लुल्ला परिवारLulla Family
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सिख वाणीनाम, सेवा और एकत्व

वाणी: महला 3

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वाणी

महला 3, गुरु अमर दास जी

1479-1574 · तीसरे गुरु · आनंद साहिब के रचयिता · 907 शबद

गुरु अमर दास को गुरुगद्दी मिली 73 साल की उम्र में। उनकी शुरुआत देर से हुई, मगर लम्बा रास्ता तय किया, 95 साल तक रहे।

तीन बड़े योगदान: (1) सिख परंपरा को जाति की जकड़न से बाहर निकाला। पहले हर आगंतुक को लंगर में बैठ कर खाना खाना होता था, फिर मिल सकते थे। 16वीं सदी में यह क्रान्तिकारी बात थी। (2) महिलाओं के हक़ में सती-प्रथा और पर्दा-प्रथा पर खुले सार्वजनिक बयान दिए। (3) आनंद साहिब लिखी, जो आज भी हर सिख संस्कार के अंत में पढ़ी जाती है।

आनंद साहिब 40 पउड़ियों में आत्मा-आनंद की पूरी बनावट खोलती है। यह "ज़िन्दगी कैसे जिएँ" वाला अस्तित्व का प्रश्न है, मगर इतना सरल कि बच्चे भी सुन कर समझ जाते हैं।

M3 की मुख्य रचनाएँ:

आदि ग्रंथ में इनके शबद

हर शबद अपनी पहली पंक्ति से, राग के अनुसार, ग्रंथ के क्रम में।

सिरी राग (71)
  1. हउ सतिगुरु सेवी आपणा इक मनि इक चिति भाइ ॥अंग 26
  2. बहु भेख करि भरमाईऐ मनि हिरदै कपटु कमाइ ॥अंग 26
  3. जिस ही की सिरकार है तिस ही का सभु कोइ ॥अंग 27
  4. जिनी सुणि कै मंनिआ तिना निज घरि वासु ॥अंग 27
  5. जिनी इक मनि नामु धिआइआ गुरमती वीचारि ॥अंग 28
  6. हरि भगता हरि धनु रासि है गुर पूछि करहि वापारु ॥अंग 28
  7. सुख सागरु हरि नामु है गुरमुखि पाइआ जाइ ॥अंग 29
  8. सबदु न चीनै सदा दुखु हरि दरगहि पति खोइ ॥अंग 29
  9. घर ही सउदा पाईऐ अंतरि सभ वथु होइ ॥अंग 29
  10. सचा साहिबु सेवीऐ सचु वडिआई देइ ॥अंग 30
  11. त्रै गुण माइआ मोहु है गुरमुखि चउथा पदु पाइ ॥अंग 30
  12. अंम्रितु छोडि बिखिआ लोभाणे सेवा करहि विडाणी ॥अंग 31
  13. मनमुख करम कमावणे जिउ दोहागणि तनि सीगारु ॥अंग 31
  14. जा पिरु जाणै आपणा तनु मनु अगै धरेइ ॥अंग 31
  15. गुरमुखि क्रिपा करे भगति कीजै बिनु गुर भगति न होई ॥अंग 32
  16. धनु जननी जिनि जाइआ धंनु पिता परधानु ॥ सतगुरु सेवि सुखु पाइआ विचहु गइआ गुमानु ॥अंग 32
  17. गोविदु गुणी निधानु है अंतु न पाइआ जाइ ॥अंग 32
  18. कांइआ साधै उरध तपु करै विचहु हउमै न जाइ ॥अंग 33
  19. किरपा करे गुरु पाईऐ हरि नामो देइ द्रिड़ाइ ॥अंग 33
  20. जिनी पुरखी सतगुरु न सेविओ से दुखीए जुग चारि ॥अंग 34
  21. किसु हउ सेवी किआ जपु करी सतगुर पूछउ जाइ ॥अंग 34
  22. जे वेला वखतु वीचारीऐ ता कितु वेला भगति होइ ॥अंग 35
  23. आपणा भउ तिन पाइओनु जिन गुर का सबदु बीचारि ॥अंग 35
  24. बिनु गुर रोगु न तुटई हउमै पीड़ न जाइ ॥अंग 36
  25. तिना अनंदु सदा सुखु है जिना सचु नामु आधारु ॥अंग 36
  26. गुणवंती सचु पाइआ त्रिसना तजि विकार ॥अंग 36
  27. आपे कारणु करता करे स्रिसटि देखै आपि उपाइ ॥अंग 37
  28. सुणि सुणि काम गहेलीए किआ चलहि बाह लुडाइ ॥अंग 37
  29. इकि पिरु रावहि आपणा हउ कै दरि पूछउ जाइ ॥अंग 38
  30. हरि जी सचा सचु तू सभु किछु तेरै चीरै ॥अंग 38
  31. जगि हउमै मैलु दुखु पाइआ मलु लागी दूजै भाइ ॥अंग 39
  32. गुरमुखि क्रिपा करे भगति कीजै बिनु गुर भगति न होइ ॥अंग 64
  33. हउमै करम कमावदे जमडंडु लगै तिन आइ ॥अंग 65
  34. पंखी बिरखि सुहावड़ा सचु चुगै गुर भाइ ॥अंग 66
  35. गुरमुखि नामु धिआईऐ मनमुखि बूझ न पाइ ॥अंग 66
  36. माइआ मोहु मेरै प्रभि कीना आपे भरमि भुलाए ॥अंग 67
  37. सहजै नो सभ लोचदी बिनु गुर पाइआ न जाइ ॥अंग 68
  38. सतिगुरि मिलिऐ फेरु न पवै जनम मरण दुखु जाइ ॥अंग 69
  39. सतिगुरि सेविऐ मनु निरमला भए पवितु सरीर ॥अंग 69
  40. सदा हरि सचु मनि वसै निहचल मति अपारु ॥अंग 83
  41. होरु बिरहा सभ धातु है जब लगु साहिब प्रीति न होइ ॥अंग 83
  42. गुर सभा एव न पाईऐ ना नेड़ै ना दूरि ॥अंग 84
  43. कलउ मसाजनी किआ सदाईऐ हिरदै ही लिखि लेहु ॥अंग 84
  44. नदरी आवदा नालि न चलई वेखहु को विउपाइ ॥अंग 84
  45. कलम जलउ सणु मसवाणीऐ कागदु भी जलि जाउ ॥अंग 84
  46. होरु कूड़ु पड़णा कूड़ु बोलणा माइआ नालि पिआरु ॥अंग 84
  47. हउ हउ करती सभ मुई संपउ किसै न नालि ॥अंग 84
  48. हुकमु न जाणै बहुता रोवै ॥अंग 85
  49. मनमुख नाम विहूणिआ रंगु कसुंभा देखि न भुलु ॥अंग 85
  50. पड़ि पड़ि पंडित बेद वखाणहि माइआ मोह सुआइ ॥अंग 85
  51. सतिगुरु सेवि सुखु पाइआ सचु नामु गुणतासु ॥अंग 85
  52. पंडितु पड़ि पड़ि उचा कूकदा माइआ मोहि पिआरु ॥अंग 86
  53. जिनी सतिगुरु सेविआ तिनी नाउ पाइआ बूझहु करि बीचारु ॥अंग 86
  54. नानक सो सूरा वरीआमु जिनि विचहु दुसटु अहंकरणु मारिआ ॥अंग 86
  55. गुरि पूरै हरि नामु दिड़ाइआ तिनि विचहु भरमु चुकाइआ ॥अंग 86
  56. आतमा देउ पूजीऐ गुर कै सहजि सुभाइ ॥अंग 87
  57. मनमुखु लोकु समझाईऐ कदहु समझाइआ जाइ ॥अंग 87
  58. मनु वेकारी वेड़िआ वेकारा करम कमाइ ॥अंग 88
  59. सतिगुरु जिनी न सेविओ सबदि न कीतो वीचारु ॥अंग 88
  60. सो भगउती जोु भगवंतै जाणै ॥अंग 88
  61. अंतरि कपटु भगउती कहाए ॥अंग 88
  62. वेस करे कुरूपि कुलखणी मनि खोटै कूड़िआरि ॥अंग 89
  63. माइआ मोहु गुबारु है तिस दा न दिसै उरवारु न पारु ॥अंग 89
  64. मनमुख मैली कामणी कुलखणी कुनारि ॥अंग 89
  65. सबदि रती सोहागणी सतिगुर कै भाइ पिआरि ॥अंग 90
  66. सतिगुर कै भाणै जो चलै तिसु वडिआई वडी होइ ॥अंग 90
  67. नानक हरि नामु जिनी आराधिआ अनदिनु हरि लिव तार ॥अंग 90
  68. आपणे प्रीतम मिलि रहा अंतरि रखा उरि धारि ॥अंग 90
  69. गुर सेवा ते हरि पाईऐ जा कउ नदरि करेइ ॥अंग 90
  70. नानक गुरमुखि सेवीऐ सदा सदा दातारु ॥अंग 91
  71. सतिगुर मिलिऐ उलटी भई नव निधि खरचिउ खाउ ॥अंग 91
माझ (35)
  1. करमु होवै सतिगुरू मिलाए ॥अंग 109
  2. मेरा प्रभु निरमलु अगम अपारा ॥अंग 110
  3. इको आपि फिरै परछंना ॥अंग 111
