राग तुखारी
रात का राग, मध्य-एशियाई संगति।
तुखारी रात का राग है, गहरा। तुखार-क्षेत्र (आज का अफ़ग़ानिस्तान-तजाकिस्तान) से नाम के स्रोत का सम्बन्ध है, जो मध्य-एशियाई संगीत-परम्पराओं से इसका नाता बताता है।
ग्रंथ में तुखारी की रचनाएँ संख्या में सीमित हैं, मगर हर एक में एक दूर-देश की धुन सुनाई देती है।
“चेति बसंत भला भवर सुहावड़े ।” तुखारी M1, बारहमाहा
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- बारहमाहा (M1): अंग 1107-1110
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