॥अंग 507
  34. नाथ नरहर दीन बंधव पतित पावन देव ॥अंग 508
  35. अंतरि गुरु आराधणा जिहवा जपि गुर नाउ ॥अंग 517
  36. रखे रखणहारि आपि उबारिअनु ॥अंग 517
  37. अकुल निरंजन पुरखु अगमु अपारीऐ ॥अंग 518
  38. जा तूं तुसहि मिहरवान अचिंतु वसहि मन माहि ॥अंग 518
  39. किती बैहनि॑ बैहणे मुचु वजाइनि वज ॥अंग 518
  40. तुधु धिआइनि॑ बेद कतेबा सणु खड़े ॥अंग 518
  41. चंगिआइंी आलकु करे बुरिआइंी होइ सेरु ॥अंग 518
  42. कितीआ कुढंग गुझा थीऐ न हितु ॥अंग 518
  43. हउ मागउ तुझै दइआल करि दासा गोलिआ ॥अंग 518
  44. साजन तेरे चरन की होइ रहा सद धूरि ॥अंग 518
  45. पतित पुनीत असंख होहि हरि चरणी मनु लाग ॥अंग 518
  46. नित जपीऐ सासि गिरासि नाउ परवदिगार दा ॥अंग 518
  47. कामु क्रोधु लोभु छोडीऐ दीजै अगनि जलाइ ॥अंग 519
  48. सिमरत सिमरत प्रभु आपणा सभ फल पाए आहि ॥अंग 519
  49. सो मुकता संसारि जि गुरि उपदेसिआ ॥अंग 519
  50. मन महि चितवउ चितवनी उदमु करउ उठि नीत ॥अंग 519
  51. द्रिसटि धारि प्रभि राखिआ मनु तनु रता मूलि ॥अंग 519
  52. जीअ की बिरथा होइ सु गुर पहि अरदासि करि ॥अंग 519
  53. लगड़ी सुथानि जोड़णहारै जोड़ीआ ॥अंग 519
  54. बनि भीहावलै हिकु साथी लधमु दुख हरता हरि नामा ॥अंग 519
  55. पाईअनि सभि निधान तेरै रंगि रतिआ ॥अंग 519
  56. प्रेम पटोला तै सहि दिता ढकण कू पति मेरी ॥अंग 520
  57. तैडै सिमरणि हभु किछु लधमु बिखमु न डिठमु कोई ॥अंग 520
  58. होवै सुखु घणा दयि धिआइऐ ॥अंग 520
  59. नदी तरंदड़ी मैडा खोजु न खुंभै मंझि मुहबति तेरी ॥अंग 520
  60. जिन॑ा दिसंदड़िआ दुरमति वंञै मित्र असाडड़े सेई ॥अंग 520
  61. आवै साहिबु चिति तेरिआ भगता डिठिआ ॥अंग 520
  62. बारि विडानड़ै हुंमस धुंमस कूका पईआ राही ॥अंग 520
  63. सची बैसक तिन॑ा संगि जिन संगि जपीऐ नाउ ॥अंग 520
  64. सा वेला परवाणु जितु सतिगुरु भेटिआ ॥अंग 520
  65. विछोहे जंबूर खवे न वंञनि गाखड़े ॥अंग 520
  66. जिमी वसंदी पाणीऐ ईधणु रखै भाहि ॥अंग 521
  67. तेरे कीते कंम तुधै ही गोचरे ॥अंग 521
  68. कड़छीआ फिरंनि॑ सुआउ न जाणनि॑ सुञीआ ॥अंग 521
  69. खोजी लधमु खोजु छडीआ उजाड़ि ॥अंग 521
  70. आराधिहु सचा सोइ सभु किछु जिसु पासि ॥अंग 521
  71. लधमु लभणहारु करमु करंदो मा पिरी ॥अंग 521
  72. पापड़िआ पछाड़ि बाणु सचावा संनि॑ कै ॥अंग 521
  73. वाहु वाहु सिरजणहार पाईअनु ठाढि आपि ॥अंग 521
  74. जा कउ भए क्रिपाल प्रभ हरि हरि सेई जपात ॥अंग 521
  75. रामु रमहु बडभागीहो जलि थलि महीअलि सोइ ॥अंग 521
  76. भगता का बोलिआ परवाणु है दरगह पवै थाइ ॥अंग 521
  77. कोटि बिघन तिसु लागते जिस नो विसरै नाउ ॥अंग 522
  78. पिरी मिलावा जा थीऐ साई सुहावी रुति ॥अंग 522
  79. सूरबीर वरीआम किनै न होड़ीऐ ॥ फउज सताणी हाठ पंचा जोड़ीऐ ॥अंग 522
  80. किलविख सभे उतरनि नीत नीत गुण गाउ ॥अंग 522
  81. नानक सतिगुरि भेटिऐ पूरी होवै जुगति ॥अंग 522
  82. सो सतिगुरु धनु धंनु जिनि भरम गड़ु तोड़िआ ॥अंग 522
  83. धिआइदिआ तूं प्रभू मिलु नानक उतरी चिंत ॥1॥अंग 522
  84. सुभ चिंतन गोबिंद रमण निरमल साधू संग ॥अंग 522
  85. तेरा कीता होइ त काहे डरपीऐ ॥अंग 522
  86. काम क्रोध मद लोभ मोह दुसट बासना निवारि ॥अंग 523
  87. खांदिआ खांदिआ मुहु घठा पैनंदिआ सभु अंगु ॥अंग 523
  88. जिउ जिउ तेरा हुकमु तिवै तिउ होवणा ॥अंग 523
  89. जीवदिआ न चेतिओ मुआ रलंदड़ो खाक ॥अंग 523
  90. जीवंदिआ हरि चेतिआ मरंदिआ हरि रंगि ॥अंग 523
  91. आदि जुगादी आपि रखण वालिआ ॥अंग 523
  92. आदि मधि अरु अंति परमेसरि रखिआ ॥अंग 523
  93. तिस नो मंनि वसाइ जिनि उपाइआ ॥अंग 523
  94. निंदक मारे ततकालि खिनु टिकण न दिते ॥अंग 523
  95. रामु जपहु वडभागीहो जलि थलि पूरनु सोइ ॥अंग 524
  96. कोटि बिघन तिसु लागते जिस नो विसरै नाउ ॥अंग 524
  97. सिमरि सिमरि दातारु मनोरथ पूरिआ ॥अंग 524
देवगंधारी (38)
  1. माई गुर चरणी चितु लाईऐ ॥अंग 528
  2. माई होनहार सो होईऐ ॥अंग 528
  3. माई सुनत सोच भै डरत ॥अंग 529
  4. मन हरि कीरति करि सदहूं ॥अंग 529
  5. मन जिउ अपुने प्रभ भावउ ॥अंग 529
  6. प्रभ जी तउ प्रसादि भ्रमु डारिओ ॥अंग 529
  7. मन सगल सिआनप रही ॥अंग 529
  8. हरि प्रान प्रभू सुखदाते ॥अंग 529
  9. देवगंधारी 5 ॥अंग 530
  10. देवगंधारी 5 ॥अंग 530
  11. देवगंधारी 5 ॥अंग 530
  12. देवगंधारी 5 ॥अंग 530
  13. देवगंधारी 5 ॥अंग 530
  14. देवगंधारी 5 ॥अंग 531
  15. देवगंधारी 5 ॥अंग 531
  16. देवगंधारी 5 ॥अंग 531
  17. अपुने हरि पहि बिनती कहीऐ ॥अंग 531
  18. देवगंधारी 5 ॥अंग 531
  19. माई प्रभ के चरन निहारउ ॥अंग 531
  20. सुंदर धिआनु धारु दिनु रैनी जीअ प्रान ते पिआरा ॥1॥ रहाउ ॥अंग 532
  21. तेरा जनु राम रसाइणि माता ॥अंग 532
  22. माई गुर बिनु गिआनु न पाईऐ ॥अंग 532
  23. ठाकुर होए आपि दइआल ॥अंग 532
  24. अपुने सतिगुर पहि बिनउ कहिआ ॥अंग 533
  25. अनाथ नाथ प्रभ हमारे ॥अंग 533
  26. प्रभ इहै मनोरथु मेरा ॥अंग 533
  27. छोडि न जाई सद ही संगे अनदिनु गुर मिलि गाए ॥1॥ रहाउ ॥अंग 533
  28. देवगंधारी 5 ॥अंग 533
  29. देवगंधारी 5 ॥अंग 534
  30. हरि जपि सेवकु पारि उतारिओ ॥अंग 534
  31. करत फिरे बन भेख मोहन रहत निरार ॥1॥ रहाउ ॥अंग 534
  32. मै पेखिओ री ऊचा मोहनु सभ ते ऊचा ॥अंग 534
  33. मै बहु बिधि पेखिओ दूजा नाही री कोऊ ॥अंग 535
  34. एकै रे हरि एकै जान ॥अंग 535
  35. देवगंधारी 5 ॥अंग 535
  36. धिआए गाए करनैहार ॥अंग 535
  37. उलटी रे मन उलटी रे ॥अंग 535
  38. सभ दिन के समरथ पंथ बिठुले हउ बलि बलि जाउ ॥अंग 536
बिहागड़ा (11)
  1. दूतन संगरीआ ॥अंग 537
  2. अति प्रीतम मन मोहना घट सोहना प्रान अधारा राम ॥अंग 542
  3. करि किरपा गुर पारब्रहम पूरे अनदिनु नामु वखाणा राम ॥अंग 543
  4. वधु सुखु रैनड़ीए प्रिअ प्रेमु लगा ॥अंग 544
  5. हरि चरण सरोवर तह करहु निवासु मना ॥अंग 544
  6. खोजत संत फिरहि प्रभ प्राण अधारे राम ॥अंग 545
  7. अन काए रातड़िआ वाट दुहेली राम ॥अंग 546
  8. सुनहु बेनंतीआ सुआमी मेरे राम ॥अंग 547
  9. बोलि सुधरमीड़िआ मोनि कत धारी राम ॥अंग 547
  10. हरि नामु न सिमरहि साधसंगि तै तनि उडै खेह ॥अंग 553
  11. घटि वसहि चरणारबिंद रसना जपै गुपाल ॥अंग 554
वडहंस (19)
  1. अति ऊचा ता का दरबारा ॥अंग 562
  2. धनु सु वेला जितु दरसनु करणा ॥अंग 562
  3. तू बेअंतु को विरला जाणै ॥अंग 562
  4. अंतरजामी सो प्रभु पूरा ॥अंग 563
  5. तू वड दाता अंतरजामी ॥अंग 563
  6. साधसंगि हरि अंम्रितु पीजै ॥अंग 563
  7. विसरु नाही प्रभ दीन दइआला ॥अंग 563
  8. तू जाणाइहि ता कोई जाणै ॥अंग 563
  9. मेरै अंतरि लोचा मिलण की पिआरे हउ किउ पाई गुर पूरे ॥अंग 564
  10. गुर मिलि लधा जी रामु पिआरा राम ॥अंग 576
  11. किआ सुणेदो कूड़ु वंञनि पवण झुलारिआ ॥अंग 577
  12. तिन घोलि घुमाई जिन प्रभु स्रवणी सुणिआ राम ॥अंग 577
  13. लोइण लोई डिठ पिआस न बुझै मू घणी ॥अंग 577
  14. जिनी हरि प्रभु डिठा तिन कुरबाणे राम ॥अंग 577
  15. देह अंधारी अंध सुंञी नाम विहूणीआ ॥अंग 577
  16. तिन खंनीऐ वंञां जिन मेरा हरि प्रभु डीठा राम ॥अंग 577
  17. जो लोड़ीदे राम सेवक सेई कांढिआ ॥अंग 578
  18. मिलि जलु जलहि खटाना राम ॥अंग 578
  19. प्रभ करण कारण समरथा राम ॥अंग 578
सोरठ (96)
  1. किस हउ जाची किस आराधी जा सभु को कीता होसी ॥अंग 608
  2. गुरु गोविंदु सलाहीऐ भाई मनि तनि हिरदै धार ॥अंग 608
  3. जउ लउ भाउ अभाउ इहु मानै तउ लउ मिलणु दूराई ॥अंग 609
  4. पुत्र कलत्र लोक ग्रिह बनिता माइआ सनबंधेही ॥अंग 609
  5. गुरु पूरा भेटिओ वडभागी मनहि भइआ परगासा ॥अंग 609
  6. सुखीए कउ पेखै सभ सुखीआ रोगी कै भाणै सभ रोगी ॥अंग 610
  7. तनु संतन का धनु संतन का मनु संतन का कीआ ॥अंग 610
  8. जा कै हिरदै वसिआ तू करते ता की तैं आस पुजाई ॥अंग 610
  9. सगल समग्री मोहि विआपी कब ऊचे कब नीचे ॥अंग 610
  10. खोजत खोजत खोजि बीचारिओ राम नामु ततु सारा ॥अंग 611
  11. करि इसनानु सिमरि प्रभु अपना मन तन भए अरोगा ॥अंग 611
  12. एकु पिता एकस के हम बारिक तू मेरा गुर हाई ॥अंग 611
  13. कोटि ब्रहमंड को ठाकुरु सुआमी सरब जीआ का दाता रे ॥अंग 612
  14. जिना बात को बहुतु अंदेसरो ते मिटे सभि गइआ ॥अंग 612
  15. चरन कमल सिउ जा का मनु लीना से जन त्रिपति अघाई ॥अंग 612
  16. राजन महि राजा उरझाइओ मानन महि अभिमानी ॥अंग 613
  17. हम मैले तुम ऊजल करते हम निरगुन तू दाता ॥अंग 613
  18. मात गरभ महि आपन सिमरनु दे तह तुम राखनहारे ॥अंग 613
  19. हम संतन की रेनु पिआरे हम संतन की सरणा ॥अंग 614
  20. जेती समग्री देखहु रे नर तेती ही छडि जानी ॥अंग 614
  21. मिरतक कउ पाइओ तनि सासा बिछुरत आनि मिलाइआ ॥अंग 614
  22. रतनु छाडि कउडी संगि लागे जा ते कछू न पाईऐ ॥अंग 614
  23. गुण गावहु पूरन अबिनासी काम क्रोध बिखु जारे ॥अंग 615
  24. करण करावणहार प्रभु दाता पारब्रहम प्रभु सुआमी ॥अंग 615
  25. प्रभ की सरणि सगल भै लाथे दुख बिनसे सुखु पाइआ ॥अंग 615