  4. सबदि मरै सु मुआ जापै ॥अंग 111
  5. अंदरि हीरा लालु बणाइआ ॥अंग 112
  6. सभ घट आपे भोगणहारा ॥अंग 113
  7. गुरमुखि विरलै किनै चखि डीठी ॥अंग 113
  8. आपे रंगे सहजि सुभाए ॥अंग 114
  9. सतिगुरु सेविऐ वडी वडिआई ॥अंग 114
  10. आपु वंञाए ता सभ किछु पाए ॥अंग 115
  11. बिनु नावै सभ भरमि भुलाणी ॥अंग 116
  12. ऐथै साचे सु आगै साचे ॥अंग 116
  13. उतपति परलउ सबदे होवै ॥अंग 117
  14. सतिगुर साची सिख सुणाई ॥अंग 117
  15. अंम्रित नामु मंनि वसाए ॥अंग 118
  16. अंम्रितु वरसै सहजि सुभाए ॥अंग 119
  17. से सचि लागे जो तुधु भाए ॥अंग 119
  18. वरन रूप वरतहि सभ तेरे ॥अंग 120
  19. निरमल जोति सभ माहि समाणी ॥अंग 121
  20. गोविंदु ऊजलु ऊजल हंसा ॥अंग 121
  21. सचा सेवी सचु सालाही ॥अंग 122
  22. तेरे भगत सोहहि साचै दरबारे ॥अंग 122
  23. आतम राम परगासु गुर ते होवै ॥अंग 123
  24. इसु गुफा महि अखुट भंडारा ॥अंग 124
  25. गुरमुखि मिलै मिलाए आपे ॥अंग 124
  26. एका जोति जोति है सरीरा ॥अंग 125
  27. मेरा प्रभु भरपूरि रहिआ सभ थाई ॥अंग 126
  28. हरि आपे मेले सेव कराए ॥अंग 126
  29. ऊतम जनमु सुथानि है वासा ॥अंग 127
  30. मनमुख पड़हि पंडित कहावहि ॥अंग 128
  31. निरगुणु सरगुणु आपे सोई ॥अंग 128
  32. माइआ मोहु जगतु सबाइआ ॥अंग 129
  33. कलि कीरति परगटु चानणु संसारि ॥अंग 145
  34. भै विचि जंमै भै मरै भी भउ मन महि होइ ॥अंग 149
  35. भै विणु जीवै बहुतु बहुतु खुसीआ खुसी कमाइ ॥अंग 149
गउड़ी (39)
  1. गुरि मिलिऐ हरि मेला होई ॥अंग 157
  2. गुर ते गिआनु पाए जनु कोइ ॥अंग 158
  3. सु थाउ सचु मनु निरमलु होइ ॥अंग 158
  4. इकि गावत रहे मनि सादु न पाइ ॥अंग 158
  5. मनु मारे धातु मरि जाइ ॥अंग 159
  6. हउमै विचि सभु जगु बउराना ॥अंग 159
  7. सो किउ विसरै जिस के जीअ पराना ॥अंग 159
  8. तूं अकथु किउ कथिआ जाहि ॥अंग 160
  9. एकसु ते सभि रूप हहि रंगा ॥अंग 160
  10. मनमुखि सूता माइआ मोहि पिआरि ॥अंग 160
  11. सचा अमरु सचा पातिसाहु ॥अंग 161
  12. जिना गुरमुखि धिआइआ तिन पूछउ जाइ ॥अंग 161
  13. गुर सेवा जुग चारे होई ॥अंग 161
  14. सतिगुरु मिलै वडभागि संजोग ॥अंग 162
  15. जैसी धरती ऊपरिमेघुला बरसतु है किआ धरती मधे पाणी नाही ॥अंग 162
  16. सभु जगु कालै वसि है बाधा दूजै भाइ ॥अंग 162
  17. पेईअड़ै दिन चारि है हरि हरि लिखि पाइआ ॥अंग 162
  18. सतिगुर ते गिआनु पाइआ हरि ततु बीचारा ॥अंग 163
  19. मन का सूतकु दूजा भाउ ॥अंग 229
  20. गुरमुखि सेवा प्रान अधारा ॥अंग 229
  21. इसु जुग का धरमु पड़हु तुम भाई ॥अंग 230
  22. ब्रहमा मूलु वेद अभिआसा ॥अंग 230
  23. ब्रहमा वेदु पड़ै वादु वखाणै ॥अंग 231
  24. त्रै गुण वखाणै भरमु न जाइ ॥अंग 231
  25. नामु अमोलकु गुरमुखि पावै ॥अंग 232
  26. मन ही मनु सवारिआ भै सहजि सुभाइ ॥अंग 232
  27. सतिगुर ते जो मुह फेरे ते वेमुख बुरे दिसंनि ॥अंग 233
  28. बिनु हरि पिआरे रहि न साकै गुर बिनु महलु न पाईऐ ॥अंग 243
  29. कापरु तनि सुहावै जा पिर भावै गुरमती चितु लाईऐ ॥अंग 244
  30. दुबिधा सहजि समाए कामणि वरु पाए गुरमती रंगु लाए ॥अंग 245
  31. सबदु खेवटु विचि पाए हरि आपि लघाए इन बिधि दुतरु तरीऐ ॥अंग 245
  32. घरि बैठिआ हरि पाए सदा चितु लाए सहजे सति सुभाए ॥अंग 246
  33. गउड़ी रागि सुलखणी जे खसमै चिति करेइ ॥अंग 311
  34. हउमै जगतु भुलाइआ दुरमति बिखिआ बिकार ॥अंग 312
  35. माइआधारी अति अंना बोला ॥अंग 313
  36. मनमुखु अहंकारी महलु न जाणै खिनु आगै खिनु पीछै ॥अंग 314
  37. जिनि गुरु गोपिआ आपणा तिसु ठउर न ठाउ ॥अंग 314
  38. मनमुखु अगिआनु दुरमति अहंकारी ॥अंग 314
  39. गुरमुखि गिआनु बिबेक बुधि होइ ॥अंग 317
आसा (31)
  1. हरि दरसनु पावै वडभागि ॥अंग 360
  2. सबदि मुआ विचहु आपु गवाइ ॥अंग 361
  3. सतिगुर विचि वडी वडिआई ॥अंग 361
  4. मेरा प्रभु साचा गहिर गंभीर ॥अंग 361
  5. दूजै भाइ लगे दुखु पाइआ ॥अंग 362
  6. मनमुख मरहि मरि मरणु विगाड़हि ॥अंग 362
  7. लालै आपणी जाति गवाई ॥अंग 362
  8. मनमुखि झूठो झूठु कमावै ॥अंग 363
  9. भगति रता जनु सहजि सुभाइ ॥अंग 363
  10. गुरु साइरु सतिगुरु सचु सोइ ॥अंग 363
  11. सबदि मरै तिसु सदा अनंद ॥अंग 364
  12. निरति करे बहु वाजे वजाए ॥अंग 364
  13. हरि कै भाणै सतिगुरु मिलै सचु सोझी होई ॥अंग 365
  14. सासतु बेदु सिंम्रिति सरु तेरा सुरसरी चरण समाणी ॥अंग 422
  15. सतिगुर हमरा भरमु गवाइआ ॥अंग 423
  16. आसा आस करे सभु कोई ॥अंग 423
  17. गुर ते सांति ऊपजै जिनि त्रिसना अगनि बुझाई ॥अंग 424
  18. सुणि मन मंनि वसाइ तूं आपे आइ मिलै मेरे भाई ॥अंग 425
  19. घरै अंदरि सभु वथु है बाहरि किछु नाही ॥अंग 425
  20. आपै आपु पछाणिआ सादु मीठा भाई ॥अंग 426
  21. दोहागणी महलु न पाइन॑ी न जाणनि पिर का सुआउ ॥अंग 426
  22. सचे रते से निरमले सदा सची सोइ ॥अंग 426
  23. सभ नावै नो लोचदी जिसु क्रिपा करे सो पाए ॥अंग 427
  24. सचि रतीआ सोहागणी जिना गुर कै सबदि सीगारि ॥अंग 427
  25. अंम्रितु जिन॑ा चखाइओनु रसु आइआ सहजि सुभाइ ॥अंग 428
  26. सतिगुर ते गुण ऊपजै जा प्रभु मेलै सोइ ॥अंग 428
  27. विचहु आपु गइआ नाउ मंनिआ सचि मिलावा होइ ॥1॥अंग 429
  28. अन रस महि भोलाइआ बिनु नामै दुख पाइ ॥अंग 430
  29. अयो अंङै सभु जगु आइआ काखै घंङै कालु भइआ ॥अंग 434
  30. हम घरे साचा सोहिला साचै सबदि सुहाइआ राम ॥अंग 439
  31. साजन मेरे प्रीतमहु तुम सह की भगति करेहो ॥अंग 440
गूजरी (74)
  1. ध्रिगु इवेहा जीवणा जितु हरि प्रीति न पाइ ॥अंग 490
  2. हरि की सेवा ते मनहु चिंदिआ फलु पाईऐ दूजी सेवा जनमु बिरथा जाइ जी ॥1॥अंग 490
  3. जुग माहि नामु दुलंभु है गुरमुखि पाइआ जाइ ॥अंग 490
  4. राम राम सभु को कहै कहिऐ रामु न होइ ॥अंग 491
  5. तिसु जन सांति सदा मति निहचल जिस का अभिमानु गवाए ॥अंग 491
  6. ना कासी मति ऊपजै ना कासी मति जाइ ॥अंग 491
  7. एको नामु निधानु पंडित सुणि सिखु सचु सोई ॥अंग 492
