अपनी गति से
एक सहज शुरुआत
बैठने का सहारा, हाथों की एक सरल मुद्रा और आती-जाती सहज साँस। ये तीन वैकल्पिक निर्देश हैं। अपनी गति से पढ़िए और चाहें तो किसी एक के बाद रुक जाइए।
शुरू करने से पहले
शुरू करने से पहले
मज़बूत कुर्सी।
चलने की जगह।
बिना पहियों की मज़बूत कुर्सी चुनिए और उसे ऐसे फ़र्श पर रखिए जहाँ वह फिसले नहीं। तलवे पूरे टिकें और घुटने लगभग समकोण पर रहें। खड़े होकर अभ्यास करने से पहले कुर्सी दीवार से सटाकर स्थिर कर लें। साँस चलती रहे; गति उतनी ही रखें जितनी सहज लगे। दर्द, चक्कर या सामान्य से अधिक साँस फूलने पर रुक जाएँ। सीने में दबाव, अचानक कमज़ोरी या साँस लेने में बहुत कठिनाई हो तो तत्काल चिकित्सकीय सहायता लें। गर्भावस्था, हाल की शल्यचिकित्सा, हृदय या रक्तचाप की समस्या, आँखों की बीमारी, रीढ़ की तकलीफ़ या संतुलन की कठिनाई हो तो अपने चिकित्सक से अनुकूल बदलाव पूछें। यह सामान्य शैक्षिक मार्गदर्शन है; व्यक्तिगत उपचार या प्रत्यक्ष प्रशिक्षण का विकल्प नहीं।
ऑस्टियोपोरोसिस या रीढ़ की किसी कशेरुका में फ्रैक्चर हो तो आगे-पीछे झुकने या धड़ घुमाने से पहले व्यक्तिगत सलाह लें। आपके लिए बताए गए बदलाव ही अपनाएँ।
संदर्भ: NCCIH, NHS और Too Fit To Fracture।
बैठने का आधार
बैठकर
बैठकर ऊर्ध्व विस्तार
ताड़ासन से प्रेरित कुर्सी-अभ्यास
बैठने का आधार पहचानिए। तलवों से सिर तक शरीर को जगह दीजिए, बिना अकड़े।

तैयारी
कुर्सी के अगले आधे हिस्से पर बैठें। पैरों में कूल्हों जितना फ़ासला हो, घुटने टखनों के ऊपर और हाथ जाँघों पर रहें।
कैसे करें
- साँस लेते हुए बैठने की हड्डियों से सिर के शिखर तक हल्का विस्तार अनुभव करें।
- साँस छोड़ते हुए पसलियों को सहज रखें। दोनों तलवों का दबाव बराबर रहने दें।
- साँस लेते हुए हाथ सामने से ऊपर उठाएँ, केवल उतना जहाँ कंधे सहज रहें।
- साँस छोड़ते हुए हाथ जाँघों पर लौटाएँ। छाती को ढहने न दें।
श्वास और मात्रा
सीधे बैठे हुए 3 से 5 सहज श्वास लें।
अभ्यास को समझिए
ताड़ासन की खड़े रहने वाली आकृति यहाँ कुर्सी के सहारे बदली गई है। ध्यान शरीर को तानने पर नहीं, आधार और सहज विस्तार को साथ रखने पर है।
कुर्सी के अनुकूल रूप: राजीव लुल्ला की मूल अभ्यास-सामग्री। सामान्य व्यायाम और सावधानियों के संदर्भ अंत में दिए हैं।
परिचय और स्रोत
स्रोत और शिक्षण-संदर्भ
व्यायाम की सामान्य सलाह और परम्परा के वर्णन अलग प्रयोजनों के लिए दिए हैं। शास्त्रीय वर्णन अपने आप चिकित्सकीय प्रमाण नहीं बन जाता। कुछ स्रोत-कड़ियाँ अंग्रेज़ी में हैं।
- योग: प्रभाव और सावधानियाँ
NCCIH का सामान्य मार्गदर्शन: शुरुआती अभ्यास, अनुकूल बदलाव और सुरक्षा।
- बैठकर किए जाने वाले व्यायाम
NHS: कुर्सी का चुनाव और सामान्य बैठा व्यायाम।
- शक्ति के लिए सामान्य व्यायाम
NHS: दीवार पर हथेलियों से धक्का देने सहित शुरुआती गतिविधियाँ।
- अधिक आयु में शारीरिक सक्रियता
CDC: व्यापक सक्रियता में शक्ति और संतुलन का स्थान।
- ऑस्टियोपोरोसिस में व्यायाम-संबंधी सहमति
Too Fit To Fracture: जियानग्रेगोरियो और सहकर्मियों की सिफ़ारिशें; रीढ़ की देखभाल के लिए व्यक्तिगत अनुकूलन।
हाथों को विश्राम
दोनों हाथ मिलने का छोटा-सा संकेत दिन की भागदौड़ में ठहरने की जगह बन सकता है। हाथों का स्पर्श महसूस कीजिए और सामने के इस क्षण पर ध्यान लाइए।
बड़ा चित्र देखिएअञ्जलि: हथेलियों का हल्का सम्पर्क; उँगलियाँ ऊपर।
आराम से बैठिए
कुर्सी या अपने सुविधाजनक आसन पर सीधे, सहज बैठिए। कन्धों को ऊपर खींचे बिना ढीला रहने दीजिए।
हाथ पहले जाँघों पर रखें। गर्दन और चेहरे की अनावश्यक कसावट छोड़ दीजिए।
हाथ कैसे रखें
- दोनों हाथ छाती के सामने लाइए और हथेलियाँ एक-दूसरे की ओर कीजिए।
- हथेलियों तथा उँगलियों को हल्के से मिलाइए। उँगलियाँ ऊपर की ओर रहें।
- हाथ शरीर की बीच की रेखा के सामने रखिए। कोहनियों को इतना ढीला रहने दीजिए कि कन्धे न उठें।
- हथेलियों का दबाव घटाकर देखिए: मुद्रा इतनी हल्की हो कि उसे सहज बनाए रख सकें।
श्वास और ध्यान
साँस को अपनी सहज गति में आने-जाने दीजिए। चाहें तो एक आती साँस और फिर जाती साँस का अनुभव कीजिए; गिनती निभाना आवश्यक नहीं।
क्या देखें
- दोनों हथेलियों का सम्पर्क कहाँ साफ़ महसूस होता है?
- कन्धे और जबड़ा ढीले हैं, या मुद्रा बनाते समय वे भी कस गए हैं?
सहज समापन
हथेलियाँ अलग कीजिए, हाथ धीरे से जाँघों पर रख दीजिए और उँगलियाँ आराम करने दें।
सरल विकल्प
हाथ कुछ नीचे रखिए या हथेलियों के बीच थोड़ी जगह छोड़ दीजिए। केवल आरामदेह सम्पर्क भी पर्याप्त है।
ध्यान रखिए
दर्द वाले जोड़ को सीधा करने या हथेलियाँ पूरी चिपकाने के लिए ज़ोर न लगाइए। दर्द, सुन्नपन या खिंचाव बढ़े तो हाथ खोलकर विश्राम दें।
स्रोत और अर्थ
शिक्षण-स्रोत इस जुड़े हाथों के रूप को प्रार्थना के आसन में रखते हैं। जोसेफ़ लेपेज इसे अञ्जलि नाम से पहचानते हैं और आदर तथा भक्ति से जोड़ते हैं। यहाँ बैठकर किया जाने वाला परिचय उसी हाथ-स्थिति का सहज रूप है; आप इसे नमस्कार, कृतज्ञता या शांत ध्यान के भाव से अपना सकते हैं।
- Art of Living: Sun Salutation · चरण 1: प्रणामासन (प्रार्थना की मुद्रा)
- Sivananda International: The Sun Salutation · चरण 1: छाती के सामने प्रार्थना की मुद्रा
- Joseph LePage: The Universe of Mudras, Part I · आरम्भिक चर्चा: अञ्जलि, हृदय के सामने जुड़े हाथ
- British Museum: figure with joined hands in Anjali · वस्तु-संख्या 1919,0717.80
साँस पर ध्यान
सहज शुरुआत
सहज श्वास का अवलोकन
पहले जो चल रहा है, उसे देखिए
बैठिए और आती-जाती साँस को पहचानिए। देखने के लिए उसे बदलना आवश्यक नहीं।
तैयारी
आराम से बैठें। पैर पूरे सहारे पर हों, हाथ जाँघों पर रखें और आँखें खुली या नज़र हल्की नीची रखें।
कैसे करें
- अगली साँस भीतर आते और बाहर जाते हुए देखें। उसकी गति या गहराई न बदलें।
- जबड़ा और कंधे ढीले होने दें। अधिक हवा भरने की कोशिश न करें।
- ध्यान भटके तो यह पहचानकर धीरे साँस के स्पर्श पर लौट आएँ।
- अंत में तलवों और कुर्सी के सहारे को फिर महसूस करें।
श्वास और मात्रा
कुछ सहज श्वास तक रहें। न कोई निश्चित गिनती, न साँस रोकना।
अभ्यास को समझिए
अभ्यास में मन का भटकना भी दिखाई देता है। उसे देखकर लौट आना इस आरम्भिक अभ्यास का हिस्सा है। यहाँ किसी विशेष अनुभव, शून्यता या विचाररहित दशा को पैदा करने का निर्देश नहीं है।
मौलिक रूप से तैयार आरम्भिक अभ्यास।
स्रोत और दायरा
आधार-संस्करण
पाठ-स्थान
- YOGA, October 2020
“Importance of Breath Awareness”, छपे पृष्ठ 36 से 38।
बिहार स्कूल ऑफ़ योग। “श्वास-सजगता का महत्त्व”, पृष्ठ 36 से 38; “भ्रामरी”, पृष्ठ 49 से 50। शिक्षण के कथन चिकित्सकीय दावों के रूप में नहीं लिए गए।
- Basic Practice of Some Pranayamas
“Pranayamas for contemplation and meditation”, पीडीएफ पृष्ठ 5।
आनन्द बालयोगी भवनानी, इंटरनेशनल सेंटर फ़ॉर योग एजुकेशन एंड रिसर्च। पृष्ठ-संख्या पीडीएफ की है; हाथ की स्थितियों के वर्णन अलग से मिलाए गए हैं।
दायरा
आधुनिक आरम्भिक रूप का परिचय, पूरे मार्गदर्शन और स्रोतों की तुलना सहित।
सीमाएँ और पाठ-भेद
ऊपर की चर्चा में महत्त्वपूर्ण भेद स्पष्ट हैं। पारम्परिक व्याख्या और कहे गए फल अपने स्रोतों के कथन हैं, चिकित्सकीय प्रमाण नहीं। समीक्षा: 11 सितम्बर 2026।
यही पूरे निर्देश अभ्यासों के अलग पन्नों पर भी उपलब्ध हैं। शिक्षण के स्रोत और इस प्रस्तुति का दायरा अभ्यास के साथ दिया गया है।