  26. माइआ मोह मगनु अंधिआरै देवनहारु न जानै ॥अंग 616
  27. पारब्रहमु होआ सहाई कथा कीरतनु सुखदाई ॥अंग 616
  28. बिनसै मोहु मेरा अरु तेरा बिनसै अपनी धारी ॥1॥अंग 616
  29. सगल बनसपति महि बैसंतरु सगल दूध महि घीआ ॥अंग 617
  30. जा कै सिमरणि होइ अनंदा बिनसै जनम मरण भै दुखी ॥अंग 617
  31. काम क्रोध लोभ झूठ निंदा इन ते आपि छडावहु ॥अंग 617
  32. जा कै सिमरणि सभु कछु पाईऐ बिरथी घाल न जाई ॥अंग 617
  33. अबिनासी जीअन को दाता सिमरत सभ मलु खोई ॥अंग 617
  34. जनम जनम के दूख निवारै सूका मनु साधारै ॥अंग 618
  35. अंतर की गति तुम ही जानी तुझ ही पाहि निबेरो ॥अंग 618
  36. भए क्रिपाल गुरू गोविंदा सगल मनोरथ पाए ॥अंग 618
  37. गुर के चरन बसे रिद भीतरि सुभ लखण प्रभि कीने ॥अंग 618
  38. संचनि करउ नाम धनु निरमल थाती अगम अपार ॥अंग 618
  39. गुरि पूरै अपनी कल धारी सभ घट उपजी दइआ ॥अंग 618
  40. सूख मंगल कलिआण सहज धुनि प्रभ के चरण निहारिआ ॥अंग 619
  41. साधू संगि भइआ मनि उदमु नामु रतनु जसु गाई ॥अंग 619
  42. गए कलेस रोग सभि नासे प्रभि अपुनै किरपा धारी ॥अंग 619
  43. सिमरि सिमरि गुरु सतिगुरु अपना सगला दूखु मिटाइआ ॥अंग 619
  44. हमरी गणत न गणीआ काई अपणा बिरदु पछाणि ॥अंग 619
  45. दुरतु गवाइआ हरि प्रभि आपे सभु संसारु उबारिआ ॥अंग 620
  46. बखसिआ पारब्रहम परमेसरि सगले रोग बिदारे ॥अंग 620
  47. भए क्रिपाल सुआमी मेरे तितु साचै दरबारि ॥अंग 620
  48. संतहु हरि हरि नामु धिआई ॥अंग 620
  49. मेरा सतिगुरु रखवाला होआ ॥अंग 620
  50. जीअ जंत्र सभि तिस के कीए सोई संत सहाई ॥अंग 621
  51. मिलि पंचहु नही सहसा चुकाइआ ॥अंग 621
  52. हिरदै नामु वसाइहु ॥अंग 621
  53. गुरि पूरै किरपा धारी ॥अंग 621
  54. साहिबु गुनी गहेरा ॥अंग 622
  55. सूख सहज आनंदा ॥अंग 622
  56. ठाढि पाई करतारे ॥अंग 622
  57. विचि करता पुरखु खलोआ ॥अंग 623
  58. पारब्रहमि निबाही पूरी ॥अंग 623
  59. गुरि पूरै चरनी लाइआ ॥अंग 623
  60. गुरि पूरै कीती पूरी ॥अंग 624
  61. दह दिस छत्र मेघ घटा घट दामनि चमकि डराइओ ॥अंग 624
  62. गई बहोड़ु बंदी छोड़ु निरंकारु दुखदारी ॥अंग 624
  63. सिमरि सिमरि प्रभ भए अनंदा दुख कलेस सभि नाठे ॥अंग 625
  64. गुरु पूरा नमसकारे ॥अंग 625
  65. रामदास सरोवरि नाते ॥अंग 625
  66. जितु पारब्रहमु चिति आइआ ॥ सो घरु दयि वसाइआ ॥अंग 625
  67. आगै सुखु गुरि दीआ ॥अंग 626
  68. गुर का सबदु रखवारे ॥अंग 626
  69. गुर अपुने बलिहारी ॥अंग 626
  70. तापु गवाइआ गुरि पूरे ॥अंग 626
  71. सोई कराइ जो तुधु भावै ॥अंग 626
  72. हरि नामु रिदै परोइआ ॥अंग 627
  73. गुर मिलि प्रभू चितारिआ ॥अंग 627
  74. पारब्रहमि साजि सवारिआ ॥अंग 627
  75. सदा सदा हरि जापे ॥अंग 627
  76. अपना गुरू धिआए ॥अंग 627
  77. परमेसरि दिता बंना ॥अंग 627
  78. ऐथै ओथै रखवाला ॥अंग 628
  79. सतिगुर पूरे भाणा ॥अंग 628
  80. गरीबी गदा हमारी ॥अंग 628
  81. गुरि पूरै पूरी कीनी ॥अंग 628
  82. भूखे खावत लाज न आवै ॥अंग 629
  83. सुख सांदि घरि आइआ ॥अंग 629
  84. प्रभु अपुना रिदै धिआए ॥अंग 629
  85. हरि मनि तनि वसिआ सोई ॥अंग 629
  86. आगै सुखु मेरे मीता ॥अंग 629
  87. नालि नराइणु मेरै ॥अंग 630
  88. सरब सुखा का दाता सतिगुरु ता की सरनी पाईऐ ॥अंग 630
  89. करन करावन हरि अंतरजामी जन अपुने की राखै ॥अंग 630
  90. भइओ किरपालु दीन दुख भंजनु आपे सभ बिधि थाटी ॥अंग 630
  91. सिमरउ अपुना सांई ॥अंग 630
  92. सुनहु बिनंती ठाकुर मेरे जीअ जंत तेरे धारे ॥अंग 631
  93. जीअ जंत सभि वसि करि दीने सेवक सभि दरबारे ॥अंग 631
  94. सभु जगु जिनहि उपाइआ भाई करण कारण समरथु ॥अंग 639
  95. मात गरभ दुख सागरो पिआरे तह अपणा नामु जपाइआ ॥अंग 640
  96. पाठु पड़िओ अरु बेदु बीचारिओ निवलि भुअंगम साधे ॥अंग 641
धनासरी (60)
  1. भव खंडन दुख भंजन स्वामी भगति वछल निरंकारे ॥अंग 670
  2. बिनु जल प्रान तजे है मीना जिनि जल सिउ हेतु बढाइओ ॥अंग 670
  3. करि किरपा दीओ मोहि नामा बंधन ते छुटकाए ॥अंग 671
  4. जब ते दरसन भेटे साधू भले दिनस ओइ आए ॥अंग 671
  5. जिस का तनु मनु धनु सभु तिस का सोई सुघड़ु सुजानी ॥अंग 671
  6. वडे वडे राजन अरु भूमन ता की त्रिसन न बूझी ॥अंग 672
  7. लवै न लागन कउ है कछूऐ जा कउ फिरि इहु धावै ॥अंग 672
  8. बारि जाउ गुर अपुने ऊपरि जिनि हरि हरि नामु द्रिड़॑ाया ॥अंग 672
  9. जिह करणी होवहि सरमिंदा इहा कमानी रीति ॥अंग 673
  10. पानी पखा पीसउ संत आगै गुण गोविंद जसु गाई ॥अंग 673
  11. जिनि कीने वसि अपुनै त्रै गुण भवण चतुर संसारा ॥अंग 673
  12. तुम दाते ठाकुर प्रतिपालक नाइक खसम हमारे ॥अंग 673
  13. पूजा वरत तिलक इसनाना पुंन दान बहु दैन ॥अंग 674
  14. बंधन ते छुटकावै प्रभू मिलावै हरि हरि नामु सुनावै ॥अंग 674
  15. हरि हरि लीने संत उबारि ॥अंग 674
  16. अब हरि राखनहारु चितारिआ ॥अंग 674
  17. मेरा लागो राम सिउ हेतु ॥अंग 675
  18. अउखधु तेरो नामु दइआल ॥अंग 675
  19. हा हा प्रभ राखि लेहु ॥अंग 675
  20. दीन दरद निवारि ठाकुर राखै जन की आपि ॥अंग 675
  21. फिरत फिरत भेटे जन साधू पूरै गुरि समझाइआ ॥अंग 676
  22. छोडि जाहि से करहि पराल ॥अंग 676
  23. मोहि मसकीन प्रभु नामु अधारु ॥अंग 676
  24. सो कत डरै जि खसमु सम॑ारै ॥अंग 677
  25. घरि बाहरि तेरा भरवासा तू जन कै है संगि ॥अंग 677
  26. सगल मनोरथ प्रभ ते पाए कंठि लाइ गुरि राखे ॥अंग 677
  27. जह जह पेखउ तह हजूरि दूरि कतहु न जाई ॥अंग 677
  28. जिनि तुम भेजे तिनहि बुलाए सुख सहज सेती घरि आउ ॥अंग 678
  29. तिसु सिउ न लाईऐ हीतु जा को किछु नाही बीतु अंत की बार ओहु संगि न चालै ॥अंग 678
  30. मेरे लाल भलो रे भलो रे भलो हरि मंगना ॥अंग 678
  31. हरि एकु सिमरि एकु सिमरि एकु सिमरि पिआरे ॥अंग 679
  32. सिमरउ सिमरि सिमरि सुख पावउ सासि सासि समाले ॥अंग 679
  33. भए क्रिपाल दइआल गोबिंदा अंम्रितु रिदै सिंचाई ॥अंग 679
  34. दरबवंतु दरबु देखि गरबै भूमवंतु अभिमानी ॥अंग 679
  35. जा कउ हरि रंगु लागो इसु जुग महि सो कहीअत है सूरा ॥अंग 679
  36. जतन करै मानुख डहकावै ओहु अंतरजामी जानै ॥अंग 680
  37. नामु गुरि दीओ है अपुनै जा कै मसतकि करमा ॥अंग 680
  38. नेत्र पुनीत भए दरस पेखे माथै परउ रवाल ॥अंग 680
  39. अपनी उकति खलावै भोजन अपनी उकति खेलावै ॥अंग 680
  40. संत क्रिपाल दइआल दमोदर काम क्रोध बिखु जारे ॥अंग 680
  41. छडाइ लीओ महा बली ते अपने चरन पराति ॥अंग 681
  42. पर हरना लोभु झूठ निंद इव ही करत गुदारी ॥अंग 681
  43. सिमरि सिमरि सुआमी प्रभु अपना सीतल तनु मनु छाती ॥अंग 681
  44. दूत दुसमन सभि तुझ ते निवरहि प्रगट प्रतापु तुमारा ॥अंग 681
  45. चतुर दिसा कीनो बलु अपना सिर ऊपरि करु धारिओ ॥अंग 681
  46. अउखी घड़ी न देखण देई अपना बिरदु समाले ॥अंग 682
  47. जिस कउ बिसरै प्रानपति दाता सोई गनहु अभागा ॥अंग 682
  48. जन के पूरन होए काम ॥अंग 682
  49. मांगउ राम ते इकु दानु ॥अंग 682
  50. मांगउ राम ते सभि थोक ॥अंग 682
  51. त्रिसना बुझै हरि कै नामि ॥अंग 682
  52. जन की कीनी पारब्रहमि सार ॥अंग 683
  53. हरि चरन सरन गोबिंद दुख भंजना दास अपुने कउ नामु देवहु ॥अंग 683
  54. हलति सुखु पलति सुखु नित सुखु सिमरनो नामु गोबिंद का सदा लीजै ॥अंग 683
  55. बंदना हरि बंदना गुण गावहु गोपाल राइ ॥ रहाउ ॥अंग 683
  56. त्रिपति भई सचु भोजनु खाइआ ॥अंग 684
  57. गुर के चरन जीअ का निसतारा ॥अंग 684
  58. कितै प्रकारि न तूटउ प्रीति ॥ दास तेरे की निरमल रीति ॥1॥ रहाउ ॥अंग 684
  59. जो जो जूनी आइओ तिह तिह उरझाइओ माणस जनमु संजोगि पाइआ ॥अंग 686
  60. भजु संगि साधू इकु अराधू जनम मरन दुख नासए ॥अंग 691
जैतसरी (64)
  1. कोई जानै कवनु ईहा जगि मीतु ॥अंग 700
  2. देहु संदेसरो कहीअउ प्रिअ कहीअउ ॥अंग 700
  3. धीरउ सुनि धीरउ प्रभ कउ ॥1॥ रहाउ ॥अंग 700
  4. लोड़ीदड़ा साजनु मेरा ॥अंग 700
  5. अब मै सुखु पाइओ गुर आग्यि ॥अंग 701
  6. मन महि सतिगुर धिआनु धरा ॥अंग 701
  7. जा कउ भए गोविंद सहाई ॥अंग 701
  8. गोबिंद जीवन प्रान धन रूप ॥अंग 701
  9. कोई जनु हरि सिउ देवै जोरि ॥अंग 701
  10. चात्रिक चितवत बरसत मेंह ॥अंग 702
  11. मनि तनि बसि रहे मेरे प्रान ॥अंग 702
  12. आए अनिक जनम भ्रमि सरणी ॥अंग 702
  13. हरि जन सिमरहु हिरदै राम ॥अंग 702
  14. दरसन पिआसी दिनसु राति चितवउ अनदिनु नीत ॥अंग 703
  15. सुणि यार हमारे सजण इक करउ बेनंतीआ ॥अंग 703
  16. ऊचा अगम अपार प्रभु कथनु न जाइ अकथु ॥अंग 704
  17. जिउ जानहु तिउ राखु हरि प्रभ तेरिआ ॥अंग 704
  18. निरति न पवै असंख गुण ऊचा प्रभ का नाउ ॥अंग 704
  19. दूसर नाही ठाउ का पहि जाईऐ ॥अंग 704
  20. रे मन ता कउ धिआईऐ सभ बिधि जा कै हाथि ॥अंग 704
  21. साथीअड़ा प्रभु एकु दूसर नाहि कोइ ॥अंग 704
  22. चिति जि चितविआ सो मै पाइआ ॥अंग 705
  23. अब मनु छूटि गइआ साधू संगि मिले ॥अंग 705
