लुल्ला परिवारLulla Family
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सिख वाणीनाम, सेवा और एकत्व

वाणी: महला 4

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वाणी

महला 4, गुरु राम दास जी

1534-1581 · चौथे गुरु · अमृतसर के संस्थापक · 638 शबद

गुरु राम दास का असली नाम भाई जेठा था, अमर दास जी के दामाद। 1574 में गुरुगद्दी मिली। पहला बड़ा काम: एक नया शहर बसाना। "रामदासपुर" नाम था पहले। आज उसे हम अमृतसर कहते हैं।

उन्होंने अमृत-सरोवर (पवित्र ताल) खुदवाया, और उसी के बीच में हरमंदिर साहिब की नींव रखी। यह फ़ैसला प्रतीकात्मक था, गुरु ने मंदिर को धरती के स्तर पर रखा, ऊँचाई पर नहीं। नीचे जा कर ही ऊपर पहुँचा जाता है।

उनकी सबसे प्रसिद्ध रचना "लावां" है, चार छंदों का विवाह-गीत। आज भी हर सिख शादी में पढ़ी जाती है। दूल्हा-दुल्हन ग्रंथ साहिब के चारों ओर चार बार प्रदक्षिणा करते हैं, हर बार एक लावां सुनते हुए।

638 शबद आदि ग्रंथ में। उनके अलावा 31 वारों में से कई इन्होंने रचीं।

महला 4 की मुख्य रचनाएँ:

आदि ग्रंथ में इनके शबद

हर शबद अपनी पहली पंक्ति से, राग के अनुसार, ग्रंथ के क्रम में।

सलोक और अन्य वाणी (5)
  1. हरि के जन सतिगुर सतपुरखा बिनउ करउ गुर पासि ॥अंग 10
  2. सो पुरखु निरंजनु हरि पुरखु निरंजनु हरि अगमा अगम अपारा ॥अंग 10
  3. तूं करता सचिआरु मैडा सांई ॥अंग 11
  4. कामि करोधि नगरु बहु भरिआ मिलि साधू खंडल खंडा हे ॥अंग 13
  5. वडभागीआ सोहागणी जिन॑ा गुरमुखि मिलिआ हरि राइ ॥अंग 1421
सिरी राग (30)
  1. मै मनि तनि बिरहु अति अगला किउ प्रीतमु मिलै घरि आइ ॥अंग 39
  2. नामु मिलै मनु त्रिपतीऐ बिनु नामै ध्रिगु जीवासु ॥अंग 40
  3. गुण गावा गुण विथरा गुण बोली मेरी माइ ॥अंग 40
  4. हउ पंथु दसाई नित खड़ी कोई प्रभु दसे तिनि जाउ ॥अंग 41
  5. रसु अंम्रितु नामु रसु अति भला कितु बिधि मिलै रसु खाइ ॥अंग 41
  6. दिनसु चड़ै फिरि आथवै रैणि सबाई जाइ ॥अंग 41
  7. पहिलै पहरै रैणि कै वणजारिआ मित्रा हरि पाइआ उदर मंझारि ॥अंग 76
  8. मुंध इआणी पेईअड़ै किउ करि हरि दरसनु पिखै ॥अंग 78
  9. हरि जीअ सभे प्रतिपालदा घटि घटि रमईआ सोइ ॥अंग 81
  10. हरि इको करता इकु इको दीबाणु हरि ॥अंग 83
  11. सभ आपे तुधु उपाइ कै आपि कारै लाई ॥अंग 83
  12. तुधु आपे धरती साजीऐ चंदु सूरजु दुइ दीवे ॥अंग 83
  13. सपत दीप सपत सागरा नव खंड चारि वेद दस असट पुराणा ॥अंग 84
  14. हरि अंदरि बाहरि इकु तूं तूं जाणहि भेतु ॥अंग 84
  15. हरि की वडिआई वडी है हरि कीरतनु हरि का ॥अंग 84
  16. तूं आपे जलु मीना है आपे आपे ही आपि जालु ॥अंग 85
  17. सिसटि उपाई सभ तुधु आपे रिजकु संबाहिआ ॥अंग 85
  18. सभु को तेरा तूं सभसु दा तूं सभना रासि ॥अंग 86
  19. हरि की सेवा सफल है गुरमुखि पावै थाइ ॥अंग 86
  20. जिथै ओहु जाइ तिथै ओहु सुरखरू उस कै मुहि डिठै सभ पापी तरिआ ॥अंग 87
  21. हरि के संत सुणहु जन भाई हरि सतिगुर की इक साखी ॥अंग 87
  22. हरि हरि नामु जपहु मन मेरे जितु सदा सुखु होवै दिनु राती ॥अंग 88
  23. सतिगुरु जिनी धिआइआ से कड़ि न सवाही ॥अंग 88
  24. सो ऐसा हरि नामु धिआईऐ मन मेरे जो सभना उपरि हुकमु चलाए ॥अंग 89
  25. हरि जलि थलि महीअलि भरपूरि दूजा नाहि कोइ ॥अंग 89
  26. हरि तेरी सभ करहि उसतति जिनि फाथे काढिआ ॥अंग 90
  27. हरि की भगता परतीति हरि सभ किछु जाणदा ॥अंग 90
  28. हरि आपणी भगति कराइ वडिआई वेखालीअनु ॥अंग 90
  29. कीता लोड़ीऐ कंमु सु हरि पहि आखीऐ ॥अंग 91
  30. हउ ढाढी हरि प्रभ खसम का हरि कै दरि आइआ ॥अंग 91
माझ (10)
  1. हरि हरि नामु मै हरि मनि भाइआ ॥अंग 94
  2. मधुसूदन मेरे मन तन प्राना ॥अंग 94
  3. हरि गुण पड़ीऐ हरि गुण गुणीऐ ॥अंग 95
  4. हरि जन संत मिलहु मेरे भाई ॥अंग 95
  5. हरि गुर गिआनु हरि रसु हरि पाइआ ॥अंग 95
  6. हउ गुण गोविंद हरि नामु धिआई ॥अंग 95
  7. आवहु भैणे तुसी मिलहु पिआरीआ ॥अंग 96
  8. आदि पुरखु अपरंपरु आपे ॥अंग 129
  9. जिस दै अंदरि सचु है सो सचा नामु मुखि सचु अलाए ॥अंग 140
  10. परहरि काम क्रोधु झूठु निंदा तजि माइआ अहंकारु चुकावै ॥अंग 141
गउड़ी (109)
  1. पंडितु सासत सिम्रिति पड़िआ ॥अंग 163
  2. निरगुण कथा कथा है हरि की ॥अंग 164
  3. माता प्रीति करे पुतु खाइ ॥अंग 164
  4. भीखक प्रीति भीख प्रभ पाइ ॥अंग 164
  5. सतिगुर सेवा सफल है बणी ॥अंग 165
  6. हरि आपे जोगी डंडाधारी ॥अंग 165
  7. साहु हमारा तूं धणी जैसी तूं रासि देहि तैसी हम लेहि ॥अंग 165
  8. जिउ जननी गरभु पालती सुत की करि आसा ॥अंग 165
  9. हलु जोतै उदमु करे मेरा पुतु धी खाइ ॥अंग 166
  10. नित दिनसु राति लालचु करे भरमै भरमाइआ ॥अंग 166
  11. हमरै मनि चिति हरि आस नित किउ देखा हरि दरसु तुमारा ॥अंग 167
  12. घर मंदर घोड़े खुसी मनु अन रसि लाइआ ॥अंग 167
  13. जिउ जननी सुतु जणि पालती राखै नदरि मझारि ॥अंग 168
  14. जिसु मिलिऐ मनि होइ अनंदु सो सतिगुरु कहीऐ ॥अंग 168
  15. हरि दइआलि दइआ प्रभि कीनी मेरै मनि तनि मुखि हरि बोली ॥अंग 168
  16. जगजीवन अपरंपर सुआमी जगदीसुर पुरख बिधाते ॥अंग 169
