03 / मनन

प्रतीक परिचित।
अर्थ कई तहों में।

मूलाधार से सहस्रार तक कमल, तत्त्व, बीज और देवता की भाषा पढ़िए। हर व्याख्या को उसके स्रोत के साथ रखिए।

सूक्ष्म-शरीर की परम्पराओं का अध्ययन; शारीरिक अंगों का नक़्शा या रोग-निदान नहीं।

सहस्रारशीर्षआज्ञाभ्रूमध्यविशुद्धकण्ठअनाहतहृदयमणिपूरनाभिस्वाधिष्ठानश्रोणिमूलाधारमूल

यह रंग-सूची आधुनिक इन्द्रधनुषी क्रम की है। शास्त्रीय कमलों के रंग कई जगह अलग हैं।

स्रोत खुला रहे,
तभी अर्थ खुलता है।

कमल के पास ज़रा ठहरिए

मूलाधार, अनाहत, आज्ञा: नाम सुने हुए लगते हैं। मगर कमल के दल, उन पर अक्षर, भीतर का बीज और तत्त्व-मण्डल पढ़िए तो परिचित नाम के भीतर कई तहें खुलती हैं। सात रंग याद कर लेना इस पूरी भाषा को जान लेना नहीं है।

छह चक्र, फिर सहस्रार

यहाँ मुख्य शास्त्रीय संदर्भ पूर्णानन्द का षट्चक्रनिरूपण है, जिसे जॉन वुडरॉफ़ के अनुवाद और टिप्पणी सहित पढ़ा गया है। उसकी छह केन्द्रों वाली संरचना में सहस्रार ऊपर वर्णित है। इसीलिए सात परिचित केन्द्रों की सूची और ग्रंथ के नाम में छह की संख्या साथ दिखाई देती हैं।

स्थान का संकेत, शरीर का नक़्शा नहीं

स्थान समझाने के लिए मूल, नाभि, हृदय या कण्ठ जैसे संकेत आते हैं। इन्हें किसी शारीरिक अंग या ग्रन्थि की हूबहू पहचान न मानें। चक्रों का यह अध्ययन रोग का निदान करने या कुण्डलिनी-जागरण का स्वयं अभ्यास कराने के लिए नहीं है।

हर परम्परा की बात उसी से सुनिए

हर केन्द्र के नीचे शास्त्रीय वर्णन, आधुनिक मनोवैज्ञानिक अर्थ और समग्र योग की व्याख्या अलग मिलेगी। इनके रंग और अर्थ हमेशा एक नहीं हैं। उस फ़र्क़ को जल्दी से मिटाने की ज़रूरत नहीं; थोड़ा ठहरकर उसके स्रोत तक जाइए। अक्सर समझ का नया दरवाज़ा वहीं खुलता है।

01

मूलाधार

मूल में आधार

लं

शास्त्रीय वर्णन में जननेन्द्रिय के नीचे और गुदा के ऊपर, मध्य नाड़ी के मूल में। शरीर की दिशा समझने के लिए इसे मूल प्रदेश का संकेत मानें।

दल
4
तत्त्व
पृथिवीस्थूल तत्त्वों में पृथ्वी
बीज
लं

शास्त्रीय वर्णन

चार गहरे लाल दल, उन पर सुनहरे अक्षर। केन्द्र में चमकता पीला पृथिवी-मण्डल चतुष्कोण के रूप में है।

आकृति: पीला चतुष्कोण
देवता: ब्रह्मा

इस कमल को मध्य मार्ग का आधार बताया गया है। शक्ति के आरोहण की कथा इसी मूल से शुरू होती है। यह कथन ग्रंथ के सूक्ष्म-शरीर और साधना-संदर्भ का है; शरीर के किसी अंग का चिकित्सकीय विवरण नहीं।

आधुनिक व्याख्या

आधुनिक सात-रंग वाले क्रम में मूलाधार लाल है। स्थिरता, सुरक्षा और जीवन में आधार की अनुभूति से इसका सम्बन्ध जोड़ा जाता है। यह व्याख्या दलों, अक्षरों और पृथिवी-मण्डल के शास्त्रीय विवरण से अलग स्तर की बात करती है।

समग्र योग की व्याख्या

समग्र योग के और्विल-सार में यह भौतिक और अवचेतन क्षेत्र से जुड़ा केन्द्र है। शारीरिक जीवन-शक्ति तथा जड़ता दोनों का प्रसंग आता है; रंग लाल दिया गया है।

और्विल एडवेंचर का द्वितीयक सार; अलग व्याख्या-परम्परा।

पाठ में कहाँ ठहरें

केवल लाल रंग याद रखने से केन्द्र का पीला चतुष्कोण छूट जाता है। दल का रंग और तत्त्व-मण्डल का रंग अलग पढ़िए; एक ही चित्र में दोनों साथ हो सकते हैं।

षट्चक्रनिरूपण, श्लोक 4-13। द सर्पेन्ट पावर में अनुवाद और टिप्पणी; संलग्न संकलन में बाद की टिप्पणियाँ भी हैं।

02

स्वाधिष्ठान

अपना अधिष्ठान

वं

शास्त्रीय स्थान जननेन्द्रिय के मूल में, मध्य नाड़ी के भीतर बताया गया है। दिशा के लिए निचले श्रोणि-प्रदेश को समझें; यह शारीरिक अंग की निश्चित पहचान नहीं।

दल
6
तत्त्व
जलसंस्कृत पद: अप्
बीज
वं

शास्त्रीय वर्णन

सिन्दूरी छः दलों का कमल, बिजली की तरह चमकते अक्षर। बीच में श्वेत जल-मण्डल और श्वेत अर्धचन्द्र है।

आकृति: श्वेत अर्धचन्द्र
देवता: विष्णु

जल-प्रदेश और उसका बीज इस छः दलों वाले कमल में रखे गए हैं। पूरा वर्णन ध्यान की उस क्रमबद्ध भाषा का अंश है जिसमें तत्त्व, आकृति और देवता साथ पढ़े जाते हैं।

आधुनिक व्याख्या

आधुनिक क्रम में नारंगी रंग, रचनात्मकता, भावनाएँ और सम्बन्ध प्रमुख अर्थ बनते हैं। इस मनोवैज्ञानिक पाठ को शास्त्रीय जल-मण्डल के साथ रख सकते हैं, पर दोनों को एक ही कथन न मानें।

समग्र योग की व्याख्या

समग्र योग के सार में यह निम्न प्राणिक क्षेत्र से सम्बद्ध है; रचनात्मक अभिव्यक्ति और निम्न प्राणिक आवेगों का उल्लेख है। रंग गहरा बैंगनी-लाल बताया गया है।

और्विल एडवेंचर का द्वितीयक सार; अलग व्याख्या-परम्परा।

पाठ में कहाँ ठहरें

स्वाधिष्ठान को पढ़ते समय देखें कि तीन व्याख्याएँ किस बात पर ठहरती हैं: शास्त्रीय पाठ जल-मण्डल पर, आधुनिक पाठ भावनात्मक जीवन पर, और समग्र योग प्राणिक क्षेत्र पर। शब्द समान हों तो भी उनकी पृष्ठभूमि अलग हो सकती है।

षट्चक्रनिरूपण, श्लोक 14-18। द सर्पेन्ट पावर में अनुवाद और टिप्पणी; संलग्न संकलन में बाद की टिप्पणियाँ भी हैं।

03

मणिपूर

मणियों का नगर · नाभि

रं

शास्त्रीय वर्णन में नाभि के मूल में। दिशा समझने के लिए मध्य अक्ष के नाभि-प्रदेश का संकेत है।

दल
10
तत्त्व
अग्नितेजस् का क्षेत्र
बीज
रं

शास्त्रीय वर्णन

कमल का रंग घने वर्षा-मेघ जैसा, अक्षर नीलकमल जैसे। बीच में अग्नि का लाल त्रिकोण उगते सूर्य की भाँति चमकता है।

आकृति: उगते सूर्य जैसा लाल त्रिकोण
देवता: रुद्र

नाभि-कमल के भीतर अग्नि-प्रदेश और रुद्र का वर्णन आता है। तत्त्व का अग्नि होना यहाँ ध्यान-प्रतीक का अंश है; इसे पाचन-रोग की पहचान या उपचार की कसौटी न बनाएँ।

आधुनिक व्याख्या

आधुनिक क्रम में पीला रंग और उसके साथ आत्मविश्वास, व्यक्तिगत सामर्थ्य तथा उद्देश्यपूर्ण कर्म के अर्थ मिलते हैं। शास्त्रीय मेघ-वर्ण कमल और यह पीला रंग एक-दूसरे के पर्याय नहीं हैं।

समग्र योग की व्याख्या

समग्र योग के सार में यह प्राणिक केन्द्र है। महत्त्वाकांक्षा, अधिकार और विजय की वृत्तियों के साथ आनन्द और उदारता का भी प्रसंग आता है। रंग बैंगनी दिया गया है।

और्विल एडवेंचर का द्वितीयक सार; अलग व्याख्या-परम्परा।

पाठ में कहाँ ठहरें

अग्नि का अर्थ हर संदर्भ में एक नहीं होता। यहाँ पहले ग्रंथ का अग्नि-मण्डल समझें, फिर आधुनिक आत्मविश्वास वाली व्याख्या पढ़ें। इससे प्रतीक और उसका बाद का अनुप्रयोग अलग दिखाई देंगे।

षट्चक्रनिरूपण, श्लोक 19-21। द सर्पेन्ट पावर में अनुवाद और टिप्पणी; संलग्न संकलन में बाद की टिप्पणियाँ भी हैं।

04

अनाहत

अनाहत · हृदय-प्रदेश

यं

नाभि-कमल के ऊपर हृदय-प्रदेश में वर्णित। दिशा के लिए वक्ष के मध्य भाग का संकेत है; इसे धड़कते हृदय-अंग का नाम न मानें।

दल
12
तत्त्व
वायु
बीज
यं

शास्त्रीय वर्णन

बन्धूक के गहरे लाल पुष्प जैसा कमल, बारह दल और सिन्दूरी अक्षर। भीतर धूम्र-वर्ण षट्कोण वायु-मण्डल है।

आकृति: धुएँ के रंग की षट्कोण आकृति
देवता: ईश · ईशान रुद्र

हृदय-कमल की तुलना कल्पवृक्ष से की गई है और भीतर के आत्मतत्त्व पर ध्यान का प्रसंग आता है। इस वर्णन की भक्ति और ध्यान की भाषा को केवल भावनाओं की सूची में सीमित कर देना उसका अर्थ छोटा कर देगा।

आधुनिक व्याख्या

आधुनिक क्रम में हरा रंग, प्रेम, करुणा और भावनात्मक संतुलन के सम्बन्ध मिलते हैं। ये आज के पाठक के लिए अर्थ खोलने वाली व्याख्याएँ हैं; शास्त्रीय कमल का रंग फिर भी गहरा लाल ही पढ़ना होगा।

समग्र योग की व्याख्या

समग्र योग के सार में यह भावनात्मक सत्ता का केन्द्र है; चैत्य पुरुष को इसके पीछे बताया जाता है। चैत्य सत्ता का यह पद केवल क्षणिक भावना का दूसरा नाम नहीं है। रंग सुनहरा-गुलाबी दिया गया है।

और्विल एडवेंचर का द्वितीयक सार; अलग व्याख्या-परम्परा।

पाठ में कहाँ ठहरें

हृदय कहने पर हम अंग, भावना और अन्तरतम, तीनों की ओर जा सकते हैं। पढ़ते समय पहचानें कि किसी अनुच्छेद में कौन-सा अर्थ सक्रिय है। हर जगह तीनों को मिला देने से सूक्ष्म अन्तर खो जाता है।

षट्चक्रनिरूपण, श्लोक 22-27। द सर्पेन्ट पावर में अनुवाद और टिप्पणी; संलग्न संकलन में बाद की टिप्पणियाँ भी हैं।

05

विशुद्ध

विशुद्ध · कण्ठ

हं

शास्त्रीय स्थान कण्ठ-मूल में है। शरीर की दिशा के लिए गले के निचले भाग का संकेत लें।

दल
16
तत्त्व
आकाश
बीज
हं

शास्त्रीय वर्णन

धुएँ की आभा वाला बैंगनी कमल, सोलह दल और लाल स्वर-वर्ण। केन्द्र में निर्मल श्वेत गोल आकाश-मण्डल है।

आकृति: निर्मल श्वेत वृत्त
देवता: सदाशिव

वर्णन में आकाश, स्वर और चन्द्र-प्रदेश का सम्बन्ध आता है। अक्षरों को यहाँ केवल सजावट न समझें: वे कमल की ध्यान-संरचना का हिस्सा हैं। आगे का साधना-प्रसंग प्रत्यक्ष परम्परागत मार्गदर्शन का विषय है।

आधुनिक व्याख्या

आधुनिक क्रम में नीला रंग और संवाद, वाणी तथा अभिव्यक्ति के अर्थ प्रमुख हैं। यह अर्थ-सरणी पारम्परिक अक्षर-मण्डल से प्रेरक सम्बन्ध रख सकती है, पर उसका पूरा स्थान नहीं लेती।

समग्र योग की व्याख्या

समग्र योग में यह मानसिक केन्द्रों में गिना गया है, विशेषकर विचार की बाहरी अभिव्यक्ति से सम्बन्धित। और्विल-सार में इसका रंग धूसर है।

और्विल एडवेंचर का द्वितीयक सार; अलग व्याख्या-परम्परा।

पाठ में कहाँ ठहरें

कण्ठ और वाणी का सम्बन्ध सहज लगता है। फिर भी शास्त्रीय स्वर-वर्ण, आधुनिक संवाद-कौशल और समग्र योग की मानसिक अभिव्यक्ति को उनके अपने संदर्भ में पढ़िए। एक साधारण समानता पूरी व्याख्या नहीं है।

षट्चक्रनिरूपण, श्लोक 28-31। द सर्पेन्ट पावर में अनुवाद और टिप्पणी; संलग्न संकलन में बाद की टिप्पणियाँ भी हैं।

06

आज्ञा

आज्ञा · भ्रूमध्य

भौंहों के बीच वर्णित केन्द्र। ध्यान की दिशा मध्य अक्ष की ओर रखी जाती है; यह भौतिक आँख या मस्तिष्क की ग्रन्थि की निश्चित पहचान नहीं।

दल
2
तत्त्व
मनस्पाँच स्थूल तत्त्वों से आगे
बीज

शास्त्रीय वर्णन

चन्द्रमा जैसा श्वेत, दो दलों वाला कमल और दो श्वेत अक्षर। भीतर की आकृतियों के वर्णन में चन्द्र-ज्योति और विद्युत् जैसी उपमाएँ आती हैं।

आकृति: भीतर का प्रकाशमय त्रिकोण
देवता: परमशिव · अर्धनारीश्वर रूप का भी प्रसंग

यहाँ सूक्ष्म मन का प्रसंग है। इसे पृथिवी से आकाश तक की सूची में छठा स्थूल तत्त्व जोड़कर न पढ़ें। ग्रंथ की ध्यान-यात्रा इस बिन्दु पर और सूक्ष्म होती है; उसकी क्रियात्मक विधि केवल पढ़कर आरम्भ करने के लिए नहीं दी गई है।

आधुनिक व्याख्या

आधुनिक क्रम में गहरा नील रंग, अन्तर्दृष्टि, विवेक और सहज बोध के सम्बन्ध मिलते हैं। इन्हें किसी अनुभव को अलौकिक सिद्ध करने की कसौटी न बनाएँ।

समग्र योग की व्याख्या

समग्र योग के सार में यह संकल्प, मानसिक क्रियाशीलता, ज्ञान और सजगता से सम्बन्धित मानसिक केन्द्र है। यहाँ इसका रंग श्वेत बताया गया है।

और्विल एडवेंचर का द्वितीयक सार; अलग व्याख्या-परम्परा।

पाठ में कहाँ ठहरें

तत्त्व की पंक्ति में मनस् देखकर ठहरिए। यहाँ मानचित्र केवल भौतिक पदार्थों का क्रम नहीं है। इसी अन्तर के कारण नीचे की पाँच प्रविष्टियों और आज्ञा को एक जैसी श्रेणी में रखकर पढ़ना भ्रामक हो सकता है।

षट्चक्रनिरूपण, श्लोक 32-38। द सर्पेन्ट पावर में अनुवाद और टिप्पणी; संलग्न संकलन में बाद की टिप्पणियाँ भी हैं।

07

सहस्रार

सहस्रदल · शीर्ष से ऊपर

छः केन्द्रों के ऊपर, सिर के शिखर और उससे ऊपर के प्रदेश में वर्णित।

दल
1,000
तत्त्व
स्थूल तत्त्वों से परेकिसी एक स्थूल तत्त्व का मण्डल नहीं
बीज
कोई एक बीज निर्धारित नहीं

शास्त्रीय वर्णन

पूर्णचन्द्र से भी उज्ज्वल सहस्रदल कमल। केसरों में उगते सूर्य की आभा और दलों पर बार-बार विन्यस्त श्वेत अक्षर वर्णित हैं।

आकृति: नीचे की ओर मुख वाला कमल और भीतर चन्द्र-प्रदेश
देवता: परमशिव और शक्ति के ऐक्य का प्रसंग

सहस्रार को छः चक्रों से ऊपर पूर्ण आनन्द और परम तत्त्व में लय के प्रसंग में रखा गया है। यहाँ वर्णन साधना की परिणति का है। इसे शरीर में कोई नया केन्द्र खोलने की छोटी तकनीक की तरह प्रस्तुत करना ग्रंथ के आशय को हल्का कर देता है।

आधुनिक व्याख्या

आधुनिक क्रम में बैंगनी या श्वेत रंग, आध्यात्मिक सजगता और व्यापक चेतना के अर्थ मिलते हैं। यह आधुनिक सार शास्त्रीय विवरण का सम्पूर्ण अनुवाद नहीं है।

समग्र योग की व्याख्या

समग्र योग के और्विल-सार में यह अतिचेतन क्षेत्र और उच्चतर चेतना से सम्पर्क का केन्द्र है। रंग नीला, स्वर्णिम प्रकाश के साथ बताया गया है।

और्विल एडवेंचर का द्वितीयक सार; अलग व्याख्या-परम्परा।

पाठ में कहाँ ठहरें

सहस्रदल की संख्या और ज्योति की उपमाएँ वर्णन का पैमाना बदल देती हैं। छह केन्द्रों की क्रमिक सूची के बाद यह परिणति का चित्र है। पहले ग्रंथ के इस बदलाव को पढ़ें, फिर आधुनिक सातवें चक्र वाले संक्षेप से तुलना करें।

षट्चक्रनिरूपण, श्लोक 40-49। द सर्पेन्ट पावर में अनुवाद और टिप्पणी; संलग्न संकलन में बाद की टिप्पणियाँ भी हैं।

स्रोत और शिक्षण-संदर्भ

व्यायाम की सामान्य सलाह और परम्परा के वर्णन अलग प्रयोजनों के लिए दिए हैं। शास्त्रीय वर्णन अपने आप चिकित्सकीय प्रमाण नहीं बन जाता। कुछ स्रोत-कड़ियाँ अंग्रेज़ी में हैं।

  1. षट्चक्रनिरूपण और द सर्पेन्ट पावर

    पूर्णानन्द का पाठ; जॉन वुडरॉफ़ का अनुवाद और टिप्पणी। संलग्न संकलन में वीरस्वामी कृष्णराज की बाद की सामग्री भी है। यहाँ शास्त्रीय प्रविष्टियाँ 4-49 के पाठ-संदर्भों पर आधारित हैं।

  2. समग्र योग में चक्रों की व्याख्या

    और्विल एडवेंचर का 2021 का परिचय। यह द्वितीयक सार है; इसे षट्चक्रनिरूपण के कथन के रूप में प्रस्तुत नहीं किया गया है।

  3. आधुनिक चक्र-व्याख्या

    अनोडिया जूडिथ की Wheels of Life: आधुनिक अर्थ-सरणी का संदर्भ। कड़ी प्रकाशक की पुस्तक-सूचना की ओर है।