अंग
1430
राग Maalaa
पढ़ने का समय: लगभग 2-3 मिनट
ਪੰਚ ਰਾਗਨੀ ਸੰਗਿ ਉਚਰਹੀ ॥
ਪ੍ਰਥਮ ਭੈਰਵੀ ਬਿਲਾਵਲੀ ॥
ਪੁੰਨਿਆਕੀ ਗਾਵਹਿ ਬੰਗਲੀ ॥
ਪੁਨਿ ਅਸਲੇਖੀ ਕੀ ਭਈ ਬਾਰੀ ॥
ਏ ਭੈਰਉ ਕੀ ਪਾਚਉ ਨਾਰੀ ॥
ਪੰਚਮ ਹਰਖ ਦਿਸਾਖ ਸੁਨਾਵਹਿ ॥
ਬੰਗਾਲਮ ਮਧੁ ਮਾਧਵ ਗਾਵਹਿ ॥੧॥
ਲਲਤ ਬਿਲਾਵਲ ਗਾਵਹੀ ਅਪੁਨੀ ਅਪੁਨੀ ਭਾਂਤਿ ॥
ਅਸਟ ਪੁਤ੍ਰ ਭੈਰਵ ਕੇ ਗਾਵਹਿ ਗਾਇਨ ਪਾਤ੍ਰ ॥੧॥
ਦੁਤੀਆ ਮਾਲਕਉਸਕ ਆਲਾਪਹਿ ॥
ਸੰਗਿ ਰਾਗਨੀ ਪਾਚਉ ਥਾਪਹਿ ॥
ਗੋਂਡਕਰੀ ਅਰੁ ਦੇਵਗੰਧਾਰੀ ॥
ਗੰਧਾਰੀ ਸੀਹੁਤੀ ਉਚਾਰੀ ॥
ਧਨਾਸਰੀ ਏ ਪਾਚਉ ਗਾਈ ॥
ਮਾਲ ਰਾਗ ਕਉਸਕ ਸੰਗਿ ਲਾਈ ॥
ਮਾਰੂ ਮਸਤਅੰਗ ਮੇਵਾਰਾ ॥
ਪ੍ਰਬਲਚੰਡ ਕਉਸਕ ਉਭਾਰਾ ॥
ਖਉਖਟ ਅਉ ਭਉਰਾਨਦ ਗਾਏ ॥
ਅਸਟ ਮਾਲਕਉਸਕ ਸੰਗਿ ਲਾਏ ॥੧॥
ਪੁਨਿ ਆਇਅਉ ਹਿੰਡੋਲੁ ਪੰਚ ਨਾਰਿ ਸੰਗਿ ਅਸਟ ਸੁਤ ॥
ਉਠਹਿ ਤਾਨ ਕਲੋਲ ਗਾਇਨ ਤਾਰ ਮਿਲਾਵਹੀ ॥੧॥
ਤੇਲੰਗੀ ਦੇਵਕਰੀ ਆਈ ॥
ਬਸੰਤੀ ਸੰਦੂਰ ਸੁਹਾਈ ॥
ਸਰਸ ਅਹੀਰੀ ਲੈ ਭਾਰਜਾ ॥
ਸੰਗਿ ਲਾਈ ਪਾਂਚਉ ਆਰਜਾ ॥
ਸੁਰਮਾਨੰਦ ਭਾਸਕਰ ਆਏ ॥
ਚੰਦ੍ਰਬਿੰਬ ਮੰਗਲਨ ਸੁਹਾਏ ॥
ਸਰਸਬਾਨ ਅਉ ਆਹਿ ਬਿਨੋਦਾ ॥
ਗਾਵਹਿ ਸਰਸ ਬਸੰਤ ਕਮੋਦਾ ॥
ਅਸਟ ਪੁਤ੍ਰ ਮੈ ਕਹੇ ਸਵਾਰੀ ॥
ਪੁਨਿ ਆਈ ਦੀਪਕ ਕੀ ਬਾਰੀ ॥੧॥
ਕਛੇਲੀ ਪਟਮੰਜਰੀ ਟੋਡੀ ਕਹੀ ਅਲਾਪਿ ॥
ਕਾਮੋਦੀ ਅਉ ਗੂਜਰੀ ਸੰਗਿ ਦੀਪਕ ਕੇ ਥਾਪਿ ॥੧॥
ਕਾਲੰਕਾ ਕੁੰਤਲ ਅਉ ਰਾਮਾ ॥
ਕਮਲਕੁਸਮ ਚੰਪਕ ਕੇ ਨਾਮਾ ॥
ਗਉਰਾ ਅਉ ਕਾਨਰਾ ਕਲੵਾਨਾ ॥
ਅਸਟ ਪੁਤ੍ਰ ਦੀਪਕ ਕੇ ਜਾਨਾ ॥੧॥
ਸਭ ਮਿਲਿ ਸਿਰੀਰਾਗ ਵੈ ਗਾਵਹਿ ॥
ਪਾਂਚਉ ਸੰਗਿ ਬਰੰਗਨ ਲਾਵਹਿ ॥
ਬੈਰਾਰੀ ਕਰਨਾਟੀ ਧਰੀ ॥
ਗਵਰੀ ਗਾਵਹਿ ਆਸਾਵਰੀ ॥
ਤਿਹ ਪਾਛੈ ਸਿੰਧਵੀ ਅਲਾਪੀ ॥
ਸਿਰੀਰਾਗ ਸਿਉ ਪਾਂਚਉ ਥਾਪੀ ॥੧॥
ਸਾਲੂ ਸਾਰਗ ਸਾਗਰਾ ਅਉਰ ਗੋਂਡ ਗੰਭੀਰ ॥
ਅਸਟ ਪੁਤ੍ਰ ਸ੍ਰੀਰਾਗ ਕੇ ਗੁੰਡ ਕੁੰਭ ਹਮੀਰ ॥੧॥
ਖਸਟਮ ਮੇਘ ਰਾਗ ਵੈ ਗਾਵਹਿ ॥
ਪਾਂਚਉ ਸੰਗਿ ਬਰੰਗਨ ਲਾਵਹਿ ॥
ਸੋਰਠਿ ਗੋਂਡ ਮਲਾਰੀ ਧੁਨੀ ॥
ਪੁਨਿ ਗਾਵਹਿ ਆਸਾ ਗੁਨ ਗੁਨੀ ॥
ਊਚੈ ਸੁਰਿ ਸੂਹਉ ਪੁਨਿ ਕੀਨੀ ॥
ਮੇਘ ਰਾਗ ਸਿਉ ਪਾਂਚਉ ਚੀਨੀ ॥੧॥
ਬੈਰਾਧਰ ਗਜਧਰ ਕੇਦਾਰਾ ॥
ਜਬਲੀਧਰ ਨਟ ਅਉ ਜਲਧਾਰਾ ॥
ਪੁਨਿ ਗਾਵਹਿ ਸੰਕਰ ਅਉ ਸਿਆਮਾ ॥
ਮੇਘ ਰਾਗ ਪੁਤ੍ਰਨ ਕੇ ਨਾਮਾ ॥੧॥
ਖਸਟ ਰਾਗ ਉਨਿ ਗਾਏ ਸੰਗਿ ਰਾਗਨੀ ਤੀਸ ॥
ਸਭੈ ਪੁਤ੍ਰ ਰਾਗੰਨ ਕੇ ਅਠਾਰਹ ਦਸ ਬੀਸ ॥੧॥੧॥
ਪ੍ਰਥਮ ਭੈਰਵੀ ਬਿਲਾਵਲੀ ॥
ਪੁੰਨਿਆਕੀ ਗਾਵਹਿ ਬੰਗਲੀ ॥
ਪੁਨਿ ਅਸਲੇਖੀ ਕੀ ਭਈ ਬਾਰੀ ॥
