चित्रों की बात

चित्रों की बात

ये चित्र कैसे बनते हैं

इस साइट का लगभग हर बड़ा प्रसंग एक चित्र के साथ चलता है। प्रेरणा राजा रवि वर्मा की चित्र-परम्परा से है: तेल-रंग की गहराई, दरबारों और वनों की वही गरिमा, चेहरों पर वही ठहराव।

बनते ये आज के औज़ारों से हैं। एक बँधी हुई शैली में, AI उपकरणों की सहायता से, केवल इसी साइट के लिए। फिर हर चित्र कथा के पाठ से मिलाया जाता है: कौन पात्र है, वेश क्या है, हाथ में क्या है, प्रसंग कहाँ का है। जो चित्र जाँच में खरा नहीं उतरता, वह फिर से बनता है; ऐसे बदलाव सुधार-पत्र में दर्ज होते हैं।

घर की बैठक में जैसे कोई पुरानी पोथी खोलकर चित्र दिखाता चले, वैसा ही इनका काम है: कथा को और पास ले आना।

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