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अंग 9

अंग
9
राग So Dar
राग: So Dar · रचयिता: गुरु नानक देव जी (महला 1)
पढ़ने का समय: लगभग 2-3 मिनट
गावनि तुधनो जती सती संतोखी गावनि तुधनो वीर करारे ॥
गावनि तुधनो पंडित पड़नि रखीसुर जुगु जुगु वेदा नाले ॥
गावनि तुधनो मोहणीआ मनु मोहनि सुरगु मछु पइआले ॥
गावनि तुधनो रतन उपाए तेरे अठसठि तीरथ नाले ॥
गावनि तुधनो जोध महाबल सूरा गावनि तुधनो खाणी चारे ॥
गावनि तुधनो खंड मंडल ब्रहमंडा करि करि रखे तेरे धारे ॥
सेई तुधनो गावनि जो तुधु भावनि रते तेरे भगत रसाले ॥
होरि केते तुधनो गावनि से मै चिति न आवनि नानकु किआ बीचारे ॥
सोई सोई सदा सचु साहिबु साचा साची नाई ॥
है भी होसी जाइ न जासी रचना जिनि रचाई ॥
रंगी रंगी भाती करि करि जिनसी माइआ जिनि उपाई ॥
करि करि देखै कीता आपणा जिउ तिस दी वडिआई ॥
जो तिसु भावै सोई करसी फिरि हुकमु न करणा जाई ॥
सो पातिसाहु साहा पतिसाहिबु नानक रहणु रजाई ॥1॥
गुरु नानक की वाणी का एक खास सीधापन यहाँ झलकता है, बिना अलंकार के, बिना ज़ोर के। पंद्रहवीं सदी के अंत और सोलहवीं सदी के प्रारम्भ में, जब बाबर अभी काबुल से दक्षिण की ओर देख रहा था, नानक पंजाब से निकल कर अपनी पैदल यात्राओं पर थे।

हिन्दी अर्थ: जती, दानी और संतोषी पुरष भी आपका गुणगान कर रहे हैं और (बेअंत) महाबली योद्धे आपकी ही वडिआईयां कर रहे हैं। (हे प्रभू!) पण्डित और महाऋिषी जो (वेदों को) पढ़ते हैं। वेदों समेत आपका ही यश गा रहे हैं। सुंदर सि्त्रयां जो (अपनी सुंदरता के साथ मनुष्य के) मन को मोह लेतीं हैं, आपको गा रही हैं (भाव, आपकी सुंदरता का प्रकाश कर रही हैं)। स्वर्ग, मात लोक व पाताल लोक में (अर्थात, हर जगह के सारे ही जीव जन्तु) आपकी ही उस्तति के गीत गा रहे हैं। (हे निरंकार!) आपके पैदा किए हुए रतन अढ़सठ तीर्तों समेत आपको ही गा रहे हैं। महाबली योद्धे व शूरवीर (आपका दिया बल दिखा के) भी आपकी ही (ताकत की) सिफतिकर रहे हैं। चारों खानों के जीव-जन्तु आपको गा रहे हैं। सारी सृष्टि, सृष्टि के सारे खण्ड और चक्कर, जो तूने पैदा करके टिका रखे हैं, आपको ही गाते हैं। (हे प्रभू!) असल में तो वही बंदे आपकी सिफत सलाह करते हैं (भाव, उनकी ही सिफत सलाह सफल है) जो आपके प्रेम में रंगे हुए हैं और आपके रसिए भक्त हैं। वही बंदे आपको प्यारे लगते हैं। अनेकों और जीव आपकी वडिआई कर रहे हैं, जो मुझसे गिने भी नहीं जा सकते। (भला, इस गिनती के बारे में) नानक क्या विचार कर सकता है? (नानक यह विचार करने के लायक नहीं हैं)। वह मालिक प्रभू सदा कायम रहने वाला है। उसकी महानता भी सदा कायम रहने वाली है। जिस (प्रभू) ने यह सृष्टि पैदा की है, वह इस वक्त मौजूद है तथा सदाकायम रहने वाला है। जिस अकाल-पुरख ने कई रंगों, किस्मों, जिनसों की माया रच दी है, वह जैसे उसकी रज़ा है, जगत को पैदा करके अपने पैदा किये हुए की संभाल कर रहा है। जो कुछ अकाल-पुरख को भाता है, वह वही करता है। कोई भी जीव अकाल-पुरख को आगे से हैंकड़ नहीं दिखा सकता (उसे ये नहीं कह सकता कि “आप एैसे कर, एैसे ना कर”)। अकाल-पुरख बादशाह है, बादशाहों का भी बादशाह है।हे नानक! (जीवों का) उसकी रजा में रहना (ही फबता है)।1।
आसा महला 1 ॥
सुणि वडा आखै सभु कोइ ॥
केवडु वडा डीठा होइ ॥
कीमति पाइ न कहिआ जाइ ॥
कहणै वाले तेरे रहे समाइ ॥1॥
वडे मेरे साहिबा गहिर गंभीरा गुणी गहीरा ॥
कोइ न जाणै तेरा केता केवडु चीरा ॥1॥ रहाउ ॥
सभि सुरती मिलि सुरति कमाई ॥
सभ कीमति मिलि कीमति पाई ॥
गिआनी धिआनी गुर गुरहाई ॥
कहणु न जाई तेरी तिलु वडिआई ॥2॥
सभि सत सभि तप सभि चंगिआईआ ॥
सिधा पुरखा कीआ वडिआईआ ॥
तुधु विणु सिधी किनै न पाईआ ॥
करमि मिलै नाही ठाकि रहाईआ ॥3॥
आखण वाला किआ वेचारा ॥
सिफती भरे तेरे भंडारा ॥
जिसु तू देहि तिसै किआ चारा ॥
नानक सचु सवारणहारा ॥4॥2॥
नानक का स्वर इस शबद में भी वही है, observational, साफ़, और बिना तड़क-भड़क के। एक पटवारी की दृष्टि जो हर-बात को बहीखाते के पन्नों पर लिखने वाली है, वो दृष्टि यहाँ-भी काम कर रही है।

