मुद्रा का अभ्यास
दोनों हाथ मिलने का छोटा-सा संकेत दिन की भागदौड़ में ठहरने की जगह बन सकता है। हाथों का स्पर्श महसूस कीजिए और सामने के इस क्षण पर ध्यान लाइए।
बड़ा चित्र देखिएअञ्जलि: हथेलियों का हल्का सम्पर्क; उँगलियाँ ऊपर।
आराम से बैठिए
कुर्सी या अपने सुविधाजनक आसन पर सीधे, सहज बैठिए। कन्धों को ऊपर खींचे बिना ढीला रहने दीजिए।
हाथ पहले जाँघों पर रखें। गर्दन और चेहरे की अनावश्यक कसावट छोड़ दीजिए।
हाथ कैसे रखें
- दोनों हाथ छाती के सामने लाइए और हथेलियाँ एक-दूसरे की ओर कीजिए।
- हथेलियों तथा उँगलियों को हल्के से मिलाइए। उँगलियाँ ऊपर की ओर रहें।
- हाथ शरीर की बीच की रेखा के सामने रखिए। कोहनियों को इतना ढीला रहने दीजिए कि कन्धे न उठें।
- हथेलियों का दबाव घटाकर देखिए: मुद्रा इतनी हल्की हो कि उसे सहज बनाए रख सकें।
श्वास और ध्यान
साँस को अपनी सहज गति में आने-जाने दीजिए। चाहें तो एक आती साँस और फिर जाती साँस का अनुभव कीजिए; गिनती निभाना आवश्यक नहीं।
क्या देखें
- दोनों हथेलियों का सम्पर्क कहाँ साफ़ महसूस होता है?
- कन्धे और जबड़ा ढीले हैं, या मुद्रा बनाते समय वे भी कस गए हैं?
सहज समापन
हथेलियाँ अलग कीजिए, हाथ धीरे से जाँघों पर रख दीजिए और उँगलियाँ आराम करने दें।
सरल विकल्प
हाथ कुछ नीचे रखिए या हथेलियों के बीच थोड़ी जगह छोड़ दीजिए। केवल आरामदेह सम्पर्क भी पर्याप्त है।
ध्यान रखिए
दर्द वाले जोड़ को सीधा करने या हथेलियाँ पूरी चिपकाने के लिए ज़ोर न लगाइए। दर्द, सुन्नपन या खिंचाव बढ़े तो हाथ खोलकर विश्राम दें।
स्रोत और अर्थ
शिक्षण-स्रोत इस जुड़े हाथों के रूप को प्रार्थना के आसन में रखते हैं। जोसेफ़ लेपेज इसे अञ्जलि नाम से पहचानते हैं और आदर तथा भक्ति से जोड़ते हैं। यहाँ बैठकर किया जाने वाला परिचय उसी हाथ-स्थिति का सहज रूप है; आप इसे नमस्कार, कृतज्ञता या शांत ध्यान के भाव से अपना सकते हैं।
- Art of Living: Sun Salutation · चरण 1: प्रणामासन (प्रार्थना की मुद्रा)
- Sivananda International: The Sun Salutation · चरण 1: छाती के सामने प्रार्थना की मुद्रा
- Joseph LePage: The Universe of Mudras, Part I · आरम्भिक चर्चा: अञ्जलि, हृदय के सामने जुड़े हाथ
- British Museum: figure with joined hands in Anjali · वस्तु-संख्या 1919,0717.80