लुल्ला परिवारLulla Family
English
सिख वाणीनाम, सेवा और एकत्व

राग तुखारी

राग · M1

राग तुखारी

रात का राग, मध्य-एशियाई संगति।

तुखारी रात का राग है, गहरा। तुखार-क्षेत्र (आज का अफ़ग़ानिस्तान-तजाकिस्तान) से नाम के स्रोत का सम्बन्ध है, जो मध्य-एशियाई संगीत-परम्पराओं से इसका नाता बताता है।

ग्रंथ में तुखारी की रचनाएँ संख्या में सीमित हैं, मगर हर एक में एक दूर-देश की धुन सुनाई देती है।

"चेतु बसंतु भला भवर सुहावड़े ॥" तुखारी M1, बारहमाहा
इस राग के सब अंग

इस राग के शबद

हर शबद अपनी पहली पंक्ति से, वाणी के अनुसार। पंक्ति पर जाने से वह शबद अपने अंग पर खुलता है।

महला 1 (22)
  1. तू सुणि किरत करंमा पुरबि कमाइआ ॥ सिरि सिरि सुख सहंमा देहि सु तू भला ॥अंग 1107
  2. सा धन सभि रस चोलै अंकि समाणीआ ॥अंग 1107
  3. तू सुणि हरि रस भिंने प्रीतम आपणे ॥अंग 1107
  4. बरसै अंम्रित धार बूंद सुहावणी ॥अंग 1107
  5. चेतु बसंतु भला भवर सुहावड़े ॥अंग 1107
  6. वैसाखु भला साखा वेस करे ॥अंग 1108
  7. माहु जेठु भला प्रीतमु किउ बिसरै ॥अंग 1108
  8. आसाड़ु भला सूरजु गगनि तपै ॥अंग 1108
  9. सावणि सरस मना घण वरसहि रुति आए ॥अंग 1108
  10. भादउ भरमि भुली भरि जोबनि पछुताणी ॥अंग 1108
  11. असुनि आउ पिरा सा धन झूरि मुई ॥अंग 1108
  12. कतकि किरतु पइआ जो प्रभ भाइआ ॥अंग 1109
  13. मंघर माहु भला हरि गुण अंकि समावए ॥अंग 1109
  14. पोखि तुखारु पड़ै वणु त्रिणु रसु सोखै ॥अंग 1109
  15. माघि पुनीत भई तीरथु अंतरि जानिआ ॥अंग 1109
  16. फलगुनि मनि रहसी प्रेमु सुभाइआ ॥अंग 1109
  17. बे दस माह रुती थिती वार भले ॥ घड़ी मूरत पल साचे आए सहजि मिले ॥अंग 1109
  18. पहिलै पहरै नैण सलोनड़ीए रैणि अंधिआरी राम ॥अंग 1110
  19. तारा चड़िआ लंमा किउ नदरि निहालिआ राम ॥अंग 1110
  20. भोलावड़ै भुली भुलि भुलि पछोताणी ॥अंग 1111
  21. मेरे लाल रंगीले हम लालन के लाले ॥अंग 1112
  22. ए मन मेरिआ तू समझु अचेत इआणिआ राम ॥अंग 1112
महला 4 (4)
  1. अंतरि पिरी पिआरु किउ पिर बिनु जीवीऐ राम ॥अंग 1113
  2. हरि हरि अगम अगाधि अपरंपर अपरपरा ॥अंग 1114
  3. तू जगजीवनु जगदीसु सभ करता स्रिसटि नाथु ॥अंग 1115
  4. नावणु पुरबु अभीचु गुर सतिगुर दरसु भइआ ॥अंग 1116
महला 5 (1)
  1. घोलि घुमाई लालना गुरि मनु दीना ॥अंग 1117

संबंधित पृष्ठ