लुल्ला परिवारLulla Family
English
सिख वाणीनाम, सेवा और एकत्व

वाणी: महला 2

इस पृष्ठ पर
वाणी

महला 2, गुरु अंगद देव जी

1504-1552 · दूसरे गुरु · गुरमुखी लिपि को गढ़ने वाले · 62 सलोक

गुरु अंगद का असली नाम भाई लहिणा था। नानक से मिले 1532 में। मिलते ही नानक ने पहचान लिया कि यह व्यक्ति उत्तराधिकारी होने के योग्य है। नाम बदल कर "अंगद" (मेरा अंग) रखा। 1539 में नानक ने उनको गुरुगद्दी सौंपी, अपने बेटों को नहीं।

यह फ़ैसला बहुत क्रांतिकारी था। उस वक़्त की आध्यात्मिक परंपरा में गद्दी ख़ून के रिश्ते से आगे जाती थी। नानक ने योग्यता के आधार पर उत्तराधिकार की रीत डाल दी, और यही रीत आगे 10 गुरुओं तक चली।

उनका सबसे बड़ा योगदान: गुरमुखी लिपि को व्यवस्थित रूप दिया। पंजाबी अब एक बाक़ायदा लिपि में लिखी जा सकती थी, जो संस्कृत की देवनागरी से अलग थी, फ़ारसी की शाहमुखी से अलग थी, और आम लोग जिसे आसानी से पढ़ सकते थे।

आदि ग्रंथ में महला 2 के सिर्फ़ 62 सलोक हैं, मुख्यत: वारों में पिरोए हुए। मगर हर सलोक कसा हुआ है, एक-दो पंक्तियों में एक पूरी बात।

महला 2 के सलोक बिखरे हैं, मुख्यत: इन वारों में:

आदि ग्रंथ में इनके शबद

हर शबद अपनी पहली पंक्ति से, राग के अनुसार, ग्रंथ के क्रम में।

सिरी राग (2)
  1. जिसु पिआरे सिउ नेहु तिसु आगै मरि चलीऐ ॥अंग 83
  2. जो सिरु सांई ना निवै सो सिरु दीजै डारि ॥अंग 89
माझ (12)
  1. देंदे थावहु दिता चंगा मनमुखि ऐसा जाणीऐ ॥अंग 138
  2. अखी बाझहु वेखणा विणु कंना सुनणा ॥अंग 139
  3. दिसै सुणीऐ जाणीऐ साउ न पाइआ जाइ ॥अंग 139
  4. सेई पूरे साह जिनी पूरा पाइआ ॥अंग 146
  5. अठी पहरी अठ खंड नावा खंडु सरीरु ॥अंग 146
  6. पउणु गुरू पाणी पिता माता धरति महतु ॥अंग 146
  7. आखणु आखि न रजिआ सुनणि न रजे कंन ॥अंग 147
  8. मंत्री होइ अठूहिआ नागी लगै जाइ ॥ आपण हथी आपणै दे कूचा आपे लाइ ॥अंग 148
  9. नानक परखे आप कउ ता पारखु जाणु ॥अंग 148
  10. निहफलं तसि जनमसि जावतु ब्रहम न बिंदते ॥अंग 148
  11. अगी पाला कि करे सूरज केही राति ॥अंग 150
  12. दीखिआ आखि बुझाइआ सिफती सचि समेउ ॥अंग 150
आसा (21)
  1. जे सउ चंदा उगवहि सूरज चड़हि हजार ॥अंग 463
  2. इहु जगु सचै की है कोठड़ी सचे का विचि वासु ॥अंग 463
  3. नानक जीअ उपाइ कै लिखि नावै धरमु बहालिआ ॥अंग 463
  4. हउमै एहा जाति है हउमै करम कमाहि ॥अंग 466
  5. सेव कीती संतोखीइंी जिन॑ी सचो सचु धिआइआ ॥अंग 466
  6. जोग सबदं गिआन सबदं बेद सबदं ब्राहमणह ॥अंग 469
  7. एक क्रिसनं सरब देवा देव देवा त आतमा ॥अंग 469
  8. एह किनेही आसकी दूजै लगै जाइ ॥अंग 474
  9. सलामु जबाबु दोवै करे मुंढहु घुथा जाइ ॥अंग 474
  10. जितु सेविऐ सुखु पाईऐ सो साहिबु सदा सम॑ालीऐ ॥अंग 474
  11. चाकरु लगै चाकरी नाले गारबु वादु ॥अंग 474
  12. जो जीइ होइ सु उगवै मुह का कहिआ वाउ ॥अंग 474
  13. नालि इआणे दोसती कदे न आवै रासि ॥अंग 474
  14. नालि इआणे दोसती वडारू सिउ नेहु ॥अंग 474
  15. होइ इआणा करे कंमु आणि न सकै रासि ॥अंग 474
  16. चाकरु लगै चाकरी जे चलै खसमै भाइ ॥अंग 474
  17. एह किनेही दाति आपस ते जो पाईऐ ॥अंग 474
  18. एह किनेही चाकरी जितु भउ खसम न जाइ ॥अंग 475
  19. नानक अंत न जापन॑ी हरि ता के पारावार ॥अंग 475
  20. आपे साजे करे आपि जाई भि रखै आपि ॥अंग 475
  21. वडे कीआ वडिआईआ किछु कहणा कहणु न जाइ ॥अंग 475
सोरठ (1)
  1. नकि नथ खसम हथ किरतु धके दे ॥अंग 653
सूही (11)
  1. जिनी चलणु जाणिआ से किउ करहि विथार ॥अंग 787
  2. राति कारणि धनु संचीऐ भलके चलणु होइ ॥अंग 787
  3. बधा चटी जो भरे ना गुणु ना उपकारु ॥अंग 787
  4. मनहठि तरफ न जिपई जे बहुता घाले ॥अंग 787
  5. जिना भउ तिन॑ नाहि भउ मुचु भउ निभविआह ॥अंग 788
  6. तुरदे कउ तुरदा मिलै उडते कउ उडता ॥अंग 788
  7. नानक तिना बसंतु है जिन॑ घरि वसिआ कंतु ॥अंग 791
  8. पहिल बसंतै आगमनि तिस का करहु बीचारु ॥अंग 791
  9. मिलिऐ मिलिआ ना मिलै मिलै मिलिआ जे होइ ॥अंग 791
  10. किस ही कोई कोइ मंञु निमाणी इकु तू ॥अंग 791
  11. जां सुखु ता सहु राविओ दुखि भी संम॑ालिओइ ॥अंग 792
रामकली (7)
  1. जपु तपु सभु किछु मंनिऐ अवरि कारा सभि बादि ॥अंग 954
  2. नानक अंधा होइ कै रतना परखण जाइ ॥अंग 954
  3. रतना केरी गुथली रतनी खोली आइ ॥अंग 954
  4. अंधे कै राहि दसिऐ अंधा होइ सु जाइ ॥अंग 954
  5. साहिबि अंधा जो कीआ करे सुजाखा होइ ॥अंग 954
  6. सो किउ अंधा आखीऐ जि हुकमहु अंधा होइ ॥अंग 954
  7. नानक चिंता मति करहु चिंता तिस ही हेइ ॥अंग 955
मारू (1)
  1. आपे जाणै करे आपि आपे आणै रासि ॥अंग 1093
सारंग (9)
  1. गुरु कुंजी पाहू निवलु मनु कोठा तनु छति ॥अंग 1237
  2. आपि उपाए नानका आपे रखै वेक ॥अंग 1238
  3. साह चले वणजारिआ लिखिआ देवै नालि ॥अंग 1238
  4. जिन वडिआई तेरे नाम की ते रते मन माहि ॥अंग 1238
  5. कीता किआ सालाहीऐ करे सोइ सालाहि ॥अंग 1239
  6. तिसु सिउ कैसा बोलणा जि आपे जाणै जाणु ॥अंग 1239
  7. सिफति जिना कउ बखसीऐ सेई पोतेदार ॥अंग 1239
  8. कथा कहाणी बेदंी आणी पापु पुंनु बीचारु ॥अंग 1243
  9. जैसा करै कहावै तैसा ऐसी बनी जरूरति ॥अंग 1245
मलार (5)
  1. वैदा वैदु सुवैदु तू पहिलां रोगु पछाणु ॥अंग 1279
  2. सावणु आइआ हे सखी कंतै चिति करेहु ॥अंग 1280
  3. सावणु आइआ हे सखी जलहरु बरसनहारु ॥अंग 1280
  4. नाउ फकीरै पातिसाहु मूरख पंडितु नाउ ॥अंग 1288
  5. नानक दुनीआ कीआं वडिआईआं अगी सेती जालि ॥अंग 1290