आसन सरल करने से पहले छवि पढ़िए
हठयोगप्रदीपिका उलटने को अमृत की रक्षा से जोड़ती है। घेरण्डसंहिता नाभि के पास सूर्य और तालु के पास चन्द्र रखकर उनके उलटे सम्बन्ध का वर्णन करती है। ये सूक्ष्म-शरीर की पारम्परिक व्याख्या के अंग हैं, शरीर के भीतर वास्तविक खगोलीय पिण्ड होने के कथन नहीं।
व्यवस्था एक ही नहीं
मलिन्सन द्वारा अनूदित घेरण्ड-अंश में सिर और हाथों के सहारे का वर्णन है। शिवानन्द हाथों से सहारा दी हुई स्थिति बताते हैं और उसी नाम के अन्तर्गत एक दूसरी उलटी स्थिति का भी उल्लेख करते हैं। इस भेद के रहते एक साधारण आकृति को एकमात्र ऐतिहासिक रूप कहना उचित नहीं होगा।
मुद्रा का दायरा
विपरीतकरणी वही मुद्रा है जिसका वर्णन उल्लिखित हठग्रन्थ करते हैं। किसी आधुनिक विश्राम-आसन को पूरे पुराने विधान का मौन विकल्प न मानिए, और अवधि तथा कायाकल्प के कथनों से घर की दिनचर्या न बनाइए। शिक्षक से ठीक उसी रूप की पहचान लेना आवश्यक है जिसकी चर्चा हो रही है। खेचरी का पास का पृष्ठ समझाता है कि अमृत की छवि एक से अधिक मुद्रा-वर्णनों में क्यों आती है।
उलटी व्यवस्था और बदलता उपोद्घात
प्रचलित 3.77 से 82 का अंश सूर्य-चन्द्र की व्याख्या से आरम्भ होकर उलटी व्यवस्था तक पहुँचता है। आलोचनात्मक संस्करण में मुख्य प्रकरण 3.73 से 77 है; परिचित आरम्भिक दो पद्य 3.77*1 से 2 पर अलग दिखाए गए हैं। इसलिए उसी प्रकरण का सन्दर्भ देते समय संस्करण और अंश, दोनों बताना उपयोगी है।
आरम्भिक सूची इसे करणी विपरीताख्या कहती है, अर्थात् विपरीत नाम वाली क्रिया या व्यवस्था। इन अंशों में नाम शरीर की व्यवस्था की ओर ले जाता है। एक ग्रन्थ से दूसरे पर जाते समय नीचे दिया गया सहारों का भेद भी ध्यान में रखिए।
जहाँ संस्करण का नाम नहीं दिया, वहाँ हठयोगप्रदीपिका की श्लोक-संख्या सिंह के 1914 संस्करण की संस्कृत गणना से है।
स्रोत और दायरा
आधार-संस्करण
Hatha Yoga Pradipika, chapter 3
पाठ-स्थान
- Haṭhapradīpikā Online: आलोचनात्मक संस्करण से तुलना
अध्याय 3, 3.73 से 77; जहाँ आवश्यक हो, साथ दिखाए गए अतिरिक्त पद्य भी। ऊपर की टिप्पणी सिंह की संस्कृत गणना 3.77 से 82 से सम्बन्धित भेद स्पष्ट करती है। तुलना की समीक्षा: 12 सितम्बर 2026।
- Hatha Yoga Pradipika, chapter 3
अध्याय 3, संस्कृत श्लोक 3.77 से 82।
स्वात्माराम; संस्कृत मूल और पंचम सिंह का 1914 का अंग्रेज़ी अनुवाद। अंग्रेज़ी अनुच्छेदों की गिनती कहीं-कहीं संस्कृत श्लोकों से अलग चलती है।
- Gheranda Samhita, James Mallinson (2004)
3.29 से 31, छपे पृष्ठ 69 से 70; संस्कृत डॉक्युमेंट्स में 3.33 से 35।
प्रकाशक की वेबसाइट पर दिया अंश: भूमिका और अध्याय 3, छपे पृष्ठ 60 से 71। यह पूरी पुस्तक का एक नमूना भर है।
- Kundalini Yoga
“Mudras and Bandhas: 8. Viparitakarani Mudra”।
स्वामी शिवानन्द; डिवाइन लाइफ़ सोसाइटी, दसवाँ संस्करण 1994, अधिकृत वेब संस्करण 1999। पारम्परिक शिक्षण, चिकित्सकीय प्रमाण नहीं।
दायरा
पारम्परिक वर्णनों की तुलना वाला मौलिक सन्दर्भ-पाठ। यह पूरे मूल अध्याय का अनुवाद नहीं है।
सीमाएँ और पाठ-भेद
ऊपर की चर्चा में महत्त्वपूर्ण भेद स्पष्ट हैं। पारम्परिक व्याख्या और कहे गए फल अपने स्रोतों के कथन हैं, चिकित्सकीय प्रमाण नहीं। समीक्षा: 11 सितम्बर 2026।