ਏ ਭੈਰਉ ਕੀ ਪਾਚਉ ਨਾਰੀ ॥
ਪੰਚਮ ਹਰਖ ਦਿਸਾਖ ਸੁਨਾਵਹਿ ॥
ਬੰਗਾਲਮ ਮਧੁ ਮਾਧਵ ਗਾਵਹਿ ॥੧॥
ਲਲਤ ਬਿਲਾਵਲ ਗਾਵਹੀ ਅਪੁਨੀ ਅਪੁਨੀ ਭਾਂਤਿ ॥
ਅਸਟ ਪੁਤ੍ਰ ਭੈਰਵ ਕੇ ਗਾਵਹਿ ਗਾਇਨ ਪਾਤ੍ਰ ॥੧॥
ਦੁਤੀਆ ਮਾਲਕਉਸਕ ਆਲਾਪਹਿ ॥
ਸੰਗਿ ਰਾਗਨੀ ਪਾਚਉ ਥਾਪਹਿ ॥
ਗੋਂਡਕਰੀ ਅਰੁ ਦੇਵਗੰਧਾਰੀ ॥
ਗੰਧਾਰੀ ਸੀਹੁਤੀ ਉਚਾਰੀ ॥
ਧਨਾਸਰੀ ਏ ਪਾਚਉ ਗਾਈ ॥
ਮਾਲ ਰਾਗ ਕਉਸਕ ਸੰਗਿ ਲਾਈ ॥
ਮਾਰੂ ਮਸਤਅੰਗ ਮੇਵਾਰਾ ॥
ਪ੍ਰਬਲਚੰਡ ਕਉਸਕ ਉਭਾਰਾ ॥
ਖਉਖਟ ਅਉ ਭਉਰਾਨਦ ਗਾਏ ॥
ਅਸਟ ਮਾਲਕਉਸਕ ਸੰਗਿ ਲਾਏ ॥੧॥
ਪੁਨਿ ਆਇਅਉ ਹਿੰਡੋਲੁ ਪੰਚ ਨਾਰਿ ਸੰਗਿ ਅਸਟ ਸੁਤ ॥
ਉਠਹਿ ਤਾਨ ਕਲੋਲ ਗਾਇਨ ਤਾਰ ਮਿਲਾਵਹੀ ॥੧॥
ਤੇਲੰਗੀ ਦੇਵਕਰੀ ਆਈ ॥
ਬਸੰਤੀ ਸੰਦੂਰ ਸੁਹਾਈ ॥
ਸਰਸ ਅਹੀਰੀ ਲੈ ਭਾਰਜਾ ॥
ਸੰਗਿ ਲਾਈ ਪਾਂਚਉ ਆਰਜਾ ॥
ਸੁਰਮਾਨੰਦ ਭਾਸਕਰ ਆਏ ॥
ਚੰਦ੍ਰਬਿੰਬ ਮੰਗਲਨ ਸੁਹਾਏ ॥
ਸਰਸਬਾਨ ਅਉ ਆਹਿ ਬਿਨੋਦਾ ॥
ਗਾਵਹਿ ਸਰਸ ਬਸੰਤ ਕਮੋਦਾ ॥
ਅਸਟ ਪੁਤ੍ਰ ਮੈ ਕਹੇ ਸਵਾਰੀ ॥
ਪੁਨਿ ਆਈ ਦੀਪਕ ਕੀ ਬਾਰੀ ॥੧॥
ਕਛੇਲੀ ਪਟਮੰਜਰੀ ਟੋਡੀ ਕਹੀ ਅਲਾਪਿ ॥
ਕਾਮੋਦੀ ਅਉ ਗੂਜਰੀ ਸੰਗਿ ਦੀਪਕ ਕੇ ਥਾਪਿ ॥੧॥
ਕਾਲੰਕਾ ਕੁੰਤਲ ਅਉ ਰਾਮਾ ॥
ਕਮਲਕੁਸਮ ਚੰਪਕ ਕੇ ਨਾਮਾ ॥
ਗਉਰਾ ਅਉ ਕਾਨਰਾ ਕਲੵਾਨਾ ॥
ਅਸਟ ਪੁਤ੍ਰ ਦੀਪਕ ਕੇ ਜਾਨਾ ॥੧॥
ਸਭ ਮਿਲਿ ਸਿਰੀਰਾਗ ਵੈ ਗਾਵਹਿ ॥
ਪਾਂਚਉ ਸੰਗਿ ਬਰੰਗਨ ਲਾਵਹਿ ॥
ਬੈਰਾਰੀ ਕਰਨਾਟੀ ਧਰੀ ॥
ਗਵਰੀ ਗਾਵਹਿ ਆਸਾਵਰੀ ॥
ਤਿਹ ਪਾਛੈ ਸਿੰਧਵੀ ਅਲਾਪੀ ॥
ਸਿਰੀਰਾਗ ਸਿਉ ਪਾਂਚਉ ਥਾਪੀ ॥੧॥
ਸਾਲੂ ਸਾਰਗ ਸਾਗਰਾ ਅਉਰ ਗੋਂਡ ਗੰਭੀਰ ॥
ਅਸਟ ਪੁਤ੍ਰ ਸ੍ਰੀਰਾਗ ਕੇ ਗੁੰਡ ਕੁੰਭ ਹਮੀਰ ॥੧॥
ਖਸਟਮ ਮੇਘ ਰਾਗ ਵੈ ਗਾਵਹਿ ॥
ਪਾਂਚਉ ਸੰਗਿ ਬਰੰਗਨ ਲਾਵਹਿ ॥
ਸੋਰਠਿ ਗੋਂਡ ਮਲਾਰੀ ਧੁਨੀ ॥
ਪੁਨਿ ਗਾਵਹਿ ਆਸਾ ਗੁਨ ਗੁਨੀ ॥
ਊਚੈ ਸੁਰਿ ਸੂਹਉ ਪੁਨਿ ਕੀਨੀ ॥
ਮੇਘ ਰਾਗ ਸਿਉ ਪਾਂਚਉ ਚੀਨੀ ॥੧॥
ਬੈਰਾਧਰ ਗਜਧਰ ਕੇਦਾਰਾ ॥
ਜਬਲੀਧਰ ਨਟ ਅਉ ਜਲਧਾਰਾ ॥
ਪੁਨਿ ਗਾਵਹਿ ਸੰਕਰ ਅਉ ਸਿਆਮਾ ॥
ਮੇਘ ਰਾਗ ਪੁਤ੍ਰਨ ਕੇ ਨਾਮਾ ॥੧॥
ਖਸਟ ਰਾਗ ਉਨਿ ਗਾਏ ਸੰਗਿ ਰਾਗਨੀ ਤੀਸ ॥
ਸਭੈ ਪੁਤ੍ਰ ਰਾਗੰਨ ਕੇ ਅਠਾਰਹ ਦਸ ਬੀਸ ॥੧॥੧॥
पंच रागनी संगि उचरही ॥
प्रथम भैरवी बिलावली ॥
पुंनिआकी गावहि बंगली ॥
पुनि असलेखी की भई बारी ॥
ए भैरउ की पाचउ नारी ॥
पंचम हरख दिसाख सुनावहि ॥
बंगालम मधु माधव गावहि ॥१॥
ललत बिलावल गावही अपुनी अपुनी भांति ॥