हिन्दी अर्थ: आसा महला 1 ॥ हरेक जीव (औरों से) सिर्फ सुन के (ही) कह देता है कि (हे प्रभू !) आप बड़ा है। पर आप कितना बड़ा है (कितना बेअंत है) – ये बात सिर्फ आपके दर्शन करके ही बताई जा सकती है। (आपका दर्शन करके ही बताया जा सकता है कि आप कितना बेअंत है)। आपके बराबर का और कोई नहीं कहा जा सकता, आपके स्वरूप का बयान नहीं किया जा सकता। आपकी वडियाई कहने वाले (आपका गुणगान करने वाले) बल्कि (स्वै को भुला के) आपके में (ही) लीन हैं जाते हैं।1। हे मेरे बड़े मालिक! आप (मानों, एक) गहरा (समुंद्र) है, आप बड़े जिगरे वाला है, आप बेअंत गुणों वाला है। कोई भी जीव नहीं जानता कि आपका कितना बड़ा विस्तार है।1।रहाउ। (आप कितना बड़ा है, ये ढूँढने के लिए) समाधियां लगाने वाले कई बड़े-बड़े प्रसिद्ध योगियों ने ध्यान जोड़ने के यत्न किये, और बारंबार प्रयत्न किये। बड़े-बड़े प्रसिद्ध (शास्त्र-वेक्ताओं) विचारवानों ने आपस में एक दूसरे की सहायता ले कर, आपके बराबर की कोई हस्ती तलाशने की कोशिश की, पर आपकी महानता का एक तिल जितना हिस्सा भी नहीं बता सके।2। (विचारवान क्या और सिद्ध योगी क्या? आपकी वडियाई का अंदाजा तो कोई भी नहीं लगा सका, पर विचारवानों के) सारे भले काम, सारे तप व सारे अच्छे गुण, सिद्ध लोगों की (रिद्धियां-सिद्धियां आदिक) बड़े-बड़े काम – ये कामयाबी किसी को भी आपकी मदद के बिना हासिल नहीं हुई। (जिस किसी को सिद्धी प्राप्त हुई है) आपकी मेहर से प्राप्त हुई है। एवं, कोई और उस प्राप्ती के राह में बाधा नहीं डाल सका।3। जीव की क्या बिसात है कि इन गुणों को बयान कर सके? (हे प्रभू!) आपके गुणों के (मानों) खजाने भरे हुए हैं। जिसको आप सिफत सलाह करने की दात बख्शते हो; उसकी राह में रुकावटें डालने में किसी का जोर नहीं चल सकता, (क्योंकि) हे नानक! (कह, हे प्रभू!) आप सदा ही कायम रहने वाला प्रभू उस (भाग्यशाली) को संवारने वाला (स्वयं) ही है।4।2।
आसा महला 1 ॥
आखा जीवा विसरै मरि जाउ ॥
आखणि अउखा साचा नाउ ॥
साचे नाम की लागै भूख ॥
उतु भूखै खाइ चलीअहि दूख ॥1॥
सो किउ विसरै मेरी माइ ॥
साचा साहिबु साचै नाइ ॥1॥ रहाउ ॥
साचे नाम की तिलु वडिआई ॥
आखि थके कीमति नही पाई ॥
जे सभि मिलि कै आखण पाहि ॥
वडा न होवै घाटि न जाइ ॥2॥
ना ओहु मरै न होवै सोगु ॥
देदा रहै न चूकै भोगु ॥
गुणु एहो होरु नाही कोइ ॥
ना को होआ ना को होइ ॥3॥
जेवडु आपि तेवड तेरी दाति ॥
नानक की कहन यहाँ-भी पैदल यात्री की है, जिसने सुलतानपुर के बहीखाते से निकल कर तीस-वर्ष की उम्र के क़रीब काबुल, बग़दाद, मक्का, और जगन्नाथ पुरी तक का सफ़र किया। शब्द इसी सफ़र की पंक्तियाँ हैं।

