ज्ञान कर्म संन्यास योग
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पाठ-संदर्भ
चौथा अध्याय “ज्ञान-कर्म-संन्यास-योग” है, बयालिस श्लोक। पहले-श्लोक में कृष्ण कहते हैं कि उन्होंने यह विद्या मूल-रूप से सूर्य को बतायी थी, सूर्य ने मनु को, मनु ने इक्ष्वाकु को, और इसी क्रम से राजा-ऋषियों ने सिखाया। यह एक तरह का वैदिक-परम्परा का दावा है। फिर अवतार-तत्त्व आता है। श्लोक सात, “यदा यदा हि धर्मस्य ग्लानिः” (जब-जब धर्म की हानि होती है, तब-तब मैं आता हूँ), भगवद् गीता की दूसरी सबसे-प्रसिद्ध पंक्ति है, अड़तालीसवें के बाद। तेरहवें श्लोक में चार-वर्ण की उत्पत्ति की चर्चा है, जो बाद के दक्षिण-भारतीय आचार्यों, विशेषतः मध्व के लिए, सामाजिक-दर्शन का आधार-वाक्य बना।
अध्याय का सार
इस अध्याय में कृष्ण एक बहुत बड़ा कथन करते हैं: ‘यह योग मैंने सूर्य को दिया था, सूर्य ने मनु को, मनु ने इक्ष्वाकु को। फिर यह विद्या लुप्त हो गई। आज मैं आपको (अर्जुन को) यही पुरानी विद्या फिर दे रहा हूँ।’
अर्जुन उलझन में पड़ जाता है: ‘आप का जन्म अभी हुआ, सूर्य का तो बहुत पहले। यह कैसे संभव है?’ कृष्ण जवाब में ‘अवतार’ का सिद्धान्त समझाते हैं: ‘जब-जब धर्म की हानि होती है, मैं प्रकट होता हूँ।’

इसके बाद कृष्ण कर्म के तीन रूप समझाते हैं: कर्म, अकर्म, और विकर्म (दूषित कर्म)। बारीक बात यह है कि कर्म और अकर्म दिखने में अलग हैं, मगर सही दृष्टि से देखें तो एक हो सकते हैं।

अंत में कृष्ण ज्ञान-यज्ञ की महिमा बताते हैं। हर तरह का यज्ञ बाहर का है, मगर ज्ञान-यज्ञ अंदर का है, और सब से ऊँचा।

मुख्य श्लोक
श्लोक 4.7-8
अभ्युत्थानमधर्मस्य तदात्मानं सृजाम्यहम् ॥
परित्राणाय साधूनां विनाशाय च दुष्कृताम् ।
धर्मसंस्थापनार्थाय सम्भवामि युगे युगे ॥
श्लोक 4.11
मम वर्त्मानुवर्तन्ते मनुष्याः पार्थ सर्वशः ॥
भक्ति-योग का बीज। सब रास्ते कृष्ण तक जाते हैं, बस आने वाले का ढंग अलग-अलग हो सकता है।
श्लोक 4.18
स बुद्धिमान्मनुष्येषु स युक्तः कृत्स्नकर्मकृत् ॥
बारीक विरोधाभास। कोई काम करता दिखता है मगर भीतर निश्चल है, तो वो असल में अकर्म है। और कोई बैठा है मगर भीतर हलचल है, तो वो कर्म कर रहा है।

श्लोक 4.34
उपदेक्ष्यन्ति ते ज्ञानं ज्ञानिनस्तत्त्वदर्शिनः ॥
शिक्षा का त्रिवेणी-संगम। विनम्रता, सही सवाल, सेवा। तीनों के बिना ज्ञान आता नहीं, और रुकता नहीं।
अवतार के सिद्धान्त का स्रोत। दो श्लोक मिलकर बहुत बार उद्धृत होते हैं। ‘युगे युगे’ का यह नाद आज भी मंदिरों में सुनाई देता है।