अंग 726, राग तिलंग (M5)

SGGS, Ang
726
राग तिलंग, महला 5
राग: राग तिलंग · रचयिता: गुरु अर्जन देव जी · महला 5
पढ़ने का समय: लगभग 1 मिनट
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तिलंग महला ५ ॥ दीनु छडिआ दुनी मिलाई ॥ दीहाड़ा गइआ कलि कलि लाई ॥१॥रहाउ॥ मुकु मीत आसी आराम जपु जपीआ रामु पिआरा ॥ तेरी पनहु सहाई बखसी कीआ बलि जाणी ॥१॥

“दीनु छडिआ दुनी मिलाई।” “‘दीन’ (humility, या faith) छोड़ कर ‘दुनी’ (दुनिया) से मिलाया।”

critical diagnosis। दीन छोड़ कर दुनिया मिल गई। मगर सबसे important “दीन” खो गया।

“दीन” शब्द ध्यान देने योग्य है। यह “दीन-दुनिया” वाली pair में आता है। “दीन” = धर्म, “दुनिया” = world। यह फ़ारसी-अरबी composite है।

दिल्ली में हम सब “दुनिया” अच्छे से manage करना सीख रहे हैं। career, finance, social standing। मगर “दीन” खोते जा रहे हैं। यह specific reminder है, “दीन” को मत खोना।

“दीहाड़ा गइआ कलि कलि लाई।” “दिन गया, ‘कलि’ (कलह, कलियुग) में लग गया।”

time passes, struggle continues। हर रोज़ छोटा-छोटा “कलि।” साल बीतते जाते हैं।

दिल्ली के commuter को यह सबसे relatable है। हर रोज़ traffic, hassle, deadline, drama। एक दिन ख़त्म, अगला शुरू। और बीच में “दीन” का कोई space नहीं।

“मुकु मीत आसी आराम जपु जपीआ रामु पिआरा।” “‘मुख’ मित्र, ‘आसी’ (आरामी), जप-जप, राम-प्यारा।”

beautiful image। एक दोस्त मिल कर, आराम से, राम-प्यारा का जप।

दिल्ली के context में: हम सब बहुत “schedules” में हैं। “आराम से” करना rare है। नानक का visualization, एक दोस्त के साथ, बिना rush, धीरे-धीरे, राम का जप।

“तेरी पनहु सहाई बखसी कीआ बलि जाणी।” “तेरी ‘पनह’ (refuge) सहायी, ‘बख़्शी’ (forgiveness) कीआ, बलि जानी।”

closing: तेरी refuge, तेरी forgiveness, बलिहार।

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[ इस अंग की गहरी चिंतना ]

“दीनु छडिआ दुनी मिलाई।” “दीन (humility, या faith) छोड़ कर दुनी (दुनिया) से मिलाया।”

critical diagnosis। दीन छोड़ कर दुनिया मिल गई। मगर सबसे important “दीन” खो गया।

“दीन” शब्द ध्यान देने योग्य है। यह “दीन-दुनिया” वाली pair में आता है। “दीन” = धर्म, “दुनिया” = world। यह फ़ारसी-अरबी composite है।

दिल्ली में हम सब “दुनिया” अच्छे से manage करना सीख रहे हैं। career, finance, social standing। मगर “दीन” खोते जा रहे हैं।

यह specific reminder है, “दीन” को मत खोना।

“दीहाड़ा गइआ कलि कलि लाई।” “दिन गया, कलि (कलह, कलियुग) में लग गया।”

time passes, struggle continues। हर रोज़ छोटा-छोटा “कलि।” साल बीतते जाते हैं।

दिल्ली के commuter को यह सबसे relatable है। हर रोज़ traffic, hassle, deadline, drama। एक दिन ख़त्म, अगला शुरू। और बीच में “दीन” का कोई space नहीं।

“मुकु मीत आसी आराम जपु जपीआ रामु पिआरा।” “मुख मित्र, आसी (आरामी), जप-जप, राम-प्यारा।”

beautiful image। एक दोस्त मिल कर, आराम से, राम-प्यारा का जप।

दिल्ली के context में: हम सब बहुत “schedules” में हैं। “आराम से” करना rare है। नानक का visualization, एक दोस्त के साथ, बिना rush, धीरे-धीरे, राम का जप।

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[ इस अंग पर एक और मनन ]

“दीन छोड़ कर दुनी मिलाई।” यह pivotal diagnosis है।

दिल्ली में हम सब “दुनिया” अच्छे से manage करते हैं। career, finance, social standing। मगर “दीन” खोते जा रहे हैं।

दीन-दुनिया pair फ़ारसी-अरबी composite है। दोनों ज़रूरी हैं, मगर balance में।

“दिन गया कलि-कलि।” हर दिन कोई न कोई “कलि” (कलह)।

दिल्ली के commuter को यह सबसे relatable है। traffic, hassle, deadline। दिन ख़त्म, बीच में spirituality का space नहीं।

मगर यह acceptance नहीं। यह warning है। space बनाओ। “दीन” को मत खोना।