  8. निरति करी इहु मनु नचाई ॥अंग 506
  9. इहु जगतु ममता मुआ जीवण की बिधि नाहि ॥अंग 508
  10. अंदरि सहसा दुखु है आपै सिरि धंधै मार ॥अंग 508
  11. आपणा आपु उपाइओनु तदहु होरु न कोई ॥अंग 509
  12. साहिबु मेरा सदा है दिसै सबदु कमाइ ॥अंग 509
  13. सचा नामु धिआईऐ सभो वरतै सचु ॥अंग 509
  14. संजोगु विजोगु उपाइओनु स्रिसटी का मूलु रचाइआ ॥अंग 509
  15. सो जपु सो तपु जि सतिगुर भावै ॥अंग 509
  16. गुर की सिख को विरला लेवै ॥अंग 509
  17. माइआ मोहु अगिआनु है बिखमु अति भारी ॥अंग 509
  18. कबीर मुकति दुआरा संकुड़ा राई दसवै भाइ ॥अंग 509
  19. नानक मुकति दुआरा अति नीका नान॑ा होइ सु जाइ ॥अंग 509
  20. प्रभि संसारु उपाइ कै वसि आपणै कीता ॥अंग 510
  21. सतिगुर सिउ चितु न लाइओ नामु न वसिओ मनि आइ ॥अंग 510
  22. माइआ होई नागनी जगति रही लपटाइ ॥अंग 510
  23. ढाढी करे पुकार प्रभू सुणाइसी ॥अंग 510
  24. सभना का सहु एकु है सद ही रहै हजूरि ॥अंग 510
  25. रैणि सबाई जलि मुई कंत न लाइओ भाउ ॥अंग 510
  26. सभु जगु फिरि मै देखिआ हरि इको दाता ॥अंग 510
  27. काइआ हंस किआ प्रीति है जि पइआ ही छडि जाइ ॥अंग 510
  28. एको निहचल नाम धनु होरु धनु आवै जाइ ॥अंग 511
  29. मेरा साहिबु अति वडा सचु गहिर गंभीरा ॥अंग 511
  30. ध्रिगु तिन॑ा दा जीविआ जो हरि सुखु परहरि तिआगदे दुखु हउमै पाप कमाइ ॥अंग 511
  31. मनमुखु ऊधा कउलु है ना तिसु भगति न नाउ ॥अंग 511
  32. बिनु बूझे वडा फेरु पइआ फिरि आवै जाई ॥अंग 511
  33. जि सतिगुरु सेवे आपणा तिस नो पूजे सभु कोइ ॥अंग 511
  34. ए मन गुर की सिख सुणि हरि पावहि गुणी निधानु ॥अंग 511
  35. सतु संतोखु सभु सचु है गुरमुखि पविता ॥अंग 512
  36. ब्रहमु बिंदे सो ब्राहमणु कहीऐ जि अनदिनु हरि लिव लाए ॥अंग 512
  37. अंतरि कपटु मनमुख अगिआनी रसना झूठु बोलाइ ॥अंग 512
  38. जिना हुकमु मनाइओनु ते पूरे संसारि ॥अंग 512
  39. गुरमुखि धिआन सहज धुनि उपजै सचि नामि चितु लाइआ ॥अंग 512
  40. सतिगुरु जिना न सेविओ सबदि न लगो पिआरु ॥अंग 512
  41. भगत सचै दरि सोहदे सचै सबदि रहाए ॥अंग 513
  42. कलिजुग महि नामु निधानु भगती खटिआ हरि उतम पदु पाइआ ॥अंग 513
  43. त्रै गुण माइआ वेखि भुले जिउ देखि दीपकि पतंग पचाइआ ॥अंग 513
  44. माइआ मोहु परेतु है कामु क्रोधु अहंकारा ॥अंग 513
  45. हउमै ममता मोहणी मनमुखा नो गई खाइ ॥अंग 513
  46. इहु मनु केतड़िआ जुग भरमिआ थिरु रहै न आवै जाइ ॥अंग 513
  47. काइआ कोटु अपारु है मिलणा संजोगी ॥अंग 514
  48. वाहु वाहु आपि अखाइदा गुर सबदी सचु सोइ ॥अंग 514
  49. वाहु वाहु करती रसना सबदि सुहाई ॥अंग 514
  50. बजर कपाट काइआ गड़॑ भीतरि कूड़ु कुसतु अभिमानी ॥अंग 514
  51. वाहु वाहु करतिआ रैणि सुखि विहाइ ॥अंग 514
  52. वाहु वाहु सबदे उचरै वाहु वाहु हिरदै नालि ॥अंग 514
  53. ए मना अति लोभीआ नित लोभे राता ॥अंग 514
  54. वाहु वाहु तिस नो आखीऐ जि सचा गहिर गंभीरु ॥अंग 514
  55. वाहु वाहु गुरमुख सदा करहि मनमुख मरहि बिखु खाइ ॥अंग 515
  56. हरि कै भाणै गुरु मिलै सेवा भगति बनीजै ॥अंग 515
  57. वाहु वाहु से जन सदा करहि जिन॑ कउ आपे देइ बुझाइ ॥अंग 515
  58. वाहु वाहु साहिबु सचु है अंम्रितु जा का नाउ ॥अंग 515
  59. सतिगुर ते सचु पछाणीऐ सचि सहजि समाणी ॥अंग 515
  60. वाहु वाहु अगम अथाहु है वाहु वाहु सचा सोइ ॥अंग 515
  61. बिनु सतिगुर सेवे साति न आवई दूजी नाही जाइ ॥अंग 516
  62. ढाढी तिस नो आखीऐ जि खसमै धरे पिआरु ॥अंग 516
  63. गूजरी जाति गवारि जा सहु पाए आपणा ॥अंग 516
  64. सदा सदा सालाहीऐ सचे कउ बलि जाउ ॥अंग 516
  65. अंसा अउतारु उपाइओनु भाउ दूजा कीआ ॥अंग 516
  66. एहु सभु किछु आवण जाणु है जेता है आकारु ॥अंग 516
  67. मनु कुंचरु पीलकु गुरू गिआनु कुंडा जह खिंचे तह जाइ ॥अंग 516
  68. तिसु आगै अरदासि जिनि उपाइआ ॥अंग 516
  69. खेति मिआला उचीआ घरु उचा निरणउ ॥अंग 517
  70. मिठा सो जो भावदा सजणु सो जि रासि ॥अंग 517
  71. प्रभ पासि जन की अरदासि तू सचा सांई ॥अंग 517
  72. आसा करता जगु मुआ आसा मरै न जाइ ॥अंग 517
  73. आसा मनसा मरि जाइसी जिनि कीती सो लै जाइ ॥अंग 517
  74. आपे जगतु उपाइओनु करि पूरा थाटु ॥अंग 517
बिहागड़ा (32)
  1. गुर सेवा ते सुखु पाईऐ होर थै सुखु न भालि ॥अंग 548
  2. सिफति खजाना बखस है जिसु बखसै सो खरचै खाइ ॥अंग 548
  3. नानक गिआनी जगु जीता जगि जीता सभु कोइ ॥अंग 548
  4. तिन॑ भउ संसा किआ करे जिन सतिगुरु सिरि करतारु ॥अंग 549
  5. गुरमुखि सचै भावदे दरि सचै सचिआर ॥अंग 549
  6. गुर की सेवा चाकरी भै रचि कार कमाइ ॥अंग 549
  7. मनि परतीति न आईआ सहजि न लगो भाउ ॥अंग 549
  8. आपणा आपु न पछाणै मूड़ा अवरा आखि दुखाए ॥अंग 549
  9. सा रसना जलि जाउ जिनि हरि का सुआउ न पाइआ ॥अंग 550
  10. सा रसना जलि जाउ जिनि हरि का नाउ विसारिआ ॥अंग 550
  11. दरवेसी को जाणसी विरला को दरवेसु ॥अंग 550
  12. नानक तरवरु एकु फलु दुइ पंखेरू आहि ॥अंग 550
  13. करम धरम सभि बंधना पाप पुंन सनबंधु ॥अंग 551
  14. गुरमुखि प्रभु सेवहि सद साचा अनदिनु सहजि पिआरि ॥अंग 551
  15. कहिऐ कथिऐ न पाईऐ अनदिनु रहै सदा गुण गाइ ॥अंग 551
  16. सेखा अंदरहु जोरु छडि तू भउ करि झलु गवाइ ॥अंग 551
  17. सतिगुर की सेवा सफल है जे को करे चितु लाइ ॥अंग 552
  18. नामि रता सतिगुरू है कलिजुग बोहिथु होइ ॥अंग 552
  19. इकि सतिगुर की सेवा करहि चाकरी हरि नामे लगै पिआरु ॥अंग 552
  20. एहा संधिआ परवाणु है जितु हरि प्रभु मेरा चिति आवै ॥अंग 553
  21. प्रिउ प्रिउ करती सभु जगु फिरी मेरी पिआस न जाइ ॥अंग 553
  22. नानक बिनु सतिगुर भेटे जगु अंधु है अंधे करम कमाइ ॥अंग 554
  23. सतिगुरू फुरमाइआ कारी एह करेहु ॥अंग 554
  24. माणसु भरिआ आणिआ माणसु भरिआ आइ ॥अंग 554
  25. इहु जगतु जीवतु मरै जा इस नो सोझी होइ ॥अंग 554
  26. किआ जाणा किव मरहगे कैसा मरणा होइ ॥अंग 555