  24. पाधाणू संसारु गारबि अटिआ ॥अंग 705
  25. आदि पूरन मधि पूरन अंति पूरन परमेसुरह ॥अंग 705
  26. हरि एकु निरंजनु गाईऐ सभ अंतरि सोई ॥अंग 706
  27. रचंति जीअ रचना मात गरभ असथापनं ॥अंग 706
  28. रकतु बिंदु करि निंमिआ अगनि उदर मझारि ॥अंग 706
  29. मन इछा दान करणं सरबत्र आसा पूरनह ॥अंग 706
  30. ग्रिह मंदर रथ असु दीए रचि भले संजोग ॥अंग 706
  31. कुटंब जतन करणं माइआ अनेक उदमह ॥अंग 706
  32. जिसु बिसरत तनु भसम होइ कहते सभि प्रेतु ॥अंग 706
  33. कोटि दान इसनानं अनिक सोधन पवित्रतह ॥अंग 706
  34. कोटि अघा सभि नास होहि सिमरत हरि नाउ ॥अंग 707
  35. ग्रिह रचना अपारं मनि बिलास सुआदं रसह ॥अंग 707
  36. सुंदर सेज अनेक सुख रस भोगण पूरे ॥अंग 707
  37. चरन कमल बिरहं खोजंत बैरागी दह दिसह ॥अंग 707
  38. बसता तूटी झुंपड़ी चीर सभि छिंना ॥अंग 707
  39. अनिक लीला राज रस रूपं छत्र चमर तखत आसनं ॥अंग 707
  40. सुपने सेती चितु मूरखि लाइआ ॥अंग 707
  41. बसंति स्वरग लोकह जितते प्रिथवी नव खंडणह ॥अंग 707
  42. महा भइआन उदिआन नगर करि मानिआ ॥अंग 707
  43. राज कपटं रूप कपटं धन कपटं कुल गरबतह ॥अंग 708
  44. चलदिआ नालि न चलै सो किउ संजीऐ ॥अंग 708
  45. नच राज सुख मिसटं नच भोग रस मिसटं नच मिसटं सुख माइआ ॥अंग 708
  46. हरि बिनु कछू न लागई भगतन कउ मीठा ॥अंग 708
  47. तिअकत जलं नह जीव मीनं नह तिआगि चात्रिक मेघ मंडलह ॥अंग 708
  48. जिउ मछुली बिनु पाणीऐ किउ जीवणु पावै ॥अंग 708
  49. चितवंति चरन कमलं सासि सासि अराधनह ॥अंग 708
  50. आसावंती आस गुसाई पूरीऐ ॥अंग 708
  51. रसना उचरंति नामं स्रवणं सुनंति सबद अंम्रितह ॥अंग 709
  52. सद बलिहारी तिना जि सुनते हरि कथा ॥अंग 709
  53. भावी उदोत करणं हरि रमणं संजोग पूरनह ॥अंग 709
  54. सा वेला कहु कउणु है जितु प्रभ कउ पाई ॥अंग 709
  55. पतित पुनीत गोबिंदह सरब दोख निवारणह ॥अंग 709
  56. मेलि लैहु दइआल ढहि पए दुआरिआ ॥अंग 709
  57. संत उधरण दइआलं आसरं गोपाल कीरतनह ॥अंग 709
  58. चरन कमल की ओट उधरे सगल जन ॥अंग 709
  59. दइआ करणं दुख हरणं उचरणं नाम कीरतनह ॥अंग 709
  60. जा प्रभ भए दइआल न बिआपै माइआ ॥अंग 710
  61. गुर गोबिंद गोपाल गुर गुर पूरन नाराइणह ॥अंग 710
  62. धंनु धंनु गुरदेव जिसु संगि हरि जपे ॥अंग 710
  63. द्रिसटंत एको सुनीअंत एको वरतंत एको नरहरह ॥अंग 710
  64. प्रभ दइआल बेअंत पूरन इकु एहु ॥अंग 710
टोडी (30)
  1. संतन अवर न काहू जानी ॥अंग 711
  2. हरि बिसरत सदा खुआरी ॥अंग 711
  3. धाइओ रे मन दह दिस धाइओ ॥अंग 712
  4. मानुखु बिनु बूझे बिरथा आइआ ॥अंग 712
  5. क्रिपा निधि बसहु रिदै हरि नीत ॥अंग 712
  6. मागउ दानु ठाकुर नाम ॥अंग 713
  7. प्रभ जी को नामु मनहि साधारै ॥अंग 713
  8. नीके गुण गाउ मिटही रोग ॥अंग 713
  9. सतिगुर आइओ सरणि तुहारी ॥अंग 713
  10. रसना गुण गोपाल निधि गाइण ॥अंग 713
  11. निंदकु गुर किरपा ते हाटिओ ॥अंग 714
  12. किरपन तन मन किलविख भरे ॥अंग 714
  13. हरि के चरन कमल मनि धिआउ ॥अंग 714
  14. हरि हरि नामु सदा सद जापि ॥अंग 714
  15. स्वामी सरनि परिओ दरबारे ॥अंग 714
  16. हां हां लपटिओ रे मूड़॑े कछू न थोरी ॥अंग 715
  17. हमारै एकै हरी हरी ॥अंग 715
  18. रूड़ो मनु हरि रंगो लोड़ै ॥अंग 715
  19. गरबि गहिलड़ो मूड़ड़ो हीओ रे ॥अंग 715
  20. ऐसो गुनु मेरो प्रभ जी कीन ॥अंग 716
  21. माई मेरे मन की प्रीति ॥अंग 716
  22. प्रभ जी मिलु मेरे प्रान ॥अंग 716
  23. प्रभ तेरे पग की धूरि ॥अंग 716
  24. माई मेरे मन की पिआस ॥अंग 716
  25. हरि हरि पतित पावन ॥अंग 717
  26. माई माइआ छलु ॥अंग 717
  27. माई चरन गुर मीठे ॥अंग 717
  28. साधसंगि हरि हरि नामु चितारा ॥अंग 717
  29. माई मेरे मन को सुखु ॥अंग 717
  30. हरि हरि चरन रिदै उर धारे ॥अंग 718
बैराड़ी (1)
  1. संत जना मिलि हरि जसु गाइओ ॥अंग 720
तिलंग (5)
  1. खाक नूर करदं आलम दुनीआइ ॥अंग 723
  2. तुधु बिनु दूजा नाही कोइ ॥अंग 723
  3. मिहरवानु साहिबु मिहरवानु ॥अंग 724
  4. करते कुदरती मुसताकु ॥अंग 724
  5. मीरां दानां दिल सोच ॥अंग 724
सूही (71)
  1. बाजीगरि जैसे बाजी पाई ॥अंग 736
  2. कीता लोड़हि सो प्रभ होइ ॥अंग 736
  3. धनु सोहागनि जो प्रभू पछानै ॥अंग 737
  4. ग्रिहु वसि गुरि कीना हउ घर की नारि ॥अंग 737
  5. उमकिओ हीउ मिलन प्रभ ताई ॥अंग 737
  6. किआ गुण तेरे सारि सम॑ाली मोहि निरगुन के दातारे ॥अंग 738
  7. सेवा थोरी मागनु बहुता ॥अंग 738
  8. बुरे काम कउ ऊठि खलोइआ ॥अंग 738
  9. घर महि ठाकुरु नदरि न आवै ॥अंग 739
  10. लालनु राविआ कवन गती री ॥अंग 739
  11. तूं जीवनु तूं प्रान अधारा ॥अंग 739
  12. सूख महल जा के ऊच दुआरे ॥अंग 739
  13. जा कै दरसि पाप कोटि उतारे ॥अंग 739
  14. रहणु न पावहि सुरि नर देवा ॥अंग 740
  15. घट घट अंतरि तुमहि बसारे ॥अंग 740
  16. कवन काज माइआ वडिआई ॥अंग 740
  17. सिमरि सिमरि ता कउ हउ जीवा ॥अंग 740
  18. गुर कै बचनि रिदै धिआनु धारी ॥अंग 740
  19. लोभि मोहि मगन अपराधी ॥अंग 740
  20. पेखत चाखत कहीअत अंधा सुनीअत सुनीऐ नाही ॥अंग 741
  21. जीवत मरै बुझै प्रभु सोइ ॥अंग 741
  22. गुरु परमेसरु करणैहारु ॥अंग 741
  23. गुर अपुने ऊपरि बलि जाईऐ ॥अंग 741
  24. दरसनु देखि जीवा गुर तेरा ॥अंग 742
  25. मीतु साजनु सुत बंधप भाई ॥अंग 742
  26. गुण गोपाल प्रभ के नित गाहा ॥अंग 742
  27. बैकुंठ नगरु जहा संत वासा ॥अंग 742
  28. अनिक बींग दास के परहरिआ ॥अंग 742
  29. दीनु छडाइ दुनी जो लाए ॥अंग 743
  30. प्रातहकालि हरि नामु उचारी ॥अंग 743
  31. गुर पूरे जब भए दइआल ॥अंग 743
  32. से संजोग करहु मेरे पिआरे ॥अंग 743
  33. बहती जात कदे द्रिसटि न धारत ॥अंग 743
  34. साधसंगि तरै भै सागरु ॥अंग 744
  35. घर का काजु न जाणी रूड़ा ॥अंग 744
  36. संत प्रसादि निहचलु घरु पाइआ ॥अंग 744
  37. जो जो जपै तिस की गति होवै हरि हरि नामु नित रसन बखानी ॥1॥ रहाउ ॥अंग 744
  38. गोबिंदा गुण गाउ दइआला ॥अंग 744
  39. तिसु बिनु दूजा अवरु न कोई ॥अंग 744
  40. दरसन कउ लोचै सभु कोई ॥अंग 745
  41. भली सुहावी छापरी जा महि गुन गाए ॥अंग 745
  42. हरि का संतु परान धन तिस का पनिहारा ॥अंग 745
  43. जिनि मोहे ब्रहमंड खंड ताहू महि पाउ ॥अंग 745
  44. प्रीति प्रीति गुरीआ मोहन लालना ॥अंग 746
  45. रासि मंडलु कीनो आखारा ॥अंग 746
  46. तउ मै आइआ सरनी आइआ ॥अंग 746
  47. सतिगुर पासि बेनंतीआ मिलै नामु आधारा ॥अंग 746
  48. तेरा भाणा तूहै मनाइहि जिस नो होहि दइआला ॥अंग 747
  49. विसरहि नाही जितु तू कबहू सो थानु तेरा केहा ॥अंग 747
  50. करम धरम पाखंड जो दीसहि तिन जमु जागाती लूटै ॥अंग 747
  51. जो किछु करै सोई प्रभ मानहि ओइ राम नाम रंगि राते ॥अंग 748
  52. महा अगनि ते तुधु हाथ दे राखे पए तेरी सरणाई ॥अंग 748
  53. जब कछु न सीओ तब किआ करता कवन करम करि आइआ ॥अंग 748
  54. पारब्रहम परमेसर सतिगुर आपे करणैहारा ॥अंग 749
  55. तुधु चिति आए महा अनंदा जिसु विसरहि सो मरि जाए ॥अंग 749
  56. जिस के सिर ऊपरि तूं सुआमी सो दुखु कैसा पावै ॥अंग 749
  57. सगल तिआगि गुर सरणी आइआ राखहु राखनहारे ॥अंग 750
  58. उरझि रहिओ बिखिआ कै संगा ॥अंग 759
  59. मिथन मोह अगनि सोक सागर ॥अंग 760
  60. जे भुली जे चुकी साइंी भी तहिंजी काढीआ ॥अंग 761
  61. सिम्रिति बेद पुराण पुकारनि पोथीआ ॥अंग 761
  62. सुणि बावरे तू काए देखि भुलाना ॥अंग 777
  63. गोबिंद गुण गावण लागे ॥अंग 778
  64. तू ठाकुरो बैरागरो मै जेही घण चेरी राम ॥अंग 779
  65. साजनु पुरखु सतिगुरु मेरा पूरा तिसु बिनु अवरु न जाणा राम ॥अंग 780
  66. करि किरपा मेरे प्रीतम सुआमी नेत्र देखहि दरसु तेरा राम ॥अंग 780
  67. हरि जपे हरि मंदरु साजिआ संत भगत गुण गावहि राम ॥अंग 781
  68. भै सागरो भै सागरु तरिआ हरि हरि नामु धिआए राम ॥अंग 782
  69. अबिचल नगरु गोबिंद गुरू का नामु जपत सुखु पाइआ राम ॥अंग 783
  70. संता के कारजि आपि खलोइआ हरि कंमु करावणि आइआ राम ॥अंग 783
  71. मिठ बोलड़ा जी हरि सजणु सुआमी मोरा ॥अंग 784
बिलावल (136)
  1. नदरी आवै तिसु सिउ मोहु ॥अंग 801
  2. सरब कलिआण कीए गुरदेव ॥अंग 801
  3. सुख निधान प्रीतम प्रभ मेरे ॥अंग 801
  4. मै मनि तेरी टेक मेरे पिआरे मै मनि तेरी टेक ॥अंग 802
  5. बिखै बनु फीका तिआगि री सखीए नामु महा रसु पीओ ॥अंग 802
  6. एक रूप सगलो पासारा ॥अंग 803
  7. आपि उपावन आपि सधरना ॥अंग 803
  8. भूले मारगु जिनहि बताइआ ॥अंग 803
  9. तनु मनु धनु अरपउ सभु अपना ॥अंग 804
  10. मात पिता सुत साथि न माइआ ॥अंग 804
  11. गुरु पूरा वडभागी पाईऐ ॥अंग 804
  12. गुर का सबदु रिदे महि चीना ॥अंग 804
  13. सगल मनोरथ पाईअहि मीता ॥अंग 804
  14. मोहि निरगुन सभ गुणह बिहूना ॥अंग 805
  15. कवनु जानै प्रभ तुम॑री सेवा ॥अंग 805
  16. मात गरभ महि हाथ दे राखिआ ॥अंग 805
  17. मात पिता सुत बंधप भाई ॥अंग 805
  18. स्रब निधान पूरन गुरदेव ॥1॥ रहाउ ॥अंग 806
