हाथ की मुद्रा

ब्रह्म मुद्रा

नाभि के सामने अँगूठे भीतर रखे हुए दोनों हाथों का मिलना।

ब्रह्म: अँगूठे भीतर; दोनों हाथों के पोर मिलते हैं
ब्रह्म: अँगूठे भीतर; दोनों हाथों के पोर मिलते हैं.

दो हाथों का सम्बन्ध

चुने हुए रूप में दोनों हाथ आदि की आकृति में हैं: अँगूठे उँगलियों के भीतर और सामने वाले पोर नाभि के आगे मिलते हैं। ICYER तथा DST/AIIMS की पुस्तिका यही सम्बन्ध बताती हैं। दूसरी पुस्तिका हथेलियों की दिशा ऊपर भी स्पष्ट करती है। चित्र मिलने वाले पोरों की पहचान कराता है; हाथों से पेट दबाने का संकेत नहीं देता।

इस पृष्ठ का दायरा

यहाँ ब्रह्म मुद्रा से इन श्वास-पुस्तिकाओं की हाथ वाली आकृति अभिप्रेत है। नाम से पढ़ाए जाने वाले हर दूसरे अभ्यास की पुष्टि इस पृष्ठ से नहीं होती। आदि से इसका भेद दोनों हाथों का साथ रखा जाना है, उँगलियों की कोई नई गढ़ी हुई आकृति नहीं। पहले आदि और फिर यह चित्र देखने पर सम्बन्ध साफ़ हो जाएगा।

आकृति और पूरा श्वास-पाठ

स्रोत इस मुद्रा को पूर्ण योगिक श्वसन में रखते हैं। किसी शिक्षण-प्रयोग का वर्णन और हाथ की आकृति से फेफड़ों की क्षमता बढ़ने या रोग के उपचार का प्रमाण अलग बातें हैं। यहाँ स्रोत और आकृति दिए हैं; श्वास का नया अनुपात या समय नहीं। बाँहों की स्थिति असहज हो तो स्वाभाविक श्वास के पूरे पाठ में जाँघों पर हाथ रखकर बैठने का विकल्प है।

स्रोत और दायरा

आधार-संस्करण

Basic Practice of Some Pranayamas

इस प्रस्तुति का पाठ

  1. Basic Practice of Some Pranayamas

    “Mudras for pranayama,” item 4, PDF p. 3.

    Ananda Balayogi Bhavanani, International Centre for Yoga Education and Research. Source page numbering refers to the PDF; hand descriptions compared independently.

  2. Structured Yoga Module for Diabetes (2024)

    9.1(d), printed p. 49; do not combine with inconsistent recap wording on p. 51.

    Puneet Misra, AIIMS New Delhi; edited with Rashmi Sharma, DST. Used here only to check the named hand arrangements, §9.1, printed p. 49. Its treatment claims are outside these pages’ scope.

इस प्रस्तुति का दायरा

हाथ की इस आकृति का मौलिक परिचय, स्रोतों की तुलना और सरल रेखाचित्र सहित।

सीमाएँ और पाठ-भेद

ऊपर की चर्चा में महत्त्वपूर्ण भेद स्पष्ट हैं। पारम्परिक व्याख्या और कहे गए फल अपने स्रोतों के कथन हैं, चिकित्सकीय प्रमाण नहीं। समीक्षा: 11 सितम्बर 2026।