  27. रामु रामु करता सभु जगु फिरै रामु न पाइआ जाइ ॥अंग 555
  28. ए मन इहु धनु नामु है जितु सदा सदा सुखु होइ ॥अंग 555
  29. हउमै विचि जगतु मुआ मरदो मरदा जाइ ॥अंग 555
  30. धुरि खसमै का हुकमु पइआ विणु सतिगुर चेतिआ न जाइ ॥अंग 556
  31. सभु किछु हुकमे आवदा सभु किछु हुकमे जाइ ॥अंग 556
  32. सो जोगी जुगति सो पाए जिस नो गुरमुखि नामु परापति होइ ॥अंग 556
वडहंस (60)
  1. मनि मैलै सभु किछु मैला तनि धोतै मनु हछा न होइ ॥अंग 558
  2. नदरी सतगुरु सेवीऐ नदरी सेवा होइ ॥अंग 558
  3. माइआ मोहु गुबारु है गुर बिनु गिआनु न होई ॥अंग 559
  4. सोहागणी सदा मुखु उजला गुर कै सहजि सुभाइ ॥अंग 559
  5. अंम्रित नामु सद मीठा लागा गुर सबदी सादु आइआ ॥अंग 559
  6. गुरमुखि सचु संजमु ततु गिआनु ॥अंग 559
  7. रसना हरि सादि लगी सहजि सुभाइ ॥अंग 560
  8. पूरे गुर ते नामु पाइआ जाइ ॥अंग 560
  9. हउमै नावै नालि विरोधु है दुइ न वसहि इक ठाइ ॥अंग 560
  10. अनदिनु सचु सलाहणा धनु धनु वडभाग हमारा ॥1॥अंग 564
  11. मनूआ दह दिस धावदा ओहु कैसे हरि गुण गावै ॥अंग 565
  12. आपणे पिर कै रंगि रती मुईए सोभावंती नारे ॥अंग 567
  13. गुरमुखि सभु वापारु भला जे सहजे कीजै राम ॥अंग 568
  14. कालु जालु जमु जोहि न साकै साचै सबदि लिव लाए ॥अंग 569
  15. रतन पदारथ वणजीअहि सतिगुरि दीआ बुझाई राम ॥अंग 569
  16. सचा सउदा हरि नामु है सचा वापारा राम ॥अंग 570
  17. ए मन मेरिआ आवा गउणु संसारु है अंति सचि निबेड़ा राम ॥अंग 571
  18. प्रभु सचड़ा हरि सालाहीऐ कारजु सभु किछु करणै जोगु ॥अंग 582
  19. सुणिअहु कंत महेलीहो पिरु सेविहु सबदि वीचारि ॥अंग 583
  20. रोवहि पिरहि विछुंनीआ मै पिरु सचड़ा है सदा नाले ॥अंग 584
  21. इहु सरीरु जजरी है इस नो जरु पहुचै आए ॥अंग 584
  22. सबदि रते वड हंस है सचु नामु उरि धारि ॥अंग 585
  23. मै जानिआ वड हंसु है ता मै कीआ संगु ॥अंग 585
  24. हंसा वेखि तरंदिआ बगां भि आया चाउ ॥अंग 585
  25. सतिगुरि सेविऐ हरि मनि वसै तिथै भउ कदे न होइ ॥अंग 586
  26. इकि सजण चले इकि चलि गए रहदे भी फुनि जाहि ॥अंग 586
  27. सतिगुर की सेवा चाकरी सुखी हूं सुख सारु ॥अंग 586
  28. होर विडाणी चाकरी ध्रिगु जीवणु ध्रिगु वासु ॥अंग 586
  29. सतिगुरि मिलिऐ भुख गई भेखी भुख न जाइ ॥अंग 586
  30. सतिगुरि सेविऐ सदा सुखु जनम मरण दुखु जाइ ॥अंग 587
  31. सजण मिले सजणा जिन सतगुर नालि पिआरु ॥अंग 587
  32. इकि सदा इकतै रंगि रहहि तिन कै हउ सद बलिहारै जाउ ॥अंग 587
  33. त्रिसना दाधी जलि मुई जलि जलि करे पुकार ॥अंग 588
  34. भेखी अगनि न बुझई चिंता है मन माहि ॥अंग 588
  35. कलि महि जमु जंदारु है हुकमे कार कमाइ ॥अंग 588
  36. एहा काइआ रोगि भरी बिनु सबदै दुखु हउमै रोगु न जाइ ॥अंग 588
  37. भगति करहि मरजीवड़े गुरमुखि भगति सदा होइ ॥अंग 589
  38. सतिगुर की सेव न कीनीआ किआ ओहु करे वीचारु ॥अंग 589
  39. रतना पारखु जो होवै सु रतना करे वीचारु ॥अंग 589
  40. सतिगुर की सेव न कीनीआ हरि नामि न लगो पिआरु ॥अंग 589
  41. बिनु सतिगुर सेवे जीअ के बंधना विचि हउमै करम कमाहि ॥अंग 589
  42. भगत जना कंउ आपि तुठा मेरा पिआरा आपे लइअनु जन लाइ ॥अंग 590
  43. सुणि सिखिऐ सादु न आइओ जिचरु गुरमुखि सबदि न लागै ॥अंग 590
  44. नानक नामु निधानु है गुरमुखि पाइआ जाइ ॥अंग 590
  45. कंचन काइआ निरमली जो सचि नामि सचि लागी ॥अंग 590
  46. मनमुखु काइरु करूपु है बिनु नावै नकु नाहि ॥अंग 591
  47. गुरमुखि सदा दरि सोहणे गुर का सबदु कमाहि ॥अंग 591
  48. सतिगुर की परतीति न आईआ सबदि न लागो भाउ ॥अंग 591
  49. ए मन ऐसा सतिगुरु खोजि लहु जितु सेविऐ जनम मरण दुखु जाइ ॥अंग 591
  50. बिनु सतिगुर सेवे जगतु मुआ बिरथा जनमु गवाइ ॥अंग 591
  51. इसु जग महि पुरखु एकु है होर सगली नारि सबाई ॥अंग 591
  52. जिन कंउ सतिगुरु भेटिआ से हरि कीरति सदा कमाहि ॥अंग 592
  53. हंउमै अंदरि खड़कु है खड़के खड़कि विहाइ ॥अंग 592
  54. गुरमुखि सेव न कीनीआ हरि नामि न लगो पिआरु ॥अंग 592
  55. इको सतिगुरु जागता होरु जगु सूता मोहि पिआसि ॥अंग 592
  56. जगतु अगिआनी अंधु है दूजै भाइ करम कमाइ ॥अंग 593
  57. हम घरि नामु खजाना सदा है भगति भरे भंडारा ॥अंग 593
  58. मनहठि किनै न पाइओ सभ थके करम कमाइ ॥अंग 593
  59. सतिगुर नो सभु को वेखदा जेता जगतु संसारु ॥अंग 594
  60. सतिगुरू न सेविओ मूरख अंध गवारि ॥अंग 594
सोरठ (61)
  1. सेवक सेव करहि सभि तेरी जिन सबदै सादु आइआ ॥अंग 599
  2. भगति खजाना भगतन कउ दीआ नाउ हरि धनु सचु सोइ ॥अंग 600
  3. दासनि दासु होवै ता हरि पाए विचहु आपु गवाई ॥अंग 600
  4. इकु पलु खिनु विसरहि तू सुआमी जाणउ बरस पचासा ॥अंग 601
  5. गुरमुखि भगति करहि प्रभ भावहि अनदिनु नामु वखाणे ॥अंग 601
  6. सो सिखु सखा बंधपु है भाई जि गुर के भाणे विचि आवै ॥अंग 601
  7. सतिगुरु सेवे सदा सुखु पाए हउमै सबदि समाणी ॥अंग 602
  8. सतिगुर मिलिऐ उलटी भई भाई जीवत मरै ता बूझ पाइ ॥अंग 602
  9. तिही गुणी त्रिभवणु विआपिआ भाई गुरमुखि बूझ बुझाइ ॥अंग 603
  10. सतिगुरु सुख सागरु जग अंतरि होर थै सुखु नाही ॥अंग 603
  11. बिनु सतिगुर सेवे बहुता दुखु लागा जुग चारे भरमाई ॥अंग 603
  12. सतिगुर सेवे ता सहज धुनि उपजै गति मति तद ही पाए ॥अंग 604
  13. हरि जी एह तेरी वडिआई ॥अंग 637
  14. निगुणिआ नो आपे बखसि लए भाई सतिगुर की सेवा लाइ ॥अंग 638
  15. सदा सुखु सोहागणी भाई अनदिनु रतीआ रंगु लाइ ॥1॥अंग 639
  16. हउमै जलते जलि मुए भ्रमि आए दूजै भाइ ॥अंग 643
  17. सफलिओ सतिगुरु सेविआ धंनु जनमु परवाणु ॥अंग 643
  18. पूरबि लिखिआ कमावणा जि करतै आपि लिखिआसु ॥अंग 643
  19. से सैण से सजणा जि गुरमुखि मिलहि सुभाइ ॥अंग 643
  20. माइआ ममता मोहणी जिनि विणु दंता जगु खाइआ ॥अंग 643
  21. घर ही महि अंम्रितु भरपूरु है मनमुखा सादु न पाइआ ॥अंग 644
  22. जिउ तनु कोलू पीड़ीऐ रतु न भोरी डेहि ॥अंग 644