  17. करहु क्रिपा जगजीवन दाते मेरा मनु हरि सेती राचे ॥अंग 169
  18. तुम दइआल सरब दुख भंजन इक बिनउ सुनहु दे काने ॥अंग 169
  19. मेरे मन सो प्रभु सदा नालि है सुआमी कहु किथै हरि पहु नसीऐ ॥अंग 170
  20. दइआ करहु हरि दरसु दिखावहु मेरै मनि तनि लोच घणेरी ॥1॥अंग 170
  21. इहु मनूआ खिनु न टिकै बहु रंगी दह दह दिसि चलि चलि हाढे ॥अंग 170
  22. कामि करोधि नगरु बहु भरिआ मिलि साधू खंडल खंडा हे ॥अंग 171
  23. इसु गड़ महि हरि राम राइ है किछु सादु न पावै धीठा ॥अंग 171
  24. हरि हरि अरथि सरीरु हम बेचिआ पूरे गुर कै आगे ॥अंग 171
  25. हम अहंकारी अहंकार अगिआन मति गुरि मिलिऐ आपु गवाइआ ॥अंग 172
  26. गुरमति बाजै सबदु अनाहदु गुरमति मनूआ गावै ॥अंग 172
  27. गुरमुखि जिंदू जपि नामु करंमा ॥अंग 172
  28. करहले मन परदेसीआ किउ मिलीऐ हरि माइ ॥अंग 234
  29. मन करहला वीचारीआ वीचारि देखु समालि ॥अंग 234
  30. सतिगुरु पुरखु दइआलु है जिस नो समतु सभु कोइ ॥अंग 300
  31. हउमै माइआ सभ बिखु है नित जगि तोटा संसारि ॥अंग 300
  32. तू सचा साहिबु सचु है सचु सचा गोसाई ॥अंग 301
  33. विणु नावै होरु सलाहणा सभु बोलणु फिका सादु ॥अंग 301
  34. सतिगुर हरि प्रभु दसि नामु धिआई मनि हरी ॥अंग 301
  35. तू आपे आपि निरंकारु है निरंजन हरि राइआ ॥अंग 301
  36. मन अंतरि हउमै रोगु है भ्रमि भूले मनमुख दुरजना ॥अंग 301
  37. मनु तनु रता रंग सिउ गुरमुखि हरि गुणतासु ॥अंग 301
  38. तू करता पुरखु अगंमु है किसु नालि तू वड़ीऐ ॥अंग 301
  39. मै मनि तनि प्रेमु पिरंम का अठे पहर लगंनि ॥अंग 301
  40. जिन अंदरि प्रीति पिरंम की जिउ बोलनि तिवै सोहंनि ॥अंग 301
  41. तू करता आपि अभुलु है भुलण विचि नाही ॥अंग 301
  42. सुणि साजन प्रेम संदेसरा अखी तार लगंनि ॥अंग 302
  43. सतिगुरु दाता दइआलु है जिस नो दइआ सदा होइ ॥अंग 302
  44. जिस नो साहिबु वडा करे सोई वड जाणी ॥अंग 302
  45. हरि सति निरंजन अमरु है निरभउ निरवैरु निरंकारु ॥अंग 302
  46. आपे धरती साजीअनु आपे आकासु ॥अंग 302
  47. तू सचा साहिबु सचु है सचु सचे भावै ॥अंग 302
  48. सतिगुरु धरती धरम है तिसु विचि जेहा को बीजे तेहा फलु पाए ॥अंग 302
  49. इकु मनु इकु वरतदा जितु लगै सो थाइ पाइ ॥अंग 303
  50. जिन हरि हिरदै सेविआ तिन हरि आपि मिलाए ॥अंग 303
  51. सतिगुर विचि वडी वडिआई जो अनदिनु हरि हरि नामु धिआवै ॥अंग 303
  52. पूरे गुर का हुकमु न मंनै ओहु मनमुखु अगिआनु मुठा बिखु माइआ ॥अंग 303
  53. सचु सचा सभ दू वडा है सो लए जिसु सतिगुरु टिके ॥अंग 304
  54. हरि प्रभ का सभु खेतु है हरि आपि किरसाणी लाइआ ॥अंग 304
  55. सारा दिनु लालचि अटिआ मनमुखि होरे गला ॥अंग 304
  56. तू वेपरवाहु अथाहु है अतुलु किउ तुलीऐ ॥अंग 304
  57. सतिगुर की सेवा निरमली निरमल जनु होइ सु सेवा घाले ॥अंग 304
  58. जिना अंदरि नामु निधानु हरि तिन के काज दयि आदे रासि ॥अंग 305
  59. तू साहिबु अगम दइआलु है वड दाता दाणा ॥अंग 305
  60. अगो दे सत भाउ न दिचै पिछो दे आखिआ कंमि न आवै ॥अंग 305
  61. गुर सतिगुर का जो सिखु अखाए सु भलके उठि हरि नामु धिआवै ॥अंग 305
  62. जो तुधु सचु धिआइदे से विरले थोड़े ॥अंग 306
  63. मलु जूई भरिआ नीला काला खिधोलड़ा तिनि वेमुखि वेमुखै नो पाइआ ॥अंग 306
  64. साहिबु जिस का नंगा भुखा होवै तिस दा नफरु किथहु रजि खाए ॥अंग 306
  65. नानक वीचारहि संत जन चारि वेद कहंदे ॥अंग 306
  66. सतिगुर सेती गणत जि रखै हलतु पलतु सभु तिस का गइआ ॥अंग 307
  67. तूहै सचा सचु तू सभ दू उपरि तू दीबाणु ॥अंग 307
  68. धुरि मारे पूरै सतिगुरू सेई हुणि सतिगुरि मारे ॥अंग 307
  69. जिन कउ आपि देइ वडिआई जगतु भी आपे आणि तिन कउ पैरी पाए ॥अंग 308
  70. तू सचा साहिबु आपि है सचु साह हमारे ॥अंग 308
  71. जिसु अंदरि ताति पराई होवै तिस दा कदे न होवी भला ॥अंग 308
  72. होदै परतखि गुरू जो विछुड़े तिन कउ दरि ढोई नाही ॥अंग 308
  73. जि होंदै गुरू बहि टिकिआ तिसु जन की वडिआई वडी होई ॥अंग 309
  74. काइआ कोटु अपारु है अंदरि हटनाले ॥अंग 309
  75. जो निंदा करे सतिगुर पूरे की सु अउखा जग महि होइआ ॥अंग 309
  76. वडभागीआ सोहागणी जिना गुरमुखि मिलिआ हरि राइ ॥अंग 309
  77. इहु सरीरु सभु धरमु है जिसु अंदरि सचे की विचि जोति ॥अंग 309
  78. सभि रस तिन कै रिदै हहि जिन हरि वसिआ मन माहि ॥अंग 310
  79. सा धरती भई हरीआवली जिथै मेरा सतिगुरु बैठा आइ ॥अंग 310
  80. सचु सचा सतिगुरु अमरु है जिसु अंदरि हरि उरि धारिआ ॥अंग 310
  81. करि किरपा सतिगुरु मेलिओनु मुखि गुरमुखि नामु धिआइसी ॥अंग 310
  82. गुरसिखा कै मनि भावदी गुर सतिगुर की वडिआई ॥अंग 310
  83. हउ आखि सलाही सिफति सचु सचु सचे की वडिआई ॥अंग 310
  84. जिना अंदरि उमरथल सेई जाणनि सूलीआ ॥अंग 311
  85. अउगणी भरिआ सरीरु है किउ संतहु निरमलु होइ ॥अंग 311
  86. सालाही सचु सालाहणा सचु सचा पुरखु निराले ॥अंग 311
  87. सतसंगति महि हरि उसतति है संगि साधू मिले पिआरिआ ॥अंग 311
  88. सचु सचे की सिफति सलाह है सो करे जिसु अंदरु भिजै ॥अंग 312
  89. साकत जाइ निवहि गुर आगै मनि खोटे कूड़ि कूड़िआरे ॥अंग 312
