ब्रह्मा विमोहन
कृष्ण को यह habit थी, अपने ग्वाले-दोस्तों के साथ बहुत समय बिताना।
हर सुबह वो उन्हें बुलाता। गायें इकट्ठी होतीं। और सब एक साथ चलते। कहीं घास खाने के लिए। कहीं नदी किनारे।
एक दिन वो सब एक बड़े मैदान में थे। कृष्ण, ग्वाले, और बछड़े।
ग्वालों ने अपने खाने की डिब्बी निकाली। जो उनकी माओं ने सुबह दी थी। माखन, चूड़ा, अचार। साधारण ग्वाला-खाना।
वो सब एक circle में बैठे। बीच में कृष्ण। हर एक की प्लेट खुली।
खाते-खाते मस्ती। कौन क्या लाया। ”अरे, तुम्हारी माँ ने आज माखन ज़्यादा डाला है!” ”मेरी माँ की चूड़ा देखो।”
इस बीच बछड़े अपने मन से कहीं चले गए।
”अरे, बछड़े गायब हैं!”
कृष्ण ने कहा, ”चिंता मत करो। मैं ढूँढ लाता हूँ। तुम सब खाते रहो।”
वो उठे। अपनी मुरली कमर में टकाई। और चले।
बछड़े बहुत दूर तक नहीं गए होंगे, यह सोचकर।
मगर कुछ अद्भुत हो रहा था।
ब्रह्मा, स्वर्ग में, यह सब देख रहे थे।
ब्रह्मा एक creator हैं। हर जीव उन्हीं की देन। और उन्हें यह बात अजीब लग रही थी कि एक बच्चा, अपने आप को ”भगवान” कहलाता है, ज़मीन पर ग्वालों के साथ खा रहा है।
उन्होंने सोचा, ”इसकी थोड़ी परीक्षा लूँ। देखूँ कि यह कितना भगवान है।”
उन्होंने अपनी shakti से, उन सब बछड़ों को छुपा दिया। एक गुफा में।
जब कृष्ण ढूँढने निकले, बछड़े नहीं मिले।
वो लौटे। पर तब तक ब्रह्मा ने एक और काम कर दिया।
उन्होंने अपनी shakti से, सब ग्वालों को भी छुपा दिया।
अब कृष्ण मैदान में अकेले। सब ग़ायब।
मगर कृष्ण इस ट्रिक को तुरंत समझ गए।
वो मुस्कुराए। ”अच्छा, ब्रह्मा यह खेल खेल रहे हैं।”
और उन्होंने एक अद्भुत counter-move किया।
सर्वव्यापिनोऽद्भुतं चित्रं भक्तेर्हेतोर्निशामय ॥
इस तरह उस भगवान की, जिसके अनगिनत रूप हैं, जो सब जगह व्यापक है, की अद्भुत और चित्र-समान लीला होती है, सिर्फ़ अपने भक्तों के लिए।
उन्होंने ख़ुद को duplicate किया। हर ग्वाले के लिए एक। हर बछड़े के लिए एक।
और हर एक बिल्कुल वैसा। उनके माथे, उनके बाल, उनकी आँखें, उनकी आवाज़, उनकी छोटी-छोटी habits। हर एक कृष्ण।
ग्वालों के माँ-बाप को कुछ नहीं पता चला। शाम को बच्चे लौटे, बछड़े लौटे। माएँ ख़ुश। ”आ गया, मेरा लाल?”
ये कृष्ण-रूप बच्चे एक माँ की गोद में बैठते, एक पिता के पास सोते, एक बहन से लड़ते।
एक साल इसी तरह बीत गया।
और जिन बच्चों के माँ-बाप थे, उन्हें ये नकली कृष्ण असली से ज़्यादा प्यारे लगे। क्योंकि अब हर माँ को असली कृष्ण का प्रेम था, उसके अपने बच्चे के रूप में।
साल भर बाद, ब्रह्मा वापस आए। देखें क्या हुआ।
उन्होंने देखा, सब कुछ same है। ग्वाले अपने काम पर। बछड़े गाँव में। नंद, यशोदा खुश।
”यह कैसे? मैंने तो सब को छुपाया था।”
उन्होंने अपनी योग-दृष्टि से देखा।
और उन्हें झटका लगा।
हर ग्वाला, हर बछड़ा, हर बच्चा, सब के सब, कृष्ण ही थे।
हर एक के अंदर वही pure consciousness। वही पीताम्बर। वही मुकुट। बस बाहर अलग रूप।
ब्रह्मा के होश उड़ गए।
”मैंने यह क्या किया? मैंने भगवान की परीक्षा ली? मैं कौन हूँ?”
वो नीचे आए। कृष्ण के पैरों में गिरे।
”प्रभु, क्षमा करें। मैं अहंकार में था। मैं ख़ुद को कर्ता समझ बैठा था। आप कौन हैं, यह मुझे पता नहीं था।”
कृष्ण मुस्कुराए। ब्रह्मा के सिर पर हाथ रखा।
”ब्रह्मा, उठ। तू ने अच्छा किया। तेरे experiment से मेरे ग्वालों को एक साल मेरा साथ मिला, अपने ही बच्चों के रूप में। तू नहीं जानता था, मगर तेरा शाप एक आशीर्वाद बन गया।”
”अब वो जो छुपे हुए हैं, वापस ला।”
ब्रह्मा ने अपना mistake fix किया। असली बच्चे, असली बछड़े वापस। नकली कृष्ण-रूप ग़ायब।
किसी को कुछ पता नहीं चला।
बस एक बात। उस दिन से, माएँ अपने बच्चों को थोड़ा और तीव्र प्रेम से देखती थीं। कुछ अंदर बदल गया था, चाहे वो explicitly नहीं जानती थीं।
ब्रह्मा-विमोहन की कथा एक बहुत interesting paradox है।
ब्रह्मा, जो ख़ुद ब्रह्मांड के creator हैं, कृष्ण की test लेने आए। और दोनों के बीच एक प्यारी चाल। ब्रह्मा छुपाते हैं, कृष्ण duplicate करते हैं।
मगर इसमें एक deeper thread है। जब कृष्ण ने सब रूप ले लिए, तब कोई फ़र्क़ नहीं रहा कौन original है। हर ग्वाला कृष्ण। हर बछड़ा कृष्ण।
और यह बात भागवतम् पूरे तरह से उद्घाटित करना चाहता है, हर जीव कृष्ण ही है, अपने असली रूप में।
हम बाहर देखें तो अनगिनत लोग दिखते हैं। माँ अलग, पिता अलग, बच्चा अलग, मित्र अलग, दुश्मन अलग।
अंदर देखें तो वही एक चेतना, अनगिनत रूपों में।
ब्रह्मा को यह दृश्य दिखा, और उन्हें माफ़ी माँगनी पड़ी। क्यों? क्योंकि उन्होंने creator होने के अहंकार में ख़ुद को कृष्ण से ऊपर समझा।
हम भी अपनी छोटी-छोटी ज़िंदगियों में यह करते हैं। ”मैंने यह बनाया।” ”यह मेरा है।” पर अगर ध्यान से देखो, हर एक के पीछे एक ही चेतना खड़ी है। हम बस उसके अलग-अलग channels हैं।