विभीषण गीता · खण्ड 1
विभीषण का प्रश्न
Vibhishan’s Doubt · चौपाइयाँ 1-4
रणभूमि पर रावण रथ पर बैठा है, अलंकृत। राम पैदल। विभीषण के मन में संशय आता है।
चौपाई 1
रावनु रथी विरथ रघुबीरा।
देखि बिभीषन भयउ अधीरा॥
देखि बिभीषन भयउ अधीरा॥
rāvanu rathī viratha raghubīrā
dekhi bibhīṣana bhayau adhīrā
dekhi bibhīṣana bhayau adhīrā
अर्थ“रावण रथ पर, रघुवीर बिना रथ के। यह देख कर विभीषण अधीर हो गए।”
सन्दर्भविभीषण का “अधीर” होना natural है। यह सच्ची भक्ति है, doubt बिना नहीं आती।
चौपाई 2
अधिक प्रीति मन भा संदेहा।
बंदि चरन कह सहित सनेहा॥
बंदि चरन कह सहित सनेहा॥
adhika prīti mana bhā saṁdehā
bandi carana kaha sahita sanehā
bandi carana kaha sahita sanehā
अर्थ“अधिक प्रेम के कारण मन में संदेह हुआ। चरण वंदन कर के, स्नेह सहित कहा।”
सन्दर्भ“अधिक प्रीति”। संदेह love-deficiency से नहीं, love-excess से। विभीषण को राम की चिन्ता है।
चौपाई 3
नाथ न रथ नहिं तन पद त्राना।
केहि बिधि जितब बीर बलवाना॥
केहि बिधि जितब बीर बलवाना॥
nātha na ratha nahiṁ tana pada trānā
kehi bidhi jitaba bīra balavānā
kehi bidhi jitaba bīra balavānā
अर्थ“नाथ, न रथ है, न शरीर पर कवच, न पैरों पर जूते। यह बलवान् वीर (रावण) कैसे जीता जाएगा?”
सन्दर्भतीन कमी: रथ, कवच, जूते। basic war equipment। और सामने full-armed रावण।
चौपाई 4
सुनहु सखा कह कृपानिधाना।
जेहिं जय होइ सो स्यंदन आना॥
जेहिं जय होइ सो स्यंदन आना॥
sunahu sakhā kaha kṛpānidhānā
jehiṁ jaya hoi so syandana ānā
jehiṁ jaya hoi so syandana ānā
अर्थ“सुनो मित्र, कृपा-निधान (राम) ने कहा: जिससे विजय होती है, वो रथ अलग है।”
सन्दर्भराम “सखा” (मित्र) कह कर सम्बोधित करते हैं। यह राम की महानता है, राक्षस-वंशी को “मित्र”। और pivot: “वो रथ अलग है”। अब description शुरू।
॥ विभीषण का प्रश्न ॥