अंग 706, राग जैतसरी (वार)

SGGS, Ang
706
राग जैतसरी, महला 5 – वार
राग: राग जैतसरी · रचयिता: गुरु अर्जन देव जी · महला 5
पढ़ने का समय: लगभग 1 मिनट
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॥ सलोकु ॥ प्रब प्रिअ सजण सुहाव पाव हम चेर बना ॥ तीनि भवण उधारणु तू दया करि लगे प्रब प्रसाद रसना ॥१॥

“प्रब प्रिअ सजण सुहाव।” “प्रभु प्रिय साजन सुहाव।”

पाँच synonyms एक पंक्ति में, प्रभ, प्रिअ, सजण, सुहाव। तरह-तरह से वही एक।

यह poetic device है। एक ही entity को कई नामों से बुलाना, हर नाम एक different aspect highlight करता है। यह relational complexity show करता है।

दिल्ली के बहुभाषी household में हम भी ऐसा करते हैं। एक ही person को “भैया,” “Bhai,” “brother,” “elder one” कह कर बुलाते हैं, context के हिसाब से। नानक यही कर रहे हैं हरि के साथ।

“पाव हम चेर बना।” “हमको ‘चेर’ (शिष्य, servant) बना।”

सबसे consistent prayer। चेला बनाना।

यह पूरे ग्रंथ साहिब में recurring request है। हर गुरु, हर बार, यह माँगते हैं, “चेला बनाओ।” क्यों? क्योंकि यह सबसे humble position है, और सबसे free position भी।

“तीनि भवण उधारणु तू।” “तीन भवन ‘उधारणु’ (uplift करने वाला) तू।”

तीनों लोकों को uplift करने वाला तू।

“दया करि लगे प्रब प्रसाद रसना।” “दया कर के लगा, प्रभु-प्रसाद, रसना (जीभ)।”

closing: रसना में प्रभु-प्रसाद लगा।

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[ इस अंग की गहरी चिंतना ]

“प्रब प्रिअ सजण सुहाव।” पाँच synonyms एक पंक्ति में। प्रभु, प्रिय, साजन, सुहाव।

यह poetic device है। एक ही entity को कई नामों से बुलाना, हर नाम एक different aspect highlight करता है। यह relational complexity show करता है।

दिल्ली के बहुभाषी household में हम भी ऐसा करते हैं। एक ही person को “भैया,” “Bhai,” “brother,” “elder one” कह कर बुलाते हैं, context के हिसाब से। नानक यही कर रहे हैं हरि के साथ।

“पाव हम चेर बना।” “हमको चेर (शिष्य, servant) बना।” सबसे consistent prayer।

यह पूरे ग्रंथ साहिब में recurring request है। हर गुरु, हर बार, यह माँगते हैं, “चेला बनाओ।” क्यों? क्योंकि यह सबसे humble position है, और सबसे free position भी।

“तीनि भवण उधारणु तू।” “तीन भवन उधारणु (uplift करने वाला) तू।” तीनों लोकों को uplift करने वाला।

यह scale-acknowledgment है। हरि just local helper नहीं, cosmic uplifter है।

“दया करि लगे प्रब प्रसाद रसना।” “दया कर के लगा, प्रभु-प्रसाद, रसना (जीभ)।” रसना में प्रभु-प्रसाद लगा।

mouth का engagement। बोलना, उच्चारण करना, यह specific role play करता है spiritual practice में।

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[ इस अंग पर एक और मनन ]

“प्रब प्रिअ सजण सुहाव” वाली line पाँच synonyms एक साथ। यह poetic device emphasis के लिए नहीं, intimacy के लिए है।

दिल्ली के बहुभाषी household में हम भी ऐसा करते हैं। एक person को कई नामों से बुलाते हैं, contexts के हिसाब से।

गुरु अर्जन हरि के साथ same dynamic create कर रहे हैं। यह hierarchy को dissolve करता है।

“चेर” (servant, disciple) बनने की request consistent है पूरे ग्रंथ साहिब में।

क्यों यह सबसे humble position best है? क्योंकि इसमें कुछ “खोने” को नहीं। हम पहले से “below” हैं। यह सबसे stable है।

“तीनि भवण उधारणु तू” वाली पंक्ति cosmic scale का acknowledgment है। तीनों लोकों को uplift करने वाला।