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महला 3, गुरु अमर दास जी
1479-1574 · तीसरे गुरु · आनंद साहिब के रचयिता · 907 शबद
गुरु अमर दास को गुरुगद्दी मिली 73 साल की उम्र में। उनकी शुरुआत देर से हुई, मगर लम्बा रास्ता तय किया, 95 साल तक रहे।
तीन बड़े योगदान: (1) सिख परंपरा को जाति की जकड़न से बाहर निकाला। पहले हर आगंतुक को लंगर में बैठ कर खाना खाना होता था, फिर मिल सकते थे। 16वीं सदी में यह क्रान्तिकारी बात थी। (2) महिलाओं के हक़ में सती-प्रथा और पर्दा-प्रथा पर खुले सार्वजनिक बयान दिए। (3) आनंद साहिब लिखी, जो आज भी हर सिख संस्कार के अंत में पढ़ी जाती है।
आनंद साहिब 40 पउड़ियों में आत्मा-आनंद की पूरी बनावट खोलती है। यह "ज़िन्दगी कैसे जिएँ" वाला अस्तित्व का प्रश्न है, मगर इतना सरल कि बच्चे भी सुन कर समझ जाते हैं।
M3 की मुख्य रचनाएँ:
- आनंद साहिब (रामकली राग)अंग 917-922
- अनंदु मूल मंत्रअंग 917
- M3 की सलोक-वार रचनाएँगउड़ी, माझ, सूही, मलार में
आदि ग्रंथ में इनके शबद
हर शबद अपनी पहली पंक्ति से, राग के अनुसार, ग्रंथ के क्रम में।
सिरी राग (71)
- हउ सतिगुरु सेवी आपणा इक मनि इक चिति भाइ ॥अंग 26
- बहु भेख करि भरमाईऐ मनि हिरदै कपटु कमाइ ॥अंग 26
- जिस ही की सिरकार है तिस ही का सभु कोइ ॥अंग 27
- जिनी सुणि कै मंनिआ तिना निज घरि वासु ॥अंग 27
- जिनी इक मनि नामु धिआइआ गुरमती वीचारि ॥अंग 28
- हरि भगता हरि धनु रासि है गुर पूछि करहि वापारु ॥अंग 28
- सुख सागरु हरि नामु है गुरमुखि पाइआ जाइ ॥अंग 29
- सबदु न चीनै सदा दुखु हरि दरगहि पति खोइ ॥अंग 29
- घर ही सउदा पाईऐ अंतरि सभ वथु होइ ॥अंग 29
- सचा साहिबु सेवीऐ सचु वडिआई देइ ॥अंग 30
- त्रै गुण माइआ मोहु है गुरमुखि चउथा पदु पाइ ॥अंग 30
- अंम्रितु छोडि बिखिआ लोभाणे सेवा करहि विडाणी ॥अंग 31
- मनमुख करम कमावणे जिउ दोहागणि तनि सीगारु ॥अंग 31
- जा पिरु जाणै आपणा तनु मनु अगै धरेइ ॥अंग 31
- गुरमुखि क्रिपा करे भगति कीजै बिनु गुर भगति न होई ॥अंग 32
- धनु जननी जिनि जाइआ धंनु पिता परधानु ॥ सतगुरु सेवि सुखु पाइआ विचहु गइआ गुमानु ॥अंग 32
- गोविदु गुणी निधानु है अंतु न पाइआ जाइ ॥अंग 32
- कांइआ साधै उरध तपु करै विचहु हउमै न जाइ ॥अंग 33
- किरपा करे गुरु पाईऐ हरि नामो देइ द्रिड़ाइ ॥अंग 33
- जिनी पुरखी सतगुरु न सेविओ से दुखीए जुग चारि ॥अंग 34
- किसु हउ सेवी किआ जपु करी सतगुर पूछउ जाइ ॥अंग 34
- जे वेला वखतु वीचारीऐ ता कितु वेला भगति होइ ॥अंग 35
- आपणा भउ तिन पाइओनु जिन गुर का सबदु बीचारि ॥अंग 35
- बिनु गुर रोगु न तुटई हउमै पीड़ न जाइ ॥अंग 36
- तिना अनंदु सदा सुखु है जिना सचु नामु आधारु ॥अंग 36
- गुणवंती सचु पाइआ त्रिसना तजि विकार ॥अंग 36
- आपे कारणु करता करे स्रिसटि देखै आपि उपाइ ॥अंग 37
- सुणि सुणि काम गहेलीए किआ चलहि बाह लुडाइ ॥अंग 37
- इकि पिरु रावहि आपणा हउ कै दरि पूछउ जाइ ॥अंग 38
- हरि जी सचा सचु तू सभु किछु तेरै चीरै ॥अंग 38
- जगि हउमै मैलु दुखु पाइआ मलु लागी दूजै भाइ ॥अंग 39
- गुरमुखि क्रिपा करे भगति कीजै बिनु गुर भगति न होइ ॥अंग 64
- हउमै करम कमावदे जमडंडु लगै तिन आइ ॥अंग 65
- पंखी बिरखि सुहावड़ा सचु चुगै गुर भाइ ॥अंग 66
- गुरमुखि नामु धिआईऐ मनमुखि बूझ न पाइ ॥अंग 66
- माइआ मोहु मेरै प्रभि कीना आपे भरमि भुलाए ॥अंग 67
- सहजै नो सभ लोचदी बिनु गुर पाइआ न जाइ ॥अंग 68
- सतिगुरि मिलिऐ फेरु न पवै जनम मरण दुखु जाइ ॥अंग 69
- सतिगुरि सेविऐ मनु निरमला भए पवितु सरीर ॥अंग 69
- सदा हरि सचु मनि वसै निहचल मति अपारु ॥अंग 83
- होरु बिरहा सभ धातु है जब लगु साहिब प्रीति न होइ ॥अंग 83
- गुर सभा एव न पाईऐ ना नेड़ै ना दूरि ॥अंग 84
- कलउ मसाजनी किआ सदाईऐ हिरदै ही लिखि लेहु ॥अंग 84
- नदरी आवदा नालि न चलई वेखहु को विउपाइ ॥अंग 84
- कलम जलउ सणु मसवाणीऐ कागदु भी जलि जाउ ॥अंग 84
- होरु कूड़ु पड़णा कूड़ु बोलणा माइआ नालि पिआरु ॥अंग 84
- हउ हउ करती सभ मुई संपउ किसै न नालि ॥अंग 84
- हुकमु न जाणै बहुता रोवै ॥अंग 85
- मनमुख नाम विहूणिआ रंगु कसुंभा देखि न भुलु ॥अंग 85
- पड़ि पड़ि पंडित बेद वखाणहि माइआ मोह सुआइ ॥अंग 85
- सतिगुरु सेवि सुखु पाइआ सचु नामु गुणतासु ॥अंग 85
- पंडितु पड़ि पड़ि उचा कूकदा माइआ मोहि पिआरु ॥अंग 86
- जिनी सतिगुरु सेविआ तिनी नाउ पाइआ बूझहु करि बीचारु ॥अंग 86
- नानक सो सूरा वरीआमु जिनि विचहु दुसटु अहंकरणु मारिआ ॥अंग 86
- गुरि पूरै हरि नामु दिड़ाइआ तिनि विचहु भरमु चुकाइआ ॥अंग 86
- आतमा देउ पूजीऐ गुर कै सहजि सुभाइ ॥अंग 87
- मनमुखु लोकु समझाईऐ कदहु समझाइआ जाइ ॥अंग 87
- मनु वेकारी वेड़िआ वेकारा करम कमाइ ॥अंग 88
- सतिगुरु जिनी न सेविओ सबदि न कीतो वीचारु ॥अंग 88
- सो भगउती जोु भगवंतै जाणै ॥अंग 88
- अंतरि कपटु भगउती कहाए ॥अंग 88
- वेस करे कुरूपि कुलखणी मनि खोटै कूड़िआरि ॥अंग 89
- माइआ मोहु गुबारु है तिस दा न दिसै उरवारु न पारु ॥अंग 89
- मनमुख मैली कामणी कुलखणी कुनारि ॥अंग 89
- सबदि रती सोहागणी सतिगुर कै भाइ पिआरि ॥अंग 90
- सतिगुर कै भाणै जो चलै तिसु वडिआई वडी होइ ॥अंग 90
- नानक हरि नामु जिनी आराधिआ अनदिनु हरि लिव तार ॥अंग 90
- आपणे प्रीतम मिलि रहा अंतरि रखा उरि धारि ॥अंग 90
- गुर सेवा ते हरि पाईऐ जा कउ नदरि करेइ ॥अंग 90
- नानक गुरमुखि सेवीऐ सदा सदा दातारु ॥अंग 91
- सतिगुर मिलिऐ उलटी भई नव निधि खरचिउ खाउ ॥अंग 91
माझ (35)
- करमु होवै सतिगुरू मिलाए ॥अंग 109