असट पुत्र भैरव के गावहि गाइन पात्र ॥१॥
दुतीआ मालकउसक आलापहि ॥
संगि रागनी पाचउ थापहि ॥
गोंडकरी अरु देवगंधारी ॥
गंधारी सीहुती उचारी ॥
धनासरी ए पाचउ गाई ॥
माल राग कउसक संगि लाई ॥
मारू मसतअंग मेवारा ॥
प्रबलचंड कउसक उभारा ॥
खउखट अउ भउरानद गाए ॥
असट मालकउसक संगि लाए ॥१॥
पुनि आइअउ हिंडोलु पंच नारि संगि असट सुत ॥
उठहि तान कलोल गाइन तार मिलावही ॥१॥
तेलंगी देवकरी आई ॥
बसंती संदूर सुहाई ॥
सरस अहीरी लै भारजा ॥
संगि लाई पांचउ आरजा ॥
सुरमानंद भासकर आए ॥
चंद्रबिंब मंगलन सुहाए ॥
सरसबान अउ आहि बिनोदा ॥
गावहि सरस बसंत कमोदा ॥
असट पुत्र मै कहे सवारी ॥
पुनि आई दीपक की बारी ॥१॥
कछेली पटमंजरी टोडी कही अलापि ॥
कामोदी अउ गूजरी संगि दीपक के थापि ॥१॥
कालंका कुंतल अउ रामा ॥
कमलकुसम चंपक के नामा ॥
गउरा अउ कानरा कलॵाना ॥
असट पुत्र दीपक के जाना ॥१॥
सभ मिलि सिरीराग वै गावहि ॥
पांचउ संगि बरंगन लावहि ॥
बैरारी करनाटी धरी ॥
गवरी गावहि आसावरी ॥
तिह पाछै सिंधवी अलापी ॥
सिरीराग सिउ पांचउ थापी ॥१॥
सालू सारग सागरा अउर गोंड गंभीर ॥
असट पुत्र स्रीराग के गुंड कुंभ हमीर ॥१॥
खसटम मेघ राग वै गावहि ॥
पांचउ संगि बरंगन लावहि ॥
सोरठि गोंड मलारी धुनी ॥
पुनि गावहि आसा गुन गुनी ॥
ऊचै सुरि सूहउ पुनि कीनी ॥
मेघ राग सिउ पांचउ चीनी ॥१॥
बैराधर गजधर केदारा ॥
जबलीधर नट अउ जलधारा ॥
पुनि गावहि संकर अउ सिआमा ॥
मेघ राग पुत्रन के नामा ॥१॥
खसट राग उनि गाए संगि रागनी तीस ॥
सभै पुत्र रागंन के अठारह दस बीस ॥१॥१॥
प्रथम भैरवी बिलावली ॥
पुंनिआकी गावहि बंगली ॥
पुनि असलेखी की भई बारी ॥
ए भैरउ की पाचउ नारी ॥
पंचम हरख दिसाख सुनावहि ॥
बंगालम मधु माधव गावहि ॥१॥
ललत बिलावल गावही अपुनी अपुनी भांति ॥
असट पुत्र भैरव के गावहि गाइन पात्र ॥१॥
दुतीआ मालकउसक आलापहि ॥
संगि रागनी पाचउ थापहि ॥
गोंडकरी अरु देवगंधारी ॥
गंधारी सीहुती उचारी ॥
धनासरी ए पाचउ गाई ॥