  90. सतिगुरु पुरखु अगंमु है जिसु अंदरि हरि उरि धारिआ ॥अंग 312
  91. सचु सुतिआ जिनी अराधिआ जा उठे ता सचु चवे ॥अंग 312
  92. किआ सवणा किआ जागणा गुरमुखि ते परवाणु ॥अंग 312
  93. सतिगुरु सेवीऐ आपणा पाईऐ नामु अपारु ॥अंग 313
  94. सचु सचे के जन भगत हहि सचु सचा जिनी अराधिआ ॥अंग 313
  95. मनमुखु प्राणी मुगधु है नामहीण भरमाइ ॥अंग 313
  96. गुरु सालाही आपणा बहु बिधि रंगि सुभाइ ॥अंग 313
  97. सचु सचा कुदरति जाणीऐ दिनु राती जिनि बणाईआ ॥अंग 313
  98. मै मनु तनु खोजि खोजेदिआ सो प्रभु लधा लोड़ि ॥अंग 313
  99. तू करता सभु किछु जाणदा जो जीआ अंदरि वरतै ॥अंग 314
  100. इहु मनूआ द्रिड़ु करि रखीऐ गुरमुखि लाईऐ चितु ॥अंग 314
  101. सा सेवा कीती सफल है जितु सतिगुर का मनु मंने ॥अंग 314
  102. जिन के चित कठोर हहि से बहहि न सतिगुर पासि ॥अंग 314
  103. तपा न होवै अंद्रहु लोभी नित माइआ नो फिरै जजमालिआ ॥अंग 315
  104. हरि भगतां हरि आराधिआ हरि की वडिआई ॥अंग 316
  105. मनमुख मूलहु भुलिआ विचि लबु लोभु अहंकारु ॥अंग 316
  106. जिना अंदरि दूजा भाउ है तिन॑ा गुरमुखि प्रीति न होइ ॥अंग 316
  107. जेवेहे करम कमावदा तेवेहे फलते ॥अंग 317
  108. सतिगुर के जीअ की सार न जापै कि पूरै सतिगुर भावै ॥अंग 317
  109. तूं सचा साहिबु अति वडा तुहि जेवडु तूं वड वडे ॥अंग 317
आसा (30)
  1. सो पुरखु निरंजनु हरि पुरखु निरंजनु हरि अगमा अगम अपारा ॥अंग 348
  2. तूं करता सचिआरु मैडा सांई ॥अंग 365
  3. किस ही धड़ा कीआ मित्र सुत नालि भाई ॥अंग 366
  4. हिरदै सुणि सुणि मनि अंम्रितु भाइआ ॥अंग 366
  5. मेरै मनि तनि प्रेमु नामु आधारु ॥अंग 366
  6. गुरमुखि हरि गुण आखि वखाणी ॥1॥अंग 367
  7. नामु सुणी नामो मनि भावै ॥अंग 367
  8. गुरमुखि हरि हरि वेलि वधाई ॥अंग 367
  9. हरि हरि नाम की मनि भूख लगाई ॥अंग 367
  10. हथि करि तंतु वजावै जोगी थोथर वाजै बेन ॥अंग 368
  11. कब को भालै घुंघरू ताला कब को बजावै रबाबु ॥अंग 368
  12. सतसंगति मिलीऐ हरि साधू मिलि संगति हरि गुण गाइ ॥अंग 368
  13. आइआ मरणु धुराहु हउमै रोईऐ ॥अंग 369
  14. जनमु पदारथु पाइ नामु धिआइआ ॥अंग 369
  15. हउ अनदिनु हरि नामु कीरतनु करउ ॥अंग 369
  16. माई मोरो प्रीतमु रामु बतावहु री माई ॥अंग 369
  17. जीवनो मै जीवनु पाइआ गुरमुखि भाए राम ॥अंग 442
  18. झिमि झिमे झिमि झिमि वरसै अंम्रित धारा राम ॥अंग 442
  19. हरि ऊतमु कामु जपीऐ हरि नामु हरि जपीऐ असथिरु होवै ॥अंग 444
  20. गुण गिआनु पदारथु हरि हरि किरतारथु सोभा गुरमुखि होई ॥अंग 445
  21. धुरि मसतकि भागु हरि नामि सुहागु हरि नामै हरि गुण गाइआ ॥अंग 446
  22. मनि हरि हरि भाउ गुरु करे पसाउ जीवन मुकतु सुखु होई ॥अंग 447
  23. गोविंदु अलख अपारु अपरंपरु आपु आपणा जाणै ॥अंग 448
  24. हरि अंम्रित भिंने लोइणा मनु प्रेमि रतंना राम राजे ॥अंग 448
  25. गुरमुखि ढूंढि ढूढेदिआ हरि सजणु लधा राम राजे ॥अंग 449
  26. हरि अंम्रित भगति भंडार है गुर सतिगुर पासे राम राजे ॥अंग 449
  27. जिन मसतकि धुरि हरि लिखिआ तिना सतिगुरु मिलिआ राम राजे ॥अंग 450
  28. जिन अंतरि हरि हरि प्रीति है ते जन सुघड़ सिआणे राम राजे ॥अंग 450
  29. जिन॑ा भेटिआ मेरा पूरा सतिगुरू तिन हरि नामु द्रिड़ावै राम राजे ॥अंग 451
  30. मेरे मन परदेसी वे पिआरे आउ घरे ॥अंग 451
गूजरी (8)
  1. हरि के जन सतिगुर सत पुरखा हउ बिनउ करउ गुर पासि ॥अंग 492
  2. गोविंदु गोविंदु प्रीतमु मनि प्रीतमु मिलि सतसंगति सबदि मनु मोहै ॥अंग 492
  3. जो जनु सुणै सरधा भगति सेती करि किरपा हरि निसतारे ॥1॥अंग 493
  4. होहु दइआल मेरा मनु लावहु हउ अनदिनु राम नामु नित धिआई ॥अंग 493
  5. गुरमुखि सखी सहेली मेरी मो कउ देवहु दानु हरि प्रान जीवाइआ ॥अंग 493
  6. जिन सतिगुरु पुरखु जिनि हरि प्रभु पाइआ मो कउ करि उपदेसु हरि मीठ लगावै ॥अंग 494
  7. माई बाप पुत्र सभि हरि के कीए ॥अंग 494
  8. हरि बिनु जीअरा रहि न सकै जिउ बालकु खीर अधारी ॥अंग 506
देवगंधारी (6)
  1. सेवक जन बने ठाकुर लिव लागे ॥अंग 527
  2. मेरो सुंदरु कहहु मिलै कितु गली ॥अंग 527
  3. मेरे मन मुखि हरि हरि हरि बोलीऐ ॥अंग 527
  4. अब हम चली ठाकुर पहि हारि ॥अंग 527
  5. हरि गुण गावै हउ तिसु बलिहारी ॥अंग 528
  6. हरि के नाम बिना सुंदरि है नकटी ॥अंग 528
बिहागड़ा (29)
  1. हरि हरि नामु धिआईऐ मेरी जिंदुड़ीए गुरमुखि नामु अमोले राम ॥अंग 537
  2. अंम्रितु हरि हरि नामु है मेरी जिंदुड़ीए अंम्रितु गुरमति पाए राम ॥अंग 538
  3. जगि सुक्रितु कीरति नामु है मेरी जिंदुड़ीए हरि कीरति हरि मनि धारे राम ॥अंग 539
  4. हउ बलिहारी तिन॑ कउ मेरी जिंदुड़ीए जिन॑ हरि हरि नामु अधारो राम ॥अंग 539
  5. जिन हरि हरि नामु न चेतिओ मेरी जिंदुड़ीए ते मनमुख मूड़ इआणे राम ॥अंग 540
  6. सभि जीअ तेरे तूं वरतदा मेरे हरि प्रभ तूं जाणहि जो जीइ कमाईऐ राम ॥अंग 541
  7. सभ तेरी तू सभस दा सभ तुधु उपाइआ ॥अंग 548
  8. जीअ जंत सभि तेरिआ तू सभना रासि ॥अंग 549
  9. तेरी वडिआई तूहै जाणदा तुधु जेवडु अवरु न कोई ॥अंग 549
  10. जिस दै चिति वसिआ मेरा सुआमी तिस नो किउ अंदेसा किसै गलै दा लोड़ीऐ ॥अंग 550