- मेरा प्रभु निरमलु अगम अपारा ॥अंग 110
- इको आपि फिरै परछंना ॥अंग 111
- सबदि मरै सु मुआ जापै ॥अंग 111
- अंदरि हीरा लालु बणाइआ ॥अंग 112
- सभ घट आपे भोगणहारा ॥अंग 113
- गुरमुखि विरलै किनै चखि डीठी ॥अंग 113
- आपे रंगे सहजि सुभाए ॥अंग 114
- सतिगुरु सेविऐ वडी वडिआई ॥अंग 114
- आपु वंञाए ता सभ किछु पाए ॥अंग 115
- बिनु नावै सभ भरमि भुलाणी ॥अंग 116
- ऐथै साचे सु आगै साचे ॥अंग 116
- उतपति परलउ सबदे होवै ॥अंग 117
- सतिगुर साची सिख सुणाई ॥अंग 117
- अंम्रित नामु मंनि वसाए ॥अंग 118
- अंम्रितु वरसै सहजि सुभाए ॥अंग 119
- से सचि लागे जो तुधु भाए ॥अंग 119
- वरन रूप वरतहि सभ तेरे ॥अंग 120
- निरमल जोति सभ माहि समाणी ॥अंग 121
- गोविंदु ऊजलु ऊजल हंसा ॥अंग 121
- सचा सेवी सचु सालाही ॥अंग 122
- तेरे भगत सोहहि साचै दरबारे ॥अंग 122
- आतम राम परगासु गुर ते होवै ॥अंग 123
- इसु गुफा महि अखुट भंडारा ॥अंग 124
- गुरमुखि मिलै मिलाए आपे ॥अंग 124
- एका जोति जोति है सरीरा ॥अंग 125
- मेरा प्रभु भरपूरि रहिआ सभ थाई ॥अंग 126
- हरि आपे मेले सेव कराए ॥अंग 126
- ऊतम जनमु सुथानि है वासा ॥अंग 127
- मनमुख पड़हि पंडित कहावहि ॥अंग 128
- निरगुणु सरगुणु आपे सोई ॥अंग 128
- माइआ मोहु जगतु सबाइआ ॥अंग 129
- कलि कीरति परगटु चानणु संसारि ॥अंग 145
- भै विचि जंमै भै मरै भी भउ मन महि होइ ॥अंग 149
- भै विणु जीवै बहुतु बहुतु खुसीआ खुसी कमाइ ॥अंग 149
गउड़ी (39)
- गुरि मिलिऐ हरि मेला होई ॥अंग 157
- गुर ते गिआनु पाए जनु कोइ ॥अंग 158
- सु थाउ सचु मनु निरमलु होइ ॥अंग 158
- इकि गावत रहे मनि सादु न पाइ ॥अंग 158
- मनु मारे धातु मरि जाइ ॥अंग 159
- हउमै विचि सभु जगु बउराना ॥अंग 159
- सो किउ विसरै जिस के जीअ पराना ॥अंग 159
- तूं अकथु किउ कथिआ जाहि ॥अंग 160
- एकसु ते सभि रूप हहि रंगा ॥अंग 160
- मनमुखि सूता माइआ मोहि पिआरि ॥अंग 160
- सचा अमरु सचा पातिसाहु ॥अंग 161
- जिना गुरमुखि धिआइआ तिन पूछउ जाइ ॥अंग 161
- गुर सेवा जुग चारे होई ॥अंग 161
- सतिगुरु मिलै वडभागि संजोग ॥अंग 162
- जैसी धरती ऊपरिमेघुला बरसतु है किआ धरती मधे पाणी नाही ॥अंग 162
- सभु जगु कालै वसि है बाधा दूजै भाइ ॥अंग 162
- पेईअड़ै दिन चारि है हरि हरि लिखि पाइआ ॥अंग 162
- सतिगुर ते गिआनु पाइआ हरि ततु बीचारा ॥अंग 163
- मन का सूतकु दूजा भाउ ॥अंग 229
- गुरमुखि सेवा प्रान अधारा ॥अंग 229
- इसु जुग का धरमु पड़हु तुम भाई ॥अंग 230
- ब्रहमा मूलु वेद अभिआसा ॥अंग 230
- ब्रहमा वेदु पड़ै वादु वखाणै ॥अंग 231
- त्रै गुण वखाणै भरमु न जाइ ॥अंग 231
- नामु अमोलकु गुरमुखि पावै ॥अंग 232
- मन ही मनु सवारिआ भै सहजि सुभाइ ॥अंग 232
- सतिगुर ते जो मुह फेरे ते वेमुख बुरे दिसंनि ॥अंग 233
- बिनु हरि पिआरे रहि न साकै गुर बिनु महलु न पाईऐ ॥अंग 243
- कापरु तनि सुहावै जा पिर भावै गुरमती चितु लाईऐ ॥अंग 244
- दुबिधा सहजि समाए कामणि वरु पाए गुरमती रंगु लाए ॥अंग 245
- सबदु खेवटु विचि पाए हरि आपि लघाए इन बिधि दुतरु तरीऐ ॥अंग 245
- घरि बैठिआ हरि पाए सदा चितु लाए सहजे सति सुभाए ॥अंग 246
- गउड़ी रागि सुलखणी जे खसमै चिति करेइ ॥अंग 311
- हउमै जगतु भुलाइआ दुरमति बिखिआ बिकार ॥अंग 312
- माइआधारी अति अंना बोला ॥अंग 313
- मनमुखु अहंकारी महलु न जाणै खिनु आगै खिनु पीछै ॥अंग 314
- जिनि गुरु गोपिआ आपणा तिसु ठउर न ठाउ ॥अंग 314
- मनमुखु अगिआनु दुरमति अहंकारी ॥अंग 314
- गुरमुखि गिआनु बिबेक बुधि होइ ॥अंग 317
आसा (31)
- हरि दरसनु पावै वडभागि ॥अंग 360
- सबदि मुआ विचहु आपु गवाइ ॥अंग 361
- सतिगुर विचि वडी वडिआई ॥अंग 361
- मेरा प्रभु साचा गहिर गंभीर ॥अंग 361
- दूजै भाइ लगे दुखु पाइआ ॥अंग 362
- मनमुख मरहि मरि मरणु विगाड़हि ॥अंग 362
- लालै आपणी जाति गवाई ॥अंग 362
- मनमुखि झूठो झूठु कमावै ॥अंग 363
- भगति रता जनु सहजि सुभाइ ॥अंग 363
- गुरु साइरु सतिगुरु सचु सोइ ॥अंग 363
- सबदि मरै तिसु सदा अनंद ॥अंग 364
- निरति करे बहु वाजे वजाए ॥अंग 364
- हरि कै भाणै सतिगुरु मिलै सचु सोझी होई ॥अंग 365
- सासतु बेदु सिंम्रिति सरु तेरा सुरसरी चरण समाणी ॥अंग 422
- सतिगुर हमरा भरमु गवाइआ ॥अंग 423
- आसा आस करे सभु कोई ॥अंग 423
- गुर ते सांति ऊपजै जिनि त्रिसना अगनि बुझाई ॥अंग 424
- सुणि मन मंनि वसाइ तूं आपे आइ मिलै मेरे भाई ॥अंग 425
- घरै अंदरि सभु वथु है बाहरि किछु नाही ॥अंग 425
- आपै आपु पछाणिआ सादु मीठा भाई ॥अंग 426
- दोहागणी महलु न पाइन॑ी न जाणनि पिर का सुआउ ॥अंग 426
- सचे रते से निरमले सदा सची सोइ ॥अंग 426
- सभ नावै नो लोचदी जिसु क्रिपा करे सो पाए ॥अंग 427
- सचि रतीआ सोहागणी जिना गुर कै सबदि सीगारि ॥अंग 427
- अंम्रितु जिन॑ा चखाइओनु रसु आइआ सहजि सुभाइ ॥अंग 428
- सतिगुर ते गुण ऊपजै जा प्रभु मेलै सोइ ॥अंग 428
- विचहु आपु गइआ नाउ मंनिआ सचि मिलावा होइ ॥1॥अंग 429
- अन रस महि भोलाइआ बिनु नामै दुख पाइ ॥अंग 430
- अयो अंङै सभु जगु आइआ काखै घंङै कालु भइआ ॥अंग 434
- हम घरे साचा सोहिला साचै सबदि सुहाइआ राम ॥अंग 439
- साजन मेरे प्रीतमहु तुम सह की भगति करेहो ॥अंग 440
गूजरी (74)
- ध्रिगु इवेहा जीवणा जितु हरि प्रीति न पाइ ॥अंग 490
- हरि की सेवा ते मनहु चिंदिआ फलु पाईऐ दूजी सेवा जनमु बिरथा जाइ जी ॥1॥अंग 490
- जुग माहि नामु दुलंभु है गुरमुखि पाइआ जाइ ॥अंग 490
- राम राम सभु को कहै कहिऐ रामु न होइ ॥अंग 491
- तिसु जन सांति सदा मति निहचल जिस का अभिमानु गवाए ॥अंग 491