हिन्दी अर्थ: आसा महला 1 ॥ (ज्यों ज्यों) मैं (प्रमात्मा का) नाम सिमरता हूँ, त्यों त्यों मेरे अंदर आत्मिक जीवन पैदा होता है। (पर जब मुझे प्रभू का नाम) भूल जाता है, मेरी आत्मिक मौत हो जाती है। (ये मालूम होते हुए भी) सदा कायम रहने वाले प्रमात्मा का नाम सिमरना मुश्किल (काम लगता है)। (जिस मनुष्य के अंदर) सदा रहने वाले प्रभू के सिमरन की चाहत पैदा हो जाती है उस ललक की बरकत से (हरि नाम भोजन) खा के उसके सारे दुख दूर हो जाते हैं।1। हे मेरी माँ (प्रार्थना कर कि) वह प्रमात्मा मुझे कभी भी ना भूले। ज्यों ज्यों उस सदा कायम रहने वाले प्रभू का नाम सिमरते हैं, त्यों त्यों वह सदा कायम रहने वाला मालिक (मन में आ बसता है)।1।रहाउ । सदा कायम रहने वाले प्रभू के नाम की रॅती जितनी भी महिमा बयान करके (सारे जीव) थक गये हैं (बयान नहीं कर सकते)।कोई भी नहीं बता सकता कि प्रमात्मा के बराबर की कौन सी हस्ती है। यदि (जगत के) सारे ही जीव मिल के (प्रभू की वडियाई) बयान करने का यतन करें, तो वह प्रभू (अपने असल से) बड़ा नहीं हो जाता, और (यदि कोई उसकी वडियाई ना भी करे), तो वह (पहले से) कम नहीं हो जाता।(उसे अपनी शोभा का लालच नहीं)।2।ना ही (उसके खातिर) उसे शोक होता है। वह सदा (जीवों को रिजक देता है उसकी दी हुई दातों का कभी अंत नहीं होता है) (उसकी दातें बाँटने से कभी खत्म नहीं होतीं)। उसकी सबसे बड़ी खूबी ये है कि और काई भी उस जैसा नहीं है, (उस जैसा अभी तक) ना कोई हुआ है, ना ही कभी होंगे।3। (हे प्रभू!) जितना बेअंत आप स्वयं है उतनी बेअंत आपकी बख्शिश।

इस राग की धुन का अपना मिज़ाज है, और शास्त्रीय परम्परा में इसकी अपनी विशिष्टता है। ग्रंथ के संकलन के समय यह राग चुना गया क्योंकि इसकी रचनाएँ इसी सुर में बँधी थीं। ये नित्य की प्रार्थनाएँ हैं, अधिकांश पन्द्रहवीं सदी के अंत और सोलहवीं सदी की शुरुआत में रची गयीं।

नानक का स्वर साफ़ है, बिना अलंकार के, बिना ज़ोर के। पन्द्रहवीं सदी के अंतिम दशकों में, जब बाबर अभी काबुल से दक्षिण की ओर देख रहा था, नानक पंजाब से निकल कर अपनी पहली बड़ी यात्रा पर थे। वो जो शब्द लाए, वो आज भी इसी ग्रंथ में पढ़े जाते हैं।

इस अंग पर 3 शबद हैं, क्रम-से बँधे। पहले की प्रारम्भिक पंक्ति यह है: “जती, दानी और संतोषी पुरष भी आपका गुणगान कर रहे हैं और (बेअंत) महाबली योद्धे आपकी ही वडिआईयां कर रहे हैं।”

एक पंक्ति, दो-तीन बार। यह पढ़ने का ढंग है जो इस तरह की वाणी से सबसे ज़्यादा खुलता है। अर्थ की कई परतें हैं, और हर पाठ में एक अलग परत सामने आती है। पाठ की धैर्य-शीलता ही असली शिक्षा है, गति नहीं।

स्रोत-नोट: यहाँ का देवनागरी पाठ बानीडीबी डेटाबेस (Khalis Foundation का खुला-स्रोत संग्रह) से लिया गया है। हिन्दी अनुवाद का आधार प्रोफ़ेसर साहिब सिंह जी की प्रसिद्ध टीका है, जो 1962 में पंजाबी विश्वविद्यालय द्वारा प्रकाशित हुई थी और आज भी विद्वानों के बीच मानक मानी जाती है। गहन व्याख्या के लिए परम्परागत ‘स्टीक’ और ‘टीका’ संसाधन उपलब्ध हैं।

स्रोत: हिन्दी अर्थ banidb.com (Khalis Foundation) के डेटा से। टीका प्रोफ़ेसर साहिब सिंह की टीका पर आधारित। देवनागरी transliteration lulla.net पर automated।