  23. सजणु मैडा रंगुला रंगु लाए मनु लेइ ॥अंग 644
  24. सतिगुर की सेवा सफलु है जे को करे चितु लाइ ॥अंग 644
  25. मनमुख मंनु अजितु है दूजै लगै जाइ ॥अंग 644
  26. सतिगुर ते जो मुह फिरे से बधे दुख सहाहि ॥अंग 645
  27. जो सतिगुर ते मुह फिरे तिना ठउर न ठाउ ॥अंग 645
  28. थालै विचि तै वसतू पईओ हरि भोजनु अंम्रितु सारु ॥अंग 645
  29. जो धुरि मेले से मिलि रहे सतिगुर सिउ चितु लाइ ॥अंग 645
  30. सहजे जागै सहजे सोवै ॥अंग 646
  31. अंतरि गिआनु न आइओ जितु किछु सोझी पाइ ॥अंग 646
  32. सचा सउदा हटु सचु रतनी भरे भंडार ॥अंग 646
  33. सेखा चउचकिआ चउवाइआ एहु मनु इकतु घरि आणि ॥अंग 646
  34. हरि गुण तोटि न आवई कीमति कहणु न जाइ ॥अंग 646
  35. परथाइ साखी महा पुरख बोलदे साझी सगल जहानै ॥अंग 647
  36. गुरमुखि चितु न लाइओ अंति दुखु पहुता आइ ॥अंग 647
  37. पंडित मैलु न चुकई जे वेद पड़ै जुग चारि ॥अंग 647
  38. मनमुख हरि नामु न सेविआ दुखु लगा बहुता आइ ॥अंग 647
  39. हसती सिरि जिउ अंकसु है अहरणि जिउ सिरु देइ ॥अंग 647
  40. जिन गुरमुखि नामु धिआइआ आए ते परवाणु ॥अंग 648
  41. नानक नामु न चेतनी अगिआनी अंधुले अवरे करम कमाहि ॥अंग 648
  42. नानक सतिगुरु सेवहि आपणा से जन सचे परवाणु ॥अंग 648
  43. बिनु करमै नाउ न पाईऐ पूरै करमि पाइआ जाइ ॥अंग 648
  44. नानक नावहु घुथिआ हलतु पलतु सभु जाइ ॥अंग 648
  45. संता नालि वैरु कमावदे दुसटा नालि मोहु पिआरु ॥अंग 649
  46. सतिगुर की सेवा गाखड़ी सिरु दीजै आपु गवाइ ॥अंग 649
  47. महलु कुमहलु न जाणनी मूरख अपणै सुआइ ॥अंग 649
  48. ब्रहमु बिंदै तिस दा ब्रहमतु रहै एक सबदि लिव लाइ ॥अंग 649
  49. किआ गभरू किआ बिरधि है मनमुख त्रिसना भुख न जाइ ॥अंग 649
  50. गुर बिनु गिआनु न होवई ना सुखु वसै मनि आइ ॥अंग 650
  51. सिध साधिक नावै नो सभि खोजदे थकि रहे लिव लाइ ॥अंग 650
  52. पड़णा गुड़णा संसार की कार है अंदरि त्रिसना विकारु ॥अंग 650
  53. विणु मनु मारे कोइ न सिझई वेखहु को लिव लाइ ॥अंग 650
  54. जनम जनम की इसु मन कउ मलु लागी काला होआ सिआहु ॥अंग 651
  55. चहु जुगी कलि काली कांढी इक उतम पदवी इसु जुग माहि ॥अंग 651
  56. रे जन उथारै दबिओहु सुतिआ गई विहाइ ॥अंग 651
  57. सबदि रते हउमै गई सोभावंती नारि ॥अंग 651
  58. गुर सेवा ते सुखु ऊपजै फिरि दुखु न लगै आइ ॥अंग 651
  59. बिनु सबदै सुधु न होवई जे अनेक करै सीगार ॥अंग 651
  60. ए मन हरि जी धिआइ तू इक मनि इक चिति भाइ ॥अंग 653
  61. आपे सेवा लाइअनु आपे बखस करेइ ॥अंग 653
धनासरी (9)
  1. इहु धनु अखुटु न निखुटै न जाइ ॥अंग 663
  2. हरि नामु धनु निरमलु अति अपारा ॥अंग 664
  3. सदा धनु अंतरि नामु समाले ॥अंग 664
  4. जगु मैला मैलो होइ जाइ ॥अंग 664
  5. जो हरि सेवहि तिन बलि जाउ ॥अंग 665
  6. मनु मरै धातु मरि जाइ ॥अंग 665
  7. काचा धनु संचहि मूरख गावार ॥अंग 665
  8. नावै की कीमति मिति कही न जाइ ॥अंग 666
  9. हम भीखक भेखारी तेरे तू निज पति है दाता ॥अंग 666
सूही (46)
  1. नामै ही ते सभु किछु होआ बिनु सतिगुर नामु न जापै ॥अंग 753
  2. काइआ कामणि अति सुआलि॑उ पिरु वसै जिसु नाले ॥अंग 754
  3. दुनीआ न सालाहि जो मरि वंञसी ॥अंग 755
  4. हरि जी सूखमु अगमु है कितु बिधि मिलिआ जाइ ॥अंग 756
  5. सुख सोहिलड़ा हरि धिआवहु ॥अंग 767
  6. सो भगतु जो गुरमुखि होवै हउमै सबदि जलाइआ राम ॥अंग 768
  7. सबदि सचै सचु सोहिला जिथै सचे का होइ वीचारो राम ॥अंग 769
  8. जुग चारे धन जे भवै बिनु सतिगुर सोहागु न होई राम ॥अंग 769
  9. हरि हरे हरि गुण गावहु हरि गुरमुखे पाए राम ॥अंग 770
  10. जे लोड़हि वरु बालड़ीए ता गुर चरणी चितु लाए राम ॥अंग 771
  11. सोहिलड़ा हरि राम नामु गुर सबदी वीचारे राम ॥अंग 772
  12. सूहै वेसि दोहागणी पर पिरु रावण जाइ ॥अंग 785
  13. सूहवीए निमाणीए सो सहु सदा सम॑ालि ॥अंग 785
  14. आपे तखतु रचाइओनु आकास पताला ॥अंग 785
  15. सूहब ता सोहागणी जा मंनि लैहि सचु नाउ ॥अंग 785
  16. लोका वे हउ सूहवी सूहा वेसु करी ॥अंग 785
  17. हुकमी स्रिसटि साजीअनु बहु भिति संसारा ॥अंग 786
  18. सूहवीए सूहा सभु संसारु है जिन दुरमति दूजा भाउ ॥अंग 786
  19. सूहा रंगु विकारु है कंतु न पाइआ जाइ ॥अंग 786
  20. आपे आपि उपाइअनु आपि कीमति पाई ॥अंग 786
  21. सूहै वेसि कामणि कुलखणी जो प्रभ छोडि पर पुरख धरे पिआरु ॥अंग 786
  22. इहु जगु आपि उपाइओनु करि चोज विडानु ॥अंग 786
  23. सूहवीए सूहा वेसु छडि तू ता पिर लगी पिआरु ॥अंग 786
  24. मुंधे सूहा परहरहु लालु करहु सीगारु ॥अंग 787
  25. मोहु कूड़ु कुटंबु है मनमुखु मुगधु रता ॥अंग 787
  26. सतीआ एहि न आखीअनि जो मड़िआ लगि जलंनि॑ ॥अंग 787
  27. भी सो सतीआ जाणीअनि सील संतोखि रहंनि॑ ॥अंग 787
  28. कंता नालि महेलीआ सेती अगि जलाहि ॥अंग 787
  29. तुधु दुखु सुखु नालि उपाइआ लेखु करतै लिखिआ ॥अंग 787
  30. करतै कारणु जिनि कीआ सो जाणै सोई ॥अंग 787
  31. सचु धिआइनि से सचे गुर सबदि वीचारी ॥अंग 788
  32. कामणि तउ सीगारु करि जा पहिलां कंतु मनाइ ॥अंग 788
  33. काजल फूल तंबोल रसु ले धन कीआ सीगारु ॥अंग 788
  34. धन पिरु एहि न आखीअनि बहनि इकठे होइ ॥अंग 788
  35. भै बिनु भगति न होवई नामि न लगै पिआरु ॥अंग 788
  36. हरि सालाही सदा सदा तनु मनु सउपि सरीरु ॥अंग 789
  37. सचा अमरु चलाइओनु करि सचु फुरमाणु ॥अंग 789
  38. आपे हुकमु चलाइदा जगु धंधै लाइआ ॥अंग 789
  39. काइआ कोटु रचाइआ हरि सचै आपे ॥अंग 789
  40. माइआ मोहु सभु कूड़ु है कूड़ो होइ गइआ ॥अंग 790
  41. दरि मंगतु जाचै दानु हरि दीजै क्रिपा करि ॥अंग 790
  42. ढाढी गुण गावै नित जनमु सवारिआ ॥अंग 790
  43. जि प्रभु सालाहे आपणा सो सोभा पाए ॥अंग 791
  44. आपे बखसे दइआ करि गुर सतिगुर बचनी ॥अंग 791
  45. हरि हरि नामु सलाहीऐ सचु कार कमावै ॥अंग 791
  46. हउ किआ सालाही किरम जंतु वडी तेरी वडिआई ॥अंग 792
