लुल्ला परिवारLulla Family
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सिख वाणीनाम, सेवा और एकत्व

राग जैजावंती

राग · M9

राग जैजावंती

राजसी राग, बाद में जोड़ा गया।

जैजावंती की धुन सबसे बाद में ग्रंथ में जोड़ी गयी है। गुरु तेग बहादुर के समय के क़रीब, सत्रहवीं सदी के मध्य में। उनकी सब रचनाएँ इसी राग में हैं, ग्रंथ के अंतिम भाग में।

नाम "जयजय" राजा-संदर्भ से लिया गया है, और स्वर में एक शाही ठाठ है। हिंदुस्तानी शास्त्रीय परम्परा में जैजावंती एक सुन्दर रात्रि-राग है।

"रामु सिमरि रामु सिमरि इहै तेरै काजि है ॥" जैजावंती M9
इस राग के सब अंग

इस राग के शबद

हर शबद अपनी पहली पंक्ति से, वाणी के अनुसार। पंक्ति पर जाने से वह शबद अपने अंग पर खुलता है।

महला 9 (4)
  1. रामु सिमरि रामु सिमरि इहै तेरै काजि है ॥अंग 1352
  2. रामु भजु रामु भजु जनमु सिरातु है ॥अंग 1352
  3. रे मन कउन गति होइ है तेरी ॥अंग 1352
  4. बीत जैहै बीत जैहै जनमु अकाजु रे ॥अंग 1352