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हाथ की मुद्रा

विष्णु और नासाग्र मुद्रा

उँगलियों की स्थिति सीखिए, फिर बिना कुम्भक अनुलोम-विलोम का पूरा क्रम कीजिए।

मुद्रा का अभ्यास

उँगलियों की साफ़ व्यवस्था नासिकाएँ बदलने का काम सरल बनाती है। पहले हाथ समझिए; फिर नीचे दिया पूरा अनुलोम-विलोम क्रम सहज गति से कर सकते हैं।

दाहिने हाथ की तर्जनी और मध्यमा भीतर मुड़ी हुईं; अंगूठा, अनामिका और छोटी उँगली खुली हैं।बड़ा चित्र देखिए

विष्णु: पहले उँगलियों की स्थिति पहचानिए।

दाहिना अंगूठा दायीं नासिका पर; अनामिका और छोटी उँगली दूसरी ओर हैं और बायीं नासिका खुली है।बड़ा चित्र देखिए

क्रम का पहला पक्ष: दायाँ अंगूठा दायीं नासिका पर, बायीं नासिका खुली। पूरा श्वास-क्रम नीचे है।

हाथों की चित्रदर्शिका

आराम से बैठिए

आराम से सीधे बैठिए। बायाँ हाथ जाँघ पर रखिए और दाहिना कन्धा ढीला रहने दें।

हाथ कैसे रखें

  1. दाहिने हाथ की तर्जनी और मध्यमा को हथेली की ओर मोड़िए।
  2. अंगूठे को खुला रखिए; अनामिका और छोटी उँगली को साथ रहने दीजिए।
  3. हाथ को नाक के पास लाइए। अंगूठा दायीं नासिका के पास और अनामिका-छोटी उँगली बायीं के पास रहें।
  4. पहले केवल स्थिति पहचानिए। नासिका बन्द करने का हल्का स्पर्श नीचे के श्वास-क्रम के साथ कीजिए।

श्वास और ध्यान

पूरा क्रम नीचे दिया है। एक नासिका से साँस लें, दूसरी से छोड़ें और उसी दूसरी से लेकर पहली पर लौटें। बीच में साँस न रोकें।

क्या देखें

  • क्या नासिका बन्द करने के लिए हल्का स्पर्श पर्याप्त है?
  • क्या श्वास के क्रम में भी दाहिना कन्धा और चेहरा ढीले रह सकते हैं?

सहज समापन

हाथ नीचे जाँघ पर रख दीजिए, उँगलियाँ खोलिए और दोनों नासिकाओं से सामान्य श्वास पर लौटिए।

सरल विकल्प

श्वास-क्रम करने से पहले हाथ की स्थिति नाक से दूर बनाकर देखिए। हाथ थके तो नीचे रखकर सामान्य साँस लें।

ध्यान रखिए

नासिका पूरी बन्द हो, उँगली के दबाव से दर्द हो या श्वास सँभालने से घबराहट बढ़े तो सामान्य श्वास पर लौटें। नीचे के पूरे क्रम की सावधानियाँ भी साथ पढ़िए।

अनुलोम-विलोम में इसका प्रयोग

इस क्रम का दायरा

नीचे पूरा अभ्यास बिना कुम्भक के है। बायीं और दायीं नासिका से होकर क्रम अपनी आरम्भिक ओर लौटता है। चार चक्रों का सुझाव इस पुस्तकालय के आरम्भिक परिचय से है; सामान्य योग प्रोटोकॉल में पाँच चक्र हैं। दोनों की गिनती को एक ही उद्धरण न समझिए।

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सहज शुरुआत

अनुलोम-विलोम की सहज शुरुआत

नासिकाओं का क्रम बदलना · बिना कुम्भक

स्पर्श हल्का हो और साँस शांत। एक पूरा चक्र ध्यान से करना तेज़ी से कई चक्र करने से अधिक उपयोगी शुरुआत है।

तैयारी

सीधे बैठें। बायाँ हाथ जाँघ पर रखें। दाएँ हाथ की तर्जनी और मध्यमा भीतर मोड़ें। अंगूठे से दायीं नासिका और अनामिका व छोटी उँगली से बायीं नासिका को हल्का बंद करें। इस हाथ की स्थिति को विष्णु मुद्रा कहते हैं।

कैसे करें
  1. अंगूठे से दायीं नासिका बंद करके बायीं से साँस लें।
  2. अनामिका और छोटी उँगली से बायीं नासिका बंद करें। अंगूठा हटाकर दायीं से साँस छोड़ें।
  3. दायीं से साँस लें। फिर उसे बंद करके बायीं से साँस छोड़ें।
  4. यह एक चक्र हुआ। उँगलियों का दबाव हल्का और साँस की गति सहज रहे; बीच में साँस न रोकें।

श्वास और मात्रा
सहज, समान गिनती पर 4 चक्र से शुरू करें। गिनती निभाने के लिए साँस को खींचें नहीं।

अभ्यास को समझिए

नाड़ीशोधन और अनुलोम-विलोम नाम अलग शिक्षण-परम्पराओं में कुछ भिन्न क्रमों के लिए भी मिलते हैं। यहाँ केवल नासिकाओं को बारी-बारी बदलने का सरल रूप दिया है। इसे अनुपात, बन्ध या कुम्भक वाले पूर्ण पारम्परिक क्रम का स्थानापन्न न मानें।

स्वामी सत्यानन्द सरस्वती, आसन प्राणायाम मुद्रा बन्ध, नाड़ीशोधन प्रकरण: आधुनिक शिक्षण-संदर्भ। यहाँ दिया प्रारम्भिक रूप कुम्भक के बिना है।

स्रोत और अर्थ

मोड़ी हुई तर्जनी-मध्यमा वाला रूप शिवानन्द की पुस्तिका में विष्णु और 2026 के सामान्य योग प्रोटोकॉल में नासाग्र कहलाता है। आईसीवाईईआर विष्णु नाम से भौंहों के बीच मध्यमा रखने वाला अलग रूप देता है। उँगलियों की व्यवस्था यहाँ वही है जो शिवानन्द परम्परा और प्रोटोकॉल में है, और साथ में बिना कुम्भक वाला पूरा आरम्भिक अभ्यास दिया है।