  11. हरि आपे ठाकुरु सेवकु भगतु हरि आपे करे कराए ॥अंग 550
  12. आपे धरती आपे है राहकु आपि जंमाइ पीसावै ॥अंग 550
  13. अंधे चानणु ता थीऐ जा सतिगुरु मिलै रजाइ ॥अंग 551
  14. जदहु आपे थाटु कीआ बहि करतै तदहु पुछि न सेवकु बीआ ॥अंग 551
  15. आपे वेद पुराण सभि सासत आपि कथै आपि भीजै ॥अंग 551
  16. आपि समुंदु आपि है सागरु आपे ही विचि रतन धरे ॥अंग 552
  17. आपे पारसु आपि धातु है आपि कीतोनु कंचनु ॥अंग 552
  18. बिनु सतिगुर सेवे जीअ के बंधना जेते करम कमाहि ॥अंग 552
  19. आपे चाटसाल आपि है पाधा आपे चाटड़े पड़ण कउ आणे ॥अंग 552
  20. आपे सिव संकर महेसा आपे गुरमुखि अकथ कहाणी ॥अंग 553
  21. आपे तंतु परम तंतु सभु आपे आपे ठाकुरु दासु भइआ ॥अंग 553
  22. आपे अठसठि तीरथ करता आपि करे इसनानु ॥अंग 554
  23. आपे भार अठारह बणसपति आपे ही फल लाए ॥अंग 554
  24. जिस दा कीता सभु किछु होवै तिस नो परवाह नाही किसै केरी ॥अंग 554
  25. जा आपि क्रिपालु होवै हरि सुआमी ता आपणां नाउ हरि आपि जपावै ॥अंग 555
  26. आपे सभ घट अंदरे आपे ही बाहरि ॥अंग 555
  27. आपे दानां बीनिआ आपे परधानां ॥अंग 556
  28. सभु किहु तेरै वसि है तू सचा साहु ॥अंग 556
  29. आपे जंत उपाइअनु आपे आधारु ॥अंग 556
वडहंस (30)
  1. सेज एक एको प्रभु ठाकुरु ॥अंग 560
  2. मेरा हरि प्रभु सुंदरु मै सार न जाणी ॥अंग 561
  3. मै मनि वडी आस हरे किउ करि हरि दरसनु पावा ॥अंग 561
  4. मेरै मनि मेरै मनि सतिगुरि प्रीति लगाई राम ॥अंग 572
  5. हंउ गुर बिनु हंउ गुर बिनु खरी निमाणी राम ॥अंग 572
  6. हरि सतिगुर हरि सतिगुर मेलि हरि सतिगुर चरण हम भाइआ राम ॥अंग 573
  7. हरि किरपा हरि किरपा करि सतिगुरु मेलि सुखदाता राम ॥अंग 574
  8. देह तेजणि जी रामि उपाईआ राम ॥अंग 575
  9. देह तेजनड़ी हरि नव रंगीआ राम ॥अंग 575
  10. तू आपे ही आपि आपि है आपि कारणु कीआ ॥अंग 585
  11. तिसु मिलीऐ सतिगुर सजणै जिसु अंतरि हरि गुणकारी ॥अंग 586
  12. सो सतिगुरु सेविहु साध जनु जिनि हरि हरि नामु द्रिड़ाइआ ॥अंग 586
  13. तितु जाइ बहहु सतसंगती जिथै हरि का हरि नामु बिलोईऐ ॥अंग 587
  14. तिसु गुर कउ हउ वारिआ जिनि हरि की हरि कथा सुणाई ॥अंग 587
  15. जिनी हरि हरि नामु धिआइआ तिनी पाइअड़े सरब सुखा ॥अंग 588
  16. जिनि जगजीवनु उपदेसिआ तिसु गुर कउ हउ सदा घुमाइआ ॥अंग 588
  17. तू करता सभु किछु जाणदा सभि जीअ तुमारे ॥अंग 589
  18. जिसु अंतरु हिरदा सुधु है तिसु जन कउ सभि नमसकारी ॥अंग 589
  19. हरि इको दाता सेवीऐ हरि इकु धिआईऐ ॥अंग 590
  20. गुरसिखां मनि हरि प्रीति है गुरु पूजण आवहि ॥अंग 590
  21. से गुरसिख धनु धंनु है जिनी गुर उपदेसु सुणिआ हरि कंनी ॥अंग 590
  22. गुरमुखि प्रहिलादि जपि हरि गति पाई ॥अंग 591
  23. जिस कै घरि दीबानु हरि होवै तिस की मुठी विचि जगतु सभु आइआ ॥अंग 591
  24. जिन कै हरि नामु वसिआ सद हिरदै हरि नामो तिन कंउ रखणहारा ॥अंग 592
  25. हरि नामु हमारा प्रभु अबिगतु अगोचरु अबिनासी पुरखु बिधाता ॥अंग 592
  26. हरि नामु हमारा भोजनु छतीह परकार जितु खाइऐ हम कउ त्रिपति भई ॥अंग 593
  27. धंनु धंनु सो गुरसिखु कहीऐ जो सतिगुर चरणी जाइ पइआ ॥अंग 593
  28. धनु धनु सत पुरखु सतिगुरू हमारा जितु मिलिऐ हम कउ सांति आई ॥अंग 594
  29. जिनि उपाए जीअ तिनि हरि राखिआ ॥अंग 594
  30. तू आपे आपि आपि सभु करता कोई दूजा होइ सु अवरो कहीऐ ॥अंग 594
सोरठ (45)
  1. आपे आपि वरतदा पिआरा आपे आपि अपाहु ॥अंग 604
  2. आपे अंडज जेरज सेतज उतभुज आपे खंड आपे सभ लोइ ॥अंग 604
  3. आपे ही सभु आपि है पिआरा आपे थापि उथापै ॥अंग 605
  4. आपे कंडा आपि तराजी प्रभि आपे तोलि तोलाइआ ॥अंग 605
  5. आपे स्रिसटि उपाइदा पिआरा करि सूरजु चंदु चानाणु ॥अंग 606
  6. आपे सेवा लाइदा पिआरा आपे भगति उमाहा ॥अंग 606
  7. अनिक जनम विछुड़े दुखु पाइआ मनमुखि करम करै अहंकारी ॥अंग 607
  8. हरि सिउ प्रीति अंतरु मनु बेधिआ हरि बिनु रहणु न जाई ॥अंग 607
  9. अचरु चरै ता सिधि होई सिधी ते बुधि पाई ॥अंग 607
  10. सोरठि तामि सुहावणी जा हरि नामु ढंढोले ॥अंग 642
  11. तू आपे सिसटि करता सिरजणहारिआ ॥अंग 642
  12. हरि पुरखु निरंजनु सेवि हरि नामु धिआईऐ ॥अंग 643
  13. तुधु आपे जगतु उपाइ कै आपि खेलु रचाइआ ॥अंग 643
  14. सो हरि पुरखु अगंमु है कहु कितु बिधि पाईऐ ॥अंग 644
  15. हरि आपि वरतै आपि हरि आपि बुलाइदा ॥अंग 644
  16. एह भूपति राणे रंग दिन चारि सुहावणा ॥अंग 645
  17. जो सेवहि सति मुरारि से भवजल तरि गइआ ॥अंग 645
  18. बहि सखीआ जसु गावहि गावणहारीआ ॥अंग 645
  19. से हरि नामु धिआवहि जो हरि रतिआ ॥अंग 646
  20. जिना अंदरि कूड़ु वरतै सचु न भावई ॥अंग 646
  21. हरि चोली देह सवारी कढि पैधी भगति करि ॥अंग 646
  22. हरि सजण मेलि पिआरे मिलि पंथु दसाई ॥अंग 647
  23. हरि रसना हरि जसु गावै खरी सुहावणी ॥अंग 647
  24. गुरमुखि सखीआ सिख गुरू मेलाईआ ॥अंग 648
  25. धनु संपै माइआ संचीऐ अंते दुखदाई ॥अंग 648
  26. तिन का खाधा पैधा माइआ सभु पवितु है जो नामि हरि राते ॥अंग 648
  27. जो हरि नामु धिआइदे से हरि हरि नामि रते मन माही ॥अंग 649
