विभीषण गीता · खण्ड 2
धर्म-रथ का प्रारम्भ
The Dharma Chariot Begins · चौपाई 5
राम का famous रूपक यहाँ शुरू होता है। पहले पहिए, ध्वज।
चौपाई 5
सौरज धीरज तेहि रथ चाका।
सत्य सील दृढ़ ध्वजा पताका॥
सत्य सील दृढ़ ध्वजा पताका॥
sauraja dhīraja tehi ratha cākā
satya sīla dṛḍha dhvajā patākā
satya sīla dṛḍha dhvajā patākā
अर्थ“शौर्य और धैर्य, उस रथ के पहिये हैं। सत्य और शील, दृढ़ ध्वज और पताका।”
सन्दर्भपहले 4 अङ्ग। दो पहिये: शौर्य (courage), धैर्य (patience)। ये रथ को move करते। शौर्य अकेला rash होता, धैर्य अकेला passive। दोनों एक साथ चलाते।
पाठक के लिए“पताका”। रथ का highest visible मार्क। हम क्या show करते हैं दुनिया को? अगर “सत्य और शील” हैं हमारे दृश्य मार्क, तो रथ रास्ते पर है।
॥ धर्म-रथ का प्रारम्भ ॥