बिलावल (33)
  1. ध्रिगु ध्रिगु खाइआ ध्रिगु ध्रिगु सोइआ ध्रिगु ध्रिगु कापड़ु अंगि चड़ाइआ ॥अंग 796
  2. अतुलु किउ तोलिआ जाइ ॥अंग 797
  3. साहिब ते सेवकु सेव साहिब ते किआ को कहै बहाना ॥अंग 797
  4. पूरा थाटु बणाइआ पूरै वेखहु एक समाना ॥अंग 797
  5. गुरमुखि प्रीति जिस नो आपे लाए ॥अंग 798
  6. पूरे गुर ते वडिआई पाई ॥अंग 798
  7. जगु कऊआ मुखि चुंच गिआनु ॥अंग 832
  8. आदित वारि आदि पुरखु है सोई ॥अंग 841
  9. आदि पुरखु आपे स्रिसटि साजे ॥अंग 842
  10. बिलावलु तब ही कीजीऐ जब मुखि होवै नामु ॥अंग 849
  11. दूजै भाइ बिलावलु न होवई मनमुखि थाइ न पाइ ॥अंग 849
  12. बिलावलु करिहु तुम॑ पिआरिहो एकसु सिउ लिव लाइ ॥अंग 849
  13. ब्रहमु बिंदहि ते ब्राहमणा जे चलहि सतिगुर भाइ ॥अंग 850
  14. सतिगुर की सेव न कीतीआ सबदि न लगो भाउ ॥अंग 850
  15. सतिगुर ते खाली को नही मेरै प्रभि मेलि मिलाए ॥अंग 850
  16. गुर सेवा ते हरि पाईऐ जा कउ नदरि करेइ ॥अंग 850
  17. ध्रिगु एह आसा दूजे भाव की जो मोहि माइआ चितु लाए ॥अंग 850
  18. आसा मनसा जगि मोहणी जिनि मोहिआ संसारु ॥अंग 851
  19. पूरै भागि सतिगुरु पाईऐ जे हरि प्रभु बखस करेइ ॥अंग 851
  20. ए मन गुर की सिख सुणि पाइहि गुणी निधानु ॥अंग 851
  21. अंदरि कपटु सदा दुखु है मनमुख धिआनु न लागै ॥अंग 851
  22. गुरमुखि सदा हरि रंगु है हरि का नाउ मनि भाइआ ॥अंग 851
  23. मनमुख मैले मरहि गवार ॥अंग 852
  24. इसु जुग महि भगती हरि धनु खटिआ होरु सभु जगतु भरमि भुलाइआ ॥अंग 852
  25. नानक सो सालाहीऐ जिसु वसि सभु किछु होइ ॥अंग 852
  26. गुरमुखि संसा मूलि न होवई चिंता विचहु जाइ ॥अंग 853
  27. कालु मारि मनसा मनहि समाणी अंतरि निरमलु नाउ ॥अंग 853
  28. जगतु जलंदा रखि लै आपणी किरपा धारि ॥अंग 853
  29. हउमै माइआ मोहणी दूजै लगै जाइ ॥अंग 853
  30. जिन॑ी नामु विसारिआ कूड़े कहण कहंनि॑ ॥अंग 854
  31. जिन॑ी सतिगुरु सेविआ ताणु निताणे तिसु ॥अंग 854
  32. अपणा आपु न पछाणई हरि प्रभु जाता दूरि ॥अंग 854
  33. हरि प्रभु सचा सोहिला गुरमुखि नामु गोविंदु ॥अंग 854
रामकली (54)
  1. सतजुगि सचु कहै सभु कोई ॥अंग 880
  2. सरमै दीआ मुंद्रा कंनी पाइ जोगी खिंथा करि तू दइआ ॥अंग 908
  3. भगति खजाना गुरमुखि जाता सतिगुरि बूझि बुझाई ॥1॥अंग 909
  4. हरि की पूजा दुलंभ है संतहु कहणा कछू न जाई ॥1॥अंग 910
  5. हम कुचल कुचील अति अभिमानी मिलि सबदे मैलु उतारी ॥1॥अंग 910
  6. नामु खजाना गुर ते पाइआ त्रिपति रहे आघाई ॥1॥अंग 911
  7. अनंदु भइआ मेरी माए सतिगुरू मै पाइआ ॥अंग 917
  8. साची लिवै बिनु देह निमाणी ॥अंग 917
  9. अनदु सुणहु वडभागीहो सगल मनोरथ पूरे ॥अंग 922
  10. सतिगुरु सहजै दा खेतु है जिस नो लाए भाउ ॥अंग 947
  11. मनमुखु दुख का खेतु है दुखु बीजे दुखु खाइ ॥अंग 947
  12. सतिगुरि मिलिऐ सदा सुखु जिस नो आपे मेले सोइ ॥अंग 947
  13. सचै तखतु रचाइआ बैसण कउ जांई ॥अंग 947
  14. नानक महिदी करि कै रखिआ सो सहु नदरि करेइ ॥अंग 947
  15. वेकी स्रिसटि उपाईअनु सभ हुकमि आवै जाइ समाही ॥अंग 947
  16. भरमि भुलाई सभु जगु फिरी फावी होई भालि ॥अंग 947
  17. धंधा धावत दिनु गइआ रैणि गवाई सोइ ॥अंग 948
  18. इकि आपणी सिफती लाइअनु दे सतिगुर मती ॥अंग 948
  19. किउ करि इहु मनु मारीऐ किउ करि मिरतकु होइ ॥अंग 948
  20. जीवत मरणा सभु को कहै जीवन मुकति किउ होइ ॥अंग 948
  21. दूजा भाउ रचाइओनु त्रै गुण वरतारा ॥अंग 948
  22. मन का झूठा झूठु कमावै ॥अंग 948
  23. सो तपा जि इहु तपु घाले ॥अंग 948
  24. राति दिनसु उपाइअनु संसार की वरतणि ॥अंग 948
  25. अभिआगत एहि न आखीअनि जिन के चित महि भरमु ॥अंग 949
  26. अभिआगत एहि न आखीअनि जि पर घरि भोजनु करेनि ॥अंग 949
  27. अंबरु धरति विछोड़िअनु विचि सचा असराउ ॥अंग 949
  28. रैणाइर माहि अनंतु है कूड़ी आवै जाइ ॥अंग 949
  29. सहजे सतिगुरु न सेविओ विचि हउमै जनमि बिनासु ॥अंग 949
  30. छतीह जुग गुबारु सा आपे गणत कीनी ॥अंग 949
  31. इहु तनु सभो रतु है रतु बिनु तंनु न होइ ॥अंग 949
  32. रामकली रामु मनि वसिआ ता बनिआ सीगारु ॥अंग 950
  33. बिनु सतिगुर सेवे सांति न आवई दूजी नाही जाइ ॥अंग 950
  34. आपि अलिपतु सदा रहै होरि धंधै सभि धावहि ॥अंग 950
  35. सचा नामु धिआइ तू सभो वरतै सचु ॥अंग 950
  36. मनमुख बोलि न जाणनी ओना अंदरि कामु क्रोधु अहंकारु ॥अंग 950
  37. तुधु जेवडु दाता नाहि किसु आखि सुणाईऐ ॥अंग 951
  38. जि सतिगुर भावै सु मंनि लैनि सेई करम करेनि ॥अंग 951
  39. गुरू जिना का अंधुला सिख भी अंधे करम करेनि ॥अंग 951
  40. सभ नदरी अंदरि रखदा जेती सिसटि सभ कीती ॥अंग 951
  41. हरि का मंदरु आखीऐ काइआ कोटु गड़ु ॥अंग 952
  42. हरि मंदरु सोई आखीऐ जिथहु हरि जाता ॥अंग 953
  43. मूरखु होवै सो सुणै मूरख का कहणा ॥अंग 953
  44. हरि का सभु सरीरु है हरि रवि रहिआ सभु आपै ॥अंग 953
  45. काइआ हंस धुरि मेलु करतै लिखि पाइआ ॥अंग 954
  46. नउ दरवाजे काइआ कोटु है दसवै गुपतु रखीजै ॥अंग 954
  47. काइआ अंदरि गड़ु कोटु है सभि दिसंतर देसा ॥अंग 955
  48. मनमुखि मोहु गुबारु है दूजै भाइ बोलै ॥अंग 955
  49. से जन साचे सदा सदा जिनी हरि रसु पीता ॥अंग 955
  50. सो सतसंगति सबदि मिलै जो गुरमुखि चलै ॥अंग 956
  51. आसा अंदरि सभु को कोइ निरासा होइ ॥अंग 956
  52. ना किछु आसा हथि है केउ निरासा होइ ॥अंग 956
  53. ध्रिगु जीवणु संसार सचे नाम बिनु ॥अंग 956
  54. आपे आपि वरतदा आपि ताड़ी लाईअनु ॥अंग 956
मारू (75)
  1. जह बैसालहि तह बैसा सुआमी जह भेजहि तह जावा ॥अंग 993
  2. आवण जाणा ना थीऐ निज घरि वासा होइ ॥अंग 993
  3. हरि की चरणी लागि रहा विचहु आपु गवाइ ॥1॥अंग 994
  4. सचि रते से टोलि लहु से विरले संसारि ॥अंग 994
  5. मारू ते सीतलु करे मनूरहु कंचनु होइ ॥अंग 994
  6. जिस नो प्रेमु मंनि वसाए ॥अंग 1016
  7. हुकमी सहजे स्रिसटि उपाई ॥अंग 1043
  8. एको एकु वरतै सभु सोई ॥अंग 1044