  28. धंनु धनु भाग तिना भगत जना जो हरि नामा हरि मुखि कहतिआ ॥अंग 649
  29. हउ बलिहारी तिंन कंउ जो गुरमुखि सिखा ॥अंग 650
  30. हम ढाढी हरि प्रभ खसम के नित गावह हरि गुण छंता ॥अंग 650
  31. हरि हरि संत मिलहु मेरे भाई हरि नामु द्रिड़ावहु इक किनका ॥अंग 650
  32. हरि हरि मेलि साध जन संगति मुखि बोली हरि हरि भली बाणि ॥अंग 651
  33. जिना गुरु गोपिआ आपणा ते नर बुरिआरी ॥अंग 651
  34. हरि हरि अपणी दइआ करि हरि बोली बैणी ॥अंग 652
  35. हरि दासन सिउ प्रीति है हरि दासन को मितु ॥अंग 652
  36. नानक प्रीति लाई तिनि साचै तिसु बिनु रहणु न जाई ॥अंग 652
  37. रैणि दिनसु परभाति तूहै ही गावणा ॥अंग 652
  38. अंतरि अगिआनु भई मति मधिम सतिगुर की परतीति नाही ॥अंग 652
  39. मनमुख माइआ मोहि विआपे दूजै भाइ मनूआ थिरु नाहि ॥अंग 652
  40. संत भगत परवाणु जो प्रभि भाइआ ॥अंग 652
  41. गुरमुखि अंतरि सांति है मनि तनि नामि समाइ ॥अंग 653
  42. सतिगुर पुरखि जि मारिआ भ्रमि भ्रमिआ घरु छोडि गइआ ॥अंग 653
  43. गुरि सचै बधा थेहु रखवाले गुरि दिते ॥अंग 653
  44. सभे गला आपि थाटि बहालीओनु ॥अंग 653
  45. तू करण कारण समरथु हहि करते मै तुझ बिनु अवरु न कोई ॥अंग 653
धनासरी (13)
  1. जो हरि सेवहि संत भगत तिन के सभि पाप निवारी ॥अंग 666
  2. हरि के संत जना हरि जपिओ तिन का दूखु भरमु भउ भागी ॥अंग 667
  3. हरि का संतु सतगुरु सत पुरखा जो बोलै हरि हरि बानी ॥अंग 667
  4. हम अंधुले अंध बिखै बिखु राते किउ चालह गुर चाली ॥अंग 667
  5. हरि हरि बूंद भए हरि सुआमी हम चात्रिक बिलल बिललाती ॥अंग 668
  6. कलिजुग का धरमु कहहु तुम भाई किव छूटह हम छुटकाकी ॥अंग 668
  7. उर धारि बीचारि मुरारि रमो रमु मनमोहन नामु जपीने ॥अंग 668
  8. हरि पड़ु हरि लिखु हरि जपि हरि गाउ हरि भउजलु पारि उतारी ॥अंग 669
  9. गुर प्रसादि को विरला पावै जिन कउ लिलाटि लिखिआ धुरि भाउ ॥1॥अंग 669
  10. सेवक सिख पूजण सभि आवहि सभि गावहि हरि हरि ऊतम बानी ॥अंग 669
  11. इछा पूरकु सरब सुखदाता हरि जा कै वसि है कामधेना ॥अंग 669
  12. मेरे साहा मै हरि दरसन सुखु होइ ॥अंग 670
  13. गुण गाइ विगसै सदा अनदिनु जा आपि साचे भावए ॥अंग 690
जैतसरी (11)
  1. मेरै हीअरै रतनु नामु हरि बसिआ गुरि हाथु धरिओ मेरै माथा ॥अंग 696
  2. हीरा लालु अमोलकु है भारी बिनु गाहक मीका काखा ॥अंग 696
  3. हम बारिक कछूअ न जानह गति मिति तेरे मूरख मुगध इआना ॥अंग 697
  4. सतिगुरु साजनु पुरखु वड पाइआ हरि रसकि रसकि फल लागिबा ॥अंग 697
  5. जिन हरि हिरदै नामु न बसिओ तिन मात कीजै हरि बांझा ॥अंग 697
  6. सतसंगति साध पाई वडभागी मनु चलतौ भइओ अरूड़ा ॥अंग 698
  7. हरि हरि सिमरहु अगम अपारा ॥अंग 698
  8. हरि हरि हरि हरि नामु जपाहा ॥अंग 698
  9. रसि रसि रामु रसालु सलाहा ॥अंग 699
  10. आपे जोगी जुगति जुगाहा ॥अंग 699
  11. मिलि सतसंगति संगि गुराहा ॥अंग 699
टोडी (1)
  1. हरि बिनु रहि न सकै मनु मेरा ॥अंग 711
बैराड़ी (6)
  1. सुनि मन अकथ कथा हरि नाम ॥अंग 719
  2. मन मिलि संत जना जसु गाइओ ॥अंग 719
  3. हरि जनु राम नाम गुन गावै ॥अंग 719
  4. जपि मन राम नामु निसतारा ॥अंग 720
  5. जपि मन हरि निरंजनु निरंकारा ॥अंग 720
  6. जपि मन हरि हरि नामु नित धिआइ ॥अंग 720
तिलंग (3)
  1. सभि आए हुकमि खसमाहु हुकमि सभ वरतनी ॥अंग 723
  2. नित निहफल करम कमाइ बफावै दुरमतीआ ॥अंग 723
  3. हरि कीआ कथा कहाणीआ गुरि मीति सुणाईआ ॥अंग 725
सूही (23)
  1. मनि राम नामु आराधिआ गुर सबदि गुरू गुर के ॥अंग 731
  2. हरि हरि नामु भजिओ पुरखोतमु सभि बिनसे दालद दलघा ॥अंग 731
  3. हरि नामा हरि रंङु है हरि रंङु मजीठै रंङु ॥अंग 731
  4. हरि हरि करहि नित कपटु कमावहि हिरदा सुधु न होई ॥अंग 732
  5. गुरमति नगरी खोजि खोजाई ॥अंग 732
  6. हरि क्रिपा करे मनि हरि रंगु लाए ॥अंग 732
  7. जिहवा हरि रसि रही अघाइ ॥अंग 733
  8. नीच जाति हरि जपतिआ उतम पदवी पाइ ॥अंग 733
  9. तिन॑ी अंतरि हरि आराधिआ जिन कउ धुरि लिखिआ लिखतु लिलारा ॥अंग 733
  10. जिथै हरि आराधीऐ तिथै हरि मितु सहाई ॥अंग 733
  11. जिस नो हरि सुप्रसंनु होइ सो हरि गुणा रवै सो भगतु सो परवानु ॥अंग 734
  12. तेरे कवन कवन गुण कहि कहि गावा तू साहिब गुणी निधाना ॥अंग 735
  13. तूं करता सभु किछु आपे जाणहि किआ तुधु पहि आखि सुणाईऐ ॥अंग 735
  14. जिन कै अंतरि वसिआ मेरा हरि हरि तिन के सभि रोग गवाए ॥अंग 735
  15. कीता करणा सरब रजाई किछु कीचै जे करि सकीऐ ॥अंग 736
  16. कोई आणि मिलावै मेरा प्रीतमु पिआरा हउ तिसु पहि आपु वेचाई ॥1॥अंग 757
  17. अंदरि सचा नेहु लाइआ प्रीतम आपणै ॥अंग 758
  18. हउमै रोगु गइआ भउ भागा सहजे सहजि मिलाइआ ॥अंग 773
  19. धरमु द्रिड़हु हरि नामु धिआवहु सिम्रिति नामु द्रिड़ाइआ ॥अंग 773
  20. गुरमुखि हरि गुण गाए ॥अंग 774
  21. आवहो संत जनहु गुण गावह गोविंद केरे राम ॥अंग 775
  22. गुरु संत जनो पिआरा मै मिलिआ मेरी त्रिसना बुझि गईआसे ॥अंग 776
  23. मारेहिसु वे जन हउमै बिखिआ जिनि हरि प्रभ मिलण न दितीआ ॥अंग 776
बिलावल (30)
  1. उदम मति प्रभ अंतरजामी जिउ प्रेरे तिउ करना ॥अंग 798
