आसन सरल करने से पहले छवि पढ़िए
हठयोगप्रदीपिका उलटने को अमृत की रक्षा से जोड़ती है। घेरण्डसंहिता नाभि के पास सूर्य और तालु के पास चन्द्र रखकर उनके उलटे सम्बन्ध का वर्णन करती है। ये सूक्ष्म-शरीर की पारम्परिक व्याख्या के अंग हैं, शरीर के भीतर वास्तविक खगोलीय पिण्ड होने के कथन नहीं।
व्यवस्था एक ही नहीं
मलिन्सन द्वारा अनूदित घेरण्ड-अंश में सिर और हाथों के सहारे का वर्णन है। शिवानन्द हाथों से सहारा दी हुई स्थिति बताते हैं और उसी नाम के अन्तर्गत एक दूसरी उलटी स्थिति का भी उल्लेख करते हैं। इस भेद के रहते एक साधारण आकृति को एकमात्र ऐतिहासिक रूप कहना उचित नहीं होगा।
इस सन्दर्भ का दायरा
यह पृष्ठ उल्लिखित हठग्रन्थों की मुद्रा के विषय में है। किसी आधुनिक विश्राम-आसन को पूरे पुराने विधान का मौन विकल्प नहीं बनाया गया है, न अवधि और कायाकल्प के कथनों से घर की दिनचर्या बनाई गई है। शिक्षक से ठीक उसी रूप की पहचान लेना आवश्यक है जिसकी चर्चा हो रही है। खेचरी का पास का पृष्ठ समझाता है कि अमृत की छवि एक से अधिक मुद्रा-वर्णनों में क्यों आती है।
स्रोत और दायरा
आधार-संस्करण
Hatha Yoga Pradipika, chapter 3
इस प्रस्तुति का पाठ
- Hatha Yoga Pradipika, chapter 3
Sanskrit verses 3.77–82.
Svātmārāma; Sanskrit and Pancham Sinh’s 1914 translation. English paragraph numbering sometimes diverges from the Sanskrit verses.
- Gheranda Samhita, James Mallinson (2004)
3.29–31, printed pp. 69–70; SanskritDocuments 3.33–35.
YogaVidya.com publisher excerpt, introduction and chapter 3, printed pp. 60–71. This is a sample, not the entire book.
- Kundalini Yoga
“Mudras and Bandhas: 8. Viparitakarani Mudra”.
Swami Sivananda; Divine Life Society, tenth edition 1994, authorized web edition 1999. Traditional teaching, not clinical evidence.
इस प्रस्तुति का दायरा
पारम्परिक वर्णनों की तुलना वाला मौलिक सन्दर्भ-पाठ। यह पूरे मूल अध्याय का अनुवाद नहीं है।
सीमाएँ और पाठ-भेद
ऊपर की चर्चा में महत्त्वपूर्ण भेद स्पष्ट हैं। पारम्परिक व्याख्या और कहे गए फल अपने स्रोतों के कथन हैं, चिकित्सकीय प्रमाण नहीं। समीक्षा: 11 सितम्बर 2026।