  19. कवन संजोग मिलउ प्रभ अपने ॥अंग 806
  20. चरन कमल प्रभ हिरदै धिआए ॥अंग 806
  21. सांति पाई गुरि सतिगुरि पूरे ॥अंग 806
  22. ममता मोह ध्रोह मदि माता बंधनि बाधिआ अति बिकराल ॥अंग 806
  23. सगल अनंदु कीआ परमेसरि अपणा बिरदु सम॑ारिआ ॥अंग 806
  24. जिसु ऊपरि होवत दइआलु ॥अंग 807
  25. मन महि सिंचहु हरि हरि नाम ॥अंग 807
  26. रोगु गइआ प्रभि आपि गवाइआ ॥अंग 807
  27. सतिगुर करि दीने असथिर घर बार ॥ रहाउ ॥अंग 807
  28. ताप संताप सगले गए बिनसे ते रोग ॥अंग 807
  29. काहू संगि न चालही माइआ जंजाल ॥अंग 807
  30. सहज समाधि अनंद सूख पूरे गुरि दीन ॥अंग 807
  31. म्रित मंडल जगु साजिआ जिउ बालू घर बार ॥अंग 808
  32. लोकन कीआ वडिआईआ बैसंतरि पागउ ॥अंग 808
  33. लाल रंगु तिस कउ लगा जिस के वडभागा ॥अंग 808
  34. राखहु अपनी सरणि प्रभ मोहि किरपा धारे ॥अंग 809
  35. दोसु न काहू दीजीऐ प्रभु अपना धिआईऐ ॥अंग 809
  36. मिरतु हसै सिर ऊपरे पसूआ नही बूझै ॥अंग 809
  37. पिंगुल परबत पारि परे खल चतुर बकीता ॥अंग 809
  38. अहंबुधि परबाद नीत लोभ रसना सादि ॥अंग 810
  39. चरन भए संत बोहिथा तरे सागरु जेत ॥अंग 810
  40. बिनु साधू जो जीवना तेतो बिरथारी ॥अंग 810
  41. टहल करउ तेरे दास की पग झारउ बाल ॥अंग 810
  42. कीता लोड़हि सो करहि तुझ बिनु कछु नाहि ॥अंग 811
  43. साधसंगति कै बासबै कलमल सभि नसना ॥अंग 811
  44. पाणी पखा पीसु दास कै तब होहि निहालु ॥अंग 811
  45. स्रवनी सुनउ हरि हरि हरे ठाकुर जसु गावउ ॥अंग 812
  46. अटल बचन साधू जना सभ महि प्रगटाइआ ॥अंग 812
  47. माटी ते जिनि साजिआ करि दुरलभ देह ॥अंग 812
  48. एक टेक गोविंद की तिआगी अन आस ॥अंग 812
  49. महा तपति ते भई सांति परसत पाप नाठे ॥अंग 813
  50. सोई मलीनु दीनु हीनु जिसु प्रभु बिसराना ॥अंग 813
  51. जलु ढोवउ इह सीस करि कर पग पखलावउ ॥अंग 813
  52. इहु सागरु सोई तरै जो हरि गुण गाए ॥अंग 813
  53. बंधन काटे आपि प्रभि होआ किरपाल ॥अंग 814
  54. भै ते उपजै भगति प्रभ अंतरि होइ सांति ॥अंग 814
  55. त्रिसन बुझी ममता गई नाठे भै भरमा ॥अंग 814
  56. हरि भगता का आसरा अन नाही ठाउ ॥अंग 815
  57. बंधन काटै सो प्रभू जा कै कल हाथ ॥अंग 815
  58. कवनु कवनु नही पतरिआ तुम॑री परतीति ॥अंग 815
  59. उदमु करत आनदु भइआ सिमरत सुख सारु ॥अंग 815
  60. जिनि तू बंधि करि छोडिआ फुनि सुख महि पाइआ ॥अंग 816
  61. खोजत खोजत मै फिरा खोजउ बन थान ॥अंग 816
  62. जीअ जंत सुप्रसंन भए देखि प्रभ परताप ॥अंग 816
  63. सिमरि सिमरि पूरन प्रभू कारज भए रासि ॥अंग 816
  64. हरि हरि हरि आराधीऐ होईऐ आरोग ॥अंग 817
  65. अवरि उपाव सभि तिआगिआ दारू नामु लइआ ॥अंग 817
  66. करु धरि मसतकि थापिआ नामु दीनो दानि ॥अंग 817
  67. चरण कमल का आसरा दीनो प्रभि आपि ॥अंग 817
  68. मनि तनि प्रभु आराधीऐ मिलि साध समागै ॥अंग 817
  69. जीअ जुगति वसि प्रभू कै जो कहै सु करना ॥अंग 818
  70. सिमरि सिमरि प्रभु आपना नाठा दुख ठाउ ॥अंग 818
  71. दास तेरे की बेनती रिद करि परगासु ॥अंग 818
  72. सरब सिधि हरि गाईऐ सभि भला मनावहि ॥अंग 818
  73. अरदासि सुणी दातारि प्रभि होए किरपाल ॥अंग 818
  74. मीत हमारे साजना राखे गोविंद ॥अंग 818
  75. गुरु पूरा आराधिआ होए किरपाल ॥अंग 819
  76. धरति सुहावी सफल थानु पूरन भए काम ॥अंग 819
  77. रोगु मिटाइआ आपि प्रभि उपजिआ सुखु सांति ॥अंग 819
  78. मरि मरि जनमे जिन बिसरिआ जीवन का दाता ॥अंग 819
  79. ताती वाउ न लगई पारब्रहम सरणाई ॥अंग 819
  80. अपणे बालक आपि रखिअनु पारब्रहम गुरदेव ॥अंग 819
  81. मेरे मोहन स्रवनी इह न सुनाए ॥ साकत गीत नाद धुनि गावत बोलत बोल अजाए ॥1॥ रहाउ ॥अंग 820
  82. प्रभ जी तू मेरे प्रान अधारै ॥अंग 820
  83. सुनीअत प्रभ तउ सगल उधारन ॥अंग 820
  84. संतन कै सुनीअत प्रभ की बात ॥अंग 820
  85. राखि लीए अपने जन आप ॥अंग 821
  86. तापु लाहिआ गुर सिरजनहारि ॥अंग 821
  87. सतिगुर सबदि उजारो दीपा ॥अंग 821
  88. बिनु हरि कामि न आवत हे ॥अंग 821
  89. हरि हरि नामु अपार अमोली ॥अंग 822
  90. गोबिंद गोबिंद गोबिंद मई ॥अंग 822
  91. किआ हम जीअ जंत बेचारे बरनि न साकह एक रोमाई ॥अंग 822
  92. अगम रूप अबिनासी करता पतित पवित इक निमख जपाईऐ ॥अंग 822
  93. संत सरणि संत टहल करी ॥अंग 822
  94. मन किआ कहता हउ किआ कहता ॥अंग 823
  95. निंदकु ऐसे ही झरि परीऐ ॥अंग 823
  96. ऐसे काहे भूलि परे ॥अंग 823
  97. मन तन रसना हरि चीन॑ा ॥अंग 823
  98. गुरि पूरै मेरी राखि लई ॥अंग 823
  99. सदा सदा जपीऐ प्रभ नाम ॥अंग 824
  100. मन तन अंतरि प्रभु आही ॥अंग 824
  101. धीरउ देखि तुम॑ारै रंगा ॥अंग 824
  102. अचुत पूजा जोग गोपाल ॥अंग 824
  103. सिमरत नामु कोटि जतन भए ॥अंग 824
  104. सुलही ते नाराइण राखु ॥अंग 825
  105. पूरे गुर की पूरी सेव ॥अंग 825
  106. ताप पाप ते राखे आप ॥अंग 825
  107. जिस ते उपजिआ तिसहि पछानु ॥अंग 825
  108. दोवै थाव रखे गुर सूरे ॥अंग 825
  109. दरसनु देखत दोख नसे ॥अंग 826
  110. तनु धनु जोबनु चलत गइआ ॥अंग 826
  111. आपना प्रभु आइआ चीति ॥अंग 826
  112. गोबिदु सिमरि होआ कलिआणु ॥अंग 826
  113. पारब्रहम प्रभ भए क्रिपाल ॥अंग 826
  114. मू लालन सिउ प्रीति बनी ॥ रहाउ ॥अंग 827
  115. हरि के चरन जपि जांउ कुरबानु ॥अंग 827
  116. राखि लीए सतिगुर की सरण ॥अंग 827
  117. मै नाही प्रभ सभु किछु तेरा ॥अंग 827
  118. ऐसी किरपा मोहि करहु ॥अंग 828
  119. ऐसी दीखिआ जन सिउ मंगा ॥अंग 828
  120. जिउ भावै तिउ मोहि प्रतिपाल ॥अंग 828
  121. राखु सदा प्रभ अपनै साथ ॥अंग 828
  122. अपने सेवक कउ कबहु न बिसारहु ॥अंग 829
  123. आगै पाछै कुसलु भइआ ॥अंग 829
  124. बिनु भै भगती तरनु कैसे ॥अंग 829
  125. आपहि मेलि लए ॥अंग 829
  126. जीवउ नामु सुनी ॥अंग 829
  127. मोहन नीद न आवै हावै हार कजर बसत्र अभरन कीने ॥अंग 830
  128. मोरी अहं जाइ दरसन पावत हे ॥अंग 830
  129. उपमा जात न कही मेरे प्रभ की उपमा जात न कही ॥अंग 837
  130. प्रभ जनम मरन निवारि ॥अंग 837
  131. मंगल साजु भइआ प्रभु अपना गाइआ राम ॥अंग 845
  132. भाग सुलखणा हरि कंतु हमारा राम ॥अंग 846
  133. सखी आउ सखी वसि आउ सखी असी पिर का मंगलु गावह ॥अंग 847
  134. सुंदर सांति दइआल प्रभ सरब सुखा निधि पीउ ॥अंग 847
  135. सुख सागर प्रभु पाईऐ जब होवै भागो राम ॥अंग 848
  136. हरि खोजहु वडभागीहो मिलि साधू संगे राम ॥अंग 848
गोंड (22)
  1. सभु करता सभु भुगता ॥1॥ रहाउ ॥अंग 862
  2. फाकिओ मीन कपिक की निआई तू उरझि रहिओ कसुंभाइले ॥अंग 862
  3. जीअ प्रान कीए जिनि साजि ॥अंग 862
  4. नाम संगि कीनो बिउहारु ॥अंग 863
  5. निमाने कउ जो देतो मानु ॥अंग 863
  6. जा कै संगि इहु मनु निरमलु ॥अंग 863
  7. गुर की मूरति मन महि धिआनु ॥अंग 864
  8. गुरू गुरू गुरु करि मन मोर ॥अंग 864
  9. गुरु मेरी पूजा गुरु गोबिंदु ॥अंग 864
  10. राम राम संगि करि बिउहार ॥अंग 865
  11. उन कउ खसमि कीनी ठाकहारे ॥अंग 865
  12. कलि कलेस मिटे हरि नाइ ॥अंग 865
  13. धूप दीप सेवा गोपाल ॥अंग 866
  14. करि किरपा सुख अनद करेइ ॥अंग 866
  15. हरि हरि नामु जपहु मेरे मीत ॥अंग 866
  16. भव सागर बोहिथ हरि चरण ॥अंग 867
  17. संत का लीआ धरति बिदारउ ॥अंग 867
  18. नामु निरंजनु नीरि नराइण ॥अंग 867
  19. जा कउ राखै राखणहारु ॥अंग 868
  20. अचरज कथा महा अनूप ॥ प्रातमा पारब्रहम का रूपु ॥ रहाउ ॥अंग 868
  21. संतन कै बलिहारै जाउ ॥अंग 869
  22. करि नमसकार पूरे गुरदेव ॥अंग 869
रामकली (159)
  1. किरपा करहु दीन के दाते मेरा गुणु अवगणु न बीचारहु कोई ॥अंग 882
  2. पवहु चरणा तलि ऊपरि आवहु ऐसी सेव कमावहु ॥अंग 883
  3. आवत हरख न जावत दूखा नह बिआपै मन रोगनी ॥अंग 883
  4. त्रै गुण रहत रहै निरारी साधिक सिध न जानै ॥अंग 883
  5. अंगीकारु कीआ प्रभि अपनै बैरी सगले साधे ॥अंग 884
  6. तू दाना तू अबिचलु तूही तू जाति मेरी पाती ॥अंग 884
  7. कर करि ताल पखावजु नैनहु माथै वजहि रबाबा ॥अंग 884
  8. एका देसी एकु दिखावै एको रहिआ बिआपै ॥अंग 885
  9. कोई बोलै राम राम कोई खुदाइ ॥अंग 885
  10. पवनै महि पवनु समाइआ ॥अंग 885
  11. जपि गोबिंदु गोपाल लालु ॥अंग 885
  12. चारि पुकारहि ना तू मानहि ॥अंग 886
  13. तागा करि कै लाई थिगली ॥अंग 886
  14. करन करावन सोई ॥अंग 886
  15. सेवकु लाइओ अपुनी सेव ॥अंग 887
  16. तन ते छुटकी अपनी धारी ॥अंग 887
  17. मुख ते पड़ता टीका सहित ॥अंग 887
  18. कोटि बिघन नही आवहि नेरि ॥अंग 888
  19. दोसु न दीजै काहू लोग ॥अंग 888
  20. पंच सबद तह पूरन नाद ॥अंग 888
  21. भेटत संगि पारब्रहमु चिति आइआ ॥अंग 889
  22. तेरै काजि न ग्रिहु राजु मालु ॥अंग 889
  23. सिंचहि दरबु देहि दुखु लोग ॥अंग 889
  24. करि संजोगु बनाई काछि ॥अंग 890
  25. जो किछु करै सोई सुखु जाना ॥अंग 890
  26. कोटि जाप ताप बिस्राम ॥अंग 890
  27. बीज मंत्रु हरि कीरतनु गाउ ॥अंग 891
  28. संत कै संगि राम रंग केल ॥अंग 891