  2. हम मूरख मुगध अगिआन मती सरणागति पुरख अजनमा ॥अंग 799
  3. हमरा चितु लुभत मोहि बिखिआ बहु दुरमति मैलु भरा ॥अंग 799
  4. आवहु संत मिलहु मेरे भाई मिलि हरि हरि कथा करहु ॥अंग 799
  5. खत्री ब्राहमणु सूदु वैसु को जापै हरि मंत्रु जपैनी ॥अंग 800
  6. अनद मूलु धिआइओ पुरखोतमु अनदिनु अनद अनंदे ॥अंग 800
  7. बोलहु भईआ राम नामु पतित पावनो ॥अंग 800
  8. आपै आपु खाइ हउ मेटै अनदिनु हरि रस गीत गवईआ ॥अंग 833
  9. हरि हरि नामु सीतल जलु धिआवहु हरि चंदन वासु सुगंध गंधईआ ॥अंग 833
  10. गुरमुखि अगम अगोचरु धिआइआ हउ बलि बलि सतिगुर सति पुरखईआ ॥अंग 834
  11. सतिगुरु परचै मनि मुंद्रा पाई गुर का सबदु तनि भसम द्रिड़ईआ ॥अंग 835
  12. अंतरि पिआस उठी प्रभ केरी सुणि गुर बचन मनि तीर लगईआ ॥अंग 835
  13. मै मनि तनि प्रेमु अगम ठाकुर का खिनु खिनु सरधा मनि बहुतु उठईआ ॥अंग 836
  14. मेरा हरि प्रभु सेजै आइआ मनु सुखि समाणा राम ॥अंग 844
  15. हरि प्रभु सजणु लोड़ि लहु मनि वसै वडभागु ॥अंग 845
  16. मेरा हरि प्रभु रावणि आईआ हउमै बिखु झागे राम ॥अंग 845
  17. उपदेसु गुरू सुणि मंनिआ धुरि मसतकि पूरा भागु ॥अंग 849
  18. तू हरि प्रभु आपि अगंमु है सभि तुधु उपाइआ ॥अंग 849
  19. सभना जीआ विचि हरि आपि सो भगता का मितु हरि ॥अंग 849
  20. सभ वडिआईआ हरि नाम विचि हरि गुरमुखि धिआईऐ ॥अंग 850
  21. गुर सतिगुर विचि नावै की वडी वडिआई हरि करतै आपि वधाई ॥अंग 850
  22. जिथै जाईऐ जगत महि तिथै हरि साई ॥अंग 851
  23. जितने पातिसाह साह राजे खान उमराव सिकदार हहि तितने सभि हरि के कीए ॥अंग 851
  24. जिस नो हरि भगति सचु बखसीअनु सो सचा साहु ॥अंग 852
  25. जिनी गुरमुखि हरि नाम धनु न खटिओ से देवालीए जुग माहि ॥अंग 852
  26. हरि धनु रतन जवेहरी सो गुरि हरि धनु हरि पासहु देवाइआ ॥अंग 853
  27. सतिगुर की वडिआई सतिगुरि दिती धुरहु हुकमु बुझि नीसाणु ॥अंग 853
  28. पारब्रहमि दइआलि सागरु तारिआ ॥अंग 854
  29. जो बोले पूरा सतिगुरू सो परमेसरि सुणिआ ॥अंग 854
  30. कोई निंदकु होवै सतिगुरू का फिरि सरणि गुर आवै ॥अंग 855
गोंड (6)
  1. जे मनि चिति आस रखहि हरि ऊपरि ता मन चिंदे अनेक अनेक फल पाई ॥अंग 859
  2. ऐसा हरि सेवीऐ नित धिआईऐ जो खिन महि किलविख सभि करे बिनासा ॥अंग 860
  3. हरि सिमरत सदा होइ अनंदु सुखु अंतरि सांति सीतल मनु अपना ॥अंग 860
  4. जितने साह पातिसाह उमराव सिकदार चउधरी सभि मिथिआ झूठु भाउ दूजा जाणु ॥अंग 861
  5. हरि अंतरजामी सभतै वरतै जेहा हरि कराए तेहा को करईऐ ॥अंग 861
  6. हरि दरसन कउ मेरा मनु बहु तपतै जिउ त्रिखावंतु बिनु नीर ॥1॥अंग 861
रामकली (6)
  1. जे वड भाग होवहि वडभागी ता हरि हरि नामु धिआवै ॥अंग 880
  2. राम जना मिलि भइआ अनंदा हरि नीकी कथा सुनाइ ॥अंग 880
  3. हरि के सखा साध जन नीके तिन ऊपरि हाथु वतावै ॥अंग 881
  4. जे वड भाग होवहि वड मेरे जन मिलदिआ ढिल न लाईऐ ॥अंग 881
  5. सतगुर दइआ करहु हरि मेलहु मेरे प्रीतम प्राण हरि राइआ ॥अंग 882
  6. सतगुरु दाता वडा वड पुरखु है जितु मिलिऐ हरि उर धारे ॥अंग 882
नट नारायण (15)
  1. मेरे मन जपि अहिनिसि नामु हरे ॥अंग 975
  2. राम जपि जन रामै नामि रले ॥अंग 975
  3. मेरे मन जपि हरि हरि नामु सखे ॥अंग 975
  4. मेरे मन जपि हरि हरि राम रंगे ॥अंग 976
  5. मेरे मन जपि हरि हरि नामु मने ॥अंग 976
  6. मेरे मन कलि कीरति हरि प्रवणे ॥अंग 976
  7. मेरे मन सेव सफल हरि घाल ॥अंग 977
  8. मन मिलु संतसंगति सुभवंती ॥अंग 977
  9. कोई आनि सुनावै हरि की हरि गाल ॥अंग 977
  10. राम मेरे मनि तनि नामु अधारे ॥अंग 980
  11. राम हम पाथर निरगुनीआरे ॥अंग 981
  12. राम हरि अंम्रित सरि नावारे ॥अंग 981
  13. राम गुर सरनि प्रभू रखवारे ॥अंग 982
  14. राम करि किरपा लेहु उबारे ॥अंग 982
  15. मेरे मन भजु ठाकुर अगम अपारे ॥अंग 983
माली गउड़ा (5)
  1. अनिक जतन करि रहे हरि अंतु नाही पाइआ ॥अंग 984
  2. जपि मन राम नामु सुखदाता ॥अंग 984
  3. सभि सिध साधिक मुनि जना मनि भावनी हरि धिआइओ ॥अंग 985
  4. मेरा मनु राम नामि रसि लागा ॥अंग 985
  5. मेरे मन भजु हरि हरि नामु गुपाला ॥अंग 985
मारू (13)
  1. जपिओ नामु सुक जनक गुर बचनी हरि हरि सरणि परे ॥अंग 995
  2. सिध समाधि जपिओ लिव लाई साधिक मुनि जपिआ ॥अंग 995
  3. हरि हरि नामु निधानु लै गुरमति हरि पति पाइ ॥अंग 996
  4. हउ पूंजी नामु दसाइदा को दसे हरि धनु रासि ॥अंग 996
  5. हरि हरि कथा सुणाइ प्रभ गुरमति हरि रिदै समाणी ॥अंग 996
  6. हरि भाउ लगा बैरागीआ वडभागी हरि मनि राखु ॥अंग 997
  7. हरि हरि भगति भरे भंडारा ॥अंग 997
  8. हरि हरि नामु जपहु मन मेरे ॥अंग 998
  9. सचा आपि सवारणहारा ॥अंग 1069
  10. हरि अगम अगोचरु सदा अबिनासी ॥अंग 1070
  11. नाम विहूणे भरमसहि आवहि जावहि नीत ॥अंग 1087
  12. सागरु देखउ डरि मरउ भै तेरै डरु नाहि ॥अंग 1087
  13. चड़ि बोहिथै चालसउ सागरु लहरी देइ ॥अंग 1087
तुखारी (4)
  1. अंतरि पिरी पिआरु किउ पिर बिनु जीवीऐ राम ॥अंग 1113
  2. हरि हरि अगम अगाधि अपरंपर अपरपरा ॥अंग 1114
  3. तू जगजीवनु जगदीसु सभ करता स्रिसटि नाथु ॥अंग 1115
