विभीषण गीता · खण्ड 3
घोड़े और सारथी
Horses and Charioteer · चौपाइयाँ 6-7
रथ को कौन खींचता है, और कौन चलाता है। चार घोड़े, एक सारथी।
चौपाई 6
बल बिबेक दम परहित घोरे।
छमा कृपा समता रजु जोरे॥
छमा कृपा समता रजु जोरे॥
bala bibeka dama parahita ghore
chamā kṛpā samatā raju jore
chamā kṛpā samatā raju jore
अर्थ“बल, विवेक, दम, परोपकार, ये चार घोड़े। क्षमा, कृपा, समता की रस्सी से जुड़े।”
सन्दर्भचार घोड़े: बल (strength), विवेक (discrimination), दम (self-control), परहित (welfare-of-others)। और reins (रस्सी): क्षमा, कृपा, समता। ये horses के “controls” हैं।
पाठक के लिए4 घोड़े बिना reins के, बेकाबू। बल बिना क्षमा के, हिंसक। विवेक बिना कृपा के, ठंडा। दम बिना समता के, rigid। हर घोड़े को उसका rein चाहिए।
चौपाई 7
ईस भजनु सारथी सुजाना।
बिरति चर्म संतोष कृपाना॥
बिरति चर्म संतोष कृपाना॥
īsa bhajanu sārathī sujānā
birati carma saṁtoṣa kṛpānā
birati carma saṁtoṣa kṛpānā
अर्थ“ईश्वर का भजन, सुजान (कुशल) सारथी। विरक्ति, ढाल। संतोष, तलवार।”
सन्दर्भसारथी key है। रथ कितना भी अच्छा हो, बिना सारथी कहाँ जाएगा? “ईश-भजन” वो सारथी। यानी ध्यान, prayer, attention to God।
पाठक के लिए“विरक्ति, ढाल”। ढाल defense। दुनिया के हमलों से बचाव। विरक्ति (detachment) सबसे अच्छी ढाल है। और “संतोष, तलवार”। संतोष आक्रामक हथियार है, क्योंकि discontent को काट देता है।
॥ घोड़े और सारथी ॥