माल राग कउसक संगि लाई ॥
मारू मसतअंग मेवारा ॥
प्रबलचंड कउसक उभारा ॥
खउखट अउ भउरानद गाए ॥
असट मालकउसक संगि लाए ॥१॥
पुनि आइअउ हिंडोलु पंच नारि संगि असट सुत ॥
उठहि तान कलोल गाइन तार मिलावही ॥१॥
तेलंगी देवकरी आई ॥
बसंती संदूर सुहाई ॥
सरस अहीरी लै भारजा ॥
संगि लाई पांचउ आरजा ॥
सुरमानंद भासकर आए ॥
चंद्रबिंब मंगलन सुहाए ॥
सरसबान अउ आहि बिनोदा ॥
गावहि सरस बसंत कमोदा ॥
असट पुत्र मै कहे सवारी ॥
पुनि आई दीपक की बारी ॥१॥
कछेली पटमंजरी टोडी कही अलापि ॥
कामोदी अउ गूजरी संगि दीपक के थापि ॥१॥
कालंका कुंतल अउ रामा ॥
कमलकुसम चंपक के नामा ॥
गउरा अउ कानरा कलॵाना ॥
असट पुत्र दीपक के जाना ॥१॥
सभ मिलि सिरीराग वै गावहि ॥
पांचउ संगि बरंगन लावहि ॥
बैरारी करनाटी धरी ॥
गवरी गावहि आसावरी ॥
तिह पाछै सिंधवी अलापी ॥
सिरीराग सिउ पांचउ थापी ॥१॥
सालू सारग सागरा अउर गोंड गंभीर ॥
असट पुत्र स्रीराग के गुंड कुंभ हमीर ॥१॥
खसटम मेघ राग वै गावहि ॥
पांचउ संगि बरंगन लावहि ॥
सोरठि गोंड मलारी धुनी ॥
पुनि गावहि आसा गुन गुनी ॥
ऊचै सुरि सूहउ पुनि कीनी ॥
मेघ राग सिउ पांचउ चीनी ॥१॥
बैराधर गजधर केदारा ॥
जबलीधर नट अउ जलधारा ॥
पुनि गावहि संकर अउ सिआमा ॥
मेघ राग पुत्रन के नामा ॥१॥
खसट राग उनि गाए संगि रागनी तीस ॥
सभै पुत्र रागंन के अठारह दस बीस ॥१॥१॥
हिन्दी अर्थ: जिसके संग पाँच रागिनियाँ भी गाती हैं। राग भैरब की पहली नारी भैरवी, तदन्तर बिलावली, पुण्या और बंगली गाती है, फिर असलेखी की गाने की बारी आती है। यह राग भैरब की पाँच स्त्रियाँ हैं। भैरव राग के आठ पुत्र। पंचम। हरख। दिसाख। बंगालम। मधु। माधव। ललत। बिलावल। मधु, माधव भी अपना गान सुनाते हैं।॥१॥ साथ ही साथ ललित एवं बिलावल भी अपने तरीके से गाते हैं। इस राग भैरब के आठ पुत्रों का गायक गान करते हैं।॥१॥ राग मालकौंस की पाँच रागनियाँ। गौंडकरी। देवगंधारी। गंधारी। सीहुती। धनासरी। जिसके संग पाँच रागिनियाँ भी शामिल हैं। गोंडकी, देवगंधारी, गान्धारी, सीहुति और धनासरी- इन पाँचों को गाया जाता है। ये राग मालकौंस के साथ ही हैं। मारू, मस्तअंग, मेवारा, प्रबलचंड, कौसक, उभारा, खौखट और भौरानद गाए जाते हैं। ये आठों ही राग मालकौसक के साथ सुर के साथ सुर मिलाकर लगे हुए हैं।॥१॥ फिर राग हिंडोल पाँच रागिनियों एवं आठ पुत्रों के साथ आता है। यह तान उठाकर किल्लोल करता स्वर मिलाकर गान करता है॥१॥ हिंडोल की रागनियाँ। तेलंगी। देवकरी। बसंती। संदूर। सहस अहीरी। बसंती, सुन्दर संदूर और सरस अहीरी भी आती है। ये पाँचों अपने पति के संग ही रहती हैं। हिंडोल के पुत्र। सुरमानंद। भास्कर। चंद्र बिम्ब। मंगलन। सरस बान। बिनोदा। बसंत। कमोदा। चंद्रबिंब, मंगलन शोभा सहित आते हैं। सरसवान, विनोद, बसंत, कमोद भी साथ ही गाते हैं। इस तरह आठ पुत्रों के साथ हिंडोल सवारी करता है और दीपक राग की रागनियाँ। कछेली। पटमंजरी। टोडी। कामोदी। गूजरी। कछेली, पटमंजरी, टोडी गाती है और कामोदी एवं गूजरी साथ ही दीपक के संग रागिनियाँ मौजूद हैं॥१॥ राग दीपक के आठ पुत्र। कालंका। कुंतल। रामा। कमल कुसम। चंपक। गउरा। कानड़ा। कलाना। कमल-कुसुम, चंपक, गौरा, कानड़ा एवं कल्याण नामक दीपक राग के आठ पुत्र माने जाते हैं।॥१॥ सिरी राग की पाँच रागनियाँ। बैरारी। करनाटी। गवरी। आसावरी। सिंधवी। साथ ही पाँच रागिनियों को भी शामिल करते हैं। बैराड़ी, करनाटी, गवरी, आसावरी को वे गाते हैं और साथ सिंधर्वी का गान होता है। ये पाँचों रागिनियाँ सिरी राग के साथ विद्यमान हैं।॥ १॥ श्री राग के आठ पुत्र। सालू। सारग। सागरा। गौंड। गंभीर। गुंड। कुंभ। हमीर। गुंड, कुंभ तथा हमीर- ये श्री राग के आठ पुत्र हैं।॥ १॥ मेघ राग की रागनियाँ। सोरठ। गोंड। मलारी। आसा। सूहउ। इसके साथ ही पाँच रागिनियों को भी शामिल करते हैं। इसकी रागिनी सोरठ, गोंड, मलारी की ध्वनि होती है, फिर आसा को मधुर स्वर में गाया जाता है। उच्च स्वर में सूही का गान होता है। इस तरह मेघ राग के साथ पाँच रागिनियाँ हैं॥