लुल्ला परिवारLULLA FAMILY, शुरुआतEnglish

हाथ की मुद्रा

आदि मुद्रा

अंगूठे को भीतर रखकर उँगलियाँ नरमी से बन्द कीजिए और हाथ टिकने दें।

मुद्रा का अभ्यास

खुले हाथ को नरमी से समेटने का अभ्यास कीजिए। आकार मुट्ठी जैसा है, पर ध्यान कसने पर नहीं, भीतर जगह रहने पर है।

खुली हथेली में अंगूठा भीतर रखा है; चारों उँगलियाँ अभी खुली हैं।बड़ा चित्र देखिए

पहले अंगूठा हथेली में रखिए।

चारों उँगलियाँ भीतर रखे अंगूठे के ऊपर मुड़ी हुईं; अंगूठा दिखाई नहीं देता।बड़ा चित्र देखिए

फिर चारों उँगलियाँ अंगूठे के ऊपर नरमी से मोड़िए।

हाथों की चित्रदर्शिका

आराम से बैठिए

सुविधाजनक आसन पर बैठकर हाथ जाँघों पर रखिए। कलाई सीधी और सहज रहने दीजिए।

हाथ कैसे रखें

  1. दाएँ अंगूठे को धीरे से हथेली के भीतर मोड़िए।
  2. चारों उँगलियाँ अंगूठे के ऊपर लपेटिए, इतनी ढीली कि अंगूठा दबे नहीं।
  3. बाएँ हाथ में भी यही स्थिति बनाइए।
  4. दोनों हाथ जाँघों पर टिका दीजिए। उँगलियाँ, कलाइयाँ और कन्धे ढीले रखिए।

श्वास और ध्यान

साँस को सहज रहने दीजिए। हाथ बन्द करने के साथ जबड़ा या पेट भी कस रहा हो तो उस कसावट को नरम कीजिए।

क्या देखें

  • उँगलियाँ अंगूठे को घेरे हुए हैं या दबा रही हैं?
  • हाथ का आकार बना रह सकता है जबकि पकड़ बहुत हल्की हो।

सहज समापन

पहले चारों उँगलियाँ खोलिए, फिर अंगूठे को धीरे से बाहर आने दीजिए। हथेली को विश्राम दें।

सरल विकल्प

उँगलियों को पूरी तरह बन्द करने के बजाय ढीला घेरा बनाएँ। अंगूठे में तकलीफ़ हो तो हाथ खुला रखें।

ध्यान रखिए

अंगूठे को अन्दर दबाकर मुट्ठी न भींचिए। दर्द या सुन्नपन हो तो हाथ खोल दीजिए।

स्रोत और अर्थ

आईसीवाईईआर इसे Adhi और एआईआईएमएस/डीएसटी की पुस्तिका Adi लिखती है; दोनों में अंगूठा उँगलियों के भीतर रहता है। यह रूप उनके श्वास-पाठ में आता है। यहाँ पहले हाथ के आराम और हल्के घेरे का अभ्यास है। ब्रह्म मुद्रा में इन्हीं दो हाथों को नाभि के पास साथ रखा जाता है।