  29. गहु करि पकरी न आई हाथि ॥अंग 891
  30. आतम रामु सरब महि पेखु ॥अंग 892
  31. दीनो नामु कीओ पवितु ॥अंग 892
  32. कउडी बदलै तिआगै रतनु ॥अंग 892
  33. रैणि दिनसु जपउ हरि नाउ ॥अंग 893
  34. तेरी सरणि पूरे गुरदेव ॥अंग 893
  35. रतन जवेहर नाम ॥अंग 893
  36. महिमा न जानहि बेद ॥अंग 894
  37. किछहू काजु न कीओ जानि ॥अंग 894
  38. राखनहार दइआल ॥अंग 894
  39. सगल सिआनप छाडि ॥अंग 895
  40. होवै सोई भल मानु ॥अंग 895
  41. दुलभ देह सवारि ॥अंग 895
  42. जिस की तिस की करि मानु ॥अंग 896
  43. मन माहि जापि भगवंतु ॥अंग 896
  44. बिरथा भरवासा लोक ॥अंग 896
  45. कारन करन करीम ॥अंग 896
  46. कोटि जनम के बिनसे पाप ॥अंग 897
  47. दरसन कउ जाईऐ कुरबानु ॥अंग 897
  48. किसु भरवासै बिचरहि भवन ॥अंग 898
  49. इह लोके सुखु पाइआ ॥अंग 898
  50. गऊ कउ चारे सारदूलु ॥अंग 898
  51. ना तनु तेरा ना मनु तोहि ॥अंग 899
  52. राजा राम की सरणाइ ॥अंग 899
  53. इंीधन ते बैसंतरु भागै ॥अंग 900
  54. जो तिसु भावै सो थीआ ॥अंग 900
  55. ऐसा पूरा गुरदेउ सहाई ॥अंग 900
  56. गावहु राम के गुण गीत ॥अंग 901
  57. गुरु पूरा मेरा गुरु पूरा ॥अंग 901
  58. नरनरह नमसकारं ॥अंग 901
  59. रूप रंग सुगंध भोग तिआगि चले माइआ छले कनिक कामिनी ॥1॥ रहाउ ॥अंग 901
  60. किनही कीआ परविरति पसारा ॥अंग 912
  61. इसु पानी ते जिनि तू घरिआ ॥अंग 913
  62. काहू बिहावै रंग रस रूप ॥अंग 913
  63. दावा अगनि रहे हरि बूट ॥अंग 914
  64. जीअ जंत सभि पेखीअहि प्रभ सगल तुमारी धारना ॥1॥अंग 915
  65. दरसनु भेटत पाप सभि नासहि हरि सिउ देइ मिलाई ॥1॥अंग 915
  66. सिखहु सबदु पिआरिहो जनम मरन की टेक ॥अंग 916
  67. मन बच क्रमि राम नामु चितारी ॥अंग 916
  68. साजनड़ा मेरा साजनड़ा निकटि खलोइअड़ा मेरा साजनड़ा ॥अंग 924
  69. हरि हरि धिआइ मना खिनु न विसारीऐ ॥अंग 925
  70. रुण झुणो सबदु अनाहदु नित उठि गाईऐ संतन कै ॥अंग 925
  71. चरन कमल सरणागती अनद मंगल गुण गाम ॥अंग 926
  72. जलि थलि महीअलि पूरि रहिआ इक निमख मनहु न वीसरै ॥अंग 926
  73. हरि सिमरत मनु तनु सुखी बिनसी दुतीआ सोच ॥अंग 926
  74. प्रतिपाल अचुत पुरखु एको तिसहि सिउ रंगु लागा ॥अंग 926
  75. रसना उचरै हरि हरे गुण गोविंद वखिआन ॥अंग 926
  76. धरम अरथ अरु काम मोख मुकति पदारथ नाथ ॥अंग 927
  77. ग्रिहि लाल आए पुरबि कमाए ता की उपमा किआ गणा ॥अंग 927
  78. रण झुंझनड़ा गाउ सखी हरि एकु धिआवहु ॥अंग 927
  79. करि बंदन प्रभ पारब्रहम बाछउ साधह धूरि ॥अंग 927
  80. गुण रंगि राते धंनि ते जन जिनी इक मनि धिआइआ ॥अंग 927
  81. उदमु अगमु अगोचरो चरन कमल नमसकार ॥अंग 927
  82. घरि नाहु निहचलु अनदु सखीए चरन कमल प्रफुलिआ ॥अंग 927
  83. साधसंगति बिनु भ्रमि मुई करती करम अनेक ॥अंग 928
  84. नह द्रिसटि आवै मरत हावै महा गारबि मुठीआ ॥अंग 928
  85. सरधा लागी संगि प्रीतमै इकु तिलु रहणु न जाइ ॥अंग 928
  86. प्रभु पूरि रहिआ सरब ठाई हरि नाम नव निधि ग्रिह भरे ॥अंग 928
  87. आस पिआसी मै फिरउ कब पेखउ गोपाल ॥अंग 928
  88. बिनु कंत पिआरे नह सूख सारे हार कंङण ध्रिगु बना ॥अंग 928
  89. जलणि बुझी सीतल भए मनि तनि उपजी सांति ॥अंग 928
  90. सभि काम पूरे मिलि हजूरे हरि चरण सेवकि सेविआ ॥अंग 929
  91. हरि धनु पाइआ सोहागणी डोलत नाही चीत ॥अंग 929
  92. ग्रिहि लाल आए मनि धिआए सेज सुंदरि सोहीआ ॥अंग 929
  93. संत सहाई जीअ के भवजल तारणहार ॥अंग 929
  94. हरि रंगि राते सहजि माते तिलु न मन ते बीसरै ॥अंग 929
  95. जैसा सतिगुरु सुणीदा तैसो ही मै डीठु ॥अंग 957
  96. इकु सजणु सभि सजणा इकु वैरी सभि वादि ॥अंग 957
  97. थटणहारै थाटु आपे ही थटिआ ॥अंग 957
  98. सुणि सजण प्रीतम मेरिआ मै सतिगुरु देहु दिखालि ॥अंग 957
  99. मेरै अंतरि लोचा मिलण की किउ पावा प्रभ तोहि ॥अंग 957
  100. देवणहारु दातारु कितु मुखि सालाहीऐ ॥अंग 957
  101. भीड़हु मोकलाई कीतीअनु सभ रखे कुटंबै नालि ॥अंग 957
  102. विणु तुधु होरु जि मंगणा सिरि दुखा कै दुख ॥अंग 958
  103. सो ऐसा दातारु मनहु न वीसरै ॥अंग 958
  104. धंनु सु राग सुरंगड़े आलापत सभ तिख जाइ ॥अंग 958
  105. धंनु सु वेला घड़ी धंनु धनु मूरतु पलु सारु ॥अंग 958
  106. सिफति सलाहणु भगति विरले दितीअनु ॥अंग 958
  107. हरि इकसै नालि मै दोसती हरि इकसै नालि मै रंगु ॥अंग 958
  108. मनमुखा केरी दोसती माइआ का सनबंधु ॥अंग 959
  109. जो रते दीदार सेई सचु हाकु ॥अंग 959
  110. हरणाखी कू सचु वैणु सुणाई जो तउ करे उधारणु ॥अंग 959
  111. काहे मन तू डोलता हरि मनसा पूरणहारु ॥अंग 959
  112. जिसु तू आवहि चिति तिस नो सदा सुख ॥अंग 960
  113. अंदरहु अंना बाहरहु अंना कूड़ी कूड़ी गावै ॥अंग 960
  114. पंडितु आखाए बहुती राही कोरड़ मोठ जिनेहा ॥अंग 960
  115. जो तुधु भाणा जंतु सो तुधु बुझई ॥अंग 961
  116. करि किरपा किरपाल आपे बखसि लै ॥अंग 961
  117. एको जपीऐ मनै माहि इकस की सरणाइ ॥अंग 961
  118. जिस नो तू रखवाला मारे तिसु कउणु ॥अंग 961
  119. होहु क्रिपाल सुआमी मेरे संतां संगि विहावे ॥अंग 961
  120. सतिगुरु सिमरहु आपणा घटि अवघटि घट घाट ॥अंग 961
  121. दूजा तिसु न बुझाइहु पारब्रहम नामु देहु आधारु ॥अंग 962
  122. अनद सूख बिस्राम नित हरि का कीरतनु गाइ ॥अंग 962
  123. ना तू आवहि वसि बहुतु घिणावणे ॥अंग 962
  124. आपे वैदु आपि नाराइणु ॥अंग 962
  125. हुकमि उछलै हुकमे रहै ॥अंग 962
  126. हउ तिसु ढाढी कुरबाणु जि तेरा सेवदारु ॥अंग 962
  127. मनि तनि हिरदै सिमरि हरि आठ पहर गुण गाउ ॥अंग 963
  128. नानक नामु धिआईऐ गुरु पूरा मति देइ ॥अंग 963
  129. वडिआई सचे नाम की हउ जीवा सुणि सुणे ॥अंग 963
  130. मित्रु पिआरा नानक जी मै छडि गवाइआ रंगि कसुंभै भुली ॥अंग 963
  131. हभे भसु पुणेदे वतनु जा मै सजणु तूहै ॥2॥अंग 963
  132. जिसु तू वुठा चिति तिसु दरदु निवारणो ॥अंग 963
  133. उसतति निंदा नानक जी मै हभ वञाई छोड़िआ हभु किझु तिआगी ॥अंग 963
  134. ता हउ सुखि सुखाली सुती जा गुर मिलि सजणु मै लधा ॥2॥अंग 963
  135. सभे दुख संताप जां तुधहु भुलीऐ ॥अंग 964
  136. तैडी बंदसि मै कोइ न डिठा तू नानक मनि भाणा ॥अंग 964
  137. पाव सुहावे जां तउ धिरि जुलदे सीसु सुहावा चरणी ॥अंग 964
  138. मिलि नारी सतसंगि मंगलु गावीआ ॥अंग 964
  139. तउ जेवडु दातारु न कोई जाचकु सदा जाचोवै ॥1॥अंग 964
  140. हभे सुख सुहेलड़ा सुता जिता जगु सबाइआ ॥2॥अंग 964
  141. वडा तेरा दरबारु सचा तुधु तखतु ॥अंग 964
  142. सोइ सुणंदड़ी मेरा तनु मनु मउला नामु जपंदड़ी लाली ॥अंग 964
  143. हठ मंझाहू मै माणकु लधा ॥अंग 964
  144. जिस कै मसतकि करमु होइ सो सेवा लागा ॥अंग 964
  145. जां पिरु अंदरि तां धन बाहरि ॥अंग 965
  146. आहर सभि करदा फिरै आहरु इकु न होइ ॥अंग 965
  147. वडी हू वडा अपारु तेरा मरतबा ॥अंग 965
  148. छतड़े बाजार सोहनि विचि वपारीए ॥अंग 965
  149. कबीरा हमरा को नही हम किस हू के नाहि ॥अंग 965
  150. सफलिउ बिरखु सुहावड़ा हरि सफल अंम्रिता ॥अंग 965
  151. कबीर धरती साध की तसकर बैसहि गाहि ॥अंग 965
  152. कबीर चावल कारणे तुख कउ मुहली लाइ ॥अंग 965
  153. आपे ही वड परवारु आपि इकातीआ ॥अंग 965
  154. फरीदा भूमि रंगावली मंझि विसूला बागु ॥अंग 966
  155. फरीदा उमर सुहावड़ी संगि सुवंनड़ी देह ॥अंग 966
  156. जपु तपु संजमु दइआ धरमु जिसु देहि सु पाए ॥अंग 966
  157. मुहबति जिसु खुदाइ दी रता रंगि चलूलि ॥अंग 966
  158. अंदरु विधा सचि नाइ बाहरि भी सचु डिठोमि ॥अंग 966
  159. आपे कीतो रचनु आपे ही रतिआ ॥अंग 966
नट नारायण (10)
  1. राम हउ किआ जाना किआ भावै ॥अंग 978
  2. उलाहनो मै काहू न दीओ ॥अंग 978
  3. जा कउ भई तुमारी धीर ॥अंग 978
  4. अपना जनु आपहि आपि उधारिओ ॥अंग 979
  5. हरि हरि मन महि नामु कहिओ ॥अंग 979
  6. चरन कमल संगि लागी डोरी ॥अंग 979
  7. मेरे मन जपु जपि हरि नाराइण ॥अंग 979
  8. मेरै सरबसु नामु निधानु ॥अंग 979
  9. हउ वारि वारि जाउ गुर गोपाल ॥1॥ रहाउ ॥अंग 980
  10. कोऊ है मेरो साजनु मीतु ॥अंग 980
माली गउड़ा (8)
  1. छका 1 ॥अंग 986
  2. राम नाम कउ नमसकार ॥अंग 986
  3. ऐसो सहाई हरि को नाम ॥अंग 986
  4. इही हमारै सफल काज ॥अंग 987
  5. सभ कै संगी नाही दूरि ॥अंग 987
  6. हरि समरथ की सरना ॥अंग 987
  7. प्रभ समरथ देव अपार ॥अंग 988
  8. मनि तनि बसि रहे गोपाल ॥अंग 988
मारू (147)
  1. डरपै धरति अकासु नख्यत्रा सिर ऊपरि अमरु करारा ॥अंग 998
  2. पांच बरख को अनाथु ध्रू बारिकु हरि सिमरत अमर अटारे ॥अंग 999
  3. वित नवित भ्रमिओ बहु भाती अनिक जतन करि धाए ॥अंग 999
  4. कवन थान धीरिओ है नामा कवन बसतु अहंकारा ॥अंग 999
  5. मान मोह अरु लोभ विकारा बीओ चीति न घालिओ ॥अंग 1000
  6. खुलिआ करमु क्रिपा भई ठाकुर कीरतनु हरि हरि गाई ॥अंग 1000
  7. जो समरथु सरब गुण नाइकु तिस कउ कबहु न गावसि रे ॥अंग 1000
  8. अंतरजामी सभ बिधि जानै तिस ते कहा दुलारिओ ॥अंग 1000