१॥ मेघ राग के आठ पुत्रों के नाम। बैराधर। गजधर। केदारा। जबलीधर। नट। जलधारा। संकर। सिआमा। जवलीधर, नट, जलधारा, शंकर और श्यामा भी गाए जाते हैं। ये मेघ राग के पुत्रों के नाम हैं॥१॥ कुल रागनियाँ – 30 हरेक राग के आठ पुत्र। छे रागों के कुल पुत्र- 48सारा जोड़- 6+30+48। 84
स्रोत: मूल गुरमुखी पाठ banidb.com (Khalis Foundation, open-source SGGS database) से। हिन्दी अर्थ प्रोफ़ेसर साहिब सिंह की टीका पर आधारित। देवनागरी transliteration lulla.net पर automated।
संदर्भ: यह अंग 1430 है, राग Maalaa का हिस्सा। मुख्य रचयिता: गुरु-वाणी।
New Friends Colony के पाँच-मंज़िला flat की terrace पर रात की हवा।
ऊपर दिखाए गए शबद आदि ग्रंथ की मूल वाणी हैं, गुरमुखी में original और साथ में देवनागरी transliteration। हिन्दी अर्थ banidb.com के verified translation (मुख्यत: प्रोफ़ेसर साहिब सिंह की टीका) से लिया गया है।
यह अंग कुल 57 पंक्तियों का है, 1 शबद में बँटा। ग्रंथ साहिब की पारंपरिक pagination में यही “अंग 1430” है। हर ang एक leaf है, “पन्ना” नहीं, क्योंकि सिख परंपरा में पूरी पोथी को एक जीवित-शरीर (Guru) माना जाता है, और हर पन्ना उसका एक अंग।
राग के context में: Maalaa राग का स्वर specific है, समय और mood दोनों define करता है। पूरे राग का full background /adi-granth/raag/… पर है।
पाठ का तरीक़ा: ऊपर के शबद को धीरे-धीरे एक बार पढ़िए, हिन्दी अर्थ के साथ। फिर एक बार बिना अर्थ के सिर्फ़ देवनागरी पढ़िए, rhythm के लिए। यह दोनों pass एक साथ ज़्यादा देते हैं।
अगर इस शबद की कोई पंक्ति आज की ज़िंदगी में सीधे लगती है, उसे note कर लीजिए। ग्रंथ साहिब का design ही यही है, हर अंग पर कुछ-न-कुछ हर पाठक के लिए होता है।
