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राग केदारा

राग · M4-M5

राग केदारा

रात का राग, राजसी और धीमा।

केदारा रात का राग है, श्रेष्ठ, संगीत-गोष्ठियों में बहु-प्रिय। हिंदुस्तानी शास्त्रीय परम्परा में इसकी ऊँची-जगह है, और कई शास्त्रीय गायक-गायिकाएँ इसे अपनी मुख्य-निधि मानते हैं।

नाम का सम्बन्ध हिमालय के केदारनाथ-क्षेत्र से जुड़ा बताया जाता है, हालाँकि यह स्पष्ट नहीं। ग्रंथ में केदारा की रचनाएँ अंग ग्यारह-सौ-अठारह के क़रीब से शुरू होती हैं।

“हरि बिन क्यों जीवा मेरी माई ।” केदारा M4

इस राग के सब अंग

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