  9. चरन कमल प्रभ राखे चीति ॥अंग 1001
  10. प्रान सुखदाता जीअ सुखदाता तुम काहे बिसारिओ अगिआनथ ॥अंग 1001
  11. गुपतु करता संगि सो प्रभु डहकावए मनुखाइ ॥अंग 1001
  12. बाहरि ढूढन ते छूटि परे गुरि घर ही माहि दिखाइआ था ॥अंग 1002
  13. जिसहि साजि निवाजिआ तिसहि सिउ रुच नाहि ॥अंग 1002
  14. फूटो आंडा भरम का मनहि भइओ परगासु ॥अंग 1002
  15. कोटि लाख सरब को राजा जिसु हिरदै नामु तुमारा ॥अंग 1003
  16. ओअंकारि उतपाती ॥अंग 1003
  17. मोहनी मोहि लीए त्रै गुनीआ ॥अंग 1004
  18. सिमरहु एकु निरंजन सोऊ ॥अंग 1004
  19. कत कउ डहकावहु लोगा मोहन दीन किरपाई ॥1॥अंग 1005
  20. मेरा ठाकुरु अति भारा ॥अंग 1005
  21. पतित उधारन तारन बलि बलि बले बलि जाईऐ ॥अंग 1005
  22. त्रिपति आघाए संता ॥अंग 1006
  23. छोडि सगल सिआणपा मिलि साध तिआगि गुमानु ॥अंग 1006
  24. जिनी नामु विसारिआ से होत देखे खेह ॥अंग 1006
  25. पुरखु पूरन सुखह दाता संगि बसतो नीत ॥अंग 1006
  26. चलत बैसत सोवत जागत गुर मंत्रु रिदै चितारि ॥अंग 1006
  27. तजि आपु बिनसी तापु रेण साधू थीउ ॥अंग 1007
  28. प्रतिपालि माता उदरि राखै लगनि देत न सेक ॥अंग 1007
  29. पतित पावन नामु जा को अनाथ को है नाथु ॥अंग 1007
  30. संजोगु विजोगु धुरहु ही हूआ ॥अंग 1007
  31. वैदो न वाई भैणो न भाई एको सहाई रामु हे ॥1॥अंग 1008
  32. लख चउरासीह भ्रमते भ्रमते दुलभ जनमु अब पाइओ ॥1॥अंग 1017
  33. करि अनुग्रहु राखि लीनो भइओ साधू संगु ॥अंग 1017
  34. ससत्रि तीखणि काटि डारिओ मनि न कीनो रोसु ॥अंग 1017
  35. आराधना अराधनु नीका हरि हरि नामु अराधना ॥2॥अंग 1018
  36. आउ जी तू आउ हमारै हरि जसु स्रवन सुनावना ॥1॥ रहाउ ॥अंग 1018
  37. जीवना सफल जीवन सुनि हरि जपि जपि सद जीवना ॥1॥ रहाउ ॥अंग 1019
  38. जिसु ग्रिहि बहुतु तिसै ग्रिहि चिंता ॥अंग 1019
  39. बिरखै हेठि सभि जंत इकठे ॥अंग 1019
  40. कला उपाइ धरी जिनि धरणा ॥अंग 1071
  41. संगी जोगी नारि लपटाणी ॥अंग 1072
  42. करै अनंदु अनंदी मेरा ॥अंग 1073
  43. गुरु गोपालु गुरु गोविंदा ॥अंग 1074
  44. आदि निरंजनु प्रभु निरंकारा ॥अंग 1075
  45. जो दीसै सो एको तूहै ॥अंग 1076
  46. सूरति देखि न भूलु गवारा ॥अंग 1077
  47. सिमरै धरती अरु आकासा ॥अंग 1078
  48. प्रभ समरथ सरब सुख दाना ॥अंग 1080
  49. तू साहिबु हउ सेवकु कीता ॥अंग 1081
  50. अचुत पारब्रहम परमेसुर अंतरजामी ॥अंग 1082
  51. अलह अगम खुदाई बंदे ॥अंग 1083
  52. पारब्रहम सभ ऊच बिराजे ॥अंग 1084
  53. चरन कमल हिरदै नित धारी ॥अंग 1085
  54. माइआ मनहु न वीसरै मांगै दंमा दंम ॥अंग 1093
  55. माइआ साथि न चलई किआ लपटावहि अंध ॥अंग 1093
  56. तू चउ सजण मैडिआ डेई सिसु उतारि ॥अंग 1094
  57. नीहु महिंजा तऊ नालि बिआ नेह कूड़ावे डेखु ॥अंग 1094
  58. उठी झालू कंतड़े हउ पसी तउ दीदारु ॥अंग 1094
  59. तू सचा साहिबु सचु सचु सभु धारिआ ॥अंग 1094
  60. जे तू मित्रु असाडड़ा हिक भोरी ना वेछोड़ि ॥अंग 1094
  61. दुरजन तू जलु भाहड़ी विछोड़े मरि जाहि ॥अंग 1094
  62. दुरजनु दूजा भाउ है वेछोड़ा हउमै रोगु ॥अंग 1094
  63. तू अगम दइआलु बेअंतु तेरी कीमति कहै कउणु ॥अंग 1094
  64. जे तू वतहि अंङणे हभ धरति सुहावी होइ ॥अंग 1095
  65. हभे टोल सुहावणे सहु बैठा अंङणु मलि ॥अंग 1095
  66. सेज विछाई कंत कू कीआ हभु सीगारु ॥अंग 1095
  67. तू पारब्रहमु परमेसरु जोनि न आवही ॥अंग 1095
  68. जा मू पसी हठ मै पिरी महिजै नालि ॥अंग 1095
  69. नानक बैठा भखे वाउ लंमे सेवहि दरु खड़ा ॥अंग 1095
  70. किआ गालाइओ भूछ पर वेलि न जोहे कंत तू ॥अंग 1095
  71. सुघड़ु सुजाणु सरूपु तू सभ महि वरतंता ॥अंग 1095
  72. कुरीए कुरीए वैदिआ तलि गाड़ा महरेरु ॥अंग 1095
  73. सचु जाणै कचु वैदिओ तू आघू आघे सलवे ॥अंग 1095
  74. भोरे भोरे रूहड़े सेवेदे आलकु ॥अंग 1095
  75. तुधु रूपु न रेखिआ जाति तू वरना बाहरा ॥अंग 1096
  76. गहडड़ड़ा त्रिणि छाइआ गाफल जलिओहु भाहि ॥अंग 1096
  77. नानक पीठा पका साजिआ धरिआ आणि मउजूदु ॥अंग 1096
  78. नानक भुसरीआ पकाईआ पाईआ थालै माहि ॥अंग 1096
  79. तुधु जग महि खेलु रचाइआ विचि हउमै पाईआ ॥अंग 1096
  80. आगाहा कू त्राघि पिछा फेरि न मुहडड़ा ॥अंग 1096
  81. सजणु मैडा चाईआ हभ कही दा मितु ॥अंग 1096
  82. गुझड़ा लधमु लालु मथै ही परगटु थिआ ॥अंग 1096
  83. जा तू मेरै वलि है ता किआ मुहछंदा ॥अंग 1096
  84. डेखण कू मुसताकु मुखु किजेहा तउ धणी ॥अंग 1096
  85. दुखीआ दरद घणे वेदन जाणे तू धणी ॥अंग 1097
  86. ढहदी जाइ करारि वहणि वहंदे मै डिठिआ ॥अंग 1097
  87. जिसु जन तेरी भुख है तिसु दुखु न विआपै ॥अंग 1097
  88. जिना पिछै हउ गई से मै पिछै भी रविआसु ॥अंग 1097
  89. गिली गिली रोडड़ी भउदी भवि भवि आइ ॥अंग 1097
  90. डिठा हभ मझाहि खाली कोइ न जाणीऐ ॥अंग 1097
  91. हउ ढाढी दरि गुण गावदा जे हरि प्रभ भावै ॥अंग 1097
  92. जा छुटे ता खाकु तू सुंञी कंतु न जाणही ॥अंग 1097
  93. नानक जिसु बिनु घड़ी न जीवणा विसरे सरै न बिंद ॥अंग 1097
  94. रते रंगि पारब्रहम कै मनु तनु अति गुलालु ॥अंग 1097
  95. जिनी ठगी जगु ठगिआ से तुधु मारि निवाड़ा ॥अंग 1097
  96. जा मूं आवहि चिति तू ता हभे सुख लहाउ ॥अंग 1098
  97. कपड़ भोग विकार ए हभे ही छार ॥अंग 1098
  98. किआ तकहि बिआ पास करि हीअड़े हिकु अधारु ॥अंग 1098
  99. धरमु धीरा कलि अंदरे इहु पापी मूलि न तगै ॥अंग 1098
  100. लोड़ीदो हभ जाइ सो मीरा मीरंन सिरि ॥अंग 1098
  101. माणिकू मोहि माउ डिंना धणी अपाहि ॥अंग 1098
  102. मू थीआऊ सेज नैणा पिरी विछावणा ॥अंग 1098
  103. मनु लोचै हरि मिलण कउ किउ दरसनु पाईआ ॥अंग 1098
  104. मू थीआऊ तखतु पिरी महिंजे पातिसाह ॥अंग 1098
  105. पिरीआ संदड़ी भुख मू लावण थी विथरा ॥अंग 1098
  106. ठगा नीहु मत्रोड़ि जाणु गंध्रबा नगरी ॥अंग 1098
  107. अकल कला नह पाईऐ प्रभु अलख अलेखं ॥अंग 1098
  108. सो निवाहू गडि जो चलाऊ न थीऐ ॥अंग 1099
  109. हभ समाणी जोति जिउ जल घटाऊ चंद्रमा ॥अंग 1099
  110. मुख सुहावे नामु चउ आठ पहर गुण गाउ ॥अंग 1099
  111. बाहर भेखि न पाईऐ प्रभु अंतरजामी ॥अंग 1099
  112. मुखहु अलाए हभ मरणु पछाणंदो कोइ ॥अंग 1099
  113. जाणु वसंदो मंझि पछाणू को हेकड़ो ॥अंग 1099
  114. मतड़ी कांढकु आह पाव धोवंदो पीवसा ॥अंग 1099
  115. निरभउ नामु विसारिआ नालि माइआ रचा ॥अंग 1099
  116. परभाते प्रभ नामु जपि गुर के चरण धिआइ ॥अंग 1099
  117. देह अंधारी अंधु सुंञी नाम विहूणीआ ॥अंग 1099
  118. लोइण लोई डिठ पिआस न बुझै मू घणी ॥अंग 1099
  119. जिनि जनि गुरमुखि सेविआ तिनि सभि सुख पाई ॥अंग 1100
  120. सचु सुहावा काढीऐ कूड़ै कूड़ी सोइ ॥अंग 1100
  121. सजण मुखु अनूपु अठे पहर निहालसा ॥अंग 1100
  122. सजण सचु परखि मुखि अलावणु थोथरा ॥अंग 1100
  123. धरति आकासु पातालु है चंदु सूरु बिनासी ॥अंग 1100
  124. डिठी हभ ढंढोलि हिकसु बाझु न कोइ ॥अंग 1100
  125. आसकु आसा बाहरा मू मनि वडी आस ॥अंग 1100
  126. विछोड़ा सुणे डुखु विणु डिठे मरिओदि ॥अंग 1100
  127. तट तीरथ देव देवालिआ केदारु मथुरा कासी ॥अंग 1100
  128. सै नंगे नह नंग भुखे लख न भुखिआ ॥अंग 1100
  129. सुख समूहा भोग भूमि सबाई को धणी ॥अंग 1101
  130. हिकस कूं तू आहि पछाणू भी हिकु करि ॥अंग 1101
  131. निहचलु एकु नराइणो हरि अगम अगाधा ॥अंग 1101
  132. जो डुबंदो आपि सो तराए किन॑ खे ॥अंग 1101
  133. जिथै कोइ कथंनि नाउ सुणंदो मा पिरी ॥अंग 1101
  134. मेरी मेरी किआ करहि पुत्र कलत्र सनेह ॥अंग 1101
  135. नैनी देखउ गुर दरसनो गुर चरणी मथा ॥अंग 1101
  136. लगड़ीआ पिरीअंनि पेखंदीआ ना तिपीआ ॥अंग 1101
  137. कथड़ीआ संताह ते सुखाऊ पंधीआ ॥अंग 1101
  138. डूंगरि जला थला भूमि बना फल कंदरा ॥अंग 1101
  139. हरि जी मेरी सार करे हम हरि के बालक ॥अंग 1101
  140. नानक कचड़िआ सिउ तोड़ि ढूढि सजण संत पकिआ ॥अंग 1102
  141. नानक बिजुलीआ चमकंनि घुरनि॑ घटा अति कालीआ ॥अंग 1102
  142. जल थल नीरि भरे सीतल पवण झुलारदे ॥अंग 1102
  143. कारणु करतै जो कीआ सोई है करणा ॥अंग 1102
  144. पहिला मरणु कबूलि जीवण की छडि आस ॥अंग 1102
  145. मुआ जीवंदा पेखु जीवंदे मरि जानि ॥अंग 1102
  146. जिसु मनि वसै पारब्रहमु निकटि न आवै पीर ॥अंग 1102
  147. कीमति कहणु न जाईऐ सचु साह अडोलै ॥अंग 1102
तुखारी (1)
  1. घोलि घुमाई लालना गुरि मनु दीना ॥अंग 1117
केदारा (15)
  1. माई संतसंगि जागी ॥अंग 1119
  2. दीन बिनउ सुनु दइआल ॥अंग 1119
  3. सरनी आइओ नाथ निधान ॥अंग 1119
  4. हरि के दरसन को मनि चाउ ॥अंग 1119
  5. प्रिअ की प्रीति पिआरी ॥अंग 1120
  6. हरि हरि हरि गुन गावहु ॥अंग 1120
  7. हरि बिनु जनमु अकारथ जात ॥अंग 1120
  8. हरि बिनु कोइ न चालसि साथ ॥अंग 1120
  9. बिसरत नाहि मन ते हरी ॥अंग 1120
  10. प्रीतम बसत रिद महि खोर ॥अंग 1121
  11. रसना राम राम बखानु ॥अंग 1121
  12. हरि के नाम को आधारु ॥अंग 1121
