महला 3, गुरु अमर दास जी
1479-1574 · तीसरे गुरु · आनंद साहिब के रचयिता · 907 शबद
गुरु अमर दास को गुरुगद्दी मिली 73 साल की उम्र में। वो late starter थे, मगर लम्बा रास्ता तय किया, 95 साल तक रहे।
तीन बड़ी contributions: (1) Sikh परंपरा को caste-rigidity से बाहर निकाला। पहले हर visitor को langar में बैठ कर खाना खाना होता था, फिर मिल सकते थे। यह radical था 16वीं सदी में। (2) महिलाओं के लिए सती-प्रथा और पर्दा-प्रथा पर खुले public statements दिए। (3) आनंद साहिब लिखी, जो आज भी हर Sikh ceremony के अंत में पढ़ी जाती है।
आनंद साहिब 40 पउड़ियों में आत्मा-आनंद की anatomy है। यह existential कि-life-कैसी-जिएँ है, मगर इतना सरल कि बच्चे भी सुन कर समझ जाते हैं।
M3 की मुख्य रचनाएँ:
- आनंद साहिब (रामकली राग)अंग 917-922
- अनंदु मूल मंत्रअंग 917
- M3 की सलोक-वार रचनाएँगउड़ी, माझ, सूही, मलार में