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राग जैजावंती

राग · M9

राग जैजावंती

राजसी राग, बाद में जोड़ा गया।

जैजावंती की धुन सबसे बाद में ग्रंथ में जोड़ी गयी है। गुरु तेग बहादुर के समय के क़रीब, सत्रहवीं सदी के मध्य में। उनकी सब रचनाएँ इसी राग में हैं, ग्रंथ के अंतिम भाग में।

नाम “जयजय” राजा-संदर्भ से लिया गया है, और स्वर में एक royal-feel है। हिंदुस्तानी शास्त्रीय परम्परा में जैजावंती एक सुन्दर रात्रि-राग है।

“राम सिमरि राम सिमरि इहै तेरै काज है ।” जैजावंती M9

इस राग के सब अंग