- ना कासी मति ऊपजै ना कासी मति जाइ ॥अंग 491
- एको नामु निधानु पंडित सुणि सिखु सचु सोई ॥अंग 492
- निरति करी इहु मनु नचाई ॥अंग 506
- इहु जगतु ममता मुआ जीवण की बिधि नाहि ॥अंग 508
- अंदरि सहसा दुखु है आपै सिरि धंधै मार ॥अंग 508
- आपणा आपु उपाइओनु तदहु होरु न कोई ॥अंग 509
- साहिबु मेरा सदा है दिसै सबदु कमाइ ॥अंग 509
- सचा नामु धिआईऐ सभो वरतै सचु ॥अंग 509
- संजोगु विजोगु उपाइओनु स्रिसटी का मूलु रचाइआ ॥अंग 509
- सो जपु सो तपु जि सतिगुर भावै ॥अंग 509
- गुर की सिख को विरला लेवै ॥अंग 509
- माइआ मोहु अगिआनु है बिखमु अति भारी ॥अंग 509
- कबीर मुकति दुआरा संकुड़ा राई दसवै भाइ ॥अंग 509
- नानक मुकति दुआरा अति नीका नान॑ा होइ सु जाइ ॥अंग 509
- प्रभि संसारु उपाइ कै वसि आपणै कीता ॥अंग 510
- सतिगुर सिउ चितु न लाइओ नामु न वसिओ मनि आइ ॥अंग 510
- माइआ होई नागनी जगति रही लपटाइ ॥अंग 510
- ढाढी करे पुकार प्रभू सुणाइसी ॥अंग 510
- सभना का सहु एकु है सद ही रहै हजूरि ॥अंग 510
- रैणि सबाई जलि मुई कंत न लाइओ भाउ ॥अंग 510
- सभु जगु फिरि मै देखिआ हरि इको दाता ॥अंग 510
- काइआ हंस किआ प्रीति है जि पइआ ही छडि जाइ ॥अंग 510
- एको निहचल नाम धनु होरु धनु आवै जाइ ॥अंग 511
- मेरा साहिबु अति वडा सचु गहिर गंभीरा ॥अंग 511
- ध्रिगु तिन॑ा दा जीविआ जो हरि सुखु परहरि तिआगदे दुखु हउमै पाप कमाइ ॥अंग 511
- मनमुखु ऊधा कउलु है ना तिसु भगति न नाउ ॥अंग 511
- बिनु बूझे वडा फेरु पइआ फिरि आवै जाई ॥अंग 511
- जि सतिगुरु सेवे आपणा तिस नो पूजे सभु कोइ ॥अंग 511
- ए मन गुर की सिख सुणि हरि पावहि गुणी निधानु ॥अंग 511
- सतु संतोखु सभु सचु है गुरमुखि पविता ॥अंग 512
- ब्रहमु बिंदे सो ब्राहमणु कहीऐ जि अनदिनु हरि लिव लाए ॥अंग 512
- अंतरि कपटु मनमुख अगिआनी रसना झूठु बोलाइ ॥अंग 512
- जिना हुकमु मनाइओनु ते पूरे संसारि ॥अंग 512
- गुरमुखि धिआन सहज धुनि उपजै सचि नामि चितु लाइआ ॥अंग 512
- सतिगुरु जिना न सेविओ सबदि न लगो पिआरु ॥अंग 512
- भगत सचै दरि सोहदे सचै सबदि रहाए ॥अंग 513
- कलिजुग महि नामु निधानु भगती खटिआ हरि उतम पदु पाइआ ॥अंग 513
- त्रै गुण माइआ वेखि भुले जिउ देखि दीपकि पतंग पचाइआ ॥अंग 513
- माइआ मोहु परेतु है कामु क्रोधु अहंकारा ॥अंग 513
- हउमै ममता मोहणी मनमुखा नो गई खाइ ॥अंग 513
- इहु मनु केतड़िआ जुग भरमिआ थिरु रहै न आवै जाइ ॥अंग 513
- काइआ कोटु अपारु है मिलणा संजोगी ॥अंग 514
- वाहु वाहु आपि अखाइदा गुर सबदी सचु सोइ ॥अंग 514
- वाहु वाहु करती रसना सबदि सुहाई ॥अंग 514
- बजर कपाट काइआ गड़॑ भीतरि कूड़ु कुसतु अभिमानी ॥अंग 514
- वाहु वाहु करतिआ रैणि सुखि विहाइ ॥अंग 514
- वाहु वाहु सबदे उचरै वाहु वाहु हिरदै नालि ॥अंग 514
- ए मना अति लोभीआ नित लोभे राता ॥अंग 514
- वाहु वाहु तिस नो आखीऐ जि सचा गहिर गंभीरु ॥अंग 514
- वाहु वाहु गुरमुख सदा करहि मनमुख मरहि बिखु खाइ ॥अंग 515
- हरि कै भाणै गुरु मिलै सेवा भगति बनीजै ॥अंग 515
- वाहु वाहु से जन सदा करहि जिन॑ कउ आपे देइ बुझाइ ॥अंग 515
- वाहु वाहु साहिबु सचु है अंम्रितु जा का नाउ ॥अंग 515
- सतिगुर ते सचु पछाणीऐ सचि सहजि समाणी ॥अंग 515
- वाहु वाहु अगम अथाहु है वाहु वाहु सचा सोइ ॥अंग 515
- बिनु सतिगुर सेवे साति न आवई दूजी नाही जाइ ॥अंग 516
- ढाढी तिस नो आखीऐ जि खसमै धरे पिआरु ॥अंग 516
- गूजरी जाति गवारि जा सहु पाए आपणा ॥अंग 516
- सदा सदा सालाहीऐ सचे कउ बलि जाउ ॥अंग 516
- अंसा अउतारु उपाइओनु भाउ दूजा कीआ ॥अंग 516
- एहु सभु किछु आवण जाणु है जेता है आकारु ॥अंग 516
- मनु कुंचरु पीलकु गुरू गिआनु कुंडा जह खिंचे तह जाइ ॥अंग 516
- तिसु आगै अरदासि जिनि उपाइआ ॥अंग 516
- खेति मिआला उचीआ घरु उचा निरणउ ॥अंग 517
- मिठा सो जो भावदा सजणु सो जि रासि ॥अंग 517
- प्रभ पासि जन की अरदासि तू सचा सांई ॥अंग 517
- आसा करता जगु मुआ आसा मरै न जाइ ॥अंग 517
- आसा मनसा मरि जाइसी जिनि कीती सो लै जाइ ॥अंग 517
- आपे जगतु उपाइओनु करि पूरा थाटु ॥अंग 517
बिहागड़ा (32)
- गुर सेवा ते सुखु पाईऐ होर थै सुखु न भालि ॥अंग 548
- सिफति खजाना बखस है जिसु बखसै सो खरचै खाइ ॥अंग 548
- नानक गिआनी जगु जीता जगि जीता सभु कोइ ॥अंग 548
- तिन॑ भउ संसा किआ करे जिन सतिगुरु सिरि करतारु ॥अंग 549
- गुरमुखि सचै भावदे दरि सचै सचिआर ॥अंग 549
- गुर की सेवा चाकरी भै रचि कार कमाइ ॥अंग 549
- मनि परतीति न आईआ सहजि न लगो भाउ ॥अंग 549
- आपणा आपु न पछाणै मूड़ा अवरा आखि दुखाए ॥अंग 549
- सा रसना जलि जाउ जिनि हरि का सुआउ न पाइआ ॥अंग 550
- सा रसना जलि जाउ जिनि हरि का नाउ विसारिआ ॥अंग 550
- दरवेसी को जाणसी विरला को दरवेसु ॥अंग 550
- नानक तरवरु एकु फलु दुइ पंखेरू आहि ॥अंग 550
- करम धरम सभि बंधना पाप पुंन सनबंधु ॥अंग 551
- गुरमुखि प्रभु सेवहि सद साचा अनदिनु सहजि पिआरि ॥अंग 551
- कहिऐ कथिऐ न पाईऐ अनदिनु रहै सदा गुण गाइ ॥अंग 551
- सेखा अंदरहु जोरु छडि तू भउ करि झलु गवाइ ॥अंग 551
- सतिगुर की सेवा सफल है जे को करे चितु लाइ ॥अंग 552
- नामि रता सतिगुरू है कलिजुग बोहिथु होइ ॥अंग 552
- इकि सतिगुर की सेवा करहि चाकरी हरि नामे लगै पिआरु ॥अंग 552
- एहा संधिआ परवाणु है जितु हरि प्रभु मेरा चिति आवै ॥अंग 553
- प्रिउ प्रिउ करती सभु जगु फिरी मेरी पिआस न जाइ ॥अंग 553
- नानक बिनु सतिगुर भेटे जगु अंधु है अंधे करम कमाइ ॥अंग 554
- सतिगुरू फुरमाइआ कारी एह करेहु ॥अंग 554