“हुकमनामा” परंपरा: हर सुबह gurdwara में रागी जी एक अंग खोलते हैं randomly, और जो शबद पहले आता है, वो दिन का “हुकमनामा” (आदेश) कहलाता है। आप भी यही कर सकते हैं, online, हर रोज़ एक अलग ang पर click करते जाइए।
नई दिल्ली के पुराने gurdwaras (बंगला साहिब, सीस-गंज, रकाब-गंज, बाबा साहिब का गुरुद्वारा) में रोज़ अंग-by-अंग पाठ चलता है। अगर वहाँ कभी समय बिताया है, यह commentary उस आदत को रिफ़्रेश करेगी।
अगर आप ग्रंथ साहिब को पहली बार पढ़ रहे हैं: किसी एक specific राग को चुनिए (जैसे राग सूही की लावां, M4 की), उसकी सब अंगों को क्रम से पढ़िए। यह random-click से बेहतर है शुरुआत के लिए।
तीसरा approach: अगर आप किसी एक रचयिता (जैसे कबीर) में specifically interested हो, उनकी वाणी की सूची देखिए और वहीं से अंगों पर जाइए।
हर शबद का अपना mood, अपनी कहानी, अपनी historical setting। 16वीं-17वीं सदी की पंजाब-context सब वाणी में बैठी है, मगर underlying claims universal हैं।
ग्रंथ साहिब का format unique है: 31 रागों में organize, 5 गुरुओं + 9वें गुरु की वाणी, plus 15 भगतों की वाणी (कबीर, फ़रीद, नामदेव, रविदास, etc.)। यह pan-Indian + pan-class + pan-religious आवाज़ें एक साथ हैं।
दिल्ली के context में ग्रंथ साहिब विशेष है: सीस-गंज और रकाब-गंज दिल्ली में हैं (शाहजहाँनाबाद के दिल में), गुरु तेग बहादुर जी की शहादत यहीं हुई, गुरु हरकिशन साहिब का गुरुद्वारा बाला साहिब भी यहीं।
“एक ओंकार” से शुरू, “सलोक महला 9” + “मुंदावनी M5” से समाप्त, बीच में 1430 अंग। यह एक sustained spiritual document है, sixteenth-seventeenth century में compile, मगर अब भी fully living।
हर अंग पर आप दो-तीन बार वापस आ सकते हैं अलग-अलग times पर, और हर बार कुछ नया दिखेगा। यही reading-design है।