  9. जगजीवनु साचा एको दाता ॥अंग 1045
  10. जो आइआ सो सभु को जासी ॥अंग 1047
  11. सचु सालाही गहिर गंभीरै ॥अंग 1048
  12. एको सेवी सदा थिरु साचा ॥अंग 1049
  13. सचै सचा तखतु रचाइआ ॥अंग 1050
  14. आपे आपु उपाइ उपंना ॥अंग 1051
  15. मारू सोलहे 3 ॥अंग 1052
  16. सो सचु सेविहु सिरजणहारा ॥अंग 1053
  17. सतिगुरु सेवनि से वडभागी ॥अंग 1054
  18. तिस दा अंतु न पाईऐ पारावारा ॥अंग 1055
  19. मेरै प्रभि साचै इकु खेलु रचाइआ ॥अंग 1056
  20. निहचलु एकु सदा सचु सोई ॥अंग 1057
  21. गुरमुखि नाद बेद बीचारु ॥अंग 1058
  22. आपे निआउ करे सभु साचा साचे साचि मिलाइदा ॥1॥अंग 1059
  23. आदि जुगादि दइआपति दाता ॥अंग 1060
  24. जुग छतीह कीओ गुबारा ॥अंग 1061
  25. ओसु तिलु न तमाइ वेपरवाहा ॥अंग 1062
  26. जो तुधु करणा सो करि पाइआ ॥अंग 1063
  27. काइआ कंचनु सबदु वीचारा ॥अंग 1064
  28. निरंकारि आकारु उपाइआ ॥अंग 1066
  29. अगम अगोचर वेपरवाहे ॥अंग 1067
  30. नदरी भगता लैहु मिलाए ॥अंग 1068
  31. गुर ते गिआनु पाइआ अति खड़गु करारा ॥अंग 1087
  32. केदारा रागा विचि जाणीऐ भाई सबदे करे पिआरु ॥अंग 1087
  33. निहकंटक राजु भुंचि तू गुरमुखि सचु कमाई ॥अंग 1087
  34. आपे करणी कार आपि आपे करे रजाइ ॥अंग 1087
  35. माइआ वेखि न भुलु तू मनमुख मूरखा ॥अंग 1087
  36. जिना गुरु नही भेटिआ भै की नाही बिंद ॥अंग 1088
  37. त्रिभवण ढूढी सजणा हउमै बुरी जगति ॥अंग 1088
  38. गुरमुखि आपे बखसिओनु हरि नामि समाणे ॥अंग 1088
  39. आपणा आपु पछाणिआ नामु निधानु पाइआ ॥अंग 1088
  40. पिर खुसीए धन रावीए धन उरि नामु सीगारु ॥अंग 1088
  41. तखति राजा सो बहै जि तखतै लाइक होई ॥अंग 1088
  42. सभना का पिरु एकु है पिर बिनु खाली नाहि ॥अंग 1088
  43. मन के अधिक तरंग किउ दरि साहिब छुटीऐ ॥अंग 1088
  44. हरि का नामु अमोलु है किउ कीमति कीजै ॥अंग 1088
  45. सहजि वणसपति फुलु फलु भवरु वसै भै खंडि ॥अंग 1089
  46. जो जन लूझहि मनै सिउ से सूरे परधाना ॥अंग 1089
  47. जोगी होवा जगि भवा घरि घरि भीखिआ लेउ ॥अंग 1089
  48. जितु दरि लेखा मंगीऐ सो दरु सेविहु न कोइ ॥अंग 1089
  49. सूरे एहि न आखीअहि अहंकारि मरहि दुखु पावहि ॥अंग 1089
  50. कागउ होइ न ऊजला लोहे नाव न पारु ॥अंग 1089
  51. मारू मारण जो गए मारि न सकहि गवार ॥अंग 1089
  52. दोवै तरफा उपाईओनु विचि सकति सिव वासा ॥अंग 1090
  53. होवा पंडितु जोतकी वेद पड़ा मुखि चारि ॥अंग 1090
  54. आपि उपाए करे आपि आपे नदरि करेइ ॥अंग 1090
  55. कंटकु कालु एकु है होरु कंटकु न सूझै ॥अंग 1090
  56. मनमुख कालु विआपदा मोहि माइआ लागे ॥अंग 1090
  57. आपे पिंडु सवारिओनु विचि नव निधि नामु ॥अंग 1090
  58. जिनी अंदरु भालिआ गुर सबदि सुहावै ॥अंग 1091
  59. इसु जुग महि नामु निधानु है नामो नालि चलै ॥अंग 1091
  60. मनमुख वापारै सार न जाणनी बिखु विहाझहि बिखु संग्रहहि बिख सिउ धरहि पिआरु ॥अंग 1091
  61. दुखु लगा बिनु सेविऐ हुकमु मंने दुखु जाइ ॥अंग 1091
  62. हरि नाम बिना जगतु है निरधनु बिनु नावै त्रिपति नाही ॥अंग 1091
  63. इसु जग महि संती धनु खटिआ जिना सतिगुरु मिलिआ प्रभु आइ ॥अंग 1092
  64. जिनि उपाई मेदनी सोई सार करेइ ॥अंग 1092
  65. अंतरि जपु तपु संजमो गुर सबदी जापै ॥अंग 1092
  66. लोकु अवगणा की बंन॑ै गंठड़ी गुण न विहाझै कोइ ॥अंग 1092
  67. गुण अवगुण समानि हहि जि आपि कीते करतारि ॥अंग 1092
  68. अंदरि राजा तखतु है आपे करे निआउ ॥अंग 1092
  69. मनु माणकु जिनि परखिआ गुर सबदी वीचारि ॥अंग 1093
  70. मनमुख अंदरु न भालनी मुठे अहंमते ॥अंग 1093
  71. सभे थोक विसारि इको मितु करि ॥अंग 1093
  72. भाणै हुकमु मनाइओनु भाणै सुखु पाइआ ॥अंग 1093
  73. जिन कउ अंदरि गिआनु नही भै की नाही बिंद ॥अंग 1093
  74. मन की पत्री वाचणी सुखी हू सुखु सारु ॥अंग 1093
  75. आपे करि करि वेखदा आपे सभु सचा ॥अंग 1094
भैरों (23)
  1. जाति का गरबु न करीअहु कोई ॥अंग 1127
  2. जोगी ग्रिही पंडित भेखधारी ॥अंग 1128
  3. जा कउ राखै अपणी सरणाई ॥अंग 1128
  4. मै कामणि मेरा कंतु करतारु ॥अंग 1128
  5. सो मुनि जि मन की दुबिधा मारे ॥अंग 1128
  6. राम नामु जगत निसतारा ॥अंग 1129
  7. नामे उधरे सभि जितने लोअ ॥अंग 1129
  8. गोविंद प्रीति सनकादिक उधारे ॥अंग 1129
  9. कलजुग महि राम नामु उर धारु ॥अंग 1129
  10. कलजुग महि बहु करम कमाहि ॥अंग 1129
  11. दुबिधा मनमुख रोगि विआपे त्रिसना जलहि अधिकाई ॥अंग 1130
  12. मनमुखि दुबिधा सदा है रोगी रोगी सगल संसारा ॥अंग 1130
  13. दुख विचि जंमै दुखि मरै दुख विचि कार कमाइ ॥अंग 1130
  14. सबदु बीचारे सो जनु साचा जिन कै हिरदै साचा सोई ॥अंग 1131
  15. मनमुख आसा नही उतरै दूजै भाइ खुआए ॥अंग 1131
  16. कलि महि प्रेत जिन॑ी रामु न पछाता सतजुगि परम हंस बीचारी ॥अंग 1131
  17. मनसा मनहि समाइ लै गुर सबदी वीचार ॥अंग 1132
  18. बाझु गुरू जगतु बउराना भूला चोटा खाई ॥अंग 1132
  19. हउमै माइआ मोहि खुआइआ दुखु खटे दुख खाइ ॥अंग 1132
  20. मेरी पटीआ लिखहु हरि गोविंद गोपाला ॥अंग 1133
  21. आपे दैत लाइ दिते संत जना कउ आपे राखा सोई ॥अंग 1133
  22. तिनि करतै इकु चलतु उपाइआ ॥अंग 1154
  23. गुर सेवा ते अंम्रित फलु पाइआ हउमै त्रिसन बुझाई ॥अंग 1155
बसंत (20)
  1. बसत्र उतारि दिगंबरु होगु ॥अंग 1169
  2. साहिब भावै सेवकु सेवा करै ॥अंग 1170
  3. माहा रुती महि सद बसंतु ॥अंग 1172
  4. राते साचि हरि नामि निहाला ॥अंग 1172
  5. हरि सेवे सो हरि का लोगु ॥अंग 1172
  6. अंतरि पूजा मन ते होइ ॥अंग 1173
  7. भगति वछलु हरि वसै मनि आइ ॥अंग 1173
  8. माइआ मोहु सबदि जलाए ॥अंग 1173
  9. पूरै भागि सचु कार कमावै ॥अंग 1174
  10. भगति करहि जन देखि हजूरि ॥अंग 1174
  11. नामि रते कुलां का करहि उधारु ॥अंग 1174
  12. बिनु करमा सभ भरमि भुलाई ॥अंग 1175
  13. क्रिपा करे सतिगुरू मिलाए ॥अंग 1175