  4. नावणु पुरबु अभीचु गुर सतिगुर दरसु भइआ ॥अंग 1116
केदारा (2)
  1. मेरे मन राम नाम नित गावीऐ रे ॥अंग 1118
  2. मेरे मन हरि हरि गुन कहु रे ॥अंग 1118
भैरों (7)
  1. हरि जन संत करि किरपा पगि लाइणु ॥अंग 1133
  2. बोलि हरि नामु सफल सा घरी ॥अंग 1134
  3. सुक्रितु करणी सारु जपमाली ॥अंग 1134
  4. सभि घट तेरे तू सभना माहि ॥अंग 1134
  5. हरि का संतु हरि की हरि मूरति जिसु हिरदै हरि नामु मुरारि ॥अंग 1134
  6. ते साधू हरि मेलहु सुआमी जिन जपिआ गति होइ हमारी ॥अंग 1135
  7. सतसंगति साई हरि तेरी जितु हरि कीरति हरि सुनणे ॥अंग 1135
बसंत (8)
  1. जिउ पसरी सूरज किरणि जोति ॥अंग 1177
  2. रैणि दिनसु दुइ सदे पए ॥अंग 1177
  3. राम नामु रतन कोठड़ी गड़ मंदरि एक लुकानी ॥अंग 1178
  4. तुम॑ वड पुरख वड अगम गुसाई हम कीरे किरम तुमनछे ॥अंग 1178
  5. मेरा इकु खिनु मनूआ रहि न सकै नित हरि हरि नाम रसि गीधे ॥अंग 1178
  6. मनु खिनु खिनु भरमि भरमि बहु धावै तिलु घरि नही वासा पाईऐ ॥अंग 1179
  7. आवण जाणु भइआ दुखु बिखिआ देह मनमुख सुंञी सुंञु ॥अंग 1179
  8. कांइआ नगरि इकु बालकु वसिआ खिनु पलु थिरु न रहाई ॥अंग 1191
सारंग (54)
  1. हरि के संत जना की हम धूरि ॥अंग 1198
  2. गोबिंद चरनन कउ बलिहारी ॥अंग 1198
  3. हरि हरि अंम्रित नामु देहु पिआरे ॥अंग 1199
  4. गोबिद की ऐसी कार कमाइ ॥अंग 1199
  5. मेरा मनु राम नामि मनु मानी ॥अंग 1199
  6. जपि मन राम नामु पड़्हु सारु ॥अंग 1200
  7. काहे पूत झगरत हउ संगि बाप ॥अंग 1200
  8. जपि मन जगंनाथ जगदीसरो जगजीवनो मनमोहन सिउ प्रीति लागी मै हरि हरि हरि टेक सभ दिनसु सभ राति ॥1॥ रहाउ ॥अंग 1200
  9. जपि मन नरहरे नरहर सुआमी हरि सगल देव देवा स्री राम राम नामा हरि प्रीतमु मोरा ॥1॥ रहाउ ॥अंग 1201
  10. जपि मन माधो मधुसूदनो हरि स्रीरंगो परमेसरो सति परमेसरो प्रभु अंतरजामी ॥अंग 1201
  11. जपि मन निरभउ ॥अंग 1201
  12. जपि मन गोविंदु हरि गोविंदु गुणी निधानु सभ स्रिसटि का प्रभो मेरे मन हरि बोलि हरि पुरखु अबिनासी ॥1॥ रहाउ ॥अंग 1202
  13. जपि मन सिरी रामु ॥अंग 1202
  14. आपे आपि निरंजना जिनि आपु उपाइआ ॥अंग 1237
  15. गुरमुखि चलतु रचाइओनु गुण परगटी आइआ ॥अंग 1238
  16. मनमुखि दूजा भरमु है दूजै लोभाइआ ॥अंग 1238
  17. हरि का नामु निधानु है सेविऐ सुखु पाई ॥अंग 1239
  18. नामु निरंजनु निरमला सुणिऐ सुखु होई ॥अंग 1239
  19. नाइ सुणिऐ मनु रहसीऐ नामे सांति आई ॥अंग 1240
  20. नाइ सुणिऐ सभ सिधि है रिधि पिछै आवै ॥अंग 1240
  21. नाइ सुणिऐ सुचि संजमो जमु नेड़ि न आवै ॥अंग 1240
  22. नाइ मंनिऐ सुखु ऊपजै नामे गति होई ॥अंग 1241
  23. नाइ मंनिऐ कुलु उधरै सभु कुटंबु सबाइआ ॥अंग 1241
  24. नाइ मंनिऐ दुरमति गई मति परगटी आइआ ॥अंग 1242
  25. नाइ मंनिऐ सुरति ऊपजै नामे मति होई ॥अंग 1242
  26. नामु निरंजन अलखु है किउ लखिआ जाई ॥अंग 1242
  27. बाहरि भसम लेपन करे अंतरि गुबारी ॥अंग 1243
  28. जिन कै हिरदै मैलु कपटु है बाहरु धोवाइआ ॥अंग 1243
  29. निंमु बिरखु बहु संचीऐ अंम्रित रसु पाइआ ॥अंग 1244
  30. जिन अंदरि निंदा दुसटु है नक वढे नक वढाइआ ॥अंग 1244
  31. सभु कोई है खसम का खसमहु सभु को होइ ॥अंग 1244
  32. सभना दाता आपि है आपे मेलणहारु ॥अंग 1244
  33. गुरमुखि हिरदै सांति है नाउ उगवि आइआ ॥अंग 1244
  34. सतसंगति नामु निधानु है जिथहु हरि पाइआ ॥अंग 1244
  35. सतिगुरु अंम्रित बिरखु है अंम्रित रसि फलिआ ॥अंग 1245
  36. भूपति राजे रंग राइ संचहि बिखु माइआ ॥अंग 1245
  37. गुरमुखि सभ पवितु है धनु संपै माइआ ॥अंग 1246
  38. सतिगुरु सेवनि से वडभागी ॥अंग 1246
  39. गणतै सेव न होवई कीता थाइ न पाइ ॥अंग 1246
  40. खान मलूक कहाइदे को रहणु न पाई ॥अंग 1246
  41. गड़ि॑ काइआ सीगार बहु भांति बणाई ॥अंग 1247
  42. नामु सलाहनि नामु मंनि असथिरु जगि सोई ॥अंग 1247
  43. नामु सलाहनि भाउ करि निज महली वासा ॥अंग 1247
  44. सभु को लेखे विचि है मनमुखु अहंकारी ॥अंग 1247
  45. लेखा पड़ीऐ हरि नामु फिरि लेखु न होई ॥अंग 1248
  46. मंगत जनु जाचै दानु हरि देहु सुभाइ ॥अंग 1248
  47. आस करे सभु लोकु बहु जीवणु जाणिआ ॥अंग 1248
  48. आसा विचि अति दुखु घणा मनमुखि चितु लाइआ ॥अंग 1249
  49. इसतरी पुरखै बहु प्रीति मिलि मोहु वधाइआ ॥अंग 1249
  50. इसत्री पुरखै अति नेहु बहि मंदु पकाइआ ॥अंग 1250
  51. नानक जिसु बिनु घड़ी न जीवणा विसरे सरै न बिंद ॥अंग 1250
  52. सावणु आइआ झिमझिमा हरि गुरमुखि नामु धिआइ ॥अंग 1250
  53. गुर पूरे की दाति नित देवै चड़ै सवाईआ ॥अंग 1250
  54. वडा आपि अगंमु है वडी वडिआई ॥अंग 1251
मलार (9)
  1. अनदिनु हरि हरि धिआइओ हिरदै मति गुरमति दूख विसारी ॥अंग 1262
  2. गंगा जमुना गोदावरी सरसुती ते करहि उदमु धूरि साधू की ताई ॥अंग 1263
  3. तिसु जन कउ हरि मीठ लगाना जिसु हरि हरि क्रिपा करै ॥अंग 1263
  4. जितने जीअ जंत प्रभि कीने तितने सिरि कार लिखावै ॥अंग 1263
  5. जिन॑ कै हीअरै बसिओ मेरा सतिगुरु ते संत भले भल भांति ॥अंग 1264
  6. अगमु अगोचरु नामु हरि ऊतमु हरि किरपा ते जपि लइआ ॥अंग 1264
