विभीषण गीता · खण्ड 6: विभीषण का समर्पण

विभीषण गीता · खण्ड 6

विभीषण का समर्पण

Vibhishan’s Surrender · चौपाई 13 + दोहा + पाठक के लिए

राम की बात ख़त्म। विभीषण की reaction। और पाठक के लिए लगने वाली बात।

चौपाई 13
सुनि प्रभु बचन बिभीषन हरषे।
निज भुज बल चित प्रबल बरषे॥
suni prabhu bacana bibhīṣana haraṣe
nija bhuja bala cita prabala baraṣe

अर्थ“प्रभु के वचन सुन कर विभीषण हर्षित हुए। अपनी भुजाओं के बल पर, चित्त में प्रबल वर्षा (उत्साह) हुई।”

सन्दर्भविभीषण change हो गए। शुरुआत में doubt, अब “हर्ष”। और “निज भुज बल”। पहले रावण के “बल” की चिन्ता थी, अब अपने ही “भुज बल” का यक़ीन।
दोहा · समापन
एहि बिधि दीनब चारि बिधी बिजय बिमल यह ज्ञान।
सुनहु सखा गुनधाम सब बुधि बल बिजय निधान॥
ehi bidhi dīnaba cāri bidhī bijaya bimala yaha jñāna
sunahu sakhā gunadhāma saba budhi bala bijaya nidhāna

अर्थ“इस प्रकार चार तरीक़ों से दिये जाने वाले विमल ज्ञान से विजय। सुनो मित्र, गुणधाम, बुद्धि-बल विजय का निधान है।”

पाठक के लिए · सारांश

सारांशविभीषण गीता का हर अङ्ग याद रखने योग्य है। 13 अङ्गों में से ज़्यादातर “inner” गुण। यानी असली जीत के लिए outer equipment नहीं, inner virtues चाहिए। और सबसे important: ये सब अलग नहीं। हर एक दूसरे पर depend। एक भी कमज़ोर हो, रथ अधूरा।

13 अङ्ग पहिये: शौर्य, धैर्य।
ध्वज-पताका: सत्य, शील।
घोड़े: बल, विवेक, दम, परहित।
रस्सी: क्षमा, कृपा, समता।
सारथी: ईश-भजन।
ढाल: विरक्ति।
तलवार: सन्तोष।
परशु: दान।
शक्ति: बुद्धि।
कोदण्ड: विज्ञान।
तरकश: निर्मल मन।
तीर: सम, यम, नियम।
कवच: विप्र-गुरु-पूजा।

रोज़मर्रा के लिएहर सुबह 5 मिनट: एक angle चुनो। आज “क्षमा” को rein बनाओ। कल “सन्तोष” को तलवार। एक-एक करके। 13 दिन में पूरा circuit। ज़िंदगी का “रथ” चलाने का यही तरीक़ा।

॥ श्री राम जय राम जय जय राम ॥ विभीषण गीता समाप्त ॥