अंग 707, राग जैतसरी (वार)

SGGS, Ang
707
राग जैतसरी, महला 5 – वार
राग: राग जैतसरी · रचयिता: गुरु अर्जन देव जी · महला 5
पढ़ने का समय: लगभग 1 मिनट
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॥ पउड़ी ॥ तीनि गुणा तेरे आपणे रब घटि घटि भोग ॥ रचना तेरी तू बाल चलणी रब हम कूत संजोग ॥५॥

“तीनि गुणा तेरे आपणे।” “तीन गुण तेरे अपने।”

सत्व-रज-तम तीनों उसी के। यह advaitic statement है।

पुराने Indian philosophy में, तीन गुण reality के three fundamental qualities हैं, सत्व (purity, balance), रजस (activity, passion), तमस (inertia, ignorance)। नानक कह रहे हैं, तीनों हरि के हैं।

दिल्ली में हम सब अपनी qualities differentiate करते हैं, “मेरी अच्छाई,” “मेरी कमज़ोरी।” नानक का statement, सब उसी की है। यह humbling है।

“रब घटि घटि भोग।” “रब घट-घट में ‘भोग’ (कर रहा है)।”

सबसे radical। हरि ही हर शरीर में “भोग” कर रहा है। duality dissolve।

दिल्ली में जब हम कहते हैं “मैंने खाया,” “मैंने पिया,” “मैंने enjoy किया,” असली में वो कर रहा है। हम बस instrument हैं।

यह subtle है। यह responsibility transfer नहीं, “वो कर रहा है, मेरी fault नहीं।” यह perception shift है, “हम apparent doers हैं, असली doer वही है।” actions same रहती हैं, सिर्फ़ ownership shift होती है।

“रचना तेरी तू बाल चलणी।” “रचना तेरी, तू ‘बाल’ (बालक की तरह) ‘चलणी’ (चलाने वाला)।”

beautiful image। हरि बच्चे की तरह सृष्टि चला रहा है। यानी spontaneous, playful, बिना heavy intent के।

“रब हम कूत संजोग।” “रब, हम ‘कूत’ (dogs, या cute creatures), ‘संजोग’ (connection)।”

closing: हम तेरे prajaa हैं, बहुत simple creatures।

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[ इस अंग की गहरी चिंतना ]

“तीनि गुणा तेरे आपणे।” “तीन गुण तेरे अपने।”

सत्व-रज-तम तीनों उसी के। यह advaitic statement है।

पुराने Indian philosophy में, तीन गुण reality के three fundamental qualities हैं, सत्व (purity, balance), रजस (activity, passion), तमस (inertia, ignorance)। नानक कह रहे हैं, तीनों हरि के हैं।

दिल्ली में हम सब अपनी qualities differentiate करते हैं, “मेरी अच्छाई,” “मेरी कमज़ोरी।” नानक का statement, सब उसी की है। यह humbling है।

“रब घटि घटि भोग।” “रब घट-घट में भोग (कर रहा है)।”

सबसे radical। हरि ही हर शरीर में “भोग” कर रहा है। duality dissolve।

दिल्ली में जब हम कहते हैं “मैंने खाया,” “मैंने पिया,” “मैंने enjoy किया,” असली में वो कर रहा है। हम बस instrument हैं।

यह subtle है। यह responsibility transfer नहीं, “वो कर रहा है, मेरी fault नहीं।” यह perception shift है, “हम apparent doers हैं, असली doer वही है।” actions same रहती हैं, सिर्फ़ ownership shift होती है।

“रचना तेरी तू बाल चलणी।” “रचना तेरी, तू बाल (बालक की तरह) चलणी (चलाने वाला)।”

beautiful image। हरि बच्चे की तरह सृष्टि चला रहा है। यानी spontaneous, playful, बिना heavy intent के।

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[ इस अंग पर एक और मनन ]

“तीन गुण तेरे अपने” वाला statement advaitic है।

सत्व-रज-तम तीनों उसी के। यह “मेरी अच्छाई” “मेरी कमज़ोरी” वाले thinking को dissolve करता है।

दिल्ली में हम सब अपनी qualities differentiate करते हैं। नानक एक different framework देते हैं, सब उसी का है।

“रब घटि घटि भोग” वाली पंक्ति radical है। हरि ही हर शरीर में “भोग” कर रहा है।

जब आप खाते हो, असली में वो खा रहा है। जब आप enjoy करते हो, वो enjoy कर रहा है। आप बस instrument हो।

यह paranoia पैदा नहीं करता (“मैं nothing हूँ”)। यह freedom देता है (“मुझे control नहीं रखना पड़ता”)।