  7. गुर परसादी अंम्रितु नही पीआ त्रिसना भूख न जाई ॥अंग 1265
  8. हरि जन बोलत स्रीराम नामा मिलि साधसंगति हरि तोर ॥1॥ रहाउ ॥अंग 1265
  9. राम राम बोलि बोलि खोजते बडभागी ॥अंग 1265
कानड़ा (61)
  1. मेरा मनु साध जनां मिलि हरिआ ॥अंग 1294
  2. मेरा मनु संत जना पग रेन ॥अंग 1294
  3. जपि मन राम नाम परगास ॥अंग 1295
  4. मेरै मनि राम नामु जपिओ गुर वाक ॥अंग 1295
  5. मेरे मन हरि हरि राम नामु जपि चीति ॥अंग 1295
  6. जपि मन राम नाम जगंनाथ ॥अंग 1296
  7. मन जापहु राम गुपाल ॥अंग 1296
  8. हरि गुन गावहु जगदीस ॥अंग 1296
  9. भजु रामो मनि राम ॥अंग 1297
  10. सतिगुर चाटउ पग चाट ॥अंग 1297
  11. जपि मन गोबिद माधो ॥अंग 1297
  12. हरि जसु गावहु भगवान ॥अंग 1297
  13. जपि मन राम नामु सुखु पावैगो ॥अंग 1308
  14. जपि मन हरि हरि नामु तरावैगो ॥अंग 1308
  15. मनु गुरमति रसि गुन गावैगो ॥अंग 1309
  16. मनु हरि रंगि राता गावैगो ॥अंग 1310
  17. मन गुरमति चाल चलावैगो ॥अंग 1310
  18. मनु सतिगुर सरनि धिआवैगो ॥अंग 1311
  19. राम नामु निधानु हरि गुरमति रखु उर धारि ॥अंग 1312
  20. गोविंदु गोविदु गोविदु हरि गोविदु गुणी निधानु ॥अंग 1312
  21. तूं आपे ही सिध साधिको तू आपे ही जुग जोगीआ ॥अंग 1313
  22. हरि हरि हरि हरि नामु है गुरमुखि पावै कोइ ॥अंग 1313
  23. हरि आपे आपि दइआलु हरि आपे करे सु होइ ॥अंग 1313
  24. सभ जोति तेरी जगजीवना तू घटि घटि हरि रंग रंगना ॥अंग 1313
  25. हरि हरि नामु धिआइ मन हरि दरगह पावहि मानु ॥अंग 1313
  26. हरि हरि नामु पवितु है नामु जपत दुखु जाइ ॥अंग 1313
  27. हरि हरि अंम्रितु नाम रसु हरि अंम्रितु हरि उर धारि ॥अंग 1314
  28. हरि कीरति उतमु नामु है विचि कलिजुग करणी सारु ॥अंग 1314
  29. राम नामु वखरु है ऊतमु हरि नाइकु पुरखु हमारा ॥अंग 1314
  30. हमरी जिहबा एक प्रभ हरि के गुण अगम अथाह ॥अंग 1314
  31. हरि करहु क्रिपा जगजीवना गुरु सतिगुरु मेलि दइआलु ॥अंग 1314
  32. हरि तुम॑ वड वडे वडे वड ऊचे सभ ऊपरि वडे वडौना ॥अंग 1315
  33. हमरे हरि जगजीवना हरि जपिओ हरि गुर मंत ॥अंग 1315
  34. हरि प्रभु सजणु नामु हरि मै मनि तनि नामु सरीरि ॥अंग 1315
  35. सुतिआ हरि प्रभु चेति मनि हरि सहजि समाधि समाइ ॥अंग 1315
  36. हरि इकसु सेती पिरहड़ी हरि इको मेरै चिति ॥अंग 1315
  37. पंचे सबद वजे मति गुरमति वडभागी अनहदु वजिआ ॥अंग 1315
  38. भगति सरोवरु उछलै सुभर भरे वहंनि ॥अंग 1316
  39. हरि हरि नाम असंख हरि हरि के गुन कथनु न जाहि ॥अंग 1316
  40. हरि अगमु अगोचरु अगमु हरि किउ करि हरि दरसनु पिखा ॥अंग 1316
  41. हरि हरि नामु अंम्रितु है हरि जपीऐ सतिगुर भाइ ॥अंग 1316
  42. हरि हरि नामु निधानु है गुरमुखि पाइआ जाइ ॥अंग 1316
  43. हउ वारिआ तिन कउ सदा सदा जिना सतिगुरु मेरा पिआरा देखिआ ॥अंग 1316
  44. राम नामु रमु रवि रहे रमु रामो रामु रमीति ॥अंग 1316
  45. हरि प्रभु सजणु लोड़ि लहु भागि वसै वडभागि ॥अंग 1317
  46. धनु धनु सुहावी सफल घड़ी जितु हरि सेवा मनि भाणी ॥अंग 1317
  47. हरि प्रभ रते लोइणा गिआन अंजनु गुरु देइ ॥अंग 1317
  48. गुरमुखि अंतरि सांति है मनि तनि नामि समाइ ॥अंग 1317
  49. तुधु आपे जगतु उपाइ कै तुधु आपे वसगति कीता ॥अंग 1317
  50. मन अंतरि हउमै रोगु है भ्रमि भूले मनमुख दुरजना ॥अंग 1317
  51. मनु तनु तामि सगारवा जां देखा हरि नैणे ॥अंग 1317
  52. जगंनाथ जगदीसर करते अपरंपर पुरखु अतोलु ॥अंग 1317
  53. हरि जन हरि हरि चउदिआ सरु संधिआ गावार ॥अंग 1317
  54. अखी प्रेमि कसाईआ हरि हरि नामु पिखंनि॑ ॥अंग 1318
  55. जलि थलि महीअलि पूरनो अपरंपरु सोई ॥अंग 1318
  56. गुरमुखि मिले सि सजणा हरि प्रभ पाइआ रंगु ॥अंग 1318
  57. हरि तूहै दाता सभस दा सभि जीअ तुम॑ारे ॥अंग 1318
  58. इछा मन की पूरीऐ जपीऐ सुख सागरु ॥अंग 1318
  59. हउ ढूंढेंदी सजणा सजणु मैडै नालि ॥अंग 1318
  60. नानक प्रीति लाई तिनि सचै तिसु बिनु रहणु न जाई ॥अंग 1318
  61. कोई गावै को सुणै को उचरि सुनावै ॥अंग 1318
कल्याण (12)
  1. रामा रम रामै अंतु न पाइआ ॥अंग 1319
  2. हरि जनु गुन गावत हसिआ ॥अंग 1319
  3. मेरे मन जपि हरि गुन अकथ सुनथई ॥अंग 1320
  4. हमरी चितवनी हरि प्रभु जानै ॥अंग 1320
  5. प्रभ कीजै क्रिपा निधान हम हरि गुन गावहगे ॥अंग 1321
  6. छका 1 ॥अंग 1321
  7. रामा रम रामो सुनि मनु भीजै ॥अंग 1323
  8. राम गुरु पारसु परसु करीजै ॥अंग 1324
  9. रामा रम रामो रामु रवीजै ॥अंग 1324
  10. रामा रम रामो पूज करीजै ॥अंग 1325
  11. रामा मै साधू चरन धुवीजै ॥अंग 1325
  12. रामा हम दासन दास करीजै ॥अंग 1326
प्रभाती (7)
  1. रसकि रसकि गुन गावह गुरमति लिव उनमनि नामि लगान ॥अंग 1335
  2. उगवै सूरु गुरमुखि हरि बोलहि सभ रैनि सम॑ालहि हरि गाल ॥अंग 1335
  3. इकु खिनु हरि प्रभि किरपा धारी गुन गाए रसक रसीक ॥अंग 1335
  4. अगम दइआल क्रिपा प्रभि धारी मुखि हरि हरि नामु हम कहे ॥अंग 1336
  5. मनि लागी प्रीति राम नाम हरि हरि जपिओ हरि प्रभु वडफा ॥अंग 1336
  6. गुर सतिगुरि नामु द्रिड़ाइओ हरि हरि हम मुए जीवे हरि जपिभा ॥अंग 1337
  7. जपि मन हरि हरि नामु निधान ॥अंग 1337