अगर specific verses की deeper commentary चाहिए, या किसी विशेष शबद का context, contact कर सकते हैं lulla.net से।
आगे का अंग: अंग None →, पीछे का: ← अंग 1429।
हर रोज़ एक नया अंग, धीरे-धीरे, बिना hurry के। यही ग्रंथ-साहिब-reading का सबसे sensible approach है।
(यह अंग की commentary संक्षेप में। पूरी verse-by-verse interpretation के लिए traditional steek/teeka resources भी available हैं, जो SGGS के scholarly commentary में deep जाते हैं।)
शबद को पढ़ने का एक और तरीक़ा: किसी भी पंक्ति को धीरे-धीरे तीन-चार बार पढ़िए, अर्थ खुलने दीजिए। हर बार थोड़ा अलग layer सामने आता है। यह “slow reading” है, scanning नहीं।
संगति का अहम role: ग्रंथ साहिब को अकेले भी पढ़ा जा सकता है, मगर कीर्तन-संगति में सुनना एक अलग depth देता है। दिल्ली के gurdwaras में रोज़ शाम 7 बजे की रहिरास और सुबह की आसा-दी-वार, दोनों openings हैं।
शबद का audio: SikhiToTheMax जैसी apps पर हर अंग का audio available है, classical raagis की voices में। एक बार audio साथ पढ़ कर देखिए, शबद की rhythm पकड़ने लगती है।
संदर्भ पर थोड़ा और: यह अंग 16वीं-17वीं सदी के Punjab में compose हुआ। उस वक़्त की सामाजिक-राजनीतिक-आर्थिक स्थिति काफ़ी अलग थी, मगर मन-की-mechanics universal हैं। इसीलिए आज भी relevant है।
एक practice suggestion: अगर आज कोई specific मुद्दा/decision/feeling आपको परेशान कर रहा है, इस शबद को पढ़ कर बैठिए। कोई एक line आज की state से directly speak कर सकती है। ग्रंथ-साहिब का “हुकमनामा” design यही करता है।
अंत में एक छोटी-सी note: यह commentary helper है, substitute नहीं। genuine sant-समाज, granthi साहिबान, और experienced kirtaniye जी से सीखना सबसे ऊँचा रास्ता है। यह site उस path का supplement है, replacement नहीं।