  14. गुर सबदी हरि चेति सुभाइ ॥अंग 1175
  15. तेरा कीआ किरम जंतु ॥अंग 1176
  16. बनसपति मउली चड़िआ बसंतु ॥अंग 1176
  17. सभि जुग तेरे कीते होए ॥अंग 1176
  18. तिन॑ बसंतु जो हरि गुण गाइ ॥अंग 1176
  19. बसंतु चड़िआ फूली बनराइ ॥अंग 1176
  20. गुरु सालाही सद अपणा भाई गुर चरणी चितु लाई ॥1॥अंग 1177
सारंग (26)
  1. मन मेरे हरि कै नामि वडाई ॥अंग 1233
  2. मन मेरे हरि का नामु अति मीठा ॥अंग 1233
  3. मन मेरे हरि की अकथ कहाणी ॥अंग 1234
  4. नउमी नेमु सचु जे करै ॥अंग 1245
  5. पड़ि॑ पड़ि॑ पंडित मोुनी थके देसंतर भवि थके भेखधारी ॥अंग 1246
  6. नांगे आवणा नांगे जाणा हरि हुकमु पाइआ किआ कीजै ॥अंग 1246
  7. सहजे सुखि सुती सबदि समाइ ॥अंग 1247
  8. जिन॑ी नामु विसारिआ किआ जपु जापहि होरि ॥अंग 1247
  9. जिनी नामु विसारिआ बहु करम कमावहि होरि ॥अंग 1247
  10. जिचरु इहु मनु लहरी विचि है हउमै बहुतु अहंकारु ॥अंग 1247
  11. सो जपु तपु सेवा चाकरी जो खसमै भावै ॥अंग 1247
  12. विणु सतिगुर सेवे सुखु नही मरि जंमहि वारो वार ॥अंग 1248
  13. माइआ मोहि विसारिआ सचु मरणा हरि नामु ॥अंग 1248
  14. गुर का कहिआ जे करे सुखी हू सुखु सारु ॥अंग 1248
  15. सचु पुराणा ना थीऐ नामु न मैला होइ ॥अंग 1248
  16. मनमुख बोलि न जाणन॑ी ओना अंदरि कामु क्रोधु अहंकारु ॥अंग 1248
  17. हरि गुरमुखि तिन॑ी अराधिआ जिन॑ करमि परापति होइ ॥अंग 1248
  18. पड़ि पड़ि पंडित वादु वखाणदे माइआ मोह सुआइ ॥अंग 1249
  19. सचु वणजहि सचु सेवदे जि गुरमुखि पैरी पाहि ॥अंग 1249
  20. पराई अमाण किउ रखीऐ दिती ही सुखु होइ ॥अंग 1249
  21. मनि अनदु भइआ मिलिआ हरि प्रीतमु सरसे सजण संत पिआरे ॥अंग 1249
  22. गुरमुखि अंम्रितु नामु है जितु खाधै सभ भुख जाइ ॥अंग 1250
  23. बिनु सबदै जगि आन॑ेरु है सबदे परगटु होइ ॥अंग 1250
  24. माइआ मोहि विसारिआ गुर का भउ हेतु अपारु ॥अंग 1250
  25. अमरु वेपरवाहु है तिसु नालि सिआणप न चलई न हुजति करणी जाइ ॥अंग 1251
  26. दाति जोति सभ सूरति तेरी ॥अंग 1251
मलार (43)
  1. निरंकारु आकारु है आपे आपे भरमि भुलाए ॥अंग 1257
  2. जिनी हुकमु पछाणिआ से मेले हउमै सबदि जलाइ ॥अंग 1258
  3. गुरमुखि कोई विरला बूझै जिस नो नदरि करेइ ॥अंग 1258
  4. गुरु सालाही सदा सुखदाता प्रभु नाराइणु सोई ॥अंग 1258
  5. गण गंधरब नामे सभि उधरे गुर का सबदु वीचारि ॥अंग 1259
  6. सतिगुर ते पावै घरु दरु महलु सु थानु ॥अंग 1259
  7. एकसु बिनु मै अवरु न जाणा सतिगुरि दीआ बुझाई ॥1॥अंग 1260
  8. मेरा प्रभु साचा दूख निवारणु सबदे पाइआ जाई ॥अंग 1260
  9. हउमै बिखु मनु मोहिआ लदिआ अजगर भारी ॥अंग 1260
  10. इहु मनु गिरही कि इहु मनु उदासी ॥अंग 1261
  11. भ्रमि भ्रमि जोनि मनमुख भरमाई ॥अंग 1261
  12. जीवत मुकत गुरमती लागे ॥अंग 1262
  13. रसना नामु सभु कोई कहै ॥अंग 1262
  14. करमु होवै ता सतिगुरु पाईऐ विणु करमै पाइआ न जाइ ॥अंग 1276
  15. बिनु नावै जम डंडु सहै मरि जनमै वारो वार ॥अंग 1276
  16. हरि हरि क्रिपा करे गुर की कारै लाए ॥अंग 1277
  17. गुरि मिलिऐ मनु रहसीऐ जिउ वुठै धरणि सीगारु ॥अंग 1278
  18. ऊंनवि ऊंनवि आइआ अवरि करेंदा वंन ॥अंग 1280
  19. ऊंनवि ऊंनवि आइआ वरसै नीरु निपंगु ॥अंग 1280
  20. ऊंनवि ऊंनवि आइआ वरसै लाइ झड़ी ॥अंग 1280
  21. किआ उठि उठि देखहु बपुड़ें इसु मेघै हथि किछु नाहि ॥अंग 1280
  22. बाबीहा जिस नो तू पूकारदा तिस नो लोचै सभु कोइ ॥अंग 1281
  23. कलमलि होई मेदनी अरदासि करे लिव लाइ ॥अंग 1281
  24. नानक सो सालाहीऐ जिसु वसि सभु किछु होइ ॥अंग 1281
  25. अंम्रितु सदा वरसदा बूझनि बूझणहार ॥अंग 1281
  26. बाबीहा ना बिललाइ ना तरसाइ एहु मनु खसम का हुकमु मंनि ॥अंग 1282
  27. बाबीहा जल महि तेरा वासु है जल ही माहि फिराहि ॥अंग 1282
  28. इहु जलु सभ तै वरसदा वरसै भाइ सुभाइ ॥अंग 1282
  29. भिंनी रैणि चमकिआ वुठा छहबर लाइ ॥अंग 1282
  30. बाबीहा एहु जगतु है मत को भरमि भुलाइ ॥अंग 1283
  31. वुठै जीआ जुगति होइ धरणी नो सीगारु होइ ॥अंग 1283
  32. बाबीहा खसमै का महलु न जाणही महलु देखि अरदासि पाइ ॥अंग 1283
  33. बाबीहा भिंनी रैणि बोलिआ सहजे सचि सुभाइ ॥अंग 1283
  34. बाबीहा गुणवंती महलु पाइआ अउगणवंती दूरि ॥अंग 1283
  35. बाबीहा बेनती करे करि किरपा देहु जीअ दान ॥अंग 1284
  36. बाबीहै हुकमु पछाणिआ गुर कै सहजि सुभाइ ॥अंग 1284
  37. चात्रिक तू न जाणही किआ तुधु विचि तिखा है कितु पीतै तिख जाइ ॥अंग 1284
  38. बाबीहा अंम्रित वेलै बोलिआ तां दरि सुणी पुकार ॥अंग 1285
  39. बाबीहा इव तेरी तिखा न उतरै जे सउ करहि पुकार ॥अंग 1285
  40. सावणि सरसी कामणी गुर सबदी वीचारि ॥अंग 1285
  41. सावणि दझै गुण बाहरी जिसु दूजै भाइ पिआरु ॥अंग 1285
  42. गुर सबदी एकु पछाणिआ एको सचा सोइ ॥अंग 1285
  43. इंदु वरसै करि दइआ लोकां मनि उपजै चाउ ॥अंग 1285
प्रभाती (9)
  1. गुरमुखि विरला कोई बूझै सबदे रहिआ समाई ॥अंग 1332
  2. निरगुणीआरे कउ बखसि लै सुआमी आपे लैहु मिलाई ॥अंग 1333
  3. गुरमुखि हरि सालाहिआ जिंना तिन सलाहि हरि जाता ॥अंग 1333
  4. तुधु जेवडु मै अवरु न सूझै ना को होआ न होगु ॥1॥अंग 1333
  5. गुर सबदी मनु निरमलु होआ चूका मनि अभिमानु ॥अंग 1334
  6. आपे भांति बणाए बहु रंगी सिसटि उपाइ प्रभि खेलु कीआ ॥अंग 1334
  7. मेरे मन गुरु अपणा सालाहि ॥अंग 1334
  8. गुर परसादी वेखु तू हरि मंदरु तेरै नालि ॥अंग 1346
  9. भै भाइ जागे से जन जाग्रण करहि हउमै मैलु उतारि ॥अंग 1346
सलोक और अन्य वाणी (6)
  1. चिंता भि आपि कराइसी अचिंतु भि आपे देइ ॥अंग 1376
  2. फरीदा काली धउली साहिबु सदा है जे को चिति करे ॥अंग 1378
  3. इहु तनु सभो रतु है रतु बिनु तंनु न होइ ॥अंग 1380
  4. काइ पटोला पाड़ती कंबलड़ी पहिरेइ ॥अंग 1383
  5. लाहौर सहरु अंम्रित सरु सिफती दा घरु ॥28॥अंग 1412
  6. अभिआगत एह न आखीअहि जिन कै मन महि भरमु ॥अंग 1413