हाथ की मुद्रा

ध्यान मुद्रा

गोद में विश्राम करते हाथ और बौद्ध कला में ध्यान का संकेत।

ध्यान: गोद में हथेलियाँ ऊपर; दायाँ हाथ बायें पर
ध्यान: गोद में हथेलियाँ ऊपर; दायाँ हाथ बायें पर.

यहाँ दिखाई गई स्थिति

स्मिथसोनियन की शिक्षण-पुस्तिका में हथेलियाँ ऊपर की ओर गोद में हैं और दायाँ हाथ बायें के ऊपर है। हार्वर्ड की बैठी बुद्ध-प्रतिमा का विवरण हाथों को ध्यान मुद्रा कहता है। यहाँ का चित्र स्मिथसोनियन की व्यवस्था दिखाता है; गोद की हल्की रेखा जगह समझाती है, पद्मासन की अनिवार्यता नहीं।

आकृति पूरी साधना नहीं

संग्रहालय के प्रसंग में यह संकेत दर्शक को ध्यान की पहचान कराता है। वह बड़े चित्र का एक हिस्सा है, बैठा शरीर और पास के पात्र या चिह्न भी साथ हैं। केवल हाथ की आकृति न वस्तु की पूरी कथा बताती है, न किसी व्यक्ति के भीतर के अनुभव का प्रमाण देती है।

परम्पराओं का अन्तर बना रहे

इस पृष्ठ में ध्यान मुद्रा का एक विशिष्ट बौद्ध-कला प्रसंग है। हर योग-विद्यालय यही नाम इन्हीं हाथों के लिए प्रयोग करता है, ऐसा नहीं माना गया है। उदाहरण के लिए ICYER आसन-निर्देशों में अँगूठे और तर्जनी वाली व्यवस्था को ध्यान कहता है। स्रोत का नाम रखने से यह भेद दिखाई देता है। मूर्ति पढ़ते या शिक्षक का अनुसरण करते समय वास्तविक आकृति और प्रसंग देखिए। इससे किसी चिकित्सकीय लाभ या बैठने की अनिवार्य अवधि का दावा नहीं जुड़ा है।

स्रोत और दायरा

आधार-संस्करण

The Art of Buddhism

इस प्रस्तुति का पाठ

  1. The Art of Buddhism

    The Art of Buddhism, “Mudras,” printed p. 10 (PDF p. 9).

    Smithsonian, Freer Gallery of Art and Arthur M. Sackler Gallery, “Mudras,” printed p. 10 (PDF p. 9).

  2. Seated Buddha Shakyamuni in Meditation

    Object 204074: Seated Buddha Shakyamuni in Meditation.

    Harvard Art Museums, object 204074; the object record identifies the hands as Dhyana mudra.

  3. Basic Practice of Some Pranayamas

    “Sitting postures for pranayama: Padma Asana,” PDF p. 1.

    Ananda Balayogi Bhavanani, International Centre for Yoga Education and Research. Source page numbering refers to the PDF; hand descriptions compared independently.

इस प्रस्तुति का दायरा

हाथ की इस आकृति का मौलिक परिचय, स्रोतों की तुलना और सरल रेखाचित्र सहित।

सीमाएँ और पाठ-भेद

ऊपर की चर्चा में महत्त्वपूर्ण भेद स्पष्ट हैं। पारम्परिक व्याख्या और कहे गए फल अपने स्रोतों के कथन हैं, चिकित्सकीय प्रमाण नहीं। समीक्षा: 11 सितम्बर 2026।