- माणसु भरिआ आणिआ माणसु भरिआ आइ ॥अंग 554
- इहु जगतु जीवतु मरै जा इस नो सोझी होइ ॥अंग 554
- किआ जाणा किव मरहगे कैसा मरणा होइ ॥अंग 555
- रामु रामु करता सभु जगु फिरै रामु न पाइआ जाइ ॥अंग 555
- ए मन इहु धनु नामु है जितु सदा सदा सुखु होइ ॥अंग 555
- हउमै विचि जगतु मुआ मरदो मरदा जाइ ॥अंग 555
- धुरि खसमै का हुकमु पइआ विणु सतिगुर चेतिआ न जाइ ॥अंग 556
- सभु किछु हुकमे आवदा सभु किछु हुकमे जाइ ॥अंग 556
- सो जोगी जुगति सो पाए जिस नो गुरमुखि नामु परापति होइ ॥अंग 556
वडहंस (60)
- मनि मैलै सभु किछु मैला तनि धोतै मनु हछा न होइ ॥अंग 558
- नदरी सतगुरु सेवीऐ नदरी सेवा होइ ॥अंग 558
- माइआ मोहु गुबारु है गुर बिनु गिआनु न होई ॥अंग 559
- सोहागणी सदा मुखु उजला गुर कै सहजि सुभाइ ॥अंग 559
- अंम्रित नामु सद मीठा लागा गुर सबदी सादु आइआ ॥अंग 559
- गुरमुखि सचु संजमु ततु गिआनु ॥अंग 559
- रसना हरि सादि लगी सहजि सुभाइ ॥अंग 560
- पूरे गुर ते नामु पाइआ जाइ ॥अंग 560
- हउमै नावै नालि विरोधु है दुइ न वसहि इक ठाइ ॥अंग 560
- अनदिनु सचु सलाहणा धनु धनु वडभाग हमारा ॥1॥अंग 564
- मनूआ दह दिस धावदा ओहु कैसे हरि गुण गावै ॥अंग 565
- आपणे पिर कै रंगि रती मुईए सोभावंती नारे ॥अंग 567
- गुरमुखि सभु वापारु भला जे सहजे कीजै राम ॥अंग 568
- कालु जालु जमु जोहि न साकै साचै सबदि लिव लाए ॥अंग 569
- रतन पदारथ वणजीअहि सतिगुरि दीआ बुझाई राम ॥अंग 569
- सचा सउदा हरि नामु है सचा वापारा राम ॥अंग 570
- ए मन मेरिआ आवा गउणु संसारु है अंति सचि निबेड़ा राम ॥अंग 571
- प्रभु सचड़ा हरि सालाहीऐ कारजु सभु किछु करणै जोगु ॥अंग 582
- सुणिअहु कंत महेलीहो पिरु सेविहु सबदि वीचारि ॥अंग 583
- रोवहि पिरहि विछुंनीआ मै पिरु सचड़ा है सदा नाले ॥अंग 584
- इहु सरीरु जजरी है इस नो जरु पहुचै आए ॥अंग 584
- सबदि रते वड हंस है सचु नामु उरि धारि ॥अंग 585
- मै जानिआ वड हंसु है ता मै कीआ संगु ॥अंग 585
- हंसा वेखि तरंदिआ बगां भि आया चाउ ॥अंग 585
- सतिगुरि सेविऐ हरि मनि वसै तिथै भउ कदे न होइ ॥अंग 586
- इकि सजण चले इकि चलि गए रहदे भी फुनि जाहि ॥अंग 586
- सतिगुर की सेवा चाकरी सुखी हूं सुख सारु ॥अंग 586
- होर विडाणी चाकरी ध्रिगु जीवणु ध्रिगु वासु ॥अंग 586
- सतिगुरि मिलिऐ भुख गई भेखी भुख न जाइ ॥अंग 586
- सतिगुरि सेविऐ सदा सुखु जनम मरण दुखु जाइ ॥अंग 587
- सजण मिले सजणा जिन सतगुर नालि पिआरु ॥अंग 587
- इकि सदा इकतै रंगि रहहि तिन कै हउ सद बलिहारै जाउ ॥अंग 587
- त्रिसना दाधी जलि मुई जलि जलि करे पुकार ॥अंग 588
- भेखी अगनि न बुझई चिंता है मन माहि ॥अंग 588
- कलि महि जमु जंदारु है हुकमे कार कमाइ ॥अंग 588
- एहा काइआ रोगि भरी बिनु सबदै दुखु हउमै रोगु न जाइ ॥अंग 588
- भगति करहि मरजीवड़े गुरमुखि भगति सदा होइ ॥अंग 589
- सतिगुर की सेव न कीनीआ किआ ओहु करे वीचारु ॥अंग 589
- रतना पारखु जो होवै सु रतना करे वीचारु ॥अंग 589
- सतिगुर की सेव न कीनीआ हरि नामि न लगो पिआरु ॥अंग 589
- बिनु सतिगुर सेवे जीअ के बंधना विचि हउमै करम कमाहि ॥अंग 589
- भगत जना कंउ आपि तुठा मेरा पिआरा आपे लइअनु जन लाइ ॥अंग 590
- सुणि सिखिऐ सादु न आइओ जिचरु गुरमुखि सबदि न लागै ॥अंग 590
- नानक नामु निधानु है गुरमुखि पाइआ जाइ ॥अंग 590
- कंचन काइआ निरमली जो सचि नामि सचि लागी ॥अंग 590
- मनमुखु काइरु करूपु है बिनु नावै नकु नाहि ॥अंग 591
- गुरमुखि सदा दरि सोहणे गुर का सबदु कमाहि ॥अंग 591
- सतिगुर की परतीति न आईआ सबदि न लागो भाउ ॥अंग 591
- ए मन ऐसा सतिगुरु खोजि लहु जितु सेविऐ जनम मरण दुखु जाइ ॥अंग 591
- बिनु सतिगुर सेवे जगतु मुआ बिरथा जनमु गवाइ ॥अंग 591
- इसु जग महि पुरखु एकु है होर सगली नारि सबाई ॥अंग 591
- जिन कंउ सतिगुरु भेटिआ से हरि कीरति सदा कमाहि ॥अंग 592
- हंउमै अंदरि खड़कु है खड़के खड़कि विहाइ ॥अंग 592
- गुरमुखि सेव न कीनीआ हरि नामि न लगो पिआरु ॥अंग 592
- इको सतिगुरु जागता होरु जगु सूता मोहि पिआसि ॥अंग 592
- जगतु अगिआनी अंधु है दूजै भाइ करम कमाइ ॥अंग 593
- हम घरि नामु खजाना सदा है भगति भरे भंडारा ॥अंग 593
- मनहठि किनै न पाइओ सभ थके करम कमाइ ॥अंग 593
- सतिगुर नो सभु को वेखदा जेता जगतु संसारु ॥अंग 594
- सतिगुरू न सेविओ मूरख अंध गवारि ॥अंग 594
सोरठ (61)
- सेवक सेव करहि सभि तेरी जिन सबदै सादु आइआ ॥अंग 599
- भगति खजाना भगतन कउ दीआ नाउ हरि धनु सचु सोइ ॥अंग 600
- दासनि दासु होवै ता हरि पाए विचहु आपु गवाई ॥अंग 600
- इकु पलु खिनु विसरहि तू सुआमी जाणउ बरस पचासा ॥अंग 601
- गुरमुखि भगति करहि प्रभ भावहि अनदिनु नामु वखाणे ॥अंग 601
- सो सिखु सखा बंधपु है भाई जि गुर के भाणे विचि आवै ॥अंग 601
- सतिगुरु सेवे सदा सुखु पाए हउमै सबदि समाणी ॥अंग 602
- सतिगुर मिलिऐ उलटी भई भाई जीवत मरै ता बूझ पाइ ॥अंग 602
- तिही गुणी त्रिभवणु विआपिआ भाई गुरमुखि बूझ बुझाइ ॥अंग 603
- सतिगुरु सुख सागरु जग अंतरि होर थै सुखु नाही ॥अंग 603
- बिनु सतिगुर सेवे बहुता दुखु लागा जुग चारे भरमाई ॥अंग 603
- सतिगुर सेवे ता सहज धुनि उपजै गति मति तद ही पाए ॥अंग 604
- हरि जी एह तेरी वडिआई ॥अंग 637
- निगुणिआ नो आपे बखसि लए भाई सतिगुर की सेवा लाइ ॥अंग 638
- सदा सुखु सोहागणी भाई अनदिनु रतीआ रंगु लाइ ॥1॥अंग 639
- हउमै जलते जलि मुए भ्रमि आए दूजै भाइ ॥अंग 643
- सफलिओ सतिगुरु सेविआ धंनु जनमु परवाणु ॥अंग 643
- पूरबि लिखिआ कमावणा जि करतै आपि लिखिआसु ॥अंग 643