  13. हरि के नाम बिनु ध्रिगु स्रोत ॥अंग 1121
  14. संतह धूरि ले मुखि मली ॥अंग 1121
  15. मिलु मेरे प्रीतम पिआरिआ ॥ रहाउ ॥अंग 1122
भैरों (67)
  1. सगली थीति पासि डारि राखी ॥ असटम थीति गोविंद जनमा सी ॥1॥अंग 1136
  2. ऊठत सुखीआ बैठत सुखीआ ॥अंग 1136
  3. वरत न रहउ न मह रमदाना ॥अंग 1136
  4. दस मिरगी सहजे बंधि आनी ॥अंग 1136
  5. जे सउ लोचि लोचि खावाइआ ॥अंग 1136
  6. जिनहि उपाए तिस कउ पीर ॥1॥अंग 1137
  7. आगै दयु पाछै नाराइण ॥अंग 1137
  8. कोटि मनोरथ आवहि हाथ ॥अंग 1137
  9. लेपु न लागो तिल का मूलि ॥अंग 1137
  10. खूबु खूबु खूबु खूबु खूबु तेरो नामु ॥अंग 1137
  11. साच पदारथु गुरमुखि लहहु ॥अंग 1138
  12. सतिगुरु सेवि सरब फल पाए ॥अंग 1138
  13. अपणे दास कउ कंठि लगावै ॥अंग 1138
  14. स्रीधर मोहन सगल उपावन निरंकार सुखदाता ॥अंग 1138
  15. बन महि पेखिओ त्रिण महि पेखिओ ग्रिहि पेखिओ उदासाए ॥अंग 1139
  16. निकटि बुझै सो बुरा किउ करै ॥अंग 1139
  17. जिसु तू राखहि तिसु कउनु मारै ॥अंग 1139
  18. तउ कड़ीऐ जे होवै बाहरि ॥अंग 1140
  19. बिनु बाजे कैसो निरतिकारी ॥अंग 1140
  20. हउमै रोगु मानुख कउ दीना ॥अंग 1140
  21. चीति आवै तां महा अनंद ॥अंग 1141
  22. बापु हमारा सद चरंजीवी ॥अंग 1141
  23. निरवैर पुरख सतिगुर प्रभ दाते ॥अंग 1141
  24. सतिगुरु मेरा बेमुहताजु ॥अंग 1142
  25. नामु लैत मनु परगटु भइआ ॥अंग 1142
  26. नमसकार ता कउ लख बार ॥अंग 1142
  27. मोहि दुहागनि आपि सीगारी ॥अंग 1143
  28. चितवत पाप न आलकु आवै ॥अंग 1143
  29. अपणी दइआ करे सो पाए ॥अंग 1143
  30. नामु हमारै अंतरजामी ॥अंग 1144
  31. तू मेरा पिता तूहै मेरा माता ॥अंग 1144
  32. सभ ते ऊच जा का दरबारु ॥अंग 1144
  33. रोवनहारी रोजु बनाइआ ॥अंग 1145
  34. संत की निंदा जोनी भवना ॥अंग 1145
  35. नामु हमारै बेद अरु नाद ॥अंग 1145
  36. निरधन कउ तुम देवहु धना ॥अंग 1146
  37. संत मंडल महि हरि मनि वसै ॥अंग 1146
  38. रोगु कवनु जां राखै आपि ॥अंग 1146
  39. तेरी टेक रहा कलि माहि ॥अंग 1147
  40. प्रथमे छोडी पराई निंदा ॥अंग 1147
  41. सुखु नाही बहुतै धनि खाटे ॥अंग 1147
  42. गुर मिलि तिआगिओ दूजा भाउ ॥अंग 1147
  43. सभ ते ऊचा जा का नाउ ॥अंग 1148
  44. जिसु सिमरत मनि होइ प्रगासु ॥अंग 1148
  45. लाज मरै जो नामु न लेवै ॥अंग 1148
  46. गुर सुप्रसंन होए भउ गए ॥अंग 1149
  47. करण कारण समरथु गुरु मेरा ॥अंग 1149
  48. मनु तनु राता राम रंगि चरणे ॥अंग 1149
  49. नामु लैत किछु बिघनु न लागै ॥अंग 1150
  50. आपे सासतु आपे बेदु ॥अंग 1150
  51. भगता मनि आनंदु गोबिंद ॥अंग 1150
  52. भै कउ भउ पड़िआ सिमरत हरि नाम ॥अंग 1151
  53. पंच मजमी जो पंचन राखै ॥अंग 1151
  54. निंदक कउ फिटके संसारु ॥अंग 1151
  55. दुइ कर जोरि करउ अरदासि ॥अंग 1152
  56. सतिगुर अपुने सुनी अरदासि ॥अंग 1152
  57. परतिपाल प्रभ क्रिपाल कवन गुन गनी ॥अंग 1153
  58. जिसु नामु रिदै सोई वड राजा ॥अंग 1155
  59. कोटि बिसन कीने अवतार ॥अंग 1156
  60. सतिगुरि मो कउ कीनो दानु ॥अंग 1157
  61. जो पाथर कउ कहते देव ॥अंग 1160
  62. जल महि मीन माइआ के बेधे ॥अंग 1160
  63. जब लगु मेरी मेरी करै ॥अंग 1160
  64. सतरि सैइ सलार है जा के ॥अंग 1161
  65. सभु कोई चलन कहत है ऊहां ॥अंग 1161
  66. किउ लीजै गढु बंका भाई ॥अंग 1161
  67. गंग गुसाइनि गहिर गंभीर ॥अंग 1162
बसंत (24)
  1. गुरु सेवउ करि नमसकार ॥अंग 1180
  2. हटवाणी धन माल हाटु कीतु ॥अंग 1180
  3. तिसु बसंतु जिसु प्रभु क्रिपालु ॥अंग 1180
  4. जीअ प्राण तुम॑ पिंड दीन॑ ॥अंग 1181
  5. प्रभ प्रीतम मेरै संगि राइ ॥अंग 1181
  6. मिलि पाणी जिउ हरे बूट ॥अंग 1181
  7. तुम बड दाते दे रहे ॥अंग 1181
  8. तिसु तू सेवि जिनि तू कीआ ॥अंग 1182
  9. जिसु बोलत मुखु पवितु होइ ॥अंग 1182
  10. मन तन भीतरि लागी पिआस ॥अंग 1182
  11. राम रंगि सभ गए पाप ॥अंग 1183
  12. सचु परमेसरु नित नवा ॥अंग 1183
  13. गुर चरण सरेवत दुखु गइआ ॥अंग 1183
  14. सगल इछा जपि पुंनीआ ॥अंग 1184
  15. किलबिख बिनसे गाइ गुना ॥अंग 1184
  16. रोग मिटाए प्रभू आपि ॥अंग 1184
  17. हुकमु करि कीन॑े निहाल ॥अंग 1184
  18. देखु फूल फूल फूले ॥अंग 1185
  19. होइ इकत्र मिलहु मेरे भाई दुबिधा दूरि करहु लिव लाइ ॥अंग 1185
  20. तेरी कुदरति तूहै जाणहि अउरु न दूजा जाणै ॥अंग 1185
  21. मूलु न बूझै आपु न सूझै भरमि बिआपी अहं मनी ॥1॥अंग 1186
  22. सुणि साखी मन जपि पिआर ॥अंग 1192
  23. अनिक जनम भ्रमे जोनि माहि ॥अंग 1192
  24. बसंत की वार महलु 5अंग 1193
सारंग (147)
  1. सतिगुर मूरति कउ बलि जाउ ॥अंग 1202
  2. करत बुराई मानुख ते छपाई साखी भूत पवान ॥1॥ रहाउ ॥अंग 1202
  3. अब मोरो नाचनो रहो ॥अंग 1203
  4. अब पूछे किआ कहा ॥अंग 1203
  5. माई धीरि रही प्रिअ बहुतु बिरागिओ ॥अंग 1203
  6. माई सति सति सति हरि सति सति सति साधा ॥अंग 1204
  7. मेरै मनि बासिबो गुर गोबिंद ॥अंग 1204
  8. अब मोहि राम भरोसउ पाए ॥अंग 1204
  9. ओुइ सुख का सिउ बरनि सुनावत ॥अंग 1205
  10. बिखई दिनु रैनि इव ही गुदारै ॥अंग 1205
  11. अवरि सभि भूले भ्रमत न जानिआ ॥अंग 1205
  12. अनदिनु राम के गुण कहीऐ ॥अंग 1206
  13. बलिहारी गुरदेव चरन ॥अंग 1206
  14. गाइओ री मै गुण निधि मंगल गाइओ ॥अंग 1206
  15. कैसे कहउ मोहि जीअ बेदनाई ॥अंग 1206
  16. रे मूड़॑े तू किउ सिमरत अब नाही ॥अंग 1207
  17. किउ जीवनु प्रीतम बिनु माई ॥अंग 1207
  18. उआ अउसर कै हउ बलि जाई ॥अंग 1207
  19. मनोरथ पूरे सतिगुर आपि ॥अंग 1207
  20. मन कहा लुभाईऐ आन कउ ॥अंग 1208
  21. मन सदा मंगल गोबिंद गाइ ॥अंग 1208
  22. हरि जन सगल उधारे संग के ॥अंग 1208
  23. हरि जन राम राम राम धिआंए ॥अंग 1208
  24. मोहन घरि आवहु करउ जोदरीआ ॥अंग 1209
  25. अब किआ सोचउ सोच बिसारी ॥अंग 1209
  26. अब मोहि सरब उपाव बिरकाते ॥अंग 1209
  27. अब मोहि लबधिओ है हरि टेका ॥अंग 1209
  28. मेरा मनु एकै ही प्रिअ मांगै ॥अंग 1209
  29. अब मोरो ठाकुर सिउ मनु मानां ॥अंग 1210
  30. मेरै मनि चीति आए प्रिअ रंगा ॥अंग 1210
  31. बचन नाद मेरे स्रवनहु पूरे देहा प्रिअ अंकि समानी ॥1॥ रहाउ ॥अंग 1210
  32. अब मेरो पंचा ते संगु तूटा ॥अंग 1210
  33. अब मेरो ठाकुर सिउ मनु लीना ॥अंग 1210
  34. मोहन सभि जीअ तेरे तू तारहि ॥अंग 1211
  35. अब मोहि धनु पाइओ हरि नामा ॥अंग 1211
  36. मेरै मनि मिसट लगे प्रिअ बोला ॥अंग 1211
  37. रसना राम कहत गुण सोहं ॥अंग 1211
  38. नैनहु देखिओ चलतु तमासा ॥अंग 1211
  39. चरनह गोबिंद मारगु सुहावा ॥अंग 1212
  40. धिआइओ अंति बार नामु सखा ॥अंग 1212
  41. गुर मिलि ऐसे प्रभू धिआइआ ॥अंग 1212
  42. मेरै मनि सबदु लगो गुर मीठा ॥अंग 1212
  43. हरि हरि नामु दीओ गुरि साथे ॥अंग 1212
  44. रे मूड़॑े आन काहे कत जाई ॥अंग 1213
  45. ओअं प्रिअ प्रीति चीति पहिलरीआ ॥अंग 1213
  46. मन ओइ दिनस धंनि परवानां ॥अंग 1213
  47. अब मोरो सहसा दूखु गइआ ॥अंग 1213
  48. प्रभु मेरो इत उत सदा सहाई ॥अंग 1213
  49. अपना मीतु सुआमी गाईऐ ॥अंग 1214
  50. द्रिसटि न लिआवउ अवर काहू कउ माणि महति प्रभ तेरै ॥1॥ रहाउ ॥अंग 1214
  51. प्रभ सिमरत दूख बिनासी ॥अंग 1214
  52. मेरो मनु जत कत तुझहि सम॑ारै ॥अंग 1214
  53. मन ते भै भउ दूरि पराइओ ॥अंग 1214
  54. अंम्रित नामु मनहि आधारो ॥अंग 1215
  55. बिनु प्रभ रहनु न जाइ घरी ॥अंग 1215
  56. रसना जपती तूही तूही ॥अंग 1215
  57. जाहू काहू अपुनो ही चिति आवै ॥अंग 1215
  58. झूठो माइआ को मद मानु ॥अंग 1215
  59. अपुनी इतनी कछू न सारी ॥अंग 1215
  60. मोहनी मोहत रहै न होरी ॥अंग 1216
  61. कहा करहि रे खाटि खाटुली ॥अंग 1216
  62. कोटि जोध उआ की बात न पुछीऐ तां दरगह भी मानिओ ॥1॥ रहाउ ॥अंग 1216
  63. हरि हरि दीओ सेवक कउ नाम ॥अंग 1216
  64. तू मेरे मीत सखा हरि प्रान ॥अंग 1216
  65. करहु गति दइआल संतहु मोरी ॥अंग 1217
  66. ठाकुर बिनती करन जनु आइओ ॥अंग 1217
  67. जा की राम नाम लिव लागी ॥अंग 1217
  68. अब जन ऊपरि को न पुकारै ॥अंग 1217
  69. हरि जन छोडिआ सगला आपु ॥अंग 1217
  70. मेरै गुरि मोरो सहसा उतारिआ ॥अंग 1218
  71. सिमरत नामु प्रान गति पावै ॥अंग 1218
  72. अपुने गुर पूरे बलिहारै ॥अंग 1218
  73. बिनु हरि है को कहा बतावहु ॥अंग 1218
  74. ठाकुर तुम॑ सरणाई आइआ ॥अंग 1218
  75. हरि के नाम की गति ठांढी ॥अंग 1219
  76. जिहवे अंम्रित गुण हरि गाउ ॥अंग 1219
  77. होती नही कवन कछु करणी ॥अंग 1219
  78. फीके हरि के नाम बिनु साद ॥अंग 1219
  79. नामु विसारि लगहि अन लालचि बिरथा जनमु पराणी ॥1॥ रहाउ ॥अंग 1219
  80. धनवंत नाम के वणजारे ॥अंग 1219
  81. प्रभ जी मोहि कवनु अनाथु बिचारा ॥अंग 1220
  82. आवै राम सरणि वडभागी ॥अंग 1220
  83. जा ते साधू सरणि गही ॥अंग 1220
  84. रसना राम को जसु गाउ ॥अंग 1220
  85. बैकुंठ गोबिंद चरन नित धिआउ ॥अंग 1220
  86. साचे सतिगुरू दातारा ॥अंग 1221
  87. गुर के चरन बसे मन मेरै ॥अंग 1221
  88. जीवनु तउ गनीऐ हरि पेखा ॥अंग 1221
  89. सिमरन राम को इकु नाम ॥अंग 1221
  90. धूरतु सोई जि धुर कउ लागै ॥अंग 1221
  91. हरि हरि संत जना की जीवनि ॥अंग 1222
  92. हरि के नामहीन बेताल ॥अंग 1222
  93. मनि तनि राम को बिउहारु ॥अंग 1222
  94. हरि के नामहीन मति थोरी ॥अंग 1222
  95. चितवउ वा अउसर मन माहि ॥अंग 1222
  96. मेरा प्रभु संगे अंतरजामी ॥अंग 1222
  97. जा कै राम को बलु होइ ॥अंग 1223
  98. जीवतु राम के गुण गाइ ॥अंग 1223
  99. मन रे नाम को सुख सार ॥अंग 1223
  100. बिराजित राम को परताप ॥अंग 1223
  101. आतुरु नाम बिनु संसार ॥अंग 1223
  102. तिनि प्रभि साचै आपि भुलाइआ बिखै ठगउरी पीउ ॥1॥ रहाउ ॥अंग 1224
  103. रमण कउ राम के गुण बाद ॥अंग 1224
  104. कीन॑े पाप के बहु कोट ॥अंग 1224
  105. अंधे खावहि बिसू के गटाक ॥अंग 1224
  106. टूटी निंदक की अध बीच ॥अंग 1224
  107. त्रिसना चलत बहु परकारि ॥अंग 1224
  108. रे पापी तै कवन की मति लीन ॥अंग 1225
  109. माई री चरनह ओट गही ॥अंग 1225
  110. माई री मनु मेरो मतवारो ॥अंग 1225
  111. माई री आन सिमरि मरि जांहि ॥अंग 1225
  112. हरि काटी कुटिलता कुठारि ॥अंग 1225
  113. पोथी परमेसर का थानु ॥अंग 1226
  114. वूठा सरब थाई मेहु ॥अंग 1226
  115. साजन मीत सहाई तुम ही तू मेरो परवार ॥1॥ रहाउ ॥अंग 1226
  116. निबही नाम की सचु खेप ॥अंग 1226
  117. माई री पेखि रही बिसमाद ॥अंग 1226
  118. माई री माती चरण समूह ॥अंग 1227
  119. बिनसे काच के बिउहार ॥अंग 1227
  120. ता ते करण पलाह करे ॥अंग 1227
  121. हरि के नाम के जन कांखी ॥अंग 1227
  122. माखी राम की तू माखी ॥अंग 1227
  123. माई री काटी जम की फास ॥अंग 1227
  124. माई री अरिओ प्रेम की खोरि ॥अंग 1228
  125. नीकी राम की धुनि सोइ ॥अंग 1228
  126. हरि के नाम की मति सार ॥अंग 1228
  127. मानी तूं राम कै दरि मानी ॥अंग 1228
  128. तुअ चरन आसरो ईस ॥अंग 1228
  129. हरि भजि आन करम बिकार ॥अंग 1229
  130. सुभ बचन बोलि गुन अमोल ॥अंग 1229
  131. कंचना बहु दत करा ॥अंग 1229
  132. राम राम राम जापि रमत राम सहाई ॥1॥ रहाउ ॥अंग 1229
  133. हरि हरे हरि मुखहु बोलि हरि हरे मनि धारे ॥1॥ रहाउ ॥अंग 1230
  134. नाम भगति मागु संत तिआगि सगल कामी ॥1॥ रहाउ ॥अंग 1230
  135. गुन लाल गावउ गुर देखे ॥अंग 1230
  136. मनि बिरागैगी ॥ खोजती दरसार ॥1॥ रहाउ ॥अंग 1230
  137. ऐसी होइ परी ॥अंग 1230
  138. लाल लाल मोहन गोपाल तू ॥अंग 1231
  139. करत केल बिखै मेल चंद्र सूर मोहे ॥अंग 1231
  140. गुसाइंी परतापु तुहारो डीठा ॥अंग 1235
  141. अगम अगाधि सुनहु जन कथा ॥अंग 1235
  142. सभ देखीऐ अनभै का दाता ॥अंग 1236
  143. धरति सुहावड़ी आकासु सुहंदा जपंदिआ हरि नाउ ॥अंग 1247
  144. सचु खाणा सचु पैनणा सचु नामु अधारु ॥अंग 1251
  145. सभे जीअ समालि अपणी मिहर करु ॥अंग 1251
  146. वुठे मेघ सुहावणे हुकमु कीता करतारि ॥अंग 1251
  147. हरि के संग बसे हरि लोक ॥अंग 1253
मलार (35)
  1. किआ तू सोचहि किआ तू चितवहि किआ तूं करहि उपाए ॥अंग 1266
  2. खीर अधारि बारिकु जब होता बिनु खीरै रहनु न जाई ॥अंग 1266
  3. सगल बिधी जुरि आहरु करिआ तजिओ सगल अंदेसा ॥अंग 1266
  4. राज ते कीट कीट ते सुरपति करि दोख जठर कउ भरते ॥अंग 1267
  5. प्रभ मेरे ओइ बैरागी तिआगी ॥अंग 1267
  6. माई मोहि प्रीतमु देहु मिलाई ॥अंग 1267
  7. बरसु मेघ जी तिलु बिलमु न लाउ ॥अंग 1267
  8. प्रीतम साचा नामु धिआइ ॥अंग 1268
  9. प्रभ मेरे प्रीतम प्रान पिआरे ॥अंग 1268
  10. अब अपने प्रीतम सिउ बनि आई ॥अंग 1268
  11. घनिहर बरसि सगल जगु छाइआ ॥अंग 1268
  12. बिछुरत किउ जीवे ओइ जीवन ॥अंग 1268
  13. हरि कै भजनि कउन कउन न तारे ॥अंग 1269
  14. आजु मै बैसिओ हरि हाट ॥अंग 1269
  15. बहु बिधि माइआ मोह हिरानो ॥अंग 1269
  16. दुसट मुए बिखु खाई री माई ॥अंग 1269
  17. मन मेरे हरि के चरन रवीजै ॥अंग 1269
  18. प्रभ को भगति बछलु बिरदाइओ ॥अंग 1270
  19. गुरमुखि दीसै ब्रहम पसारु ॥अंग 1270
  20. गुर के चरन हिरदै वसाए ॥अंग 1270
  21. परमेसरु होआ दइआलु ॥अंग 1271
  22. गुर सरणाई सगल निधान ॥अंग 1271
  23. गुर मनारि प्रिअ दइआर सिउ रंगु कीआ ॥अंग 1271
  24. मनु घनै भ्रमै बनै ॥अंग 1272
  25. प्रिअ की सोभ सुहावनी नीकी ॥अंग 1272
  26. गुर प्रीति पिआरे चरन कमल रिद अंतरि धारे ॥1॥ रहाउ ॥अंग 1272
  27. बरसु सरसु आगिआ ॥अंग 1272
  28. गुन गोुपाल गाउ नीत ॥अंग 1272
  29. घनु गरजत गोबिंद रूप ॥अंग 1272
  30. हे गोबिंद हे गोपाल हे दइआल लाल ॥1॥ रहाउ ॥अंग 1273
  31. प्रीतम प्रेम भगति के दाते ॥अंग 1278
  32. गुरि मिलिऐ मनु रहसीऐ जिउ वुठै धरणि सीगारु ॥अंग 1278
  33. राति न विहावी साकतां जिन॑ा विसरै नाउ ॥अंग 1284
  34. रतन जवेहर माणका हभे मणी मथंनि ॥अंग 1284
  35. सभो वरतै चलतु चलतु वखाणिआ ॥अंग 1291
कानड़ा (51)
  1. गाईऐ गुण गोपाल क्रिपा निधि ॥अंग 1298
  2. आराधउ तुझहि सुआमी अपने ॥अंग 1298
  3. कीरति प्रभ की गाउ मेरी रसनां ॥अंग 1298
  4. ऐसी मांगु गोबिद ते ॥अंग 1298
  5. भगति भगतन हूं बनि आई ॥अंग 1299
  6. तेरो जनु हरि जसु सुनत उमाहिओ ॥1॥ रहाउ ॥अंग 1299
  7. संतन पहि आपि उधारन आइओ ॥1॥ रहाउ ॥अंग 1299
  8. बिसरि गई सभ ताति पराई ॥अंग 1299
  9. मानु महतु तुम॑ारै ऊपरि तुम॑री ओट तुम॑ारी सरना ॥1॥ रहाउ ॥अंग 1299
  10. साध सरनि चरन चितु लाइआ ॥अंग 1300
  11. हरि के चरन हिरदै गाइ ॥अंग 1300
  12. कथीऐ संतसंगि प्रभ गिआनु ॥अंग 1300
  13. साधसंगति निधि हरि को नाम ॥अंग 1300
  14. साधू हरि हरे गुन गाइ ॥अंग 1300
  15. पेखि पेखि बिगसाउ साजन प्रभु आपना इकांत ॥1॥ रहाउ ॥अंग 1300
  16. साजना संत आउ मेरै ॥1॥ रहाउ ॥अंग 1301
  17. चरन सरन गोपाल तेरी ॥अंग 1301
  18. धनि उह प्रीति चरन संगि लागी ॥अंग 1301
  19. कुचिल कठोर कपट कामी ॥अंग 1301
  20. नाराइन नरपति नमसकारै ॥अंग 1301
  21. न जानी संतन प्रभ बिनु आन ॥अंग 1302
  22. कहन कहावन कउ कई केतै ॥अंग 1302
  23. हीए को प्रीतमु बिसरि न जाइ ॥अंग 1302
  24. आनद रंग बिनोद हमारै ॥अंग 1302
  25. साजन मीत सुआमी नेरो ॥अंग 1302
  26. बिखै दलु संतनि तुम॑रै गाहिओ ॥अंग 1303
  27. बूडत प्रानी हरि जपि धीरै ॥अंग 1303
  28. सिमरत नामु मनहि सुखु पाईऐ ॥अंग 1303
  29. मेरे मन प्रीति चरन प्रभ परसन ॥अंग 1303
  30. कुहकत कपट खपट खल गरजत मरजत मीचु अनिक बरीआ ॥1॥ रहाउ ॥अंग 1303
  31. जीअ प्रान मान दाता ॥अंग 1303
  32. अविलोकउ राम को मुखारबिंद ॥अंग 1304
  33. प्रभ पूजहो नामु अराधि ॥अंग 1304
  34. जगत उधारन नाम प्रिअ तेरै ॥अंग 1304
  35. ऐसी कउन बिधे दरसन परसना ॥1॥ रहाउ ॥अंग 1305
  36. रंगा रंग रंगन के रंगा ॥अंग 1305
  37. तिख बूझि गई गई मिलि साध जना ॥अंग 1305
  38. तिआगीऐ गुमानु मानु पेखता दइआल लाल हां हां मन चरन रेन ॥1॥ रहाउ ॥अंग 1305
  39. प्रभ कहन मलन दहन लहन गुर मिले आन नही उपाउ ॥1॥ रहाउ ॥अंग 1305
  40. पतित पावनु भगति बछलु भै हरन तारन तरन ॥1॥ रहाउ ॥अंग 1306
  41. चरन सरन दइआल ठाकुर आन नाही जाइ ॥अंग 1306
  42. वारि वारउ अनिक डारउ ॥अंग 1306
  43. अहं तोरो मुखु जोरो ॥अंग 1306
  44. तां ते जापि मना हरि जापि ॥अंग 1306
  45. मान मोही पंच दोही उरझि निकटि बसिओ ताकी सरनि साधूआ दूत संगु निवारि ॥1॥ रहाउ ॥अंग 1307
  46. सहज सुभाए आपन आए ॥अंग 1307
  47. गोबिंद ठाकुर मिलन दुराइंी ॥अंग 1307
  48. माई सिमरत राम राम राम ॥अंग 1307
  49. जन को प्रभु संगे असनेहु ॥अंग 1307
  50. करत करत चरच चरच चरचरी ॥अंग 1308
  51. से उधरे जिन राम धिआए ॥अंग 1312
कल्याण (10)
  1. हमारै एह किरपा कीजै ॥अंग 1321
  2. जाचिकु नामु जाचै जाचै ॥अंग 1321
  3. मेरे लालन की सोभा ॥अंग 1322
  4. तेरै मानि हरि हरि मानि ॥अंग 1322
  5. गुन नाद धुनि अनंद बेद ॥अंग 1322
  6. कउनु बिधि ता की कहा करउ ॥अंग 1322
  7. प्रानपति दइआल पुरख प्रभ सखे ॥अंग 1322
  8. मनि तनि जापीऐ भगवान ॥अंग 1322
  9. प्रभु मेरा अंतरजामी जाणु ॥अंग 1323
  10. हरि चरन सरन कलिआन करन ॥अंग 1323
प्रभाती (17)
  1. मनु हरि कीआ तनु सभु साजिआ ॥अंग 1337
  2. प्रभ की सेवा जन की सोभा ॥अंग 1338
  3. गुन गावत मनि होइ अनंद ॥अंग 1338
  4. सगले दूख मिटे सुख दीए अपना नामु जपाइआ ॥अंग 1338
  5. सिमरत नामु किलबिख सभि नासे ॥अंग 1339
  6. करि किरपा अपुने प्रभि कीए ॥अंग 1339
  7. से धनवंत सेई सचु साहा ॥अंग 1339
  8. गुरु पूरा पूरी ता की कला ॥अंग 1339
  9. सतिगुरि पूरै नामु दीआ ॥अंग 1340
  10. पारब्रहमु प्रभु सुघड़ सुजाणु ॥अंग 1340
  11. कुरबाणु जाई गुर पूरे अपने ॥अंग 1340
  12. गुरु गुरु करत सदा सुखु पाइआ ॥अंग 1341
  13. अवरु न दूजा ठाउ ॥अंग 1341
  14. रम राम राम राम जाप ॥अंग 1341
  15. चरन कमल सरनि टेक ॥अंग 1341
  16. मात पिता भाई सुतु बनिता ॥अंग 1347
  17. सिमरत नामु किलबिख सभि काटे ॥अंग 1348