मुद्रा का अभ्यास
एक छोटे-से स्पर्श पर ध्यान टिकाइए। अंगूठे और तर्जनी का मिलना ऐसा साफ़ संकेत देता है जिस पर मन भटके तो फिर लौट सकते हैं।
बड़ा चित्र देखिएचिन: उँगलियों की स्थिति पास से। हाथ रखने की सहज स्थिति निर्देशों में देखिए।
आराम से बैठिए
आराम से सीधे बैठिए और दोनों हाथ जाँघों पर रखिए। कोहनियाँ सहज रहें।
हाथ कैसे रखें
- दाहिने हाथ की तर्जनी और अंगूठे के सिरों को हल्के से मिलाकर गोल घेरा बनाइए।
- बीच की, अनामिका और छोटी उँगली को आराम से खुला रहने दीजिए; उन्हें अकड़ाकर सीधा न कीजिए।
- बाएँ हाथ में भी यही स्थिति बनाइए।
- हथेलियाँ ऊपर रखते हुए हाथों की पीठ जाँघों पर टिका दीजिए।
श्वास और ध्यान
सहज साँस लेते हुए उँगली और अंगूठे के सम्पर्क को महसूस कीजिए। ध्यान हट जाए तो उसी स्पर्श पर लौट आइए।
क्या देखें
- क्या घेरा बिना दबाव के बना रह सकता है?
- खुली तीन उँगलियाँ और कलाइयाँ भी आराम में हैं या केवल देखने में सीधी हैं?
सहज समापन
तर्जनी और अंगूठे को अलग कीजिए। हाथ खोलकर जाँघों पर रख दें।
सरल विकल्प
दोनों हाथों में एक साथ करना कठिन लगे तो पहले एक हाथ से देखिए। सिरों को मिलाना असुविधाजनक हो तो हाथ खुला ही रखिए।
ध्यान रखिए
उँगली के जोड़ खींचकर घेरा न बनाइए। दर्द या झनझनाहट हो तो सम्पर्क छोड़ दें।
स्रोत और अर्थ
यहाँ हथेली ऊपर वाला रूप चिन मुद्रा के नाम से दिया है। ऑस्ट्रेलियन स्कूल ऑफ़ मेडिटेशन ऐंड योग हथेली नीचे वाले उसी उँगली-रूप को ज्ञान मुद्रा कहता है। आराम हो तो हाथ को धीरे से पलटकर यह भेद भी देख सकते हैं। नाम-पद्धति सभी विद्यालयों में एक-सी नहीं। उसी विद्यालय की व्याख्या में अंगूठे और तर्जनी का मिलना जीव और परमात्मा के सम्बन्ध का प्रतीक है।
- Ananda Balayogi Bhavanani, ICYER: Basic Practice of Some Pranayamas · प्राणायाम की मुद्राएँ, बिन्दु 1 से 6, पीडीएफ पृष्ठ 2 से 3
- AIIMS / DST: Structured Yoga Module for Diabetes (2024) · खण्ड 9.1 के चारों उप-खण्ड, छपा पृष्ठ 49
- Australian School of Meditation and Yoga: Chin and Jnana Mudra · हाथ का रूप, हथेली की दिशा और विद्यालय की प्रतीक-व्याख्या