- से सैण से सजणा जि गुरमुखि मिलहि सुभाइ ॥अंग 643
- माइआ ममता मोहणी जिनि विणु दंता जगु खाइआ ॥अंग 643
- घर ही महि अंम्रितु भरपूरु है मनमुखा सादु न पाइआ ॥अंग 644
- जिउ तनु कोलू पीड़ीऐ रतु न भोरी डेहि ॥अंग 644
- सजणु मैडा रंगुला रंगु लाए मनु लेइ ॥अंग 644
- सतिगुर की सेवा सफलु है जे को करे चितु लाइ ॥अंग 644
- मनमुख मंनु अजितु है दूजै लगै जाइ ॥अंग 644
- सतिगुर ते जो मुह फिरे से बधे दुख सहाहि ॥अंग 645
- जो सतिगुर ते मुह फिरे तिना ठउर न ठाउ ॥अंग 645
- थालै विचि तै वसतू पईओ हरि भोजनु अंम्रितु सारु ॥अंग 645
- जो धुरि मेले से मिलि रहे सतिगुर सिउ चितु लाइ ॥अंग 645
- सहजे जागै सहजे सोवै ॥अंग 646
- अंतरि गिआनु न आइओ जितु किछु सोझी पाइ ॥अंग 646
- सचा सउदा हटु सचु रतनी भरे भंडार ॥अंग 646
- सेखा चउचकिआ चउवाइआ एहु मनु इकतु घरि आणि ॥अंग 646
- हरि गुण तोटि न आवई कीमति कहणु न जाइ ॥अंग 646
- परथाइ साखी महा पुरख बोलदे साझी सगल जहानै ॥अंग 647
- गुरमुखि चितु न लाइओ अंति दुखु पहुता आइ ॥अंग 647
- पंडित मैलु न चुकई जे वेद पड़ै जुग चारि ॥अंग 647
- मनमुख हरि नामु न सेविआ दुखु लगा बहुता आइ ॥अंग 647
- हसती सिरि जिउ अंकसु है अहरणि जिउ सिरु देइ ॥अंग 647
- जिन गुरमुखि नामु धिआइआ आए ते परवाणु ॥अंग 648
- नानक नामु न चेतनी अगिआनी अंधुले अवरे करम कमाहि ॥अंग 648
- नानक सतिगुरु सेवहि आपणा से जन सचे परवाणु ॥अंग 648
- बिनु करमै नाउ न पाईऐ पूरै करमि पाइआ जाइ ॥अंग 648
- नानक नावहु घुथिआ हलतु पलतु सभु जाइ ॥अंग 648
- संता नालि वैरु कमावदे दुसटा नालि मोहु पिआरु ॥अंग 649
- सतिगुर की सेवा गाखड़ी सिरु दीजै आपु गवाइ ॥अंग 649
- महलु कुमहलु न जाणनी मूरख अपणै सुआइ ॥अंग 649
- ब्रहमु बिंदै तिस दा ब्रहमतु रहै एक सबदि लिव लाइ ॥अंग 649
- किआ गभरू किआ बिरधि है मनमुख त्रिसना भुख न जाइ ॥अंग 649
- गुर बिनु गिआनु न होवई ना सुखु वसै मनि आइ ॥अंग 650
- सिध साधिक नावै नो सभि खोजदे थकि रहे लिव लाइ ॥अंग 650
- पड़णा गुड़णा संसार की कार है अंदरि त्रिसना विकारु ॥अंग 650
- विणु मनु मारे कोइ न सिझई वेखहु को लिव लाइ ॥अंग 650
- जनम जनम की इसु मन कउ मलु लागी काला होआ सिआहु ॥अंग 651
- चहु जुगी कलि काली कांढी इक उतम पदवी इसु जुग माहि ॥अंग 651
- रे जन उथारै दबिओहु सुतिआ गई विहाइ ॥अंग 651
- सबदि रते हउमै गई सोभावंती नारि ॥अंग 651
- गुर सेवा ते सुखु ऊपजै फिरि दुखु न लगै आइ ॥अंग 651
- बिनु सबदै सुधु न होवई जे अनेक करै सीगार ॥अंग 651
- ए मन हरि जी धिआइ तू इक मनि इक चिति भाइ ॥अंग 653
- आपे सेवा लाइअनु आपे बखस करेइ ॥अंग 653
धनासरी (9)
- इहु धनु अखुटु न निखुटै न जाइ ॥अंग 663
- हरि नामु धनु निरमलु अति अपारा ॥अंग 664
- सदा धनु अंतरि नामु समाले ॥अंग 664
- जगु मैला मैलो होइ जाइ ॥अंग 664
- जो हरि सेवहि तिन बलि जाउ ॥अंग 665
- मनु मरै धातु मरि जाइ ॥अंग 665
- काचा धनु संचहि मूरख गावार ॥अंग 665
- नावै की कीमति मिति कही न जाइ ॥अंग 666
- हम भीखक भेखारी तेरे तू निज पति है दाता ॥अंग 666
सूही (46)
- नामै ही ते सभु किछु होआ बिनु सतिगुर नामु न जापै ॥अंग 753
- काइआ कामणि अति सुआलि॑उ पिरु वसै जिसु नाले ॥अंग 754
- दुनीआ न सालाहि जो मरि वंञसी ॥अंग 755
- हरि जी सूखमु अगमु है कितु बिधि मिलिआ जाइ ॥अंग 756
- सुख सोहिलड़ा हरि धिआवहु ॥अंग 767
- सो भगतु जो गुरमुखि होवै हउमै सबदि जलाइआ राम ॥अंग 768
- सबदि सचै सचु सोहिला जिथै सचे का होइ वीचारो राम ॥अंग 769
- जुग चारे धन जे भवै बिनु सतिगुर सोहागु न होई राम ॥अंग 769
- हरि हरे हरि गुण गावहु हरि गुरमुखे पाए राम ॥अंग 770
- जे लोड़हि वरु बालड़ीए ता गुर चरणी चितु लाए राम ॥अंग 771
- सोहिलड़ा हरि राम नामु गुर सबदी वीचारे राम ॥अंग 772
- सूहै वेसि दोहागणी पर पिरु रावण जाइ ॥अंग 785
- सूहवीए निमाणीए सो सहु सदा सम॑ालि ॥अंग 785
- आपे तखतु रचाइओनु आकास पताला ॥अंग 785
- सूहब ता सोहागणी जा मंनि लैहि सचु नाउ ॥अंग 785
- लोका वे हउ सूहवी सूहा वेसु करी ॥अंग 785
- हुकमी स्रिसटि साजीअनु बहु भिति संसारा ॥अंग 786
- सूहवीए सूहा सभु संसारु है जिन दुरमति दूजा भाउ ॥अंग 786
- सूहा रंगु विकारु है कंतु न पाइआ जाइ ॥अंग 786
- आपे आपि उपाइअनु आपि कीमति पाई ॥अंग 786
- सूहै वेसि कामणि कुलखणी जो प्रभ छोडि पर पुरख धरे पिआरु ॥अंग 786
- इहु जगु आपि उपाइओनु करि चोज विडानु ॥अंग 786
- सूहवीए सूहा वेसु छडि तू ता पिर लगी पिआरु ॥अंग 786
- मुंधे सूहा परहरहु लालु करहु सीगारु ॥अंग 787
- मोहु कूड़ु कुटंबु है मनमुखु मुगधु रता ॥अंग 787
- सतीआ एहि न आखीअनि जो मड़िआ लगि जलंनि॑ ॥अंग 787
- भी सो सतीआ जाणीअनि सील संतोखि रहंनि॑ ॥अंग 787
- कंता नालि महेलीआ सेती अगि जलाहि ॥अंग 787
- तुधु दुखु सुखु नालि उपाइआ लेखु करतै लिखिआ ॥अंग 787
- करतै कारणु जिनि कीआ सो जाणै सोई ॥अंग 787
- सचु धिआइनि से सचे गुर सबदि वीचारी ॥अंग 788
- कामणि तउ सीगारु करि जा पहिलां कंतु मनाइ ॥अंग 788
- काजल फूल तंबोल रसु ले धन कीआ सीगारु ॥अंग 788
- धन पिरु एहि न आखीअनि बहनि इकठे होइ ॥अंग 788
- भै बिनु भगति न होवई नामि न लगै पिआरु ॥अंग 788
- हरि सालाही सदा सदा तनु मनु सउपि सरीरु ॥अंग 789
- सचा अमरु चलाइओनु करि सचु फुरमाणु ॥अंग 789
- आपे हुकमु चलाइदा जगु धंधै लाइआ ॥अंग 789
- काइआ कोटु रचाइआ हरि सचै आपे ॥अंग 789
- माइआ मोहु सभु कूड़ु है कूड़ो होइ गइआ ॥अंग 790
- दरि मंगतु जाचै दानु हरि दीजै क्रिपा करि ॥अंग 790
- ढाढी गुण गावै नित जनमु सवारिआ ॥अंग 790
- जि प्रभु सालाहे आपणा सो सोभा पाए ॥अंग 791
- आपे बखसे दइआ करि गुर सतिगुर बचनी ॥अंग 791
- हरि हरि नामु सलाहीऐ सचु कार कमावै ॥अंग 791
- हउ किआ सालाही किरम जंतु वडी तेरी वडिआई ॥अंग 792
बिलावल (33)
- ध्रिगु ध्रिगु खाइआ ध्रिगु ध्रिगु सोइआ ध्रिगु ध्रिगु कापड़ु अंगि चड़ाइआ ॥अंग 796
- अतुलु किउ तोलिआ जाइ ॥अंग 797
- साहिब ते सेवकु सेव साहिब ते किआ को कहै बहाना ॥अंग 797
- पूरा थाटु बणाइआ पूरै वेखहु एक समाना ॥अंग 797
- गुरमुखि प्रीति जिस नो आपे लाए ॥अंग 798
- पूरे गुर ते वडिआई पाई ॥अंग 798
- जगु कऊआ मुखि चुंच गिआनु ॥अंग 832
- आदित वारि आदि पुरखु है सोई ॥अंग 841
- आदि पुरखु आपे स्रिसटि साजे ॥अंग 842
- बिलावलु तब ही कीजीऐ जब मुखि होवै नामु ॥अंग 849
- दूजै भाइ बिलावलु न होवई मनमुखि थाइ न पाइ ॥अंग 849
- बिलावलु करिहु तुम॑ पिआरिहो एकसु सिउ लिव लाइ ॥अंग 849
- ब्रहमु बिंदहि ते ब्राहमणा जे चलहि सतिगुर भाइ ॥अंग 850
- सतिगुर की सेव न कीतीआ सबदि न लगो भाउ ॥अंग 850
- सतिगुर ते खाली को नही मेरै प्रभि मेलि मिलाए ॥अंग 850
- गुर सेवा ते हरि पाईऐ जा कउ नदरि करेइ ॥अंग 850
- ध्रिगु एह आसा दूजे भाव की जो मोहि माइआ चितु लाए ॥अंग 850
- आसा मनसा जगि मोहणी जिनि मोहिआ संसारु ॥अंग 851
- पूरै भागि सतिगुरु पाईऐ जे हरि प्रभु बखस करेइ ॥अंग 851
- ए मन गुर की सिख सुणि पाइहि गुणी निधानु ॥अंग 851
- अंदरि कपटु सदा दुखु है मनमुख धिआनु न लागै ॥अंग 851
- गुरमुखि सदा हरि रंगु है हरि का नाउ मनि भाइआ ॥अंग 851
- मनमुख मैले मरहि गवार ॥अंग 852
- इसु जुग महि भगती हरि धनु खटिआ होरु सभु जगतु भरमि भुलाइआ ॥अंग 852
- नानक सो सालाहीऐ जिसु वसि सभु किछु होइ ॥अंग 852
- गुरमुखि संसा मूलि न होवई चिंता विचहु जाइ ॥अंग 853
- कालु मारि मनसा मनहि समाणी अंतरि निरमलु नाउ ॥अंग 853
- जगतु जलंदा रखि लै आपणी किरपा धारि ॥अंग 853
- हउमै माइआ मोहणी दूजै लगै जाइ ॥अंग 853
- जिन॑ी नामु विसारिआ कूड़े कहण कहंनि॑ ॥अंग 854
- जिन॑ी सतिगुरु सेविआ ताणु निताणे तिसु ॥अंग 854
- अपणा आपु न पछाणई हरि प्रभु जाता दूरि ॥अंग 854
- हरि प्रभु सचा सोहिला गुरमुखि नामु गोविंदु ॥अंग 854
रामकली (54)
- सतजुगि सचु कहै सभु कोई ॥अंग 880
- सरमै दीआ मुंद्रा कंनी पाइ जोगी खिंथा करि तू दइआ ॥अंग 908
- भगति खजाना गुरमुखि जाता सतिगुरि बूझि बुझाई ॥1॥अंग 909
- हरि की पूजा दुलंभ है संतहु कहणा कछू न जाई ॥1॥अंग 910
- हम कुचल कुचील अति अभिमानी मिलि सबदे मैलु उतारी ॥1॥अंग 910
- नामु खजाना गुर ते पाइआ त्रिपति रहे आघाई ॥1॥अंग 911
- अनंदु भइआ मेरी माए सतिगुरू मै पाइआ ॥अंग 917
- साची लिवै बिनु देह निमाणी ॥अंग 917
- अनदु सुणहु वडभागीहो सगल मनोरथ पूरे ॥अंग 922
- सतिगुरु सहजै दा खेतु है जिस नो लाए भाउ ॥अंग 947
- मनमुखु दुख का खेतु है दुखु बीजे दुखु खाइ ॥अंग 947
- सतिगुरि मिलिऐ सदा सुखु जिस नो आपे मेले सोइ ॥अंग 947
- सचै तखतु रचाइआ बैसण कउ जांई ॥अंग 947
- नानक महिदी करि कै रखिआ सो सहु नदरि करेइ ॥अंग 947
- वेकी स्रिसटि उपाईअनु सभ हुकमि आवै जाइ समाही ॥अंग 947
- भरमि भुलाई सभु जगु फिरी फावी होई भालि ॥अंग 947
- धंधा धावत दिनु गइआ रैणि गवाई सोइ ॥अंग 948
- इकि आपणी सिफती लाइअनु दे सतिगुर मती ॥अंग 948
- किउ करि इहु मनु मारीऐ किउ करि मिरतकु होइ ॥अंग 948
- जीवत मरणा सभु को कहै जीवन मुकति किउ होइ ॥अंग 948
- दूजा भाउ रचाइओनु त्रै गुण वरतारा ॥अंग 948
- मन का झूठा झूठु कमावै ॥अंग 948
- सो तपा जि इहु तपु घाले ॥अंग 948
- राति दिनसु उपाइअनु संसार की वरतणि ॥अंग 948
- अभिआगत एहि न आखीअनि जिन के चित महि भरमु ॥अंग 949
- अभिआगत एहि न आखीअनि जि पर घरि भोजनु करेनि ॥अंग 949
- अंबरु धरति विछोड़िअनु विचि सचा असराउ ॥अंग 949
- रैणाइर माहि अनंतु है कूड़ी आवै जाइ ॥अंग 949
- सहजे सतिगुरु न सेविओ विचि हउमै जनमि बिनासु ॥अंग 949
- छतीह जुग गुबारु सा आपे गणत कीनी ॥अंग 949
- इहु तनु सभो रतु है रतु बिनु तंनु न होइ ॥अंग 949
- रामकली रामु मनि वसिआ ता बनिआ सीगारु ॥अंग 950
- बिनु सतिगुर सेवे सांति न आवई दूजी नाही जाइ ॥अंग 950
- आपि अलिपतु सदा रहै होरि धंधै सभि धावहि ॥अंग 950
- सचा नामु धिआइ तू सभो वरतै सचु ॥अंग 950
- मनमुख बोलि न जाणनी ओना अंदरि कामु क्रोधु अहंकारु ॥अंग 950
- तुधु जेवडु दाता नाहि किसु आखि सुणाईऐ ॥अंग 951
- जि सतिगुर भावै सु मंनि लैनि सेई करम करेनि ॥अंग 951
- गुरू जिना का अंधुला सिख भी अंधे करम करेनि ॥अंग 951
- सभ नदरी अंदरि रखदा जेती सिसटि सभ कीती ॥अंग 951
- हरि का मंदरु आखीऐ काइआ कोटु गड़ु ॥अंग 952
- हरि मंदरु सोई आखीऐ जिथहु हरि जाता ॥अंग 953
- मूरखु होवै सो सुणै मूरख का कहणा ॥अंग 953
- हरि का सभु सरीरु है हरि रवि रहिआ सभु आपै ॥अंग 953
- काइआ हंस धुरि मेलु करतै लिखि पाइआ ॥अंग 954
- नउ दरवाजे काइआ कोटु है दसवै गुपतु रखीजै ॥अंग 954
- काइआ अंदरि गड़ु कोटु है सभि दिसंतर देसा ॥अंग 955
- मनमुखि मोहु गुबारु है दूजै भाइ बोलै ॥अंग 955
- से जन साचे सदा सदा जिनी हरि रसु पीता ॥अंग 955
- सो सतसंगति सबदि मिलै जो गुरमुखि चलै ॥अंग 956
- आसा अंदरि सभु को कोइ निरासा होइ ॥अंग 956
- ना किछु आसा हथि है केउ निरासा होइ ॥अंग 956
- ध्रिगु जीवणु संसार सचे नाम बिनु ॥अंग 956
- आपे आपि वरतदा आपि ताड़ी लाईअनु ॥अंग 956
मारू (75)
- जह बैसालहि तह बैसा सुआमी जह भेजहि तह जावा ॥अंग 993
- आवण जाणा ना थीऐ निज घरि वासा होइ ॥अंग 993
- हरि की चरणी लागि रहा विचहु आपु गवाइ ॥1॥अंग 994
- सचि रते से टोलि लहु से विरले संसारि ॥अंग 994
- मारू ते सीतलु करे मनूरहु कंचनु होइ ॥अंग 994
- जिस नो प्रेमु मंनि वसाए ॥अंग 1016
- हुकमी सहजे स्रिसटि उपाई ॥अंग 1043
- एको एकु वरतै सभु सोई ॥अंग 1044
- जगजीवनु साचा एको दाता ॥अंग 1045
- जो आइआ सो सभु को जासी ॥अंग 1047
- सचु सालाही गहिर गंभीरै ॥अंग 1048
- एको सेवी सदा थिरु साचा ॥अंग 1049
- सचै सचा तखतु रचाइआ ॥अंग 1050
- आपे आपु उपाइ उपंना ॥अंग 1051
- मारू सोलहे 3 ॥अंग 1052
- सो सचु सेविहु सिरजणहारा ॥अंग 1053
- सतिगुरु सेवनि से वडभागी ॥अंग 1054
- तिस दा अंतु न पाईऐ पारावारा ॥अंग 1055
- मेरै प्रभि साचै इकु खेलु रचाइआ ॥अंग 1056
- निहचलु एकु सदा सचु सोई ॥अंग 1057
- गुरमुखि नाद बेद बीचारु ॥अंग 1058
- आपे निआउ करे सभु साचा साचे साचि मिलाइदा ॥1॥अंग 1059
- आदि जुगादि दइआपति दाता ॥अंग 1060
- जुग छतीह कीओ गुबारा ॥अंग 1061
- ओसु तिलु न तमाइ वेपरवाहा ॥अंग 1062
- जो तुधु करणा सो करि पाइआ ॥अंग 1063
- काइआ कंचनु सबदु वीचारा ॥अंग 1064
- निरंकारि आकारु उपाइआ ॥अंग 1066
- अगम अगोचर वेपरवाहे ॥अंग 1067
- नदरी भगता लैहु मिलाए ॥अंग 1068
- गुर ते गिआनु पाइआ अति खड़गु करारा ॥अंग 1087
- केदारा रागा विचि जाणीऐ भाई सबदे करे पिआरु ॥अंग 1087
- निहकंटक राजु भुंचि तू गुरमुखि सचु कमाई ॥अंग 1087
- आपे करणी कार आपि आपे करे रजाइ ॥अंग 1087
- माइआ वेखि न भुलु तू मनमुख मूरखा ॥अंग 1087
- जिना गुरु नही भेटिआ भै की नाही बिंद ॥अंग 1088
- त्रिभवण ढूढी सजणा हउमै बुरी जगति ॥अंग 1088
- गुरमुखि आपे बखसिओनु हरि नामि समाणे ॥अंग 1088
- आपणा आपु पछाणिआ नामु निधानु पाइआ ॥अंग 1088
- पिर खुसीए धन रावीए धन उरि नामु सीगारु ॥अंग 1088
- तखति राजा सो बहै जि तखतै लाइक होई ॥अंग 1088
- सभना का पिरु एकु है पिर बिनु खाली नाहि ॥अंग 1088
- मन के अधिक तरंग किउ दरि साहिब छुटीऐ ॥अंग 1088
- हरि का नामु अमोलु है किउ कीमति कीजै ॥अंग 1088
- सहजि वणसपति फुलु फलु भवरु वसै भै खंडि ॥अंग 1089
- जो जन लूझहि मनै सिउ से सूरे परधाना ॥अंग 1089
- जोगी होवा जगि भवा घरि घरि भीखिआ लेउ ॥अंग 1089
- जितु दरि लेखा मंगीऐ सो दरु सेविहु न कोइ ॥अंग 1089
- सूरे एहि न आखीअहि अहंकारि मरहि दुखु पावहि ॥अंग 1089
- कागउ होइ न ऊजला लोहे नाव न पारु ॥अंग 1089
- मारू मारण जो गए मारि न सकहि गवार ॥अंग 1089
- दोवै तरफा उपाईओनु विचि सकति सिव वासा ॥अंग 1090
- होवा पंडितु जोतकी वेद पड़ा मुखि चारि ॥अंग 1090
- आपि उपाए करे आपि आपे नदरि करेइ ॥अंग 1090
- कंटकु कालु एकु है होरु कंटकु न सूझै ॥अंग 1090
- मनमुख कालु विआपदा मोहि माइआ लागे ॥अंग 1090
- आपे पिंडु सवारिओनु विचि नव निधि नामु ॥अंग 1090
- जिनी अंदरु भालिआ गुर सबदि सुहावै ॥अंग 1091
- इसु जुग महि नामु निधानु है नामो नालि चलै ॥अंग 1091
- मनमुख वापारै सार न जाणनी बिखु विहाझहि बिखु संग्रहहि बिख सिउ धरहि पिआरु ॥अंग 1091
- दुखु लगा बिनु सेविऐ हुकमु मंने दुखु जाइ ॥अंग 1091
- हरि नाम बिना जगतु है निरधनु बिनु नावै त्रिपति नाही ॥अंग 1091
- इसु जग महि संती धनु खटिआ जिना सतिगुरु मिलिआ प्रभु आइ ॥अंग 1092
- जिनि उपाई मेदनी सोई सार करेइ ॥अंग 1092
- अंतरि जपु तपु संजमो गुर सबदी जापै ॥अंग 1092
- लोकु अवगणा की बंन॑ै गंठड़ी गुण न विहाझै कोइ ॥अंग 1092
- गुण अवगुण समानि हहि जि आपि कीते करतारि ॥अंग 1092
- अंदरि राजा तखतु है आपे करे निआउ ॥अंग 1092
- मनु माणकु जिनि परखिआ गुर सबदी वीचारि ॥अंग 1093
- मनमुख अंदरु न भालनी मुठे अहंमते ॥अंग 1093
- सभे थोक विसारि इको मितु करि ॥अंग 1093
- भाणै हुकमु मनाइओनु भाणै सुखु पाइआ ॥अंग 1093
- जिन कउ अंदरि गिआनु नही भै की नाही बिंद ॥अंग 1093
- मन की पत्री वाचणी सुखी हू सुखु सारु ॥अंग 1093
- आपे करि करि वेखदा आपे सभु सचा ॥अंग 1094
भैरों (23)
- जाति का गरबु न करीअहु कोई ॥अंग 1127
- जोगी ग्रिही पंडित भेखधारी ॥अंग 1128
- जा कउ राखै अपणी सरणाई ॥अंग 1128
- मै कामणि मेरा कंतु करतारु ॥अंग 1128
- सो मुनि जि मन की दुबिधा मारे ॥अंग 1128
- राम नामु जगत निसतारा ॥अंग 1129
- नामे उधरे सभि जितने लोअ ॥अंग 1129
- गोविंद प्रीति सनकादिक उधारे ॥अंग 1129
- कलजुग महि राम नामु उर धारु ॥अंग 1129
- कलजुग महि बहु करम कमाहि ॥अंग 1129
- दुबिधा मनमुख रोगि विआपे त्रिसना जलहि अधिकाई ॥अंग 1130
- मनमुखि दुबिधा सदा है रोगी रोगी सगल संसारा ॥अंग 1130
- दुख विचि जंमै दुखि मरै दुख विचि कार कमाइ ॥अंग 1130
- सबदु बीचारे सो जनु साचा जिन कै हिरदै साचा सोई ॥अंग 1131
- मनमुख आसा नही उतरै दूजै भाइ खुआए ॥अंग 1131
- कलि महि प्रेत जिन॑ी रामु न पछाता सतजुगि परम हंस बीचारी ॥अंग 1131
- मनसा मनहि समाइ लै गुर सबदी वीचार ॥अंग 1132
- बाझु गुरू जगतु बउराना भूला चोटा खाई ॥अंग 1132
- हउमै माइआ मोहि खुआइआ दुखु खटे दुख खाइ ॥अंग 1132
- मेरी पटीआ लिखहु हरि गोविंद गोपाला ॥अंग 1133
- आपे दैत लाइ दिते संत जना कउ आपे राखा सोई ॥अंग 1133
- तिनि करतै इकु चलतु उपाइआ ॥अंग 1154
- गुर सेवा ते अंम्रित फलु पाइआ हउमै त्रिसन बुझाई ॥अंग 1155
बसंत (20)
- बसत्र उतारि दिगंबरु होगु ॥अंग 1169
- साहिब भावै सेवकु सेवा करै ॥अंग 1170
- माहा रुती महि सद बसंतु ॥अंग 1172
- राते साचि हरि नामि निहाला ॥अंग 1172
- हरि सेवे सो हरि का लोगु ॥अंग 1172
- अंतरि पूजा मन ते होइ ॥अंग 1173
- भगति वछलु हरि वसै मनि आइ ॥अंग 1173
- माइआ मोहु सबदि जलाए ॥अंग 1173
- पूरै भागि सचु कार कमावै ॥अंग 1174
- भगति करहि जन देखि हजूरि ॥अंग 1174
- नामि रते कुलां का करहि उधारु ॥अंग 1174
- बिनु करमा सभ भरमि भुलाई ॥अंग 1175
- क्रिपा करे सतिगुरू मिलाए ॥अंग 1175
- गुर सबदी हरि चेति सुभाइ ॥अंग 1175
- तेरा कीआ किरम जंतु ॥अंग 1176
- बनसपति मउली चड़िआ बसंतु ॥अंग 1176
- सभि जुग तेरे कीते होए ॥अंग 1176
- तिन॑ बसंतु जो हरि गुण गाइ ॥अंग 1176
- बसंतु चड़िआ फूली बनराइ ॥अंग 1176
- गुरु सालाही सद अपणा भाई गुर चरणी चितु लाई ॥1॥अंग 1177
सारंग (26)
- मन मेरे हरि कै नामि वडाई ॥अंग 1233
- मन मेरे हरि का नामु अति मीठा ॥अंग 1233
- मन मेरे हरि की अकथ कहाणी ॥अंग 1234
- नउमी नेमु सचु जे करै ॥अंग 1245
- पड़ि॑ पड़ि॑ पंडित मोुनी थके देसंतर भवि थके भेखधारी ॥अंग 1246
- नांगे आवणा नांगे जाणा हरि हुकमु पाइआ किआ कीजै ॥अंग 1246
- सहजे सुखि सुती सबदि समाइ ॥अंग 1247
- जिन॑ी नामु विसारिआ किआ जपु जापहि होरि ॥अंग 1247
- जिनी नामु विसारिआ बहु करम कमावहि होरि ॥अंग 1247
- जिचरु इहु मनु लहरी विचि है हउमै बहुतु अहंकारु ॥अंग 1247
- सो जपु तपु सेवा चाकरी जो खसमै भावै ॥अंग 1247
- विणु सतिगुर सेवे सुखु नही मरि जंमहि वारो वार ॥अंग 1248
- माइआ मोहि विसारिआ सचु मरणा हरि नामु ॥अंग 1248
- गुर का कहिआ जे करे सुखी हू सुखु सारु ॥अंग 1248
- सचु पुराणा ना थीऐ नामु न मैला होइ ॥अंग 1248
- मनमुख बोलि न जाणन॑ी ओना अंदरि कामु क्रोधु अहंकारु ॥अंग 1248
- हरि गुरमुखि तिन॑ी अराधिआ जिन॑ करमि परापति होइ ॥अंग 1248
- पड़ि पड़ि पंडित वादु वखाणदे माइआ मोह सुआइ ॥अंग 1249
- सचु वणजहि सचु सेवदे जि गुरमुखि पैरी पाहि ॥अंग 1249
- पराई अमाण किउ रखीऐ दिती ही सुखु होइ ॥अंग 1249
- मनि अनदु भइआ मिलिआ हरि प्रीतमु सरसे सजण संत पिआरे ॥अंग 1249
- गुरमुखि अंम्रितु नामु है जितु खाधै सभ भुख जाइ ॥अंग 1250
- बिनु सबदै जगि आन॑ेरु है सबदे परगटु होइ ॥अंग 1250
- माइआ मोहि विसारिआ गुर का भउ हेतु अपारु ॥अंग 1250
- अमरु वेपरवाहु है तिसु नालि सिआणप न चलई न हुजति करणी जाइ ॥अंग 1251
- दाति जोति सभ सूरति तेरी ॥अंग 1251
मलार (43)
- निरंकारु आकारु है आपे आपे भरमि भुलाए ॥अंग 1257
- जिनी हुकमु पछाणिआ से मेले हउमै सबदि जलाइ ॥अंग 1258
- गुरमुखि कोई विरला बूझै जिस नो नदरि करेइ ॥अंग 1258
- गुरु सालाही सदा सुखदाता प्रभु नाराइणु सोई ॥अंग 1258
- गण गंधरब नामे सभि उधरे गुर का सबदु वीचारि ॥अंग 1259
- सतिगुर ते पावै घरु दरु महलु सु थानु ॥अंग 1259
- एकसु बिनु मै अवरु न जाणा सतिगुरि दीआ बुझाई ॥1॥अंग 1260
- मेरा प्रभु साचा दूख निवारणु सबदे पाइआ जाई ॥अंग 1260
- हउमै बिखु मनु मोहिआ लदिआ अजगर भारी ॥अंग 1260
- इहु मनु गिरही कि इहु मनु उदासी ॥अंग 1261
- भ्रमि भ्रमि जोनि मनमुख भरमाई ॥अंग 1261
- जीवत मुकत गुरमती लागे ॥अंग 1262
- रसना नामु सभु कोई कहै ॥अंग 1262
- करमु होवै ता सतिगुरु पाईऐ विणु करमै पाइआ न जाइ ॥अंग 1276
- बिनु नावै जम डंडु सहै मरि जनमै वारो वार ॥अंग 1276
- हरि हरि क्रिपा करे गुर की कारै लाए ॥अंग 1277
- गुरि मिलिऐ मनु रहसीऐ जिउ वुठै धरणि सीगारु ॥अंग 1278
- ऊंनवि ऊंनवि आइआ अवरि करेंदा वंन ॥अंग 1280
- ऊंनवि ऊंनवि आइआ वरसै नीरु निपंगु ॥अंग 1280
- ऊंनवि ऊंनवि आइआ वरसै लाइ झड़ी ॥अंग 1280
- किआ उठि उठि देखहु बपुड़ें इसु मेघै हथि किछु नाहि ॥अंग 1280
- बाबीहा जिस नो तू पूकारदा तिस नो लोचै सभु कोइ ॥अंग 1281
- कलमलि होई मेदनी अरदासि करे लिव लाइ ॥अंग 1281
- नानक सो सालाहीऐ जिसु वसि सभु किछु होइ ॥अंग 1281
- अंम्रितु सदा वरसदा बूझनि बूझणहार ॥अंग 1281
- बाबीहा ना बिललाइ ना तरसाइ एहु मनु खसम का हुकमु मंनि ॥अंग 1282
- बाबीहा जल महि तेरा वासु है जल ही माहि फिराहि ॥अंग 1282
- इहु जलु सभ तै वरसदा वरसै भाइ सुभाइ ॥अंग 1282
- भिंनी रैणि चमकिआ वुठा छहबर लाइ ॥अंग 1282
- बाबीहा एहु जगतु है मत को भरमि भुलाइ ॥अंग 1283
- वुठै जीआ जुगति होइ धरणी नो सीगारु होइ ॥अंग 1283
- बाबीहा खसमै का महलु न जाणही महलु देखि अरदासि पाइ ॥अंग 1283
- बाबीहा भिंनी रैणि बोलिआ सहजे सचि सुभाइ ॥अंग 1283
- बाबीहा गुणवंती महलु पाइआ अउगणवंती दूरि ॥अंग 1283
- बाबीहा बेनती करे करि किरपा देहु जीअ दान ॥अंग 1284
- बाबीहै हुकमु पछाणिआ गुर कै सहजि सुभाइ ॥अंग 1284
- चात्रिक तू न जाणही किआ तुधु विचि तिखा है कितु पीतै तिख जाइ ॥अंग 1284
- बाबीहा अंम्रित वेलै बोलिआ तां दरि सुणी पुकार ॥अंग 1285
- बाबीहा इव तेरी तिखा न उतरै जे सउ करहि पुकार ॥अंग 1285
- सावणि सरसी कामणी गुर सबदी वीचारि ॥अंग 1285
- सावणि दझै गुण बाहरी जिसु दूजै भाइ पिआरु ॥अंग 1285
- गुर सबदी एकु पछाणिआ एको सचा सोइ ॥अंग 1285
- इंदु वरसै करि दइआ लोकां मनि उपजै चाउ ॥अंग 1285
प्रभाती (9)
- गुरमुखि विरला कोई बूझै सबदे रहिआ समाई ॥अंग 1332
- निरगुणीआरे कउ बखसि लै सुआमी आपे लैहु मिलाई ॥अंग 1333
- गुरमुखि हरि सालाहिआ जिंना तिन सलाहि हरि जाता ॥अंग 1333
- तुधु जेवडु मै अवरु न सूझै ना को होआ न होगु ॥1॥अंग 1333
- गुर सबदी मनु निरमलु होआ चूका मनि अभिमानु ॥अंग 1334
- आपे भांति बणाए बहु रंगी सिसटि उपाइ प्रभि खेलु कीआ ॥अंग 1334
- मेरे मन गुरु अपणा सालाहि ॥अंग 1334
- गुर परसादी वेखु तू हरि मंदरु तेरै नालि ॥अंग 1346
- भै भाइ जागे से जन जाग्रण करहि हउमै